जैसलमेर जिले के मोहनगढ़ इलाके में गुरुवार, 29 अक्टूबर को दोपहर करीब एक बजे एक खेत में अचानक जोरदार धमाका हुआ। जैसलमेर मोहनगढ़ बम धमाका इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि धमाके के समय किसान अपने ट्रैक्टर के पास ही काम कर रहा था, और एक छोटे से संयोग ने उसकी जान बचा ली। गनीमत रही कि घटना में कोई जनहानि नहीं हुई। लेकिन धमाके की आवाज दो से तीन किलोमीटर दूर तक सुनाई दी, खेत में करीब दो फुट गहरा गड्ढा बन गया और छर्रे पास खड़े ट्रैक्टर से जा टकराए। अब सवाल यही है कि बम खेत तक पहुंचा कैसे — जवाब जांच के बाद मिलेगा।
मोबाइल ढूंढने ट्रैक्टर से उतरा किसान, उसी पल हुआ धमाका
मोहनगढ़ के 3 केएनएम में तुलसाराम के खेत में किसान द्वारकाराम अपने ट्रैक्टर के साथ तुलाई के काम में लगा था। इसी दौरान उसे पता चला कि उसका मोबाइल फोन कहीं गिर गया है। वह मोबाइल तलाशने के लिए ट्रैक्टर से थोड़ी दूर चला गया — और तभी अचानक जोरदार धमाका हो गया। पूरे इलाके में धुएं का गुबार फैल गया और आवाज से आसपास के लोग सहम गए।
द्वारकाराम ने बताया कि उसने बम को गिरते हुए नहीं देखा था, लेकिन धमाका इतना तेज था कि पूरा क्षेत्र गूंज उठा। उसके पिता तुलसाराम ने तुरंत उसे जमीन पर लेट जाने को कहा, क्योंकि उन्हें आशंका थी कि कहीं दूसरा बम भी न गिर जाए। खबर फैलते ही ग्रामीण मौके पर जमा हो गए।
जैसलमेर मोहनगढ़ बम धमाका: पुलिस और सेना ने मौके पर क्या किया
सूचना मिलते ही मोहनगढ़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने उच्च अधिकारियों को जानकारी दी और सेना को भी अवगत कराया। इसके बाद पुलिस और सेना के जवानों ने खेत का जायजा लिया और संदिग्ध बम के अवशेष बरामद किए। जांच का मकसद साफ है — यह पता लगाना कि विस्फोटक वस्तु कहां से आई और खेत तक कैसे पहुंची।
मोहनगढ़ थानाधिकारी गुमान सिंह ने बताया कि 3 केएनएम में खेत पर अचानक संदिग्ध बम गिरने की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचने पर सामने आया कि खेत तुलसाराम का है। उन्होंने साफ कहा कि घटना में कोई जनहानि नहीं हुई और बड़ा हादसा टल गया।
जैसलमेर मोहनगढ़ बम धमाका और चांधन रेंज: आशंका क्या, पुष्टि क्या नहीं
मोहनगढ़ के नजदीक ही चांधन फील्ड फायरिंग रेंज स्थित है। इसी वजह से प्रारंभिक जानकारी में यह आशंका जताई जा रही है कि रेंज में परीक्षण या युद्धाभ्यास के दौरान कोई बम अथवा गोला निर्धारित क्षेत्र से बाहर आकर खेत में गिरा हो सकता है। कुछ रिपोर्टों में इसे परीक्षण के दौरान निशाना चूकने की आशंका के रूप में भी बताया गया है। लेकिन यहां एक जरूरी फर्क समझ लीजिए — आशंका और पुष्टि दो अलग चीजें हैं।
अभी तक घटना के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। न पुलिस ने और न सेना की ओर से यह कहा गया है कि बम निश्चित रूप से फायरिंग रेंज से ही आया था। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बम किस स्थान से आया और किन परिस्थितियों में खेत तक पहुंचा।
खेतों में काम करने वालों की सुरक्षा पर उठा बड़ा सवाल
इस जैसलमेर मोहनगढ़ बम धमाके ने नहरी क्षेत्र के किसानों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खेतों में किसान और कृषि श्रमिक रोज काम करते हैं, और उनके लिए खेत सिर्फ काम की जगह नहीं, बल्कि परिवार की रोजी-रोटी का जरिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि करीब दो वर्ष पहले भी इसी क्षेत्र के आसपास खेतों में बम जैसी वस्तुएं गिरी थीं। एक ग्रामीण ने सीमा पार से बार-बार बम आने की घटनाओं का दावा करते हुए सरकार से स्थायी समाधान की मांग भी की। हालांकि यह ग्रामीणों का दावा है, जांच का नतीजा नहीं — और मौजूदा घटना के कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है, इसलिए दोनों बातों को अलग-अलग रखकर देखना ही सही है। इसी मोहनगढ़ इलाके में ट्रांसफॉर्मर तेल चोरी पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई और रावला ड्रोन मामले के मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी भी हुई है। जैसलमेर में एयर रेड वार्निंग सायरन का ट्रायल भी हो चुका है।
संदिग्ध वस्तु दिखे तो क्या करें, क्या बिल्कुल न करें
खेत, रास्ते या खुले मैदान में कोई संदिग्ध धातु की वस्तु, गोला या विस्फोटक जैसी चीज दिखे तो घबराहट में उसे छूना सबसे बड़ी गलती होगी। सबसे पहले उस जगह से सुरक्षित दूरी बना लें और बच्चों को भी वहां से दूर रखें। इसके बाद तुरंत 112 पर कॉल करके पुलिस को सूचना दें, या नजदीकी थाने को बताएं। गांव के पास जगह हो तो सरपंच या पटवारी को भी खबर कर दें, ताकि कोई और व्यक्ति अनजाने में वहां न पहुंच जाए।
कुछ काम किसी भी हाल में नहीं करने चाहिए — संदिग्ध वस्तु को उठाना, हिलाना, उस पर पत्थर मारना, उसे खोदकर निकालने की कोशिश करना या उसमें आग लगाना जानलेवा हो सकता है। पुराने और जंग लगे गोले भी उतने ही खतरनाक होते हैं, क्योंकि उनमें विस्फोटक अब भी सक्रिय हो सकता है। दूर से ही पुलिस को सूचना दें और जांच टीम के आने तक वहां किसी को न जाने दें।
घटना एक नजर में
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| तारीख और समय | 29 अक्टूबर 2026, दोपहर करीब 1 बजे |
| स्थान | 3 केएनएम, मोहनगढ़, जैसलमेर |
| खेत के मालिक | तुलसाराम |
| काम कर रहे किसान | द्वारकाराम |
| जनहानि / घायल | कोई नहीं, किसान बाल-बाल बचा |
| धमाके की आवाज | 2 से 3 किलोमीटर दूर तक |
| खेत में गड्ढा | करीब 2 फुट गहरा |
| नुकसान | ट्रैक्टर से छर्रे टकराए |
| मौके पर टीमें | मोहनगढ़ पुलिस और सेना |
| पुलिस बयान | थानाधिकारी गुमान सिंह, जांच जारी |
| नजदीकी रेंज | चांधन फील्ड फायरिंग रेंज |
| कारण | आधिकारिक पुष्टि बाकी, निशाना चूकने की आशंका |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. जैसलमेर मोहनगढ़ बम धमाका कब और कहां हुआ?
29 अक्टूबर 2026, दोपहर करीब 1 बजे, मोहनगढ़ के 3 केएनएम में तुलसाराम के खेत में।
2. धमाके में कोई घायल हुआ?
नहीं। खेत में काम कर रहा किसान द्वारकाराम बाल-बाल बच गया। पुलिस के मुताबिक कोई जनहानि नहीं हुई।
3. बम खेत में कैसे गिरा?
आधिकारिक पुष्टि बाकी है। चांधन रेंज में परीक्षण के दौरान निशाना चूकने की आशंका है।
4. संदिग्ध वस्तु दिखे तो क्या करें?
न छुएं, दूरी बना लें और तुरंत 112 पर पुलिस को सूचना दें।
इस खबर का स्रोत ईटीवी भारत और पत्रिका की 29 अक्टूबर 2026 की रिपोर्टें हैं।