उदयपुर में इलाज का ऐसा मेला लगा है जहां दवा के साथ-साथ पांच हजार साल पुरानी चिकित्सा पद्धति का खजाना भी मुफ्त में मिल रहा है। आयुर्वेद विभाग की ओर से आयोजित 49वां विशाल निःशुल्क आयुर्वेद पंचकर्म चिकित्सा शिविर 5 अक्टूबर से शुरू हो गया है और यह 9 अक्टूबर तक चलेगा। सबसे खास बात — उद्घाटन के दिन ही बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी शिविर में पहुंचे और भारतीय आयुर्वेद को करीब से देखा।
धन्वंतरि जयंती से पहले आयुर्वेद की सबसे पुरानी और प्रभावी चिकित्सा पद्धति पंचकर्म अब उदयपुरवासियों के दरवाजे तक पहुंच गई है। बिना एक रुपया खर्च किए घुटनों के दर्द से लेकर माइग्रेन तक की समस्याओं का इलाज यहां संभव होगा। शिविर का शुभारंभ भगवान धन्वंतरि के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और माल्यार्पण के साथ पारंपरिक तरीके से हुआ।
शिविर में क्या-क्या मुफ्त मिलेगा: समय और सेवाएं
शिविर 5 अक्टूबर से 9 अक्टूबर 2026 तक प्रतिदिन सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलेगा। इस दौरान आमजन को निःशुल्क आयुर्वेद परामर्श के साथ-साथ पंचकर्म चिकित्सा सेवाएं भी दी जाएंगी। शिविर का संचालन आयुर्वेद विभाग कर रहा है और इसमें वरिष्ठ चिकित्सकों की पूरी टीम तैनात है।
शिविर प्रभारी वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. शोभालाल हैं, जो वर्षों से उदयपुर में इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। इससे पहले भी वे दर्जनों निःशुल्क शिविरों का सफल आयोजन करा चुके हैं। आयोजन में स्थानीय पार्षद कुलदीप मेहता, पूर्व पार्षद डॉ. शिल्पा पामेचा, चंदा औदीच्य, महेश पोरवाल सहित कई समाजसेवी भी मौजूद रहे।
उद्घाटन समारोह में आयुर्वेद विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजीव भट्ट, सहायक निदेशक डॉ. भानु कुमार जैन और उदयपुर संभाग के सहायक निदेशक डॉ. राकेश सोलंकी सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इतने बड़े स्तर पर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी बताती है कि आयुर्वेद को लेकर सरकारी मशीनरी भी कितनी गंभीर है।
विदेशी पर्यटकों की दिलचस्पी: भारतीय चिकित्सा पद्धति की वैश्विक पहुंच
शिविर का सबसे आकर्षक पहलू रहा विदेशी पर्यटकों की भागीदारी। स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटकों ने शिविर में भाग लिया और भारतीय प्राचीन आयुर्वेद व पंचकर्म चिकित्सा पद्धति की जानकारी ली। कई विदेशी मेहमानों ने चिकित्सा विधियों में विशेष रुचि दिखाई।
यह कोई संयोग नहीं है। उदयपुर पहले से ही विदेशी पर्यटकों का पसंदीदा ठिकाना है, और अब आयुर्वेद और वेलनेस टूरिज्म यहां तेजी से उभर रहा है। केरल के बाद अब राजस्थान भी आयुर्वेद पर्यटन के नक्शे पर अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा है। विदेशी मेहमानों का शिविर में आना इस बात का सबूत है कि भारतीय चिकित्सा पद्धति को लेकर दुनिया भर में जिज्ञासा बढ़ रही है।
पंचकर्म क्या है: पांच विधियों से शरीर की शुद्धि
पंचकर्म आयुर्वेद की वह चिकित्सा पद्धति है जो शरीर से जमा विषाक्त पदार्थों (टॉक्सिन) को बाहर निकालकर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है। इसमें पांच प्रमुख क्रियाएं शामिल हैं — वमन, विरेचन, बस्ती, नस्य और रक्तमोक्षण। इनके अलावा अभ्यंग (तेल मालिश), स्वेदन (भाप सेक), शिरोधारा, शिरोबस्ती, कटिबस्ती, जानुबस्ती, ग्रीवाबस्ती जैसी सहायक विधियां भी अपनाई जाती हैं।
पंचकर्म गठिया, घुटनों का दर्द, सर्वाइकल, कमर दर्द, साइटिका, स्पॉन्डिलाइटिस, माइग्रेन, पाचन विकार, त्वचा रोग, मोटापा, मानसिक तनाव और अनिद्रा जैसे रोगों में लाभकारी माना गया है। शिविर में रोग के अनुसार उचित विधि का चयन चिकित्सक करेंगे।
आचार्य सुश्रुत और चरक के सिद्धांतों पर आधारित यह पद्धति आज दुनिया भर में “वेलनेस थेरेपी” के रूप में प्रसिद्ध हो रही है, लेकिन इसका मूल स्वरूप भारत में ही संरक्षित है।
शिविर का सबसे खास दिन: 9 अक्टूबर को विशेष अग्निकर्म
शिविर के अंतिम दिन यानी 9 अक्टूबर को डॉ. वीरेंद्र सिंह हाड़ा द्वारा विशेष अग्निकर्म चिकित्सा का आयोजन किया जाएगा। अग्निकर्म आयुर्वेद की प्राचीन चिकित्सा विधि है जिसमें गर्म धातु शलाका (दहनी) से शरीर के विशेष बिंदुओं पर ऊष्मा दी जाती है।
