जयपुर मेट्रो फेज 1C: टीबीएम ‘प्रताप’ ने शुरू की सुरंग खुदाई, 17 मीटर नीचे दौड़ेगी मेट्रो

जयपुर के लोगों के लिए बड़ी खबर है — शहर की धरती के 17 मीटर नीचे अब मेट्रो की सुरंग खोदने का काम शुरू हो गया है। जयपुर मेट्रो फेज 1C के तहत शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को गलता गेट के पास प्रस्तावित गलता जी मेट्रो स्टेशन पर टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) ‘प्रताप’ से भूमिगत सुरंग निर्माण की खुदाई का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास खुद मौजूद रहे, जो इस परियोजना की सरकार की प्राथमिकता को साफ दिखाता है।

बड़ी चौपड़ से ट्रांसपोर्ट नगर तक फैले इस विस्तार के बाद जयपुर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा। सबसे अहम बात यह है कि परकोटे के इलाके में यातायात जाम की पुरानी समस्या से राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। खुदाई शुरू होते ही अब सवाल यह उठ रहा है कि कब तक जयपुरवासी इस नई मेट्रो में सफर कर पाएंगे — आइए, परियोजना का पूरा ब्योरा जानते हैं।

जयपुर मेट्रो फेज 1C का रूट: बड़ी चौपड़ से ट्रांसपोर्ट नगर तक

फेज-1C परियोजना जयपुर मेट्रो के मौजूदा नेटवर्क को शहर के घनी आबादी वाले परकोटे इलाके से आगे बढ़ाने की योजना है। बड़ी चौपड़ से ट्रांसपोर्ट नगर तक का यह रूट शहर के पुराने हिस्सों को नए इलाकों से जोड़ेगा। परियोजना के तहत एलिवेटेड और भूमिगत — दोनों तरह के मेट्रो स्टेशनों का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती भूमिगत सुरंग का निर्माण है, जिसकी शुरुआत अब ‘प्रताप’ मशीन से हो चुकी है।

परकोटे जैसे पुराने शहर के इलाकों में सड़क के ऊपर मेट्रो का खंभा खड़ा करना व्यावहारिक नहीं था, इसलिए जमीन के नीचे से रास्ता निकालने का फैसला लिया गया। सूत्रों के अनुसार इस खंड में मेट्रो मुख्य सड़क से करीब 17 मीटर नीचे चलेगी, यानी लगभग पांच-छह मंजिला इमारत की गहराई पर। तीन किलोमीटर लंबा भूमिगत ट्रैक तैयार करने के बाद ही इस रूट पर मेट्रो संचालन संभव होगा।

95 मीटर लंबी ‘प्रताप’: सुरंग खुदाई का ब्योरा

टनल बोरिंग मशीन ‘प्रताप’ कोई आम मशीन नहीं है — इसकी लंबाई 95 मीटर है, यानी लगभग एक फुटबॉल मैदान जितनी लंबी। यह मशीन जमीन के नीचे आगे बढ़ते हुए सुरंग खोदती है और साथ ही सुरंग की दीवारों को पक्का करती चलती है, जिससे जमीन के ऊपर की इमारतों और सड़कों पर कम से कम असर पड़ता है।

लेकिन ‘प्रताप’ अकेली नहीं है। योजना के अनुसार इस माह के अंत तक दूसरी टनल बोरिंग मशीन ‘कुंभा’ भी काम शुरू कर देगी, जो दूसरी टनल की खुदाई करेगी। दो मशीनों के एक साथ काम करने से परियोजना की रफ्तार काफी तेज हो जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि जुड़वां सुरंