RAS अधिकारी पंकज ओझा को चार्जशीट: 15 दिन में जवाब मांगा, अधिकारी बोले- फर्जी स्क्रीनशॉट से फंसाया गया

अब इस मामले की नजर अगले 15 दिन पर टिकी है। राजस्थान सरकार के कार्मिक विभाग ने वरिष्ठ आरएएस अधिकारी पंकज कुमार ओझा को 16 सीसीए के तहत आरोप पत्र थमा दिया है और 15 दिन के भीतर लिखित जवाब मांगा है। विभाग ने चेतावनी भी दी है कि तय समय में जवाब नहीं आया तो एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। RAS पंकज ओझा चार्जशीट की यह खबर शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को सामने आई है। अधिकारी ने सारे आरोप सिरे से खारिज करते हुए इन्हें फर्जी स्क्रीनशॉट से फंसाने की साजिश बताया है। साफ रहे: चार्जशीट दोषसिद्धि नहीं है, यह आरोपों की औपचारिक सूचना और जांच की शुरुआत है।

RAS पंकज ओझा चार्जशीट में क्या आरोप हैं

कार्मिक (क-3/जांच) विभाग के आरोप पत्र के अनुसार, ओझा ने अपनी फेसबुक आईडी से अक्टूबर 2025 में कई आपत्तिजनक पोस्ट कीं और साझा कीं। इसमें 16, 19, 21, 22-25 और 27 अक्टूबर की तारीखों का उल्लेख है। कुल 14 कथित पोस्टों का हवाला दिया गया है, जिनमें जातिगत द्वेष, सांप्रदायिक वैमनस्य और राजनीतिक विषयों पर अशोभनीय टिप्पणियां करने की बात कही गई है।

आरोप पत्र में 25 अक्टूबर 2025 की एक पोस्ट का विशेष जिक्र है, जिसमें जाति-आधारित जनगणना नीति पर सवाल उठाते हुए लिखा गया था कि केवल जातिगत जनगणना ही क्यों हो, जातिगत करदाताओं और जातिगत अपराध के आंकड़े भी सार्वजनिक किए जाएं। विभाग ने इसे सरकार की नीतियों की सार्वजनिक आलोचना और गंभीर कदाचार माना है। कानूनी आधार के तौर पर आचरण नियम, 1971 के नियम 3, 4 और 11 के उल्लंघन का आरोप है, साथ ही 2017 और 2024 के परिपत्रों का हवाला दिया गया है। हाल ही में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पर हुई ऐसी ही कार्रवाई का ब्योरा शिखर अग्रवाल को एपीओ किए जाने की खबर में पढ़ा जा सकता है।

ओझा का पक्ष: फर्जी स्क्रीनशॉट, राजकाज जवाब और पुलिस शिकायत

पंकज ओझा ने सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने ऐसी कोई विवादास्पद पोस्ट साझा नहीं की, बल्कि कुछ तत्वों ने तकनीकी छेड़छाड़ करके उनके नाम से जाली स्क्रीनशॉट तैयार किए और वायरल कर दिए, और अब वही स्क्रीनशॉट उनके खिलाफ इस्तेमाल हो रहे हैं।

सबसे दिलचस्प मोड़ जवाब को लेकर है, जहां विभाग और अधिकारी के दावे टकराते हैं। विभाग का कहना है कि 19 जनवरी 2026 को कारण बताओ नोटिस देकर तीन दिन में जवाब मांगा गया था, लेकिन तय समय में कोई स्पष्टीकरण नहीं मिला। वहीं ओझा का दावा है कि उन्होंने 27 जनवरी 2026 को ही राजकाज पोर्टल के जरिए आधिकारिक रसीद सहित विस्तृत जवाब भेज दिया था। उनका यह भी कहना है कि 29 दिसंबर 2025 को ही उन्होंने मुख्य सचिव और कार्मिक सचिव को फर्जी स्क्रीनशॉट की लिखित शिकायत दी थी और जयपुर पुलिस आयुक्त से मिलकर अशोक नगर थाने में परिवाद सौंपा था। अब जांच में यही सवाल अहम होगा कि राजकाज पोर्टल का रिकॉर्ड किस दावे की पुष्टि करता है।

RAS पंकज ओझा चार्जशीट: 16 CCA की प्रक्रिया क्या होगी

16 सीसीए का मतलब है राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम 16 के तहत शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई। यह नियम बड़ी शास्ति वाले गंभीर मामलों में अपनाया जाता है। प्रक्रिया यह है: पहले आरोप पत्र, फिर अधिकारी का लिखित जवाब, जरूरत पड़ने पर जांच अधिकारी की नियुक्ति और औपचारिक जांच, और अंत में जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकार का फैसला। इस दौरान अधिकारी को अपना पक्ष रखने और दस्तावेज पेश करने का पूरा मौका मिलता है। अगर आरोप साबित नहीं होते तो मामला बंद भी हो सकता है। इसलिए 15 दिन की समय-सीमा अहम है।

