राजस्थान के धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर एक बड़ा प्रोजेक्ट आकार लेने की तैयारी में है। अजमेर के पुष्कर में बागेश्वर धाम से जुड़े एक विशाल धार्मिक परिसर का प्रस्ताव सामने आया है, जिसकी अनुमानित लागत करीब 150 करोड़ रुपये बताई जा रही है। योजना में एक साथ एक लाख श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था, 50 हजार लोगों के लिए लगातार चलने वाले अन्नपूर्णा भंडारे और गौशाला निर्माण जैसे बड़े प्रावधान शामिल हैं। लेकिन यहां यह समझना जरूरी है कि यह फिलहाल प्रस्ताव और तैयारी के स्तर पर है — जमीन का आवंटन होने के बाद ही इस परियोजना की अंतिम तस्वीर साफ होगी।
प्रस्ताव में क्या-क्या शामिल है: एक नजर में बड़े आंकड़े
प्रस्ताव के मुताबिक पुष्कर में विशाल हनुमान मंदिर के साथ एक मठ विकसित करने की योजना है। इसे श्री श्याम सनातन सेवा समिति की देखरेख में आगे बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। पूरी योजना का पैमाना बड़ा है, और इसे इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि भविष्य में यह पुष्कर का एक प्रमुख धार्मिक केंद्र बन सके।
| योजना का घटक | प्रस्तावित प्रावधान |
| अनुमानित लागत | करीब 150 करोड़ रुपये |
| श्रद्धालुओं के बैठने की क्षमता | एक लाख लोग |
| अन्नपूर्णा भंडारा | 50 हजार लोगों के लिए लगातार |
| अन्य प्रमुख घटक | गौशाला (प्राथमिकता), मंदिर-मठ परिसर |
| संचालन/देखरेख | श्री श्याम सनातन सेवा समिति (प्रस्तावित) |
| वर्तमान स्थिति | जमीन आवंटन लंबित, तैयारी स्तर पर |
विशेष बात यह है कि मंदिर-मठ से पहले गौशाला विकसित करने की योजना को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके बाद गौशाला के आसपास के भू-भाग पर मंदिर और मठ का निर्माण प्रस्तावित है। यानी पूरी योजना चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगी — पहले गौशाला, फिर धार्मिक परिसर।
11 से 15 अक्टूबर: 41 जिलों से हिंदू एकता रथ यात्रा की तैयारी
इसी बीच बागेश्वर धाम से जुड़े धार्मिक आयोजनों की तैयारियां भी जोरों पर हैं। 11 से 15 अक्टूबर तक प्रदेश के 41 जिलों से बागेश्वर धाम तक हिंदू एकता रथ यात्रा निकालने की तैयारी की जा रही है। इस संबंध में श्री श्याम सेवा समिति की बैठक अध्यक्ष गौरी शंकर शर्मा की अध्यक्षता में हुई, जिसमें यात्रा से ज्यादा से ज्यादा श्रद्धालुओं को जोड़ने और आयोजन की व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा हुई।
समिति से जुड़े पवन शर्मा के मुताबिक प्रदेश के 41 जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में संपर्क अभियान चलाया जाएगा। कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को यात्रा में शामिल होने का निमंत्रण देंगे और इसके लिए पीले चावल बांटेंगे। अभियान के तहत ब्यावर में पीले चावल बांटकर निमंत्रण देने की शुरुआत भी हो चुकी है। बैठक के दौरान हिंदू एकता रथ यात्रा के पोस्टर का विमोचन भी किया गया।
यह यात्रा पुष्कर के मंदिर-मठ प्रस्ताव से अलग आयोजन है, लेकिन दोनों का आपस में गहरा संबंध है — दोनों ही बागेश्वर धाम के प्रभाव-क्षेत्र को राजस्थान में मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
कहां से शुरू हुई बात: फरवरी 2026 की हनुमंत कथा से प्रस्ताव तक
पुष्कर के नए मेला मैदान में 23 से 25 फरवरी 2026 तक तीन दिवसीय हनुमंत कथा और दरबार का आयोजन हुआ था। इसी दौरान आचार्य धीरेंद्र शास्त्री के सामने पुष्कर में भी बागेश्वर धाम की तर्ज पर मठ और मंदिर बनाने की मांग रखी गई थी। धीरेंद्र शास्त्री ने कथा के दौरान कहा था कि उनकी इच्छा है कि अजमेर जिले के पुष्कर में एक मठ बनाया जाए।
