कल्पना कीजिए कि डॉक्टर किसी अपने के लिए अंग प्रत्यारोपण की सलाह दे और परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल पैसों का खड़ा हो जाए। राजस्थान में हजारों परिवारों के लिए यही सवाल अब जानलेवा नहीं रहा। मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य (मां) योजना के तहत पिछले 34 महीनों में करीब 2,000 अंग प्रत्यारोपण हो चुके हैं, और इसी दौरान करीब 50 लाख लोगों को निःशुल्क उपचार मिला है, जिस पर 10,678 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। मां योजना अंग प्रत्यारोपण की यह कहानी सिर्फ आंकड़ों की नहीं है — यह इस बात की कहानी है कि आर्थिक मजबूरी अब किसी जरूरतमंद के इलाज के आड़े नहीं आ रही। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी यही कहा है कि आर्थिक मजबूरी किसी जरूरतमंद के इलाज में बाधा नहीं बननी चाहिए।
यह खबर इसलिए भी अहम है, क्योंकि अंग प्रत्यारोपण देश के सबसे महंगे इलाजों में गिना जाता है। किडनी, लीवर या बोन मैरो ट्रांसप्लांट का खर्च आम परिवार की पहुंच से बाहर होता है। ऐसे में कैशलेस सुविधा के तहत हुए करीब दो हजार ट्रांसप्लांट यह बताते हैं कि योजना जमीन पर काम कर रही है।
मां योजना अंग प्रत्यारोपण: आंकड़ों में पूरी तस्वीर
34 महीनों के आंकड़े देखें तो सबसे ज्यादा राहत किडनी के मरीजों को मिली है, फिर बोन मैरो, लीवर और हृदय प्रत्यारोपण के मामले आते हैं। सुनने की क्षमता से जुड़े कॉक्लियर इम्प्लांट के सैकड़ों मामले भी योजना के तहत हुए हैं।
| उपचार का प्रकार | लाभार्थियों की संख्या | खर्च (लगभग) |
|---|---|---|
| किडनी प्रत्यारोपण | 1,310 मरीज | 58 करोड़ रुपये |
| बोन मैरो ट्रांसप्लांट | 563 मरीज | 35 करोड़ रुपये |
| लीवर प्रत्यारोपण | 112 मरीज | — |
| हृदय प्रत्यारोपण | 9 मरीज | — |
| कॉक्लियर इम्प्लांट | 671 लाभार्थी | — |
| दूसरे राज्यों में प्रत्यारोपण | 106 मामले | करीब 6 करोड़ रुपये |
इन आंकड़ों को जोड़ें तो किडनी, बोन मैरो, लीवर और हृदय के ट्रांसप्लांट मिलाकर संख्या 1,994 तक पहुंचती है — यानी करीब दो हजार का दावा आंकड़ों से मेल खाता है।
50 लाख मुफ्त इलाज और बढ़ते उपचार पैकेज
अंग प्रत्यारोपण तो इस योजना का सबसे चमकदार चेहरा है, लेकिन इसकी असली ताकत आम इलाज में दिखती है। पिछले 34 महीनों में करीब 50 लाख लोगों को निःशुल्क उपचार मिला है। सरकार के अनुसार इस पर 10,678 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं — यानी हर महीने औसतन डेढ़ लाख से ज्यादा लोग इस योजना से इलाज करा रहे हैं।
उपचार पैकेजों की संख्या भी 1,800 से बढ़ाकर करीब 2,200 कर दी गई है, जिससे अब पहले से ज्यादा बीमारियों का इलाज योजना के दायरे में आ गया है।
पहली बार दूसरे राज्य में भी इलाज की सुविधा
इस रिपोर्ट की एक और बड़ी बात इंटर स्टेट पोर्टेबिलिटी है। योजना में पहली बार यह सुविधा शुरू की गई है, जिसके तहत दूसरे राज्यों में भी 106 अंग प्रत्यारोपण मामलों में करीब 6 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। यह सुविधा उन परिवारों के लिए बेहद काम की है, जिनके मरीज का इलाज राजस्थान के बाहर किसी विशेष अस्पताल में ही संभव होता है।
मां योजना आखिर है क्या और इसमें क्या-क्या मिलता है
मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना, जिसे मां योजना के नाम से जाना जाता है, राजस्थान सरकार की कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना है। इसके तहत पात्र परिवारों को प्रति वर्ष 25 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलता है। यह योजना पहले मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना के रूप में जानी जाती थी, जिसे बढ़े हुए लाभों के साथ नए स्वरूप में पेश किया गया।
