जयपुर की पहचान उसके गुलाबी रंग से है, और शनिवार की सुबह यही पहचान एक बार फिर शहर की दीवारों पर उतर आई। जयपुर रंग दे गुलाबी 2.0 अभियान के तहत जयपुर नगर निगम ने आज झोटवाड़ा-वैशाली नगर जोन के वार्ड संख्या 27 में दीवारों पर पेंटिंग करवाई, जिसमें महापौर सुनील कोठारी ने खुद ब्रश उठाकर काम कर रही टीम का हौसला बढ़ाया। बायोडायवर्सिटी पार्क के सामने वाली दीवार को गुलाबी रंग से सजाया गया।
यह कोई अकेला कार्यक्रम नहीं है। इसके पीछे नगर निगम की 100 दिवसीय कार्ययोजना है, जिसके तहत सभी 150 वार्डों में करीब 100 करोड़ रुपये के विकास कार्य हो रहे हैं। 31 अक्टूबर को “ऑपरेशन क्लीन स्वीप 2.0” के रूप में इसका अगला बड़ा चरण भी तय है।
जयपुर रंग दे गुलाबी 2.0: आज सुबह वार्ड 27 में क्या हुआ
शनिवार सुबह का कार्यक्रम बायोडायवर्सिटी पार्क के सामने रखा गया था, क्योंकि ऐसी जगहों पर रंग-रोगन का असर सबसे ज्यादा लोगों तक पहुंचता है। सुबह टहलने वालों, आने-जाने वाले लोगों और आसपास के रहवासियों की नजर सीधे इस दीवार पर पड़ती है। महापौर सुनील कोठारी के साथ निगम आयुक्त ओम कसेरा भी इस अभियान में शामिल हुए। उद्योग मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौर भी इस पहल से जुड़े रहे।
जब शहर का पहला नागरिक खुद ब्रश उठाता है, तो संदेश साफ होता है — यह काम सिर्फ कागजों पर नहीं, जमीन पर होना है। वक्त के साथ कई दीवारों का रंग फीका पड़ गया है, और इस अभियान का मकसद उसी गुलाबी पहचान को दोबारा चमकाना है — एक दीवार से शुरू करके पूरे शहर तक।
गुलाबी रंग सिर्फ रंग नहीं, जयपुर की पहचान है
जयपुर का गुलाबी रंग कोई फैशन नहीं, शहर की ऐतिहासिक पहचान का हिस्सा है। परकोटे के बाजार और पुरानी हवेलियां — सब कुछ इसी रंग से जुड़ा है, और पर्यटकों की तस्वीरों में यही रंग सबसे पहले नजर आता है। इसलिए दीवारों पर नया रंग चढ़ने का असर सिर्फ सुंदरता तक सीमित नहीं रहता, पर्यटन और शहर की छवि पर भी पड़ता है।
इसीलिए यह अभियान सिर्फ पेंटिंग तक सीमित नहीं है। इसके साथ सफाई, प्रकाश व्यवस्था, सड़क सुधार और सौंदर्यीकरण का पूरा पैकेज जुड़ा है। दीवार रंगने का काम दिखता है, लेकिन उसके पीछे नालियों की सफाई, कचरा उठाने की व्यवस्था और स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत जैसे काम भी चल रहे हैं।
जयपुर रंग दे गुलाबी 2.0 के पीछे 100 दिवसीय कार्ययोजना
इस अभियान को समझने के लिए इसके आंकड़ों पर नजर डालना जरूरी है, क्योंकि यहीं से पता चलता है कि यह कितना बड़ा काम है। यह कार्ययोजना मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशों के बाद तैयार की गई है। 5 अक्टूबर को मुख्यमंत्री ने नगर निगम से जुड़े विकास कार्यों को लेकर बैठक की थी, जिसमें साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के निर्देश दिए गए थे। उन्हीं निर्देशों के बाद निगम ने पांच चरणों में काम की योजना बनाई।
| काम | आंकड़ा |
|---|---|
| कार्ययोजना की अवधि | 100 दिन |
| कवर होने वाले वार्ड | सभी 150 वार्ड |
| वार्ड विकास पर कुल खर्च | करीब 100 करोड़ रुपये |
| हर वार्ड के लिए विकास कार्य | पार्षद की अनुशंसा पर 50 लाख रुपये तक |
| अमृत 2.0 के तहत सीवरेज कार्यादेश | 465.14 करोड़ रुपये, सात जोन में |
| अतिरिक्त सफाई कर्मचारी | 3000, 15 अक्टूबर से 14 नवंबर तक |
| मशीनी सफाई यूनिट | 45, दूसरी पारी में भी |
