राजस्थान में 2.61 लाख करोड़ का इंफ्रास्ट्रक्चर मेगा प्लान: 29 प्रोजेक्ट 80% से ज्यादा पूरे, 3 करोड़ लोगों को मिलेगा पानी

राजस्थान में रहने वाले हर परिवार के लिए एक बड़ी खबर है, और वह भी आंकड़ों के साथ। राजस्थान इंफ्रास्ट्रक्चर 2.61 लाख करोड़ के मेगा प्लान के तहत प्रदेश में केंद्र सरकार की परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। इसका सबसे सीधा फायदा उन 3 करोड़ से ज्यादा लोगों को मिलेगा, जिन्हें राम जल सेतु लिंक परियोजना से पीने का पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही करीब 4 लाख हेक्टेयर खेतों को सिंचाई की सुविधा मिलने की उम्मीद है।

ताजा आंकड़ों के मुताबिक इनमें से 1 लाख 22 हजार करोड़ रुपये की 29 परियोजनाएं 80 प्रतिशत से अधिक पूरी हो चुकी हैं, और कुल 82 केंद्रीय परियोजनाओं पर अब तक 1 लाख 17 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए जा चुके हैं। केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर तालमेल से इन परियोजनाओं को गति मिली है।

आम आदमी को सबसे पहले क्या मिलेगा

इस पूरे प्लान का सबसे बड़ा असर पानी पर पड़ने वाला है। राम जल सेतु लिंक परियोजना से प्रदेश के 17 जिलों के 3 करोड़ से अधिक लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। गर्मी के महीनों में पानी की किल्लत झेलने वाले राजस्थान के लिए यह आंकड़ा सबसे ज्यादा मायने रखता है। इसके साथ ही करीब 4 लाख हेक्टेयर खेतों को सिंचाई सुविधा मिल सकेगी, जिससे किसानों को सीधा फायदा होगा।

दूसरा बड़ा असर रोजगार और कारोबार पर होगा — जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र जैसी योजनाओं से नए कारखाने आएंगे और स्थानीय युवाओं के लिए काम के मौके बढ़ेंगे। तीसरा असर यात्रा पर होगा — जयपुर में रिंग रोड और मेट्रो, जिलों में बेहतर रेल-सड़क नेटवर्क और हवाई अड्डों के नए टर्मिनल से सफर आसान होगा।

राजस्थान इंफ्रास्ट्रक्चर मेगा प्लान: आंकड़ों में पूरी तस्वीर

क्षेत्र परियोजनाएं अनुमानित लागत
कुल केंद्रीय परियोजनाएं 82 2.61 लाख करोड़ रुपये
80% से ज्यादा पूरी परियोजनाएं 29 1.22 लाख करोड़ रुपये
बिजली प्रसारण व वितरण 19 98,759 करोड़ रुपये
रेलवे परियोजनाएं 22 33,572 करोड़ रुपये से ज्यादा
राष्ट्रीय राजमार्ग 22 16,241 करोड़ रुपये
शहरी सार्वजनिक परिवहन — 14,222 करोड़ रुपये
जयपुर रिंग रोड (उत्तर) 1 11,764 करोड़ रुपये
जयपुर मेट्रो फेज-2 1 13,000 करोड़ रुपये से ज्यादा

यह टेबल साफ करती है कि इस राजस्थान इंफ्रास्ट्रक्चर मेगा प्लान का पैसा किसी एक क्षेत्र में नहीं, बल्कि सड़क, रेल, बिजली, पानी और हवाई यात्रा में एक साथ लग रहा है।

जयपुर को क्या मिलेगा: रिंग रोड उत्तर और मेट्रो फेज-2

राजधानी जयपुर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए जयपुर रिंग रोड (उत्तर) परियोजना पर 11,764 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। शहर के चारों ओर यातायात का दबाव कम होने से रोजाना जाम में फंसने वाले लाखों लोगों को राहत मिलेगी। इसके अलावा 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से जयपुर मेट्रो फेज-2 परियोजना भी आगे बढ़ाई जा रही है।

जयपुर में मेट्रो से जुड़ी हालिया प्रगति के बारे में जयपुर मेट्रो लाइन 2 की ताजा खबर भी पढ़ी जा सकती है, जिसमें भूमिगत रूट के टेंडर की जानकारी दी गई थी। रिंग रोड और मेट्रो के एक साथ आगे बढ़ने से जयपुर की यातायात व्यवस्था में अगले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

