जयपुर में रहने वालों के लिए आज बड़ी खुशखबरी आई है। जयपुर मेट्रो लाइन 2 के सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्से — 8.5 किलोमीटर लंबे भूमिगत रूट — के निर्माण की दौड़ में अदाणी ग्रुप की कंपनी सबसे आगे निकल गई है। जयपुर मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (JMRC) के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, अदाणी ग्रुप की ‘सेमइंडिया प्रोजेक्ट्स लिमिटेड’ ने इस टेंडर में ₹921.63 करोड़ की सबसे कम बोली (L1 Bidder) लगाई है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस प्रोजेक्ट के तहत जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ठीक नीचे से दो समानांतर सुरंगें बनाई जाएंगी — यानी आने वाले सालों में आप हवाई जहाज से उतरकर सीधे मेट्रो पकड़ सकेंगे। हालांकि अंतिम ठेका जारी होना अभी बाकी है, लेकिन माना जा रहा है कि यह मेगा प्रोजेक्ट अदाणी ग्रुप को ही मिलेगा।
एयरपोर्ट के नीचे से गुजरेगी मेट्रो: क्या है पूरा प्रोजेक्ट
यह टेंडर जयपुर मेट्रो लाइन-2 के अंडरग्राउंड स्ट्रेच के निर्माण से जुड़ा है। इस टेंडर के तहत टोंक रोड पर पिंजरापोल गोशाला से लेकर B2 बाईपास चौराहे तक भूमिगत मेट्रो ट्रैक बिछाया जाएगा।
इस 8.5 किलोमीटर लंबे भूमिगत हिस्से में कई आधुनिक सिविल निर्माण शामिल हैं:
- जुड़वां टनल: जयपुर एयरपोर्ट के ठीक नीचे से दो समानांतर सुरंगें बनाई जाएंगी।
- भूमिगत स्टेशन: सांगानेर थाना और जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अंडरग्राउंड स्टेशन बनेंगे।
- संभावित तीसरा स्टेशन: प्रस्तावित यूनिटी मॉल को ध्यान में रखते हुए जवाहर सर्किल के पास एक अतिरिक्त भूमिगत स्टेशन बनाने पर भी विचार चल रहा है।
- टर्मिनल कनेक्टिविटी: एयरपोर्ट स्टेशन को सीधे पैसेंजर टर्मिनल से जोड़ने के लिए सबवे और वॉकवे भी प्रस्तावित है।
यानी यह सिर्फ एक मेट्रो लाइन का विस्तार नहीं, बल्कि जयपुर के हवाई और शहरी परिवहन को एक ही धागे में पिरोने की योजना है।
₹921.63 करोड़ की सबसे कम बोली: टेंडर की अहम बातें
सरकारी टेंडर प्रक्रिया में सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी को L1 बिडर कहा जाता है, और आमतौर पर ठेका उसी को मिलता है। इस मामले में अदाणी ग्रुप की सेमइंडिया प्रोजेक्ट्स लिमिटेड L1 बिडर बनी है। टेंडर से जुड़े प्रमुख आंकड़े एक नजर में:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| प्रोजेक्ट | जयपुर मेट्रो लाइन-2 अंडरग्राउंड स्ट्रेच |
| L1 बिडर | सेमइंडिया प्रोजेक्ट्स लिमिटेड (अदाणी ग्रुप) |
| बोली राशि | ₹921.63 करोड़ |
| भूमिगत हिस्से की लंबाई | 8.5 किलोमीटर |
| रूट | पिंजरापोल गोशाला (टोंक रोड) से B2 बाईपास चौराहा |
| खास निर्माण | एयरपोर्ट के नीचे जुड़वां टनल |
| भूमिगत स्टेशन | सांगानेर थाना, जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट |
| निर्माण तकनीक | टनल बोरिंग मशीन (TBM) |
| लक्ष्य अवधि | टेंडर आवंटन के 36 महीने |
गौरतलब है कि इसी साल की शुरुआत में लाइन-2 के एलिवेटेड (ऊंचे) हिस्से के एक बड़े पैकेज का L1 बिडर भी घोषित हो चुका है। यानी लाइन-2 के अलग-अलग हिस्सों पर काम एक साथ आगे बढ़ रहा है।
TBM तकनीक से बनेगी जुड़वां टनल: इंजीनियरिंग की बड़ी चुनौती
एयरपोर्ट के रनवे के नीचे सुरंग बनाना कोई मामूली इंजीनियरिंग काम नहीं है। जरा सी चूक से रनवे की जमीन धंस सकती है या उड़ानों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। इसीलिए जयपुर मेट्रो प्रशासन इस 8.5 किलोमीटर लंबे भूमिगत हिस्से के लिए अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन (TBM) का इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है।
TBM एक विशाल मशीन होती है जो जमीन के अंदर घूमते हुए मिट्टी काटती है और साथ-साथ कंक्रीट के रिंग लगाकर सुरंग की दीवारें भी तैयार करती जाती है। इससे ऊपर की जमीन पर कंपन और धंसाव का खतरा सबसे कम रहता है। टोंक रोड पर घनी आबादी वाले इलाके और एयरपोर्ट के रनवे — दोनों को ध्यान में रखते हुए यही तकनीक सबसे सुरक्षित मानी जा रही है।
