जैसलमेर के मोहनगढ़ इलाके में मंगलवार को पुलिस और ट्रांसफॉर्मर तेल चोरी करने वाले बदमाशों के बीच करीब 100 किलोमीटर लंबी दौड़ चली — और अंत में पुलिस ने तीनों आरोपियों को धर दबोचा। जैसलमेर ट्रांसफॉर्मर तेल चोरी की इस वारदात की सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि चोर जिस समय ट्रांसफॉर्मरों का तेल निकाल रहे थे, उस समय बिजली की लाइनें चालू थीं — एक छोटी सी चूक पूरे इलाके की बिजली व्यवस्था ठप कर सकती थी।
जैसलमेर ट्रांसफॉर्मर तेल चोरी: 100 KM का फिल्मी पीछा कैसे हुआ
चाहड गांव के 33 केवी जीएसएस में अलसुबह चोर ट्रांसफॉर्मरों के नट-बोल्ट खोलकर उनमें भरा तेल ड्रमों और कैन में भर रहे थे। परिसर से आ रही संदिग्ध आवाजें सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और चोरों को रंगे हाथों देख लिया। पकड़े जाने के डर से आरोपियों ने पिकअप गाड़ी दौड़ा दी और वहां से भाग निकले।
ग्रामीणों ने तुरंत मोहनगढ़ पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई, आरोपियों का रूट पता किया और घेराबंदी कर दी। इसके बाद जो हुआ, वो किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था — पुलिस ने पिकअप का लगातार करीब 100 किलोमीटर तक पीछा किया। नाचना-रामदेवरा मार्ग पर दिधु गांव के पास पुलिस की गाड़ी को पीछे आता देख आरोपियों ने पिकअप की रफ्तार और बढ़ा दी, तभी गाड़ी अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। पिकअप पलटते ही पुलिस ने मौके से तीनों आरोपियों को पकड़ लिया।
चालू बिजली लाइनों के बीच चोरी — कितना बड़ा खतरा था
इस पूरी वारदात में सबसे खतरनाक पहलू ये था कि ट्रांसफॉर्मरों में चोरी के समय बिजली सप्लाई चालू थी। 33 केवी ग्रिड सब-स्टेशन से इलाके के कई गांवों को बिजली मिलती है, और ऐसे हाई-वोल्टेज उपकरणों के साथ छेड़छाड़ जानलेवा साबित हो सकती है।
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| वारदात का स्थान | चाहड गांव, 33 केवी जीएसएस, मोहनगढ़ थाना क्षेत्र, जैसलमेर |
| वारदात का समय | मंगलवार अलसुबह (13 अक्टूबर 2026) |
| चोरी की वस्तु | ट्रांसफॉर्मर ऑयल (ड्रमों और कैन में भरा जा रहा था) |
| बिजली की स्थिति | चोरी के समय लाइनें चालू थीं |
| पीछा की दूरी | करीब 100 किलोमीटर |
| गिरफ्तारी स्थल | नाचना-रामदेवरा मार्ग, दिधु गांव के पास |
| गिरफ्तार आरोपी | 3 (पिकअप पलटने के बाद पकड़े गए) |
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पकड़े गए आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है और इस वारदात में शामिल अन्य संदिग्धों तथा चोरी के पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है। संभावना है कि ये चोर किसी संगठित गिरोह का हिस्सा हों, जो बिजली उपकरणों से तेल और धातु चुराकर बेचता है।
ट्रांसफॉर्मर का तेल चोरों के निशाने पर क्यों रहता है
ट्रांसफॉर्मर ऑयल कोई साधारण तेल नहीं होता। ये बिजली के ट्रांसफॉर्मर के अंदर इंसुलेशन और ठंडक बनाए रखने का काम करता है, और इसकी कीमत बाजार में अच्छी-खासी होती है। चोर इसे निकालकर कबाड़ी या अवैध खरीददारों को बेच देते हैं — कभी ईंधन के रूप में, तो कभी औद्योगिक इस्तेमाल के लिए।
समस्या ये है कि तेल निकल जाने के बाद ट्रांसफॉर्मर अंदर से जल सकता है या पूरी तरह खराब हो सकता है। एक ट्रांसफॉर्मर की कीमत लाखों रुपये होती है, और उसे बदलने में हफ्तों लग सकते हैं — जिसका खामियाजा उन गांवों को भुगतना पड़ता है जिनकी बिजली उसी जीएसएस से जुड़ी होती है। यही वजह है कि ट्रांसफॉर्मर तेल चोरी को पुलिस बिजली चोरी से कहीं गंभीर अपराध मानती है — ये सिर्फ चोरी नहीं, सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को नुकसान भी है।
राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में ये चुनौती और बड़ी है — जीएसएस और बिजली लाइनें दूर-दराज के निर्जन इलाकों में फैली होती हैं, जहां रात में निगरानी रखना मुश्किल होता है। ऐसे में ग्रामीणों की सतर्कता ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच बनती है।
राजस्थान पुलिस की ये कार्रवाई क्यों खास है
इस मामले में मोहनगढ़ पुलिस की तत्परता काबिले-तारीफ रही। अक्सर ऐसी चोरियों में आरोपी फरार हो जाते हैं और केस ठंडे बस्ते में चला जाता है, लेकिन यहां पुलिस ने न सिर्फ रूट ट्रैक किया, बल्कि 100 किलोमीटर तक पीछा करके आरोपियों को पकड़ा। इससे दो संदेश गए हैं — पहला, बिजली उपकरणों से छेड़छाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा; दूसरा, ग्रामीणों की त्वरित सूचना से अपराध रुक सकते हैं।
राजस्थान पुलिस बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़े अपराधों पर विशेष नजर रख रही है। इससे पहले भी कुचामन में चेन स्नेचिंग गैंग के 30 सदस्यों को पुलिस ने एक साथ दबोचा था, और धौलपुर में हथियार तस्कर की गिरफ्तारी हुई थी — ये दिखाता है कि जिला पुलिस अब संगठित अपराध के खिलाफ लगातार सक्रिय है।
ऐसी चोरी रोकने के लिए क्या हो सकता है
- ग्रामीणों की सतर्कता: जीएसएस के आसपास रहने वाले लोग संदिग्ध गतिविधि दिखते ही तुरंत पुलिस को सूचना दें — चाहड की तरह।
- सीसीटीवी और अलार्म: संवेदनशील जीएसएस परिसरों में कैमरे और तेल-स्तर अलार्म लगाए जाएं।
- गश्त बढ़ाना: रात के समय बिजली विभाग और पुलिस की संयुक्त गश्त ऐसे निर्जन इलाकों में।
- कबाड़ी नेटवर्क पर नजर: चोरी का तेल खरीदने वालों पर शिकंजा कसे बिना चोरी नहीं रुकेगी — पुलिस को खरीददारों तक पहुंचना होगा।
राजस्थान ऊर्जा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर बिजली बुनियादी ढांचे से जुड़ी जानकारी और शिकायत के माध्यम उपलब्ध हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल 1: जैसलमेर में ट्रांसफॉर्मर तेल चोरी की घटना कब और कहां हुई?
जवाब: ये घटना 13 अक्टूबर 2026 की अलसुबह जैसलमेर के मोहनगढ़ थाना क्षेत्र के चाहड गांव स्थित 33 केवी जीएसएस में हुई। तीन आरोपी ट्रांसफॉर्मरों का तेल ड्रमों और कैन में भर रहे थे।
सवाल 2: पुलिस ने आरोपियों को कैसे पकड़ा?
जवाब: ग्रामीणों की सूचना पर मोहनगढ़ पुलिस ने आरोपियों का रूट ट्रैक किया और करीब 100 किलोमीटर तक पिकअप का पीछा किया। नाचना-रामदेवरा मार्ग पर दिधु गांव के पास पिकअप पलट गई, जिसके बाद तीनों आरोपी पकड़े गए।
सवाल 3: ट्रांसफॉर्मर तेल चोरी इतनी गंभीर क्यों मानी जाती है?
जवाब: तेल निकल जाने से ट्रांसफॉर्मर जल सकता है या खराब हो सकता है, जिसकी कीमत लाखों रुपये होती है। इससे पूरे इलाके की बिजली आपूर्ति ठप हो सकती है। साथ ही चालू लाइनों के साथ छेड़छाड़ जानलेवा भी हो सकती है।
सवाल 4: क्या इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं?
जवाब: पुलिस पकड़े गए तीनों आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है और चोरी के पूरे नेटवर्क व अन्य संदिग्धों की जानकारी जुटा रही है, इसलिए आगे और गिरफ्तारियां संभव हैं।
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