अग्निकर्म मुख्यतः जोड़ों के दर्द, एड़ी के दर्द, घुटने के दर्द और गठिया जैसे रोगों में प्रयोग किया जाता है। आचार्य सुश्रुत ने इसे शल्य चिकित्सा की महत्वपूर्ण विधि बताया है। आधुनिक चिकित्सा में जो काम इंजेक्शन या फिजियोथेरेपी से होता है, उसका पारंपरिक विकल्प अग्निकर्म माना जाता है। इस विशेष चिकित्सा को देखने और इसका लाभ लेने के लिए 9 अक्टूबर को अधिक भीड़ उमड़ने की उम्मीद है।
शिविर में सेवा देने वाली पूरी चिकित्सा टीम
| चिकित्सक/कार्मिक | भूमिका |
|---|---|
| डॉ. शोभालाल | शिविर प्रभारी, वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी |
| डॉ. संजय सोनी | चिकित्सक |
| डॉ. नितिन सेजू | चिकित्सक |
| डॉ. मोनिका सिंह | चिकित्सक |
| डॉ. वीरेंद्र सिंह हाड़ा | अग्निकर्म विशेषज्ञ (9 अक्टूबर) |
| शंकर लाल खराड़ी, कंचन कुमार डामोर, कन्हैयालाल नागदा | वरिष्ठ कंपाउंडर |
| वंदना शाक्तावत, चंद्रेश परमार, अंजना बारोट, हेमंत पालीवाल, संगीता रेगर, हीना रानी पाल, त्रिलोचना अहारी | नर्सिंग स्टाफ |
| गजेंद्र कुमार आमेटा, लालूराम गमेती, निर्भयसिंह भाटी | परिचारक |
उदयपुर में पंचकर्म शिविरों की परंपरा: 35वें से 49वें तक का सफर
यह उदयपुर का कोई पहला शिविर नहीं है — बल्कि 49वां है। इससे पहले 46वां और 35वां शिविर भी आयुर्वेद विभाग की ओर से आयोजित किए जा चुके हैं। राजकीय आदर्श आयुर्वेद औषधालय, सिंधी बाजार की आरोग्य समिति इन शिविरों की रीढ़ रही है।
पिछले शिविरों में कमर दर्द, घुटनों का दर्द, साइटिका, स्पॉन्डिलाइटिस, माइग्रेन जैसी समस्याओं का इलाज कटिबस्ती, जानुबस्ती, ग्रीवाबस्ती, सर्वांग स्वेदन, शिरोधारा, शिरोबस्ती, धारास्वेदन जैसी विधियों से किया गया था। कई रोगियों को इन शिविरों से राहत मिलने की खबरें भी सामने आई थीं।
यह निरंतरता बताती है कि ये शिविर केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उदयपुर के आमजन के लिए आयुर्वेद इलाज का भरोसेमंद ठिकाना बन चुके हैं।
शिविर में जाने से पहले जानें ये जरूरी बातें
शिविर में जाने वालों के लिए कुछ व्यावहारिक सुझाव हैं। पहला — सुबह 9 बजे से पहले पहुंचें, क्योंकि दोपहर 2 बजे तक का ही समय है और पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर परामर्श होगा। दूसरा — अपनी पुरानी रिपोर्टें, दवाओं की पर्ची और जांच रिपोर्ट साथ लेकर जाएं, ताकि चिकित्सक सही विधि चुन सकें। तीसरा — खाली पेट या हल्का नाश्ता करके जाएं, क्योंकि कई पंचकर्म विधियों से पहले चिकित्सक विशेष परहेज बताते हैं। चौथा — 9 अक्टूबर को अग्निकर्म के दिन समय से पहुंचें, क्योंकि उस दिन अधिक भीड़ की संभावना है।
गर्भवती महिलाओं, गंभीर हृदय रोगियों और हाल ही में सर्जरी कराने वालों को किसी भी चिकित्सा प्रक्रिया से पहले चिकित्सक से विशेष परामर्श लेना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
क्या शिविर में इलाज पूरी तरह मुफ्त है?
हां, परामर्श और पंचकर्म चिकित्सा सेवाएं निःशुल्क हैं। शिविर 5 से 9 अक्टूबर तक प्रतिदिन सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलेगा।
पंचकर्म किन बीमारियों में फायदेमंद है?
गठिया, घुटनों-कमर का दर्द, सर्वाइकल, साइटिका, माइग्रेन, पाचन विकार, त्वचा रोग, मोटापा, तनाव और अनिद्रा जैसे रोगों में पंचकर्म लाभकारी माना गया है।
अग्निकर्म क्या है और यह कब होगा?
अग्निकर्म में गर्म धातु शलाका से शरीर के विशेष बिंदुओं पर ऊष्मा दी जाती है, जो जोड़ों के दर्द में लाभकारी है। शिविर के अंतिम दिन 9 अक्टूबर को डॉ. वीरेंद्र सिंह हाड़ा इसका विशेष आयोजन करेंगे।
क्या विदेशी नागरिक भी शिविर का लाभ ले सकते हैं?
उद्घाटन के दिन ही बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक शिविर में पहुंचे और आयुर्वेद पद्धति की जानकारी ली। शिविर सभी के लिए खुला है।
निष्कर्ष यही है कि उदयपुर का यह 49वां निःशुल्क पंचकर्म शिविर आयुर्वेद को जन-जन तक पहुंचाने की एक और सार्थक कड़ी है। 5 से 9 अक्टूबर के बीच यदि आप या आपके परिवार का कोई सदस्य जोड़ों के दर्द, तनाव या अन्य पुरानी समस्याओं से जूझ रहा है, तो यह शिविर एक अच्छा अवसर हो सकता है — और वह भी बिना एक रुपया खर्च किए।