रबी सीजन की बुवाई के बीच ब्यावर से किसानों के लिए एक बड़ी और चेतावनी भरी खबर आई है। ब्यावर अमानक खाद कार्रवाई में जिला प्रशासन ने एक ही फर्म के 1,860 बैग उर्वरक राजसात कर दिए हैं, जिनका कुल वजन 93,000 किलो यानी 93 टन है। फर्म पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जांच में फर्म के दोनों नमूने तय मानकों पर खरे नहीं उतरे थे। रबी बुवाई के इस दौर में यह कार्रवाई हर किसान के लिए सीधी चेतावनी है।
ब्यावर अमानक खाद कार्रवाई में क्या-क्या जब्त हुआ
यह कार्रवाई जैतारण क्षेत्र के ग्राम सोमावास में स्थित मैसर्स आदित्य एग्रो इंडस्ट्रीज के विनिर्माण परिसर और गोदाम पर हुई। कृषि विभाग की टीम ने वहां से पोटाश डेराइव्ड फ्रॉम मोलेसेस (14.5 प्रतिशत K2O न्यूनतम) उर्वरक के नमूने लिए थे। राजकीय उर्वरक परीक्षण प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट में दोनों नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए।
| उर्वरक का विवरण | बैग की संख्या | वजन |
|---|---|---|
| कोड RJAA-28 (50 किलो प्रति बैग) | 1,560 | 78,000 किलो |
| कोड RJAA-25 (50 किलो प्रति बैग) | 300 | 15,000 किलो |
| कुल | 1,860 | 93,000 किलो (93 टन) |
आदेश के अनुसार राजसात किए गए उर्वरक का नियमानुसार निस्तारण किया जाएगा, और एक लाख रुपये की जुर्माना राशि राजकोष में जमा कराई जाएगी। जिला कलक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट कमल राम मीना ने यह कार्रवाई आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत की है।
ब्यावर अमानक खाद कार्रवाई: नमूना लेने से राजसात तक की प्रक्रिया
यह कार्रवाई रातोंरात नहीं हुई। पहले कृषि विभाग की टीम ने फर्म के परिसर और गोदाम से नमूने लिए, फिर राजकीय प्रयोगशाला में जांच हुई। दोनों नमूने अमानक पाए जाने के बाद फर्म को सुनवाई का अवसर दिया गया, और उसके बाद उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के उल्लंघन का दोषी पाए जाने पर आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत कार्रवाई की गई। किसानों के लिए यही प्रक्रिया उनकी शिकायत पर भी लागू होती है: नमूना जांच की मांग करें, क्योंकि जांच रिपोर्ट ही तय करती है कि खाद असली है या अमानक।
अमानक खाद की पहचान किसान खुद कैसे करें
हर किसान प्रयोगशाला तो नहीं खोल सकता, लेकिन खरीदते समय कुछ बातों पर ध्यान देकर वह काफी हद तक खुद को बचा सकता है। सबसे पहली बात, खाद हमेशा पक्के बिल के साथ ही खरीदें, जिसमें फर्म का नाम, खाद का नाम, बैच नंबर और कीमत साफ लिखी हो। बिना बिल की खाद पर शिकायत करना भी मुश्किल हो जाता है।
- बोरी पर निर्माता का नाम, बैच नंबर, निर्माण तिथि और शुद्ध वजन देखें। फटी, दोबारा सिली या बिना लेबल वाली बोरी न लें।
- उर्वरक के साथ कोई दूसरा उत्पाद जबरन खरीदने को कहा जाए तो यह गलत है। कृषि विभाग ने ऐसी जबरन बिक्री यानी टैगिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया हुआ है।
- निर्धारित मूल्य से ज्यादा कीमत मांगी जाए तो बिल संभालकर रखें और शिकायत करें।
- खाद डालने के बाद फसल में उम्मीद के उलट असर दिखे तो बची हुई खाद का नमूना सुरक्षित रखें, ताकि जांच हो सके।
- संदिग्ध खाद की शिकायत जिले के कृषि विभाग कार्यालय या उर्वरक शिकायत प्रकोष्ठ में करें। विभाग के निर्देशों के अनुसार ऐसी शिकायतों पर 24 घंटे के भीतर प्रारंभिक कार्रवाई शुरू करने की व्यवस्था है।
सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि किसान को पता ही नहीं चलता कि नुकसान कब हुआ। फसल कमजोर होती है तो वह मौसम या बीज को दोष देता है, जबकि असली वजह अमानक खाद भी हो सकती है।
पूरे राजस्थान में खाद की गुणवत्ता पर कितनी बड़ी कार्रवाई चल रही है
ब्यावर अमानक खाद कार्रवाई अकेली नहीं है। विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 (जनवरी 2026 तक) के दौरान उर्वरक, बीज और कीटनाशकों के कुल 2,220 नमूने अमानक पाए गए। इन मामलों में 466 प्रकरणों में न्यायालय में वाद दायर किए गए, 117 में एफआईआर दर्ज हुई, 39 में लाइसेंस निरस्त किए गए, 215 निलंबित किए गए और 128 में जब्ती हुई।
जांच की क्षमता भी बढ़ाई गई है। वर्ष 2024-25 में जहां करीब 59 हजार नमूनों की जांच क्षमता थी, वहीं वर्ष 2025-26 में इसे बढ़ाकर 76,250 नमूने प्रतिवर्ष कर दिया गया है। निरीक्षण के लिए विकसित मोबाइल ऐप से प्रदेश में 9,000 से अधिक विक्रेताओं का निरीक्षण किया जा चुका है और 250 से अधिक के विरुद्ध कार्रवाई हुई है। कृषि आयुक्तालय ने 23 अक्टूबर 2026 को जारी निर्देशों में स्पष्ट किया है कि किसानों को यूरिया, डीएपी या अन्य अनुदानित उर्वरकों के साथ कोई दूसरा उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, और अनियमितता मिलने पर थोक विक्रेताओं व निर्माता कंपनियों की भूमिका की भी जांच होगी।
राजस्थान में किसानों से जुड़ी राहत की दूसरी खबरों पर भी नजर रखना जरूरी है। हाल ही में फसल बीमा के 345 करोड़ रुपये के लंबित दावों का भुगतान किया गया था। रबी सीजन की सिंचाई से जुड़ी जयसमंद झील से सिंचाई पानी की व्यवस्था भी किसानों के लिए अहम है। वहीं, बालोतरा और श्रीगंगानगर में हुई मिलावट कार्रवाई बताती है कि गुणवत्ता को लेकर सख्ती सिर्फ खाद तक सीमित नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अमानक खाद क्या होती है?
अमानक खाद वह उर्वरक है जो तय गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरता, यानी उसमें पोषक तत्वों की मात्रा लेबल पर लिखे मानक से कम होती है। ऐसी खाद फसल को पूरा पोषण नहीं दे पाती, जिससे पैदावार घट सकती है।
राजसात का क्या मतलब है?
राजसात का मतलब है कि प्रशासन ने वह माल अपने कब्जे में लेकर उसे सरकारी संपत्ति घोषित कर दिया है। ब्यावर मामले में 1,860 बैग उर्वरक राजसात किए गए हैं, जिनका नियमानुसार निस्तारण किया जाएगा, यानी यह माल अब बाजार में नहीं बेचा जा सकेगा।
अमानक खाद से नुकसान होने पर किसान को क्षतिपूर्ति मिलती है?
वर्तमान नियमों के अनुसार यदि खाद या बीज का नमूना अमानक पाया जाता है तो किसानों को सीधे तौर पर क्षतिपूर्ति देने का कोई प्रावधान नहीं है। विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार न तो राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष और न ही कंपनी के स्तर पर ऐसी कोई व्यवस्था मौजूद है। इसलिए खरीद के समय सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।
खाद खरीदते समय किसान को सबसे पहले क्या जांचना चाहिए?
सबसे पहले पक्का बिल लें, बोरी पर निर्माता का नाम, बैच नंबर, निर्माण तिथि और वजन देखें, और उर्वरक के साथ कोई दूसरा उत्पाद जबरन न खरीदें। शक होने पर बची हुई खाद का नमूना सुरक्षित रखकर कृषि विभाग में शिकायत करें।
ब्यावर अमानक खाद कार्रवाई रबी सीजन के किसानों के लिए साफ संदेश है। खाद की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा, और हितों से खिलवाड़ करने वालों पर जांच रिपोर्ट के आधार पर सख्त कार्रवाई होगी। किसान भी सतर्क रहें, बिल लेकर खरीदें और संदिग्ध खाद की शिकायत जरूर करें।