उदयपुर में 12 साल गैस समझकर खाता रहा एंटासिड, पेट से निकला 378 मिमी का हाइडेटिड सिस्ट: 3 घंटे की सर्जरी में मिली नई जिंदगी

बारह साल तक पेट का दर्द, हर बार वही जवाब — गैस हो गई है, एंटासिड खा लो। उदयपुर के एक 24 वर्षीय युवक की कहानी ठीक इसी गलतफहमी से शुरू होती है, और उसका अंत एक ऐसी सर्जरी पर होता है जिसने उसकी जान पर मंडरा रहे बड़े खतरे को टाल दिया। उदयपुर हाइडेटिड सिस्ट सर्जरी के इस मामले में जीबीएच जनरल अस्पताल के डॉक्टरों ने युवक के पेट से लिवर के पास मौजूद 378 मिमी लंबा हाइडेटिड सिस्ट सफलतापूर्वक निकाला। जांच में बढ़ी हुई तिल्ली के पास 99 मिमी का दूसरा सिस्ट भी मिला, और दोनों गांठों ने मिलकर पेट के करीब 80 प्रतिशत हिस्से को प्रभावित कर रखा था।

गैस समझकर 12 साल क्यों बीत गए

पेट दर्द भारत में सबसे आम शिकायतों में से एक है, और इसका सबसे आम, सबसे आसान जवाब गैस ही माना जाता है। खाना देर से खाना, मसालेदार भोजन, तनाव — इन सबको दर्द की वजह मान लेना आसान होता है। इस युवक ने भी यही किया। दर्द होता, एंटासिड ली जाती, कुछ देर आराम मिलता, फिर दर्द लौट आता। यह चक्र बारह साल तक चलता रहा।

जांच में क्या-क्या सामने आया

जीबीएच जनरल अस्पताल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में पहुंचने के बाद युवक की विस्तृत जांच की गई। सीटी स्कैन ने तस्वीर साफ कर दी — लिवर के पास 378 मिमी, यानी करीब 38 सेंटीमीटर लंबा सिस्ट मौजूद था। इसके अलावा बढ़ी हुई तिल्ली के पास 99 मिमी का दूसरा सिस्ट भी पाया गया। दोनों मिलकर पेट के लगभग 80 प्रतिशत हिस्से को घेर चुके थे।

उदयपुर हाइडेटिड सिस्ट सर्जरी: तीन घंटे की सर्जरी में किसने क्या किया

सर्जरी जीबीएच जनरल अस्पताल की गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और हेपेटोबिलियरी सर्जन डॉ. आकांक्षा सोनी ने की। ऑपरेशन करीब तीन घंटे तक चला। उनके साथ डॉ. पशुपत भानुड़ा, एनेस्थेसिया विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र शर्मा और डॉ. कुनाल, तथा ऑपरेटिंग थियेटर की नर्सें राजेश्वरी और संदीप शामिल रहीं।

हाइडेटिड सिस्ट होता क्या है और कैसे फैलता है

हाइडेटिड सिस्ट एक परजीवी संक्रमण से बनता है। इसका परजीवी आमतौर पर कुत्तों और कुछ अन्य जानवरों में पाया जाता है। मनुष्य तक यह संक्रमण तब पहुंचता है जब कोई व्यक्ति संक्रमित जानवर के संपर्क में आता है, या उसके मल से दूषित भोजन या पानी का सेवन कर लेता है। परजीवी के अंडे शरीर में पहुंचकर धीरे-धीरे सिस्ट का रूप ले लेते हैं, जो अक्सर लिवर को प्रभावित करता है, पर कभी-कभी फेफड़ों और अन्य अंगों में भी बन सकता है।

इलाज का तरीका सिस्ट के आकार, स्थान और मरीज की हालत पर निर्भर करता है। छोटे सिस्ट पर दवाओं और निगरानी से काम चल सकता है, लेकिन बड़े या लक्षण पैदा करने वाले सिस्ट के लिए सर्जरी ही मुख्य इलाज मानी जाती है। सर्जरी के बाद भी डॉक्टर आमतौर पर कुछ समय तक दवाएं और फॉलो-अप जांच की सलाह देते हैं, ताकि संक्रमण दोबारा न लौटे।

एक नजर में: उदयपुर हाइडेटिड सिस्ट सर्जरी

बिंदु जानकारी
स्थान जीबीएच जनरल अस्पताल, उदयपुर
मरीज की उम्र 24 वर्षीय युवक
दर्द की अवधि करीब 12 वर्ष
मुख्य सिस्ट का आकार 378 मिमी, लिवर के पास
दूसरा सिस्ट 99 मिमी, बढ़ी हुई तिल्ली के पास
प्रभावित पेट का हिस्सा करीब 80 प्रतिशत
सर्जरी की अवधि करीब 3 घंटे
मुख्य सर्जन डॉ. आकांक्षा सोनी
सर्जरी टीम डॉ. पशुपत भानुड़ा, डॉ. राजेंद्र शर्मा, डॉ. कुनाल, नर्सें राजेश्वरी और संदीप
डिस्चार्ज ऑपरेशन के तीसरे दिन
सिस्ट का प्रकार हाइडेटिड सिस्ट (परजीवी संक्रमण)

किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएं

हर पेट दर्द हाइडेटिड सिस्ट नहीं होता, और डरने की जरूरत नहीं है। लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं जिन पर जांच टालना ठीक नहीं होता। अगर पेट का दर्द बार-बार लौट रहा है और सामान्य दवाओं से पूरी तरह ठीक नहीं हो रहा, तो एक बार अल्ट्रासाउंड जांच करा लेना समझदारी है। पेट में लगातार सूजन या भारीपन, दाहिनी ओर ऊपरी पेट में दबाव महसूस होना, भूख कम लगना या बिना वजह वजन घटना भी जांच की वजह बन सकते हैं।

अचानक तेज पेट दर्द, तेज बुखार, उल्टी या एलर्जी जैसी प्रतिक्रिया हो तो उसे आपात स्थिति मानकर तुरंत अस्पताल जाएं — खासकर तब, जब पहले से लिवर में गांठ या सिस्ट की जानकारी हो। गांवों और कस्बों में रहने वाले लोगों के लिए नजदीकी सरकारी अस्पताल या जिला अस्पताल में शुरुआती जांच उपलब्ध है, और वहां से जरूरत पड़ने पर मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है।

बचाव के व्यावहारिक उपाय

हाइडेटिड संक्रमण से बचाव के उपाय रोजमर्रा की आदतों से जुड़े हैं। पालतू कुत्तों को नियमित रूप से कृमिनाशक दवा दिलवाना और पशु चिकित्सक से समय-समय पर जांच कराना जरूरी है। कुत्तों के संपर्क के बाद हाथ अच्छी तरह धोएं, खासकर खाना खाने से पहले। कच्ची या अधपकी सब्जियों और बिना धुले फलों से बचें, और पीने के लिए साफ पानी का ही इस्तेमाल करें।

राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में पशुपालन आम है, इसलिए यह जानकारी सिर्फ उदयपुर तक सीमित नहीं है। पशुओं के साथ रहने वाले हर परिवार को यह समझना चाहिए कि जानवरों की देखभाल और इंसानों की सेहत आपस में जुड़ी हुई हैं। पालतू जानवरों का टीकाकरण और कृमिनाशक इलाज सिर्फ उनकी सेहत के लिए नहीं, पूरे परिवार की सुरक्षा के लिए है।

उदयपुर की स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए क्या मायने रखता है यह मामला

उदयपुर में हाल के समय में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हुआ है। एमबी अस्पताल में नई सीटी स्कैन मशीनों की स्थापना और जीबीएच में लिवर ट्रांसप्लांट व रोबोटिक सर्जरी जैसी सुविधाओं की शुरुआत से दक्षिणी राजस्थान के मरीजों को राहत मिली है। इस हाइडेटिड सिस्ट सर्जरी की सफलता उसी कड़ी का हिस्सा है — जटिल सर्जरी अब स्थानीय विशेषज्ञों के भरोसे भी संभव हो रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. उदयपुर हाइडेटिड सिस्ट सर्जरी में क्या निकाला गया?

उदयपुर के जीबीएच जनरल अस्पताल में 24 वर्षीय युवक के पेट से लिवर के पास मौजूद 378 मिमी लंबा हाइडेटिड सिस्ट निकाला गया। तिल्ली के पास 99 मिमी का दूसरा सिस्ट भी मिला था।

2. युवक को कितने समय से पेट दर्द था?

युवक करीब 12 वर्षों से पेट दर्द से परेशान था। वह इसे गैस की समस्या समझकर खाली पेट एंटासिड दवाएं लेता रहा था।

3. सर्जरी कितनी देर चली और किसने की?

सर्जरी करीब तीन घंटे तक चली। इसे गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और हेपेटोबिलियरी सर्जन डॉ. आकांक्षा सोनी ने अपनी टीम के साथ पूरा किया।

4. हाइडेटिड सिस्ट कैसे फैलता है?

यह परजीवी संक्रमण संक्रमित कुत्तों या अन्य जानवरों के संपर्क से, या उनके मल से दूषित भोजन-पानी के सेवन से मनुष्यों तक पहुंच सकता है। यह अक्सर लिवर को प्रभावित करता है।

5. पेट दर्द के किन लक्षणों पर जांच करानी चाहिए?

बार-बार लौटता दर्द, सूजन या भारीपन, भूख कम लगना या वजन घटना होने पर अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन कराएं। अचानक तेज दर्द या बुखार पर तुरंत अस्पताल जाएं।

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