योजना का मकसद साफ है — गंभीर बीमारी का खर्च किसी परिवार को कर्ज में न धकेल दे। कैंसर, हृदय रोग, किडनी और लीवर से जुड़ी बीमारियों के साथ-साथ अंग प्रत्यारोपण जैसे महंगे इलाज भी इसके दायरे में हैं, और सूचीबद्ध सरकारी व निजी अस्पतालों में इलाज कराया जा सकता है।
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी एक और अहम खबर यह है कि प्रदेश में आशा सहयोगिनियों का मानदेय बढ़ाकर 5,455 रुपये किया गया है। वहीं, हाल ही में उदयपुर के अस्पताल में एक दुर्लभ सर्जरी भी चर्चा में रही थी।
मां योजना अंग प्रत्यारोपण: इलाज कराना हो तो क्या करें
अगर किसी परिवार में अंग प्रत्यारोपण या किसी गंभीर बीमारी के इलाज की जरूरत है, तो सबसे पहले यह जांचें कि परिवार योजना के दायरे में आता है या नहीं। पात्रता की पुष्टि नजदीकी सूचीबद्ध अस्पताल की हेल्प डेस्क से की जा सकती है।
- जन आधार कार्ड और पहचान से जुड़े दस्तावेज साथ रखें, ताकि पात्रता जांच में देर न हो।
- इलाज से पहले यह जरूर पूछें कि संबंधित अस्पताल योजना के तहत सूचीबद्ध है या नहीं।
- अंग प्रत्यारोपण जैसे मामलों में डॉक्टर की सलाह और जरूरी जांच रिपोर्ट पहले से तैयार रखें।
- दूसरे राज्य में इलाज की जरूरत हो तो इंटर स्टेट पोर्टेबिलिटी की प्रक्रिया अस्पताल से पहले ही समझ लें।
- किसी भी तरह की राशि मांगे जाने पर अस्पताल प्रबंधन से लिखित जानकारी लें।
यह भी ध्यान रखें कि योजना से जुड़ी हर जानकारी की पुष्टि आधिकारिक स्रोत से ही करें। मां योजना के ताजा आंकड़ों की मूल रिपोर्ट यहां पढ़ी जा सकती है।
आगे की राह: आंकड़े अच्छे हैं, नजर सतर्कता पर भी रहे
करीब दो हजार ट्रांसप्लांट और 50 लाख मुफ्त इलाज के आंकड़े निस्संदेह उत्साहजनक हैं। लेकिन किसी भी बड़ी योजना की असली परीक्षा तब होती है, जब हर मरीज को समय पर इलाज मिले और अस्पतालों को भुगतान में देरी न हो। पिछले दिनों योजना से जुड़ी भुगतान संबंधी शिकायतें भी सामने आई थीं, जिन पर मां योजना के अस्पताल भुगतान संकट की खबर में विस्तार से चर्चा हुई थी। ऐसे में सरकार के लिए अगली चुनौती यही होगी कि व्यवस्था की रफ्तार भी बनी रहे, ताकि कोई मरीज सिर्फ कागजी अड़चन की वजह से इलाज से वंचित न रह जाए। फिलहाल, यह साफ है कि मां योजना अंग प्रत्यारोपण ने हजारों परिवारों को वह सहारा दिया है, जिसकी उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत थी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मां योजना के तहत कितने रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है?
पात्र परिवारों को प्रति वर्ष 25 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलता है, जिसमें सूचीबद्ध अस्पतालों में भर्ती और गंभीर बीमारियों का उपचार शामिल है।
34 महीनों में कितने अंग प्रत्यारोपण हुए हैं?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 34 महीनों में करीब 2,000 अंग प्रत्यारोपण हुए हैं। इनमें 1,310 किडनी, 563 बोन मैरो, 112 लीवर और 9 हृदय प्रत्यारोपण शामिल हैं।
क्या दूसरे राज्य में भी इस योजना से इलाज हो सकता है?
हां, योजना में पहली बार इंटर स्टेट पोर्टेबिलिटी शुरू की गई है। इसके तहत दूसरे राज्यों में 106 अंग प्रत्यारोपण मामलों में करीब 6 करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है।
कॉक्लियर इम्प्लांट भी मां योजना अंग प्रत्यारोपण में शामिल है?
हां, अब तक 671 लाभार्थियों को कॉक्लियर इम्प्लांट मिला है, जो सुनने की क्षमता से जुड़ी समस्या वाले मरीजों के लिए बेहद अहम है।