जैसलमेर नहरी पानी संकट अब किसानों के सब्र की परीक्षा बन गया है। खेतों में रबी की फसल खड़ी है, खाद-बीज पर लाखों रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन सिंचाई की पहली बारी का इंतजार अब भी खत्म नहीं हुआ है। इसी चिंता के बीच शनिवार को मोहनगढ़ के शहीद स्मारक पर हजारों किसान महापंचायत में जुटे और निर्धारित हिस्से का पूरा पानी समय पर देने की मांग की। जिला कलक्टर के नाम ज्ञापन पुलिस थानाधिकारी गुमान सिंह के माध्यम से भेजा गया।
किसानों की मांग सीधी है: तय हिस्सा समय पर चाहिए। पहले के जोनों में दो-दो बारियां पूरी हो चुकी हैं, जबकि जैसलमेर जोन अब भी पहली बारी के लिए तरस रहा है। महापंचायत ने चेतावनी दी है कि जल्द पूरा पानी नहीं मिला तो आंदोलन तेज होगा।
जैसलमेर नहरी पानी संकट: तय हिस्सा कितना था, मिला कितना
किसानों के अनुसार रबी 2026-27 के लिए इंदिरा गांधी नहर परियोजना (आईजीएनपी) ने 30 सितंबर से 17 अक्टूबर तक दो ग्रुपों के लिए रेगुलेशन जारी किया था। 8 अक्टूबर तक जैसलमेर जोन का हिस्सा 1800 क्यूसेक और 9 से 19 अक्टूबर तक 2060 क्यूसेक तय था। आरोप है कि 1800 क्यूसेक वाले दौर में शून्य पानी मिला, जबकि 2060 क्यूसेक के दौरान महज 1000 क्यूसेक आपूर्ति हुई।
इसके बाद भी हालात नहीं सुधरे। 17 अक्टूबर से तीन में से एक ग्रुप का रेगुलेशन शुरू हुआ, लेकिन 1800 क्यूसेक के मुकाबले एक-दो दिन ही 1500 क्यूसेक पानी मिला। बाद में आपूर्ति घटकर 600 से 700 क्यूसेक रह गई, बीच की नहरें बंद करनी पड़ीं और पिछले दिन से 1254 आरडी पर पानी शून्य होने का आरोप है।
| अवधि / दौर | तय हिस्सा | किसानों के अनुसार मिली आपूर्ति |
|---|---|---|
| 8 अक्टूबर तक | 1800 क्यूसेक | शून्य |
| 9 से 19 अक्टूबर तक | 2060 क्यूसेक | करीब 1000 क्यूसेक |
| 17 अक्टूबर के बाद (तीन में से एक ग्रुप) | 1800 क्यूसेक | एक-दो दिन 1500 क्यूसेक, फिर 600-700 क्यूसेक |
| 1254 आरडी (पिछला दिन) | नियमित आपूर्ति अपेक्षित | शून्य होने का आरोप |
| पहले के जोन | निर्धारित बारियां | दो-दो बारियां पूरी होने का दावा |
| जैसलमेर जोन | पहली बारी | अब भी इंतजार |
तालिका से साफ है कि विवाद कुल पानी पर उतना नहीं है, जितना बंटवारे और समय पर है। जब एक जोन की दो बारियां पूरी हो जाएं और दूसरे की पहली बारी ही न शुरू हो, तो असमानता का भाव पैदा होना स्वाभाविक है।
जैसलमेर नहरी पानी संकट: मोहनगढ़ महापंचायत की मांग
शनिवार को मोहनगढ़ के शहीद स्मारक पर हुई महापंचायत में हजारों किसानों ने हिस्सा लिया। सिंचाई विभाग के खिलाफ नाराजगी जताई गई और जिला प्रशासन से पूरा पानी समय पर देने की मांग उठाई गई। ज्ञापन जिला कलक्टर के नाम पुलिस थानाधिकारी गुमान सिंह के माध्यम से सौंपा गया, ताकि मांग लिखित रूप में दर्ज रहे।
महापंचायत का संदेश दो हिस्सों में है: तत्काल मांग — निर्धारित हिस्से का पूरा पानी बिना और देरी के; और चेतावनी — जल्द पानी नहीं मिला तो उग्र आंदोलन होगा। यह चेतावनी इसलिए गंभीर है क्योंकि अक्टूबर की शुरुआत में भी किसान इसी मुद्दे पर आंदोलन कर चुके हैं। 2 से 9 अक्टूबर तक जीरो आरडी मोहनगढ़ पर आंदोलन चला था, जिसमें अधिकारियों ने निर्धारित हिस्सा देने का भरोसा दिलाया था, लेकिन किसानों का कहना है कि हालात नहीं बदले।
अक्टूबर की कहानी: आश्वासन, आंदोलन और फिर वही शिकायत
