घड़साना किसान आंदोलन: NH-911 रातभर जाम, बेनीवाल डटे रहे

श्रीगंगानगर। घड़साना किसान आंदोलन शनिवार की रात 32वें दिन इतना उग्र हो गया कि नेशनल हाईवे 911 पर रातभर चक्का जाम रहा, चार बाजार पूरी तरह बंद रहे और 550 से ज्यादा पुलिस-आरएसी जवान तैनात करने पड़े। RLP सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने खुद आंदोलन की अगुवाई संभाली और रविवार सुबह 4 बजे तक किसानों के साथ टोल नाके पर डटे रहे।

रबी सीजन की बुआई के ठीक पहले सिंचाई पानी की मांग और डीएपी खाद की भारी किल्लत ने इलाके के अन्नदाताओं को आर-पार के मूड में ला दिया है। रविवार सुबह प्रशासन के साथ वार्ता तय की गई है — किसान लिखित समझौते पर अड़े हैं।

NH-911 पर रातभर रहा चक्का जाम, बैरिकेड तोड़े गए

घड़साना किसान आंदोलन में सबसे नाटकीय मोड़ शनिवार रात करीब 10 बजे आया। शाम को घड़साना की नई धानमंडी में हनुमान बेनीवाल की मौजूदगी में बड़ी किसान सभा हुई। प्रशासन को दिए गए अल्टीमेटम की रात 9:15 बजे की समय-सीमा बीत गई और मांगों पर कोई लिखित सहमति नहीं बनी, तो बेनीवाल ने हजारों किसानों के साथ श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय की ओर कूच का ऐलान कर दिया।

हजारों किसान ट्रैक्टरों, गाड़ियों और अपने वाहनों के काफिले के साथ रवाना हुए। इस काफिले को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने 12 एमडी टोल नाके के पास भारी नाकाबंदी और बैरिकेडिंग की थी। लेकिन उग्र किसानों ने बैरिकेड्स को गिरा दिया और टोल नाके पर कब्जा कर लिया। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि पुलिस बल को पीछे हटना पड़ा।

इसके बाद देर रात किसानों ने पतरोड़ा के पेट्रोल पंप के पास नेशनल हाईवे नंबर 911 पर पड़ाव डालकर चक्का जाम कर दिया, जिससे मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। राहत की एकमात्र बात यह रही कि एंबुलेंस जैसे आपातकालीन वाहनों को रास्ता दिया जा रहा है।

32 दिन पुराना है यह धरना, क्या है असली वजह?

घड़साना किसान आंदोलन अचानक पैदा नहीं हुआ। श्रीगंगानगर जिले की घड़साना और अनूपगढ़ शाखा में सिंचाई पानी की मांग को लेकर किसान पिछले कई हफ्तों से एसडीएम दफ्तर के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे। घड़साना की नई मंडी में किसानों का महापड़ाव शनिवार तक 31 दिन पुराना हो चुका था और रविवार को यह 32वें दिन में प्रवेश कर गया।

असली वजह रबी सीजन का समय है। अक्टूबर का महीना बुआई की तैयारी का है, और इस वक्त खेतों को समय पर पानी न मिले तो पूरी फसल चौपट हो जाती है। किसानों का कहना है कि पानी का बंटवारा इतना असमान है कि उनके खेत सूखे पड़े हैं। यही वजह है कि घड़साना किसान आंदोलन की जड़ें सिर्फ एक रात की नहीं, बल्कि एक महीने से जमी शिकायतों में हैं।

इलाके के किसान यह भी कहते हैं कि सूखे और पानी की कमी से पहले ही फसलों का खराबा हो चुका है — विशेष गिरदावरी करवाकर बीमा क्लेम और मुआवजा दिए जाने की मांग भी आंदोलन का हिस्सा बन गई है।

किसानों की 4 बड़ी मांगें — तालिका में समझें

घड़साना किसान आंदोलन मुख्य रूप से चार सूत्री मांगों पर टिका है:

