राजस्थान ड्रग्स तस्करी नेटवर्क: 3 साल में 7.66 लाख किलो जब्त, पाकिस्तान बॉर्डर पर जांच तेज

राजस्थान में पिछले तीन साल में 7.66 लाख किलोग्राम से ज्यादा मादक पदार्थ पकड़ा गया है। यह किसी एक छापे का नहीं, बल्कि 2023 से 2025 के बीच तमाम एजेंसियों की कुल जब्ती का आंकड़ा है। इसी पृष्ठभूमि में जयपुर में हुई राज्य स्तरीय संयुक्त समन्वय समिति (JCC) की बैठक में पाकिस्तान से जुड़े तस्करी नेटवर्क को तोड़ने पर खास जोर दिया गया। केंद्रीय एजेंसियों और राज्य मशीनरी को एक मंच पर लाकर खुफिया जानकारी साझा करने और संगठित सिंडिकेट के खिलाफ समन्वित कार्रवाई की रणनीति बनी है।

तीन साल का हिसाब: कब कितनी जब्ती हुई

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जब्ती का ग्राफ तीनों साल ऊंचा रहा। 2023 में सबसे ज्यादा मात्रा दर्ज हुई, उसके बाद के दो सालों में भी आंकड़ा दो लाख किलोग्राम से ऊपर बना रहा, यानी तस्करी का दबाव लगातार बना हुआ है।

साल जब्त मादक पदार्थ (किलोग्राम में)
2023 2,94,582
2024 2,45,576
2025 2,25,933
कुल (तीन साल) 7,66,091 (करीब 7.66 लाख)

इन आंकड़ों में हर तरह के मादक पदार्थ शामिल हैं। मात्रा का घटना तस्करी कम होने का सबूत नहीं है, क्योंकि तस्कर तरीका बदल लेते हैं: कभी खेप छोटी-छोटी करके भेजी जाती है, कभी दवाओं के रूप में नशा बढ़ जाता है। इसीलिए एजेंसियां अब वजन गिनने के बजाय पूरे नेटवर्क को समझने पर जोर दे रही हैं।

राजस्थान ड्रग्स तस्करी नेटवर्क: 1070 किमी बॉर्डर क्यों निशाने पर है

राजस्थान की पाकिस्तान के साथ 1,070 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की रिपोर्ट में श्रीगंगानगर, अनूपगढ़, बीकानेर, जैसलमेर और बाड़मेर को ज्यादा जोखिम वाला बताया गया है, जहां सीमा पार की खेप स्थानीय नेटवर्क के जरिए घरेलू बाजारों तक पहुंचाई जाती है।

तस्करी आमतौर पर परतों में चलती है। सीमा पार से खेप आती है, फिर उसे उठाने, पहुंचाने और बेचने वाले अलग-अलग कड़ियों में बंट जाते हैं। सिर्फ आखिरी कड़ी पकड़ने से सरगना तक पहुंचना मुश्किल होता है, इसीलिए जयपुर बैठक में हर जब्ती को बड़े नेटवर्क की कड़ी मानने पर जोर दिया गया।

राज्य में पहले भी ऐसी कड़ियां सामने आ चुकी हैं। श्रीगंगानगर में ड्रोन से हेरोइन तस्करी के मामले में हवाई रास्ते से खेप भेजने का तरीका उजागर हुआ था, जबकि बालोतरा में एमडी ड्रग्स फैक्ट्री का भंडाफोड़ बताता है कि अंदर अवैध प्रयोगशालाएं भी इस धंधे का हिस्सा हैं।

फार्मा टैबलेट का नया खतरा: श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ के आंकड़े चौंकाते हैं

इस तस्वीर में सबसे चिंताजनक मोड़ दवाओं के रूप में मिलने वाले नशीले पदार्थों का बढ़ता चलन है। डॉक्टर के पर्चे वाली दवाएं और साइकोट्रोपिक पदार्थ अब अवैध बाजार का बड़ा सहारा बन रहे हैं। श्रीगंगानगर में 2023 में सिर्फ 14,146 टैबलेट-कैप्सूल जब्त हुए थे, 2024 में 2,37,231 और 2025 में 7,08,465 तक पहुंच गए। यानी दो साल में करीब पचास गुना बढ़ोतरी।

हनुमानगढ़ में भी यही पैटर्न है। वहां 2025 में प्रीगैबलिन के 2,74,655 कैप्सूल-टैबलेट के साथ अन्य फार्मास्युटिकल पदार्थ जब्त हुए। प्रीगैबलिन का दुरुपयोग नशे के तौर पर होता है, और जब दवा की आड़ में नशा बिकने लगे तो उसे पहचानना-रोकना दोनों मुश्किल हो जाता है।

इसीलिए बैठक में पुलिस के साथ दवा नियंत्रण अधिकारियों, सीमा शुल्क और वित्तीय जांचकर्ताओं के बीच तालमेल की जरूरत रेखांकित की गई।