यह एक दिन की नाराजगी नहीं है। 2 से 9 अक्टूबर तक जीरो आरडी मोहनगढ़ पर आंदोलन चला था, जिसमें अधिकारियों ने निर्धारित हिस्सा देने का भरोसा दिलाया था। 9 अक्टूबर के आसपास भी जीरो आरडी पर धरने की खबरें आईं, जिसमें किसानों ने कहा था कि सात दिन से धरना चलने के बावजूद ठोस पहल नहीं हुई है।
खाजूवाला से जैसलमेर तक सिंचाई पानी का आंदोलन पहले भी सुर्खियों में रहा है, और अब मोहनगढ़ की महापंचायत उसी सवाल को फिर उठा रही है: बंटवारा टेल तक बराबरी से कैसे पहुंचे।
यह खबर किसानों के आरोपों और महापंचायत की मांगों पर आधारित है; सिंचाई विभाग की आधिकारिक सफाई आने वाले दिनों में सामने आएगी।
टेल क्षेत्र की मुश्किल: जैसलमेर जोन क्यों पिछड़ता है
जैसलमेर जोन नहर के अंतिम छोर की ओर पड़ता है, इसलिए पानी की कमी की मार यहां सबसे पहले महसूस होती है। जब ऊपरी हिस्सों में उपयोग हो जाता है, तो टेल तक पहुंचने वाला हिस्सा सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। आईजीएनपी से जुड़ी सिंचाई परियोजनाओं पर पहले भी चर्चा होती रही है, लेकिन किसानों की असली चिंता अपने खेत तक पानी पहुंचने की है।
रबी सीजन में किसान बीज, खाद और जुताई पर पहले ही खर्च कर चुका होता है। बारी देर से मिली तो फसल की बढ़त रुक सकती है और पूरी फसल पर खतरा मंडरा सकता है, इसलिए किसान इसे सालभर की आमदनी का मुद्दा मान रहे हैं। जयसमंद झील से रबी सिंचाई की खबर में भी यही बात सामने आई थी कि नहरों में पानी की समय-सारणी किसानों की पूरी योजना तय करती है।
आगे क्या: किसानों के लिए जरूरी बातें और प्रशासन से उम्मीद
जैसलमेर नहरी पानी संकट के इस पड़ाव पर अब सबकी नजर ज्ञापन के बाद जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग के कदमों पर है। मांग स्पष्ट है: निर्धारित हिस्से का पूरा पानी, समय पर। आपूर्ति सुधरी तो चेतावनी का दबाव कम होगा, वरना आंदोलन तेज होने की आशंका है।
किसानों के लिए कुछ व्यावहारिक बातें काम आ सकती हैं: अपनी नहर और आरडी के अनुसार बारी की जानकारी स्थानीय सिंचाई कार्यालय से लिखित में लेते रहें, फसल की स्थिति की तस्वीरें और खर्च का ब्योरा संभालकर रखें, और किसी भी धरने में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखें। दस्तावेज और समय पर जानकारी इस तरह के विवादों में हमेशा काम आती है।
अगले कुछ दिन निर्णायक होंगे: नहरों में पानी की अगली बारी, 1254 आरडी पर आपूर्ति और सिंचाई विभाग का रुख तय करेंगे कि किसान को राहत मिलती है या आंदोलन नया मोड़ लेता है। स्रोत रिपोर्ट पत्रिका की मूल खबर भी देखी जा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
जैसलमेर नहरी पानी संकट क्या है?
किसानों के अनुसार जैसलमेर जोन को तय हिस्से से कम सिंचाई पानी मिल रहा है, जिससे रबी की पहली बारी अब तक नहीं मिली है।
मोहनगढ़ महापंचायत में क्या मांग की गई?
जिला कलक्टर के नाम ज्ञापन भेजकर निर्धारित हिस्से का पूरा पानी समय पर देने की मांग की गई; ज्ञापन थानाधिकारी गुमान सिंह के माध्यम से सौंपा गया।
तय हिस्से और मिली आपूर्ति में कितना अंतर है?
1800 क्यूसेक वाले दौर में शून्य, 2060 क्यूसेक वाले दौर में करीब 1000 क्यूसेक पानी मिला; बाद में आपूर्ति 600-700 क्यूसेक रह गई।
आगे क्या हो सकता है?
जल्द पूरा पानी नहीं मिला तो महापंचायत ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।