क्रममांगकिसानों की दलील
1स्थाई सिंचाई रेगुलेशनअनूपगढ़ शाखा में 6 महीने का स्थाई रेगुलेशन लागू हो, ताकि हर बार पानी को लेकर संघर्ष न करना पड़े
2पर्याप्त पानी का वितरणचार में से दो समूहों को भरपूर सिंचाई पानी मिले ताकि समय पर बुआई हो सके
3अधिकारियों पर कार्रवाईपानी की आपूर्ति में लापरवाही बरतने वाले सिंचाई विभाग के अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो
4फसल खराबे का मुआवजाविशेष गिरदावरी करवाकर किसानों को उचित बीमा क्लेम और मुआवजा दिया जाए

किसान नेताओं का रुख साफ है — जब तक सरकार लिखित समझौता करके मांगों का ठोस समाधान नहीं करती, यह संघर्ष और तेज होगा। खाजूवाला में भी अक्टूबर की शुरुआत में सिंचाई पानी को लेकर चक्काजाम और धरना हुआ था

DAP खाद की किल्लत ने आग में घी का काम किया

घड़साना किसान आंदोलन को उग्र बनाने में रबी बुआई से पहले डीएपी खाद की भारी किल्लत ने आग में घी का काम किया है। राज्य सरकार ने भरोसा दिया है कि मौजूदा स्टॉक से करीब 18 दिन का डीएपी और 35 दिन का यूरिया उपलब्ध है और 14 अक्टूबर तक 14 रैक और पहुंचने की संभावना है, लेकिन जमीनी हकीकत में किसान दुकानों पर कतारों में खड़े हैं।

यही वजह है कि राजस्थान में डीएपी खाद संकट पर अक्टूबर की शुरुआत से ही किसानों का गुस्सा सड़कों पर दिख रहा है — कहीं दुकान बंद होने पर धरना, कहीं मेगा हाईवे जाम। घड़साना में पानी के साथ-साथ खाद की यह किल्लत दोहरी मार बनकर सामने आई है। किसानों का सवाल सीधा है: बिना पानी और बिना खाद के रबी की बुआई होगी कैसे?

प्रशासन अलर्ट पर: 550 जवान, 4 बाजार बंद

आंदोलन के उग्र रूप को देखते हुए घड़साना, रावला, खाजूवाला और मंडी 365 हेड के बाजार पूरी तरह बंद रखे गए हैं। कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए घड़साना क्षेत्र में तीन बटालियन और करीब 550 से अधिक पुलिस तथा आरएसी के जवान तैनात किए गए हैं।

स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए क्यूआरटी, आरएसी और अतिरिक्त पुलिस सुरक्षा कंपनियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। रविवार सुबह करीब 9-10 बजे प्रशासन के साथ वार्ता तय की गई है। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि समाधान न निकलने पर आरएलपी कार्यकर्ता पूरे प्रदेश में चक्का जाम और टोल नाके ब्लॉक करने की तैयारी में हैं। यानी आज की वार्ता का नतीजा सिर्फ घड़साना किसान आंदोलन की दिशा तय नहीं करेगा, बल्कि पूरे राजस्थान के हाईवे भी प्रभावित हो सकते हैं।

खेती से जुड़े बाजार भाव की ताजा जानकारी किसान एगमार्कनेट पोर्टल पर देख सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

घड़साना किसान आंदोलन क्यों शुरू हुआ?
सिंचाई पानी की मांग को लेकर घड़साना नई मंडी में किसानों का महापड़ाव पिछले 31 दिनों से चल रहा था। रबी बुआई से पहले पानी न मिलने और डीएपी खाद की किल्लत ने इसे उग्र बना दिया।

NH-911 पर चक्का जाम कब हुआ?
शनिवार रात करीब 10 बजे हनुमान बेनीवाल के नेतृत्व में हजारों किसानों ने कूच किया, बैरिकेड तोड़े और पतरोड़ा के पेट्रोल पंप के पास NH-911 पर पड़ाव डाल दिया।

किसानों की मुख्य मांगें क्या हैं?
चार सूत्री मांगें हैं: 6 महीने का स्थाई सिंचाई रेगुलेशन, पर्याप्त पानी का वितरण, लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई और फसल खराबे का मुआवजा।

अब आगे क्या होगा?
रविवार सुबह 9-10 बजे प्रशासन के साथ वार्ता तय है। किसान लिखित समझौते की मांग पर अड़े हैं, वरना प्रदेशभर में चक्का जाम की चेतावनी दी गई है।

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