उदयपुर स्कूल में छत का प्लास्टर गिरा: 3 बच्चे घायल, जर्जर भवन पर ताला

उदयपुर के सरकारी स्कूल में 32 बच्चों के ऊपर गिरी छत का प्लास्टर: 3 छात्र घायल, जर्जर भवन पर प्रशासन ने लगाया ताला

उदयपुर जिले के भींडर इलाके में एक सरकारी स्कूल की कक्षा में पढ़ रहे 32 मासूम बच्चों के साथ मंगलवार को वो हादसा हो गया, जिसकी आहट लंबे समय से सुनाई दे रही थी। पढ़ाई के बीच अचानक छत का प्लास्टर भरभराकर नीचे आ गिरा और कमरे में अफरा-तफरी मच गई। हादसे में तीन बच्चों के सिर में चोटें आईं, जबकि दो बच्चों को हल्की चोट लगी। जान बच गई — लेकिन सवाल वहीं का वहीं है: बच्चों को जर्जर भवनों में कब तक पढ़ाया जाता रहेगा?

वाणियातलाई के नारदा स्कूल में कैसे हुआ हादसा

घटना उदयपुर जिले के भींडर क्षेत्र की वाणियातलाई ग्राम पंचायत के राजकीय प्राथमिक विद्यालय नारदा की है। मंगलवार को सुबह सामान्य पढ़ाई चल रही थी — पहली से पांचवीं तक के बच्चे एक ही कमरे में बैठे थे, तभी तेज आवाज के साथ छत से प्लास्टर का हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा। हादसे के समय कमरे में करीब 32 बच्चे मौजूद थे और अचानक हुए हादसे से वे बुरी तरह घबरा गए, कमरे में भगदड़ मच गई। शिक्षकों ने स्थिति संभालते हुए घायल बच्चों को तुरंत भींडर के सरकारी अस्पताल पहुंचाया। घायल बच्चों की पहचान पहली कक्षा की छात्रा कृष्णा कुमारी, छात्र कार्तिक और पांचवीं कक्षा के छात्र गणेशलाल के रूप में हुई है — तीनों के सिर में चोट आई। प्राथमिक उपचार के बाद सभी को घर भेज दिया गया।

24 साल पुरानी इमारत: शिकायतें होती रहीं, सुनवाई नहीं

जो तथ्य इस हादसे को सबसे ज्यादा चिंताजनक बनाता है, वह है विद्यालय भवन की पुरानी खराब हालत। स्कूल भवन वर्ष 2001 में बना था — दो कमरे और एक बरामदा। ग्रामीणों का कहना है कि इमारत लंबे समय से जर्जर है और बारिश के दिनों में खतरा और बढ़ जाता है।

स्कूल के प्रधानाध्यापक लालसिंह शक्तावत के अनुसार विद्यालय में कुल 37 बच्चे नामांकित हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि स्कूल भवन की जर्जर स्थिति के बारे में शिक्षा विभाग को पहले ही अवगत करा दिया गया था। ग्रामीणों का भी दावा है कि भवन की मरम्मत को लेकर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यही वजह है कि घटना के बाद ग्रामीणों और अभिभावकों में जबरदस्त नाराजगी है — उनका सवाल सीधा है: जब भवन पहले से ही जर्जर था, तो बच्चों को वहां क्यों पढ़ाया जा रहा था?

हादसे के बाद प्रशासन की प्रतिक्रिया: भवन बंद, कक्षाएं दूसरी जगह

हादसे की जानकारी मिलते ही सीबीईओ भींडर राजेंद्र कुमार चौबीसा मौके पर पहुंचे और भवन का निरीक्षण किया। शिक्षा विभाग और प्रशासन के निर्देश पर एहतियात के तौर पर पूरे स्कूल भवन को बंद कर दिया गया है — मुख्य द्वार पर ताला लगा है। बच्चों की कक्षाएं अब माताजी के चबूतरे के पास वैकल्पिक स्थान पर संचालित हो रही हैं। ग्रामीणों ने नया भवन बनाने या स्थायी सुरक्षित व्यवस्था की मांग की है।

एक बड़ा सवाल: राजस्थान के हजारों जर्जर स्कूल कब सुधरेंगे?

