खाजूवाला से जैसलमेर तक सिंचाई पानी का संग्राम: चक्काजाम और बाजार बंद के बीच जीरो आरडी में अनिश्चितकालीन धरना
पश्चिमी राजस्थान के खेतों में इस समय रबी की बुवाई का मौसम है, लेकिन बीकानेर संभाग के हजारों किसान खेतों की बजाय सड़कों पर हैं। सिंचाई पानी की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब खाजूवाला से जैसलमेर तक फैल चुका है — एक तरफ खाजूवाला में चक्काजाम और बाजार बंद है, तो दूसरी तरफ जैसलमेर के जीरो आरडी क्षेत्र में किसान अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। किसानों का आरोप है कि नहर की टेल तक पानी ही नहीं पहुंच रहा, जबकि बुवाई हो चुकी फसलें सूखने के कगार पर हैं।
आज की स्थिति: कहां-कहां चल रहा है आंदोलन
खाजूवाला कस्बे में किसानों ने राजीव सर्किल चौराहे सहित प्रमुख मार्गों पर चक्काजाम कर दिया है। चक-ढाणियों से बड़ी संख्या में किसान खाजूवाला पहुंचे हैं। किसानों के आह्वान पर कस्बे का बाजार और अनाज मंडी पूरी तरह बंद रखी गई है। स्थानीय व्यापारियों ने भी आंदोलन को खुला समर्थन दिया है, वहीं बार एसोसिएशन खाजूवाला ने भी किसानों के साथ खड़े होने का ऐलान किया है।
चक्काजाम को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। खाजूवाला के सीओ विजयपाल यादव और सीआई अशोक बिश्नोई के नेतृत्व में पुलिस का जाब्ता और आरएसी के जवान तैनात किए गए हैं। प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
वहीं जैसलमेर के नहरी क्षेत्र में आंदोलन और भी गंभीर रूप ले चुका है। यहां के किसानों ने जीरो आरडी क्षेत्र में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। किसानों का कहना है कि जिले के हिस्से का पर्याप्त सिंचाई पानी नहीं दिया जा रहा, जिसके कारण नहर की टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा और खड़ी फसलें सीधे प्रभावित हो रही हैं।
खाजूवाला के अलावा दंतौर, 17 केवाईडी, 20 बीडी, 14 बीडी, रावला, घड़साना, अनूपगढ़ और 365 हेड जैसे कस्बों और क्षेत्रों में भी बंद का असर देखा जा रहा है। यानी यह आंदोलन अब श्रीगंगानगर के अनूपगढ़ से लेकर बीकानेर के खाजूवाला तक पूरे इंदिरा गांधी नहर के प्रथम चरण क्षेत्र में फैल गया है।
किसानों की मांगें: अंक और तथ्य एक नजर में
किसानों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं — रबी सीजन के लिए आठ बारी पानी (नहर विभाग छह बारी देने को तैयार है), प्रथम चरण की नहरों का स्थाई रेगुलेशन, जैसलमेर के हिस्से के करीब 1,800 क्यूसेक पानी, और अनूपगढ़ शाखा के लिए निर्धारित रिजर्व पानी पूरा उपलब्ध कराना। सरकार ने रबी 2026-27 के लिए पांच सिंचाई बारियों का नया रेगुलेशन जारी किया है।
किसानों का सबसे बड़ा आरोप यह है कि उन्हें जरूरत के मुकाबले आधा पानी ही मिल रहा है। किसानों के अनुसार, अगर किसी किसान ने 20 बीघा में बुवाई की है तो उसे केवल 10 बीघा के लिए ही पानी मिल रहा है। अनूपगढ़ शाखा को उसका पूरा हिस्सा नहीं मिलने से रबी की बुवाई सीधे प्रभावित हो रही है। हजारों हेक्टेयर में सरसों और गेहूं की बुवाई हो चुकी है, लेकिन अब सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है।
जैसलमेर के किसानों ने विशेष रूप से अपने हिस्से के करीब 1,800 क्यूसेक पानी की मांग उठाई है। उनका कहना है कि अधिकारियों के आश्वासन तो कई बार मिले, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं हुआ। किसानों ने महापंचायत में आंदोलन को और व्यापक करने की चेतावनी भी दी है और आने वाले दिनों में चक्काजाम जैसे कड़े कदम उठाने का ऐलान किया है।
बुवाई पर संकट: क्यों इतना गहरा है किसानों का गुस्सा
पश्चिमी राजस्थान में खेती का बड़ा हिस्सा नहर के पानी पर निर्भर है। यहां बारिश कम होती है और भूजल भी सीमित है, इसलिए इंदिरा गांधी नहर ही किसानों की जीवनरेखा है। सिंचाई के निर्धारित पानी में जरा सी भी कमी सीधे किसानों की फसल और आय पर चोट करती है।
इस समय रबी की बुवाई का दौर चल रहा है। सरसों और गेहूं की बुवाई हजारों हेक्टेयर में हो चुकी है। बुवाई के बाद फसल को समय पर पानी मिलना सबसे जरूरी होता है — यही वह नाजुक समय है जब पानी की कमी पूरी मेहनत पर पानी फेर सकती है। किसानों का कहना है कि यह समस्या सिर्फ इस मौसम की फसल का सवाल नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। बीज, खाद और जुताई में लगा पैसा डूबने का डर किसानों को सड़कों पर ला रहा है।
आंदोलन यहां तक कैसे पहुंचा: अब तक का सफर
यह आंदोलन एक दिन में नहीं भड़का है। सितंबर में ही खाजूवाला क्षेत्र के किसानों ने 58 प्रतिशत सिंचाई पानी की मांग को लेकर घड़साना में बड़े आंदोलन का ऐलान किया था। इसके बाद आंदोलन ने चक्काजाम और बाजार बंद जैसे रूप ले लिए। किसानों के अनुसार, इंदिरा गांधी नहर परियोजना के अधिकारियों के साथ वार्ता भी हुई, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। वार्ता विफल होने के बाद किसानों ने आंदोलन को और तेज करने का फैसला लिया।