दिलचस्प बात यह है कि जयपुर मेट्रो में TBM का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है। फेज 1C के तहत गलता गेट के पास पहले ही TBM ‘प्रताप’ से भूमिगत सुरंग की खुदाई शुरू हो चुकी है — यानी शहर की धरती के नीचे सुरंग खोदने का अनुभव मेट्रो प्रशासन के पास पहले से है। जयपुर मेट्रो फेज 1C में TBM प्रताप से सुरंग खुदाई की पूरी खबर यहां पढ़ें
36 महीने का लक्ष्य, लेकिन पहले ये मंजूरी जरूरी
टेंडर प्रक्रिया का एक अहम पड़ाव अभी बाकी है। JMRC अधिकारियों के मुताबिक, अंतिम ठेका जारी होने से पहले राज्य कैबिनेट और मेट्रो बोर्ड से अंतिम मंजूरी लेनी होगी। अगर यह मंजूरी बिना किसी अड़चन के मिल जाती है, तो टेंडर आवंटित होने के 36 महीनों के भीतर इस अंडरग्राउंड टनल का निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
यानी सब कुछ योजना के मुताबिक रहा तो करीब तीन साल में जयपुर वालों को एयरपोर्ट तक मेट्रो से पहुंचने की सुविधा मिल सकती है। बेशक, बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में समयसीमा आगे-पीछे होती रहती है, लेकिन टेंडर का L1 तय हो जाना इस दिशा में सबसे बड़ा औपचारिक कदम माना जाता है।
जयपुर मेट्रो लाइन 2: शहर के सबसे बड़े विस्तार की कहानी
जयपुर मेट्रो की लाइन-1 (पिंक लाइन) पहले से शहर में दौड़ रही है और रोजाना हजारों यात्री इसका इस्तेमाल करते हैं। लाइन-2 शहर का सबसे महत्वाकांक्षी विस्तार प्रोजेक्ट है, जो प्रस्तावित सीतापुरा-अंबाबाड़ी कॉरिडोर के रूप में जाना जाता है।
इस लाइन के पूरे होने पर जयपुर के दक्षिणी औद्योगिक इलाकों से लेकर उत्तरी हिस्सों तक सीधी मेट्रो कनेक्टिविटी मिलेगी। खास बात यह है कि लाइन-2 एयरपोर्ट को भी जोड़ेगी — जो किसी भी बड़े शहर के लिए मेट्रो नेटवर्क की सबसे अहम कड़ी मानी जाती है। दिल्ली और बेंगलुरु जैसे शहरों में एयरपोर्ट मेट्रो कनेक्टिविटी ने हवाई यात्रियों की जिंदगी आसान की है, और अब जयपुर भी उसी राह पर है।
मेट्रो नेटवर्क के विस्तार के साथ-साथ यात्री सुविधाओं का आधुनिकीकरण भी चल रहा है। हाल ही में JMRC ने टोकन सिस्टम बंद करके पूरी तरह QR कोड टिकट व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया था — यानी नई लाइन के साथ नई तकनीक वाली टिकटिंग भी तैयार हो रही है।
जयपुर के लोगों को क्या फायदा मिलेगा
इस प्रोजेक्ट का सीधा असर जयपुर के लाखों लोगों पर पड़ेगा:
- एयरपोर्ट पहुंच आसान: हवाई यात्री टर्मिनल से सीधे मेट्रो पकड़ सकेंगे — टैक्सी का झंझट और जाम से राहत।
- टोंक रोड का जाम कम: सांगानेर, जवाहर सर्किल और टोंक रोड के यात्रियों को तेज और सस्ता विकल्प मिलेगा।
- रियल एस्टेट को बढ़ावा: मेट्रो स्टेशनों के आसपास के इलाकों में प्रॉपर्टी की कीमतों और व्यावसायिक गतिविधियों में तेजी की उम्मीद।
- रोजगार के अवसर: 36 महीने के निर्माण काल में हजारों लोगों को सीधा और परोक्ष रोजगार मिलेगा।
बेशक, निर्माण के दौरान टोंक रोड पर कुछ असुविधा भी हो सकती है, लेकिन TBM तकनीक से सड़क के ऊपर का यातायात बड़े पैमाने पर बाधित नहीं होगा — यही इस तकनीक की सबसे बड़ी खूबी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: जयपुर मेट्रो लाइन 2 के अंडरग्राउंड टेंडर में सबसे कम बोली किसने लगाई?
उत्तर: अदाणी ग्रुप की कंपनी सेमइंडिया प्रोजेक्ट्स लिमिटेड ने ₹921.63 करोड़ की सबसे कम बोली (L1) लगाई है। हालांकि अंतिम ठेका जारी होना अभी बाकी है।
प्रश्न 2: यह अंडरग्राउंड रूट कहां से कहां तक बनेगा?
उत्तर: टोंक रोड पर पिंजरापोल गोशाला से B2 बाईपास चौराहे तक 8.5 किलोमीटर लंबा भूमिगत ट्रैक बनेगा, जो जयपुर एयरपोर्ट के नीचे से गुजरेगा।
प्रश्न 3: इस रूट पर कौन-कौन से भूमिगत स्टेशन बनेंगे?
उत्तर: सांगानेर थाना और जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भूमिगत स्टेशन बनेंगे। जवाहर सर्किल के पास एक अतिरिक्त स्टेशन पर विचार चल रहा है।
प्रश्न 4: निर्माण कार्य कब तक पूरा होने का लक्ष्य है?
उत्तर: राज्य कैबिनेट और मेट्रो बोर्ड की अंतिम मंजूरी के बाद टेंडर आवंटित होगा, और उसके 36 महीनों के भीतर निर्माण पूरा करने का लक्ष्य है।
स्रोत: Moneycontrol Hindi (18 अक्टूबर 2026)