राजस्थान के लाखेरी उपखंड क्षेत्र में लाखेरी ईआरसीपी नहर पानी की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन अब संगठित रूप लेने जा रहा है। टेल क्षेत्र के करीब दो दर्जन गांवों के किसानों और जनप्रतिनिधियों ने शुक्रवार को लबान छप्पन जी के बाग में बैठक की, जिसमें संघर्ष समिति के गठन का प्रस्ताव लिया गया। किसानों की मांग साफ है — क्षेत्र से गुजर रही ईआरसीपी नहर परियोजना से टेल क्षेत्र के गांवों को सिंचाई का पानी दिया जाए, ताकि हर साल की पानी की किल्लत का स्थायी समाधान निकल सके।
लाखेरी ईआरसीपी नहर पानी की मांग: बैठक में क्या तय हुआ
शुक्रवार की बैठक में टेल क्षेत्र के किसान बड़ी संख्या में जुटे। बैठक में लाखेरी ईआरसीपी नहर पानी की मांग पर विस्तार से चर्चा हुई और सर्वसम्मति से अहम फैसले लिए गए:
- संघर्ष समिति का गठन: प्रभावित गांवों के किसानों को एकजुट करने के लिए संघर्ष समिति बनाने का प्रस्ताव लिया गया।
- मांग अधिकारियों तक: नहर से पानी देने और जल वितरण व्यवस्था सुधारने की मांग अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाई जाएगी।
- सामूहिक प्रयास जारी: मांग पूरी होने तक किसानों ने सामूहिक प्रयास जारी रखने का संकल्प लिया।
- गांव-गांव संपर्क: समिति के जरिए सभी प्रभावित गांवों में संपर्क कर किसानों को इस मुहिम से जोड़ा जाएगा।
बैठक में यह बात उभरकर आई कि यह लड़ाई किसी एक गांव की नहीं, बल्कि पूरे टेल क्षेत्र के करीब दो दर्जन गांवों की साझा लड़ाई है। इसीलिए अलग-अलग मांगों की बजाय एक साझा मंच बनाने का फैसला हुआ।
टेल क्षेत्र के किसान हर साल क्यों करते हैं आंदोलन
किसानों के मुताबिक उन्हें अभी चंबल की कोटा बैराज परियोजना की नहरों से पानी मिलता है, लेकिन टेल क्षेत्र — यानी नहर के अंतिम छोर — तक पानी समय पर और पर्याप्त मात्रा में पहुंच ही नहीं पाता। नहर के शुरुआती हिस्सों में पानी इस्तेमाल हो जाता है और अंतिम छोर के खेत सूखे रह जाते हैं।
किसानों का कहना है कि हर साल सिंचाई के सीजन में आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करना पड़ता है, तब जाकर नहरी पानी पहुंचता है। इससे बुवाई देर से होती है, पैदावार घटती है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। सिंचाई पानी को लेकर किसान आंदोलनों की यह कहानी प्रदेश में नई नहीं है।
ईआरसीपी परियोजना से कैसे बदलेगी तस्वीर
पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) प्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी जल परियोजनाओं में गिनी जाती है। इसका मकसद दक्षिणी राजस्थान की नदियों के बरसात के मौसम के अधिशेष जल का संचयन करके 13 जिलों को पेयजल और करीब 2 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का पानी देना है। बिजली-पानी पर हाल की चर्चा में भी ईआरसीपी प्रमुखता से उठी थी।
किसानों का तर्क सीधा है — जब ईआरसीपी नहर उनके क्षेत्र से ही गुजर रही है तो लाखेरी ईआरसीपी नहर पानी की मांग पूरी क्यों न हो? उनका मानना है कि ईआरसीपी से पानी मिलने पर वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान हो जाएगा और हर साल आंदोलन नहीं करना पड़ेगा। प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी जल संकट को लेकर किसान आवाज उठा रहे हैं।
जल वितरण व्यवस्था में सुधार की मांग
बैठक में नहर से पानी देने के साथ-साथ जल वितरण व्यवस्था में सुधार की मांग भी प्रमुखता से उठी। किसानों का कहना है कि बंटवारा न्यायसंगत न होने का खामियाजा टेल क्षेत्र के किसान भुगतते हैं। उनका मानना है कि वितरण सुधर जाए तो मौजूदा संसाधनों से भी राहत मिल सकती है। राजस्थान के जल संसाधन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जल परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी उपलब्ध है।
गौरतलब है कि लाखेरी ईआरसीपी नहर पानी की यह मांग सिर्फ सिंचाई तक सीमित नहीं है। किसानों का कहना है कि समय पर पानी मिलने से रबी और खरीफ दोनों फसलों की बुवाई समय पर हो सकेगी, पैदावार बढ़ेगी और कर्ज के बोझ से भी राहत मिलेगी। यही वजह है कि इस मांग को लेकर पूरे टेल क्षेत्र में एकजुटता देखी जा रही है।
लाखेरी ईआरसीपी नहर पानी पर आगे क्या होगा
अब सबकी नजरें संघर्ष समिति के गठन और उसके अगले कदमों पर हैं। प्रस्ताव के मुताबिक समिति बनते ही गांव-गांव जाकर किसानों को जोड़ा जाएगा और फिर एकजुट होकर अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के सामने लाखेरी ईआरसीपी नहर पानी की मांग रखी जाएगी।
किसानों ने स्पष्ट किया कि वे टकराव के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन जायज मांग पर ध्यान न दिया गया तो लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रहेगा। टेल क्षेत्र के करीब दो दर्जन गांवों के लिए यह सिर्फ पानी की मांग नहीं, बल्कि आजीविका और भविष्य का सवाल है।
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| मांग | ईआरसीपी नहर से टेल क्षेत्र के करीब 24 गांवों को सिंचाई पानी |
| बैठक स्थल | लबान छप्पन जी का बाग, लाखेरी उपखंड क्षेत्र |
| बैठक का दिन | शुक्रवार (16 अक्टूबर 2026) |
| मुख्य फैसला | संघर्ष समिति के गठन का प्रस्ताव |
| मौजूदा स्रोत | कोटा बैराज की नहरें (अपर्याप्त आपूर्ति) |
| मुख्य शिकायत | हर साल सिंचाई के लिए आंदोलन करना पड़ता है |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: ईआरसीपी परियोजना क्या है?
उत्तर: पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) प्रदेश की बड़ी जल परियोजना है, जिसका उद्देश्य नदियों के अधिशेष जल से 13 जिलों को पेयजल और करीब 2 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का पानी देना है।
प्रश्न 2: टेल क्षेत्र का क्या मतलब है?
उत्तर: नहर के अंतिम छोर को टेल क्षेत्र कहते हैं। यहां पानी पहुंचने में सबसे ज्यादा दिक्कत आती है, क्योंकि रास्ते में ही बड़ा हिस्सा इस्तेमाल हो जाता है।
प्रश्न 3: लाखेरी के किसानों की मुख्य मांग क्या है?
उत्तर: लाखेरी ईआरसीपी नहर पानी की मांग के तहत किसान चाहते हैं कि क्षेत्र से गुजर रही ईआरसीपी नहर से टेल क्षेत्र के करीब दो दर्जन गांवों को सिंचाई पानी मिले और जल वितरण व्यवस्था में सुधार हो।
प्रश्न 4: संघर्ष समिति क्या करेगी?
उत्तर: समिति प्रभावित गांवों के किसानों को एकजुट करेगी, मांग अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाएगी और मांग पूरी होने तक सामूहिक प्रयास जारी रखेगी।