बिजली, रेल और सड़क: तीनों नेटवर्क एक साथ

बिजली के क्षेत्र में 98 हजार 759 करोड़ रुपये की लागत से 19 प्रमुख परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें बाड़मेर कॉम्प्लेक्स का 6 गीगावाट सोलर प्रोजेक्ट और फतेहगढ़-द्वितीय ट्रांसमिशन सिस्टम शामिल हैं। इससे सौर ऊर्जा में राजस्थान की अग्रणी स्थिति और मजबूत होगी।

रेलवे के क्षेत्र में बीकानेर-मेड़ता-जोधपुर, अजमेर-चित्तौड़गढ़-उदयपुर और सादुलपुर-रतनगढ़ रेल लाइन सहित 22 परियोजनाओं पर 33 हजार 572 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ी 22 परियोजनाओं पर 16 हजार 241 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। सड़क नेटवर्क से जुड़ी एक और हालिया सौगात के बारे में NH-25 के पचपदरा-पटाऊ हिस्से के फोरलेन की खबर में पढ़ा जा सकता है।

हवाई कनेक्टिविटी और बाड़मेर रिफाइनरी: 99 प्रतिशत पूरा टर्मिनल

राजस्थान इंफ्रास्ट्रक्चर मेगा प्लान के तहत हवाई यात्रा के मोर्चे पर भी दो बड़ी खबरें हैं। जोधपुर एयरपोर्ट पर 480 करोड़ रुपये की लागत से नया यात्री टर्मिनल भवन बनाया गया है, जबकि उदयपुर एयरपोर्ट पर नए एकीकृत यात्री टर्मिनल का निर्माण 88 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इससे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ पर्यटन और व्यापार को भी फायदा होगा।

औद्योगिक विकास के लिहाज से सबसे अहम प्रोजेक्ट बाड़मेर में देश की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी से जुड़ा है। यहां पेट्रोकेमिकल निकासी और विपणन टर्मिनल का निर्माण 99 प्रतिशत पूरा हो चुका है। टर्मिनल के लगभग तैयार होने से पश्चिमी राजस्थान में पेट्रोकेमिकल कारोबार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

पानी और उद्योग: राम जल सेतु से माही-बांसवाड़ा तक

इस मेगा प्लान में जल परियोजनाओं पर भी काम तेज किया गया है। राम जल सेतु लिंक परियोजना के अलावा यमुना, किशाऊ और नर्मदा जल समझौतों से भी प्रदेश की जल उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है। ऊर्जा के क्षेत्र में माही-बांसवाड़ा परमाणु विद्युत परियोजना भी प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे मिलने वाली स्थिर बिजली जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र के विकास में मदद करेगी।

राजस्थान इंफ्रास्ट्रक्चर: काम कितना बाकी, आगे क्या देखें

29 परियोजनाओं का 80 प्रतिशत से अधिक पूरा होना एक मजबूत संकेत है, लेकिन 2.61 लाख करोड़ के पूरे प्लान को जमीन पर उतरने में अभी समय लगेगा। आगे देखने वाली बातें ये हैं — बाड़मेर पेट्रोकेमिकल टर्मिनल का शत-प्रतिशत पूरा होना, उदयपुर एयरपोर्ट टर्मिनल का उद्घाटन, जयपुर रिंग रोड (उत्तर) और मेट्रो फेज-2 के निर्माण की गति, और राम जल सेतु लिंक परियोजना के तहत जिलों में पानी पहुंचने की समयसीमा। इस राजस्थान इंफ्रास्ट्रक्चर मेगा प्लान की रफ्तार आने वाले वर्षों में पानी, बिजली, सफर और नौकरी के मौके के रूप में महसूस होगी।

स्रोत: केंद्र सरकार के ताजा आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट, न्यूज18 हिंदी, 3 नवंबर 2026।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

राजस्थान में कितनी राशि की केंद्रीय परियोजनाओं पर काम चल रहा है?

प्रदेश में करीब 2.61 लाख करोड़ रुपये की 82 केंद्रीय परियोजनाओं पर काम चल रहा है, जिन पर अब तक 1.17 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो चुके हैं।

कितनी परियोजनाएं 80 प्रतिशत से ज्यादा पूरी हो चुकी हैं?

1.22 लाख करोड़ रुपये की 29 परियोजनाएं 80 प्रतिशत से अधिक पूरी हो चुकी हैं।

जयपुर मेट्रो फेज-2 और रिंग रोड पर कितना खर्च आएगा?

जयपुर मेट्रो फेज-2 पर 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक और रिंग रोड (उत्तर) पर 11,764 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

राम जल सेतु लिंक परियोजना से किसे फायदा होगा?

17 जिलों के 3 करोड़ से अधिक लोगों को पेयजल और करीब 4 लाख हेक्टेयर खेतों को सिंचाई सुविधा देने का लक्ष्य है।

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