पूरा घटनाक्रम: अक्टूबर 2025 से 30 अक्टूबर 2026 तक

तारीख घटना
अक्टूबर 2025 गोपालन निदेशक रहते फेसबुक पर 14 कथित पोस्ट (16, 19, 21, 22-25, 27 अक्टूबर)
29 दिसंबर 2025 ओझा का दावा: मुख्य सचिव, कार्मिक सचिव को फर्जी स्क्रीनशॉट की शिकायत
19 जनवरी 2026 कार्मिक विभाग का कारण बताओ नोटिस, तीन दिन में जवाब मांगा
27 जनवरी 2026 ओझा का दावा: राजकाज पोर्टल से रसीद सहित जवाब भेजा
29-30 अक्टूबर 2026 16 सीसीए चार्जशीट, 15 दिन में लिखित जवाब मांगा

इस क्रम से साफ है कि कार्रवाई अचानक नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे कई महीनों की कागजी प्रक्रिया है। आरएएस अधिकारियों से जुड़ी अन्य खबरें और कार्मिक विभाग के फैसलों पर हमारी पिछली कवरेज भी इसी पृष्ठभूमि को समझने में मदद करती है।

सरकारी अधिकारियों के लिए सोशल मीडिया: आचरण नियम क्या कहते हैं

आचरण नियम, 1971 के नियम 3, 4 और 11 का सार यह है कि सरकारी कर्मचारी को सत्यनिष्ठा बनाए रखनी होती है, सरकार की नीतियों की सार्वजनिक आलोचना से बचना होता है और सेवा की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला कोई आचरण नहीं करना होता। सोशल मीडिया के दौर में ये नियम निजी अकाउंट से की गई पोस्टों पर भी लागू होते हैं। सबक: नीति पर सार्वजनिक टिप्पणी से पहले नियम देख लें; फर्जी पोस्ट पर तुरंत लिखित शिकायत करें; नोटिस का जवाब रसीद सहित आधिकारिक माध्यम से दें।

इस मामले की पृष्ठभूमि में पहले क्या-क्या सामने आया

रिपोर्टों के अनुसार, ओझा का नाम पहले भी प्रशासनिक प्रकरणों में चर्चा में रहा है, हालांकि कई मामलों में केवल प्रशासनिक कदम उठाए गए। 2025 में एक कथित ऑडियो सामने आने के बाद 15 सितंबर 2025 को उन्हें गोपालन विभाग भेज दिया गया था। मौजूदा चार्जशीट एक अलग औपचारिक प्रक्रिया है, जिसका फैसला उसके अपने साक्ष्यों पर होगा। आगे 15 दिन में उनका लिखित जवाब आएगा, फिर विभाग तय करेगा कि औपचारिक जांच बैठाई जाए या जवाब के आधार पर कोई और कदम उठाया जाए। इस खबर का स्रोत खास खबर की रिपोर्ट है, जिसे अमर उजाला और लोकमत/आईएएनएस की खबरों से भी पुष्टि मिली है। (स्रोत: खास खबर)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

RAS पंकज ओझा चार्जशीट क्या है?

कार्मिक विभाग ने वरिष्ठ आरएएस अधिकारी पंकज कुमार ओझा को अक्टूबर 2025 की 14 कथित फेसबुक पोस्टों के मामले में 16 सीसीए के तहत आरोप पत्र दिया है। 15 दिन में लिखित जवाब मांगा गया है।

15 दिन में जवाब न दिया तो क्या होगा?

विभाग ने चेतावनी दी है कि तय समय में जवाब नहीं आया तो एकतरफा कार्रवाई हो सकती है, यानी अधिकारी के पक्ष के बिना ही जांच और फैसला आगे बढ़ सकता है।

पंकज ओझा का पक्ष क्या है?

ओझा ने सभी आरोप खारिज किए हैं। उनका कहना है कि उनके नाम से फर्जी स्क्रीनशॉट बनाए गए, जिसकी शिकायत उन्होंने दिसंबर 2025 में ही दी थी, और जनवरी 2026 में राजकाज पोर्टल से जवाब भी भेजा था।

क्या पंकज ओझा पर आरोप साबित हो गए हैं?

नहीं। चार्जशीट आरोपों की औपचारिक सूचना है, दोषसिद्धि नहीं। अंतिम निष्कर्ष जवाब और विभागीय जांच के बाद ही आएगा।

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