उस समय हनुमंत कथा में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी शिरकत की थी और कहा था कि आने वाले समय में पुष्कर का स्वरूप बदलेगा और पुष्कर के विकास के लिए काम शुरू हो गया है। उस मौके पर प्रदेश के मंदिरों के विकास पर 100 करोड़ रुपये खर्च करने की बात भी कही गई थी।
इसके बाद इस प्रस्ताव को जमीन पर उतारने की कवायद शुरू होने की जानकारी सामने आई है। फरवरी में उठी मांग अब 150 करोड़ रुपये के ठोस प्रस्ताव के रूप में आगे बढ़ती दिख रही है — हालांकि अभी इसे प्रस्ताव ही कहा जा सकता है, स्वीकृति नहीं।
जमीन आवंटन बाकी: परियोजना की असल स्थिति क्या है
यहां स्पष्टता जरूरी है। पुष्कर में प्रस्तावित मंदिर-मठ परियोजना अभी योजना और चर्चा के स्तर पर है। जमीन का आवंटन होने के बाद ही परियोजना की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी। यानी:
प्रस्ताव तैयार है — लागत, क्षमता और घटकों का खाका सामने आ चुका है।
समिति तय है — श्री श्याम सनातन सेवा समिति की देखरेख में काम आगे बढ़ाने का प्रस्ताव है।
जमीन का आवंटन नहीं हुआ है — यह सबसे बड़ा बचा हुआ कदम है।
निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है — यह खबर किसी उद्घाटन या शिलान्यास की नहीं है।
श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को इस अंतर को समझना चाहिए ताकि प्रस्ताव को अंतिम परियोजना न मान लिया जाए।
पुष्कर के लिए क्या मायने: धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था
पुष्कर पहले से ही राजस्थान का एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल है। पुष्कर सरोवर और ब्रह्मा मंदिर के लिए यह तीर्थ नगरी देश-विदेश के श्रद्धालुओं के बीच जानी जाती है। योजना से जुड़े लोगों का मानना है कि बागेश्वर धाम का मंदिर और मठ बनने से यहां धार्मिक गतिविधियां और बढ़ सकती हैं।
इससे देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ स्थानीय व्यापार, होटल, परिवहन और अन्य सेवाओं को भी फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि इसका वास्तविक असर परियोजना के आकार, संचालन और श्रद्धालुओं की आवाजाही पर निर्भर करेगा — यह भी उतना ही सच है।
बागेश्वर धाम का नाम मध्य प्रदेश के छतरपुर से जुड़ा है, जहां धीरेंद्र शास्त्री के दरबार में हर सप्ताह लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। राजस्थान में भी उनके अनुयायियों की संख्या बड़ी है। ऐसे में पुष्कर में बागेश्वर धाम से जुड़ा परिसर बनना धार्मिक पर्यटन के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: क्या पुष्कर में बागेश्वर धाम का मंदिर बनना तय हो गया है?
नहीं। अभी यह प्रस्ताव और तैयारी के स्तर पर है। जमीन का आवंटन होने के बाद ही परियोजना की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी। निर्माण कार्य अभी शुरू नहीं हुआ है।
प्रश्न 2: हिंदू एकता रथ यात्रा कब और कहां से निकलेगी?
11 से 15 अक्टूबर तक प्रदेश के 41 जिलों से बागेश्वर धाम तक हिंदू एकता रथ यात्रा निकालने की तैयारी है। कार्यकर्ता घर-घर जाकर पीले चावल बांटकर निमंत्रण दे रहे हैं।
प्रश्न 3: प्रस्तावित परिसर में श्रद्धालुओं के लिए क्या सुविधाएं होंगी?
प्रस्ताव के मुताबिक एक लाख श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था, 50 हजार लोगों के लिए लगातार अन्नपूर्णा भंडारा और गौशाला निर्माण मुख्य प्रावधान हैं।
प्रश्न 4: इस योजना का संचालन कौन करेगा?
श्री श्याम सनातन सेवा समिति की देखरेख में इस योजना को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। रथ यात्रा की व्यवस्था श्री श्याम सेवा समिति कर रही है, जिसकी बैठक अध्यक्ष गौरी शंकर शर्मा की अध्यक्षता में हुई।