| दीपावली से पहले नई एलईडी स्ट्रीट लाइटें | 10 हजार का लक्ष्य |
| अगला बड़ा चरण | 31 अक्टूबर, ऑपरेशन क्लीन स्वीप 2.0 |
सीवरेज का हिस्सा इस योजना की सबसे बड़ी रकम है। अमृत 2.0 के तहत सात जोन में 465.14 करोड़ रुपये के कार्यादेश जारी किए गए हैं। सीवरेज का काम दीवार की पेंटिंग की तरह नजर नहीं आता, लेकिन शहर की सेहत के लिए सबसे अहम है। बरसात में पानी भरने और नालियों के उफान की जड़ अक्सर कमजोर सीवर व्यवस्था ही होती है।
जयपुर में रहने वालों के लिए इसका सीधा मतलब है कि उनके वार्ड की सूरत आने वाले दिनों में बदली हुई नजर आएगी। हर वार्ड में पार्षद की अनुशंसा पर 50 लाख रुपये तक के काम होने हैं, ताकि काम स्थानीय जरूरत के हिसाब से हो, न कि सिर्फ बड़े इलाकों तक सीमित रहे।
दीपावली से पहले क्या-क्या बदलेगा
दीपावली जयपुर के लिए सबसे बड़ा त्योहार है, और निगम की कोशिश है कि त्योहार से पहले शहर पूरी तरह तैयार दिखे। 15 अक्टूबर से 14 नवंबर तक 3000 अतिरिक्त सफाई कर्मचारी लगाए गए हैं, और 45 मशीनी यूनिट दूसरी पारी में भी काम करेंगी। त्योहारों के दौरान बढ़ने वाले कचरे को संभालने के लिए पहले से ज्यादा लोग और मशीनें मैदान में होंगी।
दीपावली से पहले 10 हजार नई एलईडी स्ट्रीट लाइटें लगाने का लक्ष्य है। अंधेरी गलियों में रोशनी बढ़ने से शहर सुंदर दिखेगा ही, रात में आने-जाने वालों की सुरक्षा भी बढ़ेगी। इसके बाद 31 अक्टूबर को “ऑपरेशन क्लीन स्वीप 2.0” होगा — शहर की बड़ी सफाई का अगला चरण। आज का रंग दे गुलाबी 2.0 और 31 अक्टूबर का क्लीन स्वीप, दोनों एक ही श्रृंखला की कड़ियां हैं — एक में रंग चढ़ेगा, दूसरे में गंदगी हटेगी।
किसी भी अभियान की सफलता सिर्फ निगम के काम से नहीं, लोगों की भागीदारी से तय होती है। दीवार पर पोस्टर चिपकाना या रंग खराब करना पूरी मेहनत पर पानी फेर देता है। अगर आपके इलाके में सफाई या रोशनी की समस्या है, तो अपने पार्षद से संपर्क करना सबसे सीधा रास्ता है। वार्ड 27 की दीवार पर चढ़ा रंग एक शुरुआत है — दीपावली तक जयपुर कितना बदला नजर आता है, यह इस कार्ययोजना के जमीन पर उतरने और लोगों की भागीदारी पर निर्भर करेगा।
स्रोत: इस खबर की मूल जानकारी यूनीवार्ता की 24 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट (रंग दे गुलाबी 2.0 अभियान) और नगर निगम की 100 दिवसीय कार्ययोजना की सार्वजनिक जानकारी पर आधारित है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
रंग दे गुलाबी 2.0 अभियान क्या है?
यह जयपुर नगर निगम का अभियान है, जिसके तहत शहर की दीवारों को गुलाबी रंग से सजाया जा रहा है। 24 अक्टूबर को झोटवाड़ा-वैशाली नगर जोन के वार्ड 27 में इसका आयोजन हुआ, जिसमें महापौर सुनील कोठारी ने खुद दीवार पर पेंटिंग की।
जयपुर की 100 दिवसीय कार्ययोजना में क्या-क्या शामिल है?
इसमें 150 वार्डों में करीब 100 करोड़ रुपये के विकास कार्य, सात जोन में 465.14 करोड़ रुपये के सीवरेज कार्य, 3000 अतिरिक्त सफाई कर्मचारी, 45 मशीनी यूनिट और दीपावली से पहले 10 हजार नई एलईडी लाइटें शामिल हैं।
ऑपरेशन क्लीन स्वीप 2.0 कब होगा?
नगर निगम की योजना के अनुसार 31 अक्टूबर को ऑपरेशन क्लीन स्वीप 2.0 आयोजित किया जाएगा, जो शहर की बड़ी सफाई का अगला चरण होगा।
हर वार्ड को कितना बजट मिलेगा?
हर वार्ड में पार्षद की अनुशंसा पर 50 लाख रुपये तक के विकास कार्य कराए जाने की व्यवस्था है, ताकि काम स्थानीय जरूरत के हिसाब से हो सके।