शुक्रवार शाम को खाजूवाला में हनुमान मंदिर परिसर में किसान प्रतिनिधियों और व्यापारियों की एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में सर्वसम्मति से कस्बे को अनिश्चितकाल के लिए बंद रखने का निर्णय लिया गया। किसान नेता कालूराम कुंट के अनुसार, बैठक में संयुक्त व्यापार मंडल, व्यापार मंडल, मजदूर संगठनों और किसान प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और सभी संगठनों ने एकजुटता दिखाते हुए बंद का समर्थन किया।
बैठक में यह भी तय हुआ कि फल-सब्जी, दूध और मेडिकल स्टोर्स को केवल शनिवार तक छूट दी जाएगी, ताकि लोग अगले कुछ दिनों के लिए जरूरी सामान का स्टॉक कर सकें। रविवार से इन दुकानों को भी बंद रखने की बात कही गई। पूरा आंदोलन ‘खेत बचाओ-किसान बचाओ संघर्ष समिति’ के बैनर तले चल रहा है।
सरकार का जवाब: 6 अक्टूबर की बैठक और नया रेगुलेशन
आंदोलन के तेज होते ही सरकार भी हरकत में आई है। 6 अक्टूबर को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में एक बैठक हुई, जिसमें केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल सहित क्षेत्र के भाजपा नेताओं ने मुलाकात की।
सरकार की ओर से रबी 2026-27 के लिए इंदिरा गांधी नहर परियोजना में पांच सिंचाई बारियों का रेगुलेशन कार्यक्रम जारी किया गया है। उपलब्ध जल संसाधनों के आधार पर पानी देने की योजना बताई गई है। अब किसानों की निगाह इस बात पर टिकी है कि घोषित रेगुलेशन के मुताबिक वास्तव में नहर की टेल तक कितना पानी पहुंचता है। किसान संगठनों का कहना है कि कागज पर रेगुलेशन से काम नहीं चलेगा — जमीन पर पानी दिखना चाहिए।
पंचायत चुनाव के बीच गरमाया पानी का मुद्दा
यह आंदोलन ऐसे समय तेज हुआ है जब राजस्थान में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। पानी का सवाल अब ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक चर्चा का प्रमुख मुद्दा बनता जा रहा है। किसानों के बीच केंद्र और राज्य सरकार के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों को लेकर नाराजगी के स्वर भी तेज हुए हैं।
आंदोलनकारी किसानों की ओर से विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। किसानों ने अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का विरोध जताया है, केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल का पुतला दहन किया गया है और सिंचाई मंत्री सुरेश रावत के खिलाफ भी प्रदर्शन हुए हैं। गांव-ढाणियों में अब पानी ही सबसे बड़ी चुनावी चर्चा है।
आगे क्या: महापंचायत की चेतावनी
जैसलमेर के किसानों ने महापंचायत में आंदोलन को और व्यापक करने की चेतावनी दी है। किसानों ने आने वाले दिनों में चक्काजाम जैसे कड़े कदम उठाने का ऐलान किया है। खाजूवाला में पहले से ही चक्काजाम चल रहा है और बाजार बंद है — अगर जैसलमेर और अनूपगढ़ क्षेत्र में भी यही रूप लेता है तो पूरे संभाग में आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
फिलहाल सबकी नजरें सरकार के जारी किए गए पांच बारियों के रेगुलेशन पर हैं। किसान यह देखना चाहते हैं कि नहर की टेल तक वास्तव में कितना पानी पहुंचता है। अगर जमीनी स्थिति नहीं बदली तो यह आंदोलन पंचायत चुनाव के बीच और बड़ा रूप ले सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- प्रश्न: किसान सिंचाई के लिए कितने पानी की मांग कर रहे हैं?
- उत्तर: किसान रबी सीजन के लिए आठ बारी पानी और प्रथम चरण की नहरों के स्थाई रेगुलेशन की मांग कर रहे हैं। जैसलमेर के किसानों ने अपने हिस्से के करीब 1,800 क्यूसेक पानी की मांग विशेष रूप से उठाई है।
- प्रश्न: नहर विभाग का क्या कहना है?
- उत्तर: नहर विभाग किसानों को छह बारी पानी देने के लिए तैयार है। विभाग का कहना है कि उपलब्ध जल संसाधनों के आधार पर पानी दिया जा रहा है और रबी 2026-27 के लिए पांच सिंचाई बारियों का रेगुलेशन जारी किया गया है।
- प्रश्न: आंदोलन किन-किन इलाकों में चल रहा है?
- उत्तर: आंदोलन खाजूवाला, जैसलमेर के जीरो आरडी क्षेत्र, अनूपगढ़ शाखा क्षेत्र के अलावा दंतौर, 17 केवाईडी, 20 बीडी, 14 बीडी, रावला, घड़साना और 365 हेड जैसे क्षेत्रों में फैला हुआ है।
- प्रश्न: सरकार ने इस मुद्दे पर अब तक क्या कदम उठाए हैं?
- उत्तर: 6 अक्टूबर को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें क्षेत्र के भाजपा नेताओं ने हिस्सा लिया। सरकार ने रबी 2026-27 के लिए इंदिरा गांधी नहर परियोजना में पांच सिंचाई बारियों का रेगुलेशन कार्यक्रम जारी किया है।