नारदा की यह घटना अकेली नहीं है। इसने जुलाई 2025 के झालावाड़ के पिपलोदी सरकारी स्कूल हादसे की याद ताजा कर दी है, जिसमें भवन का हिस्सा गिरने से सात बच्चों की मौत हुई थी। उसके बाद पूरे प्रदेश में स्कूल भवनों की सुरक्षा जांच के दावे हुए, लेकिन नारदा की घटना दिखाती है कि जमीनी हकीकत अब भी डराने वाली है — विभाग के ही ताजा आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 3,768 सरकारी स्कूलों की पूरी इमारतें और 83,783 कक्षाएं जीर्ण-शीर्ण हालत में हैं। राजस्थान हाई कोर्ट ने सरकार से मरम्मत का स्पष्ट रोडमैप भी मांगा था।

सरकार ने ‘विधायक शिक्षा का साथी योजना’ की घोषणा की है, जिसके तहत विधायक कोष का 20 प्रतिशत भाग हर साल स्कूल भवनों के सुधार और निर्माण में लगाया जाएगा। शिक्षा मंत्री ने सभी विधायकों को पत्र लिखकर अपील भी की है। लेकिन नारदा जैसे मामलों में सवाल यही है कि घोषणा और जमीनी कार्रवाई के बीच का फासला कब भरेगा।

घटना के प्रमुख तथ्य एक नजर में

तथ्यविवरण
घटना का स्थानराजकीय प्राथमिक विद्यालय नारदा, वाणियातलाई ग्राम पंचायत, भींडर, उदयपुर
घटना का दिनमंगलवार (6 अक्टूबर 2026), कक्षा के दौरान
कमरे में मौजूद बच्चेकरीब 32
घायल बच्चे3 (सिर में चोट) + 2 (मामूली चोट)
घायल बच्चों के नामकृष्णा कुमारी (कक्षा 1), कार्तिक (कक्षा 1), गणेशलाल (कक्षा 5)
विद्यालय में कुल नामांकन37 बच्चे
भवन का निर्माण वर्ष2001 (दो कमरे और एक बरामदा)
प्रधानाध्यापकलालसिंह शक्तावत
मौके पर पहुंचे अधिकारीसीबीईओ भींडर राजेंद्र कुमार चौबीसा
फिलहाल व्यवस्थाभवन पर ताला, कक्षाएं माताजी के चबूतरे के पास वैकल्पिक स्थान पर
उपचारभींडर सरकारी अस्पताल में प्राथमिक उपचार, फिर घर भेजा गया

बच्चों की सुरक्षा के लिए अभिभावकों को क्या करना चाहिए

  1. स्कूल भवन खुद जाकर देखें: बच्चे के स्कूल की छत और कक्षाओं की स्थिति समय-समय पर खुद देखें। दरारें या लटका प्लास्टर दिखे तो प्रधानाध्यापक को लिखित में अवगत कराएं।
  2. शिकायत का रिकॉर्ड रखें: शिकायत मौखिक न करें — आवेदन देकर उसकी रसीद या फोटो अपने पास रखें।
  3. SMC बैठकों में सक्रिय रहें: स्कूल प्रबंधन समिति की बैठकों में भवन सुरक्षा का मुद्दा जरूर उठाएं; सुनवाई न हो तो सीबीईओ या जिला शिक्षा अधिकारी को लिखित शिकायत भेजें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न: उदयपुर के नारदा स्कूल में क्या हादसा हुआ?
उत्तर: राजकीय प्राथमिक विद्यालय नारदा में मंगलवार को कक्षा के दौरान छत का प्लास्टर अचानक भरभराकर गिर गया। कमरे में करीब 32 बच्चे थे — तीन के सिर में चोटें आईं, दो को हल्की चोट लगी।

प्रश्न: क्या घायल बच्चे अब खतरे से बाहर हैं?
उत्तर: हां। तीनों को भींडर के सरकारी अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया। किसी के गंभीर घायल होने की खबर नहीं है।

प्रश्न: स्कूल भवन की हालत पहले से खराब थी, क्या किसी ने शिकायत की थी?
उत्तर: हां। स्कूल के प्रधानाध्यापक के अनुसार भवन की जर्जर स्थिति के बारे में शिक्षा विभाग को पहले ही जानकारी दी जा चुकी थी। ग्रामीणों का भी दावा है कि मरम्मत को लेकर कई बार शिकायतें हुईं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

प्रश्न: हादसे के बाद स्कूल अब कहां चल रहा है?
उत्तर: पूरे भवन को बंद करके मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया गया है। बच्चों की कक्षाएं माताजी के चबूतरे के पास वैकल्पिक स्थान पर संचालित हो रही हैं।

निष्कर्ष: नारदा का हादसा एक चेतावनी है — इस बार जान बच गई, लेकिन जर्जर भवनों की मरम्मत में देरी जारी रही तो अगली बार नतीजा भयावह हो सकता है। बच्चों की सुरक्षा कागजी योजनाओं से नहीं, जमीनी कार्रवाई से सुनिश्चित होगी।

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