राजस्थान ड्रग्स तस्करी नेटवर्क पर जयपुर JCC बैठक में क्या तय हुआ

बैठक की अध्यक्षता NCB के पश्चिमी क्षेत्र के डिप्टी डायरेक्टर जनरल मनीष कुमार और राजस्थान एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के इंस्पेक्टर जनरल ने संयुक्त रूप से की। इसमें NIA, ED, DRI, CBN, सीमा शुल्क, आयकर विभाग, खुफिया ब्यूरो, सामाजिक न्याय मंत्रालय, ड्रग नियंत्रक कार्यालय और राज्य एएनटीएफ के प्रतिनिधि शामिल हुए।

बैठक के एजेंडे में एनडीपीएस मामलों की समीक्षा, नेटवर्क की पहचान, अवैध प्रयोगशालाओं पर कार्रवाई, व्यावसायिक मात्रा की जब्ती, बार-बार अपराध करने वालों की जमानत, अफीम-पोस्ता दाना का डायवर्जन और नशामुक्ति केंद्रों का कामकाज शामिल था। यानी कानूनी, वित्तीय और सामाजिक तीनों मोर्चों पर रणनीति बनी।

केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की राजस्थान यूनिट ने सितंबर 2026 में ही एक ऑपरेशन में करीब चार टन प्रतिबंधित सामग्री जब्त की थी।

जब्ती से आगे: जांच की अगली कड़ी क्या होगी

NCB के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर जनरल संजय कुमार सिंह के मुताबिक सीमा पर एक सफल जब्ती सिर्फ पहला कदम है। असली काम उसके बाद शुरू होता है: खेप के स्रोत का पता लगाना, प्राप्तकर्ताओं की पहचान करना और यह स्थापित करना कि वह शिपमेंट किसी बड़े रैकेट का हिस्सा है या नहीं।

वित्तीय जांच इस कड़ी में अहम है। तस्करी की कमाई का रास्ता खोजने पर पता चलता है कि पैसा कहां जा रहा है और कौन लोग इस धंधे से जुड़े हैं। खुफिया एजेंसियां सीमा पार संपर्कों की जांच करती हैं, और गुप्त प्रयोगशालाओं व अफीम-पोस्ता भूसी के डायवर्जन पर नजर भी जरूरी बताई गई है।

राज्य स्तर पर भी काम चल रहा है। राजस्थान नशा मुक्त अभियान के तहत 1,244 करोड़ रुपये की ड्रग्स जब्ती और 8,842 गिरफ्तारियों का आंकड़ा बताता है कि राज्य पुलिस का अभियान भी बड़े पैमाने पर है। केंद्रीय JCC बैठक और राज्य अभियान का मेल जमीन पर उतरे तो नेटवर्क पर दबाव बढ़ना तय है।

आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब है

आम परिवारों के लिए यह खबर सिर्फ आंकड़ों की नहीं है। नशे का कारोबार सीधे युवाओं और मोहल्लों को प्रभावित करता है, और फार्मा टैबलेट के रूप में नशा घरों तक पहुंच जाए तो पहचानना और मुश्किल हो जाता है। इसलिए जागरूकता उतनी ही जरूरी है जितनी पुलिस कार्रवाई। संदिग्ध दवा बिक्री या अवैध प्रयोगशाला दिखे तो स्थानीय पुलिस या एएनटीएफ को जानकारी देना मददगार हो सकता है। नशामुक्ति केंद्रों की भूमिका भी बैठक के एजेंडे में थी, यानी इलाज और पुनर्वास को भी कार्रवाई का हिस्सा माना जा रहा है।

इस खबर का स्रोत ईटीवी भारत की रिपोर्ट है, जो एनसीबी रिपोर्ट और पीआईबी की जानकारी पर आधारित है। (स्रोत: ईटीवी भारत)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

राजस्थान में तीन साल में कितनी ड्रग्स जब्त हुई?

2023 से 2025 के बीच राजस्थान में 7.66 लाख किलोग्राम से ज्यादा मादक पदार्थ जब्त हुआ है: 2023 में 2,94,582 किलो, 2024 में 2,45,576 किलो और 2025 में 2,25,933 किलो।

राजस्थान ड्रग्स तस्करी नेटवर्क में कौन-कौन सी एजेंसियां शामिल हैं?

जयपुर की JCC बैठक में NCB, ANTF, NIA, ED, DRI, CBN, सीमा शुल्क, आयकर विभाग, खुफिया ब्यूरो, ड्रग नियंत्रक कार्यालय और सामाजिक न्याय मंत्रालय के प्रतिनिधि शामिल हुए।

पाकिस्तान से लगी राजस्थान की सीमा कितनी लंबी है?

राजस्थान की पाकिस्तान के साथ 1,070 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है। श्रीगंगानगर, अनूपगढ़, बीकानेर, जैसलमेर और बाड़मेर में तस्करी का खतरा ज्यादा बताया गया है।

फार्मा टैबलेट की तस्करी क्यों बढ़ रही है?

डॉक्टर के पर्चे वाली दवाओं और प्रीगैबलिन जैसे पदार्थों का दुरुपयोग बढ़ा है। श्रीगंगानगर में 2023 के 14,146 टैबलेट की तुलना में 2025 में 7,08,465 टैबलेट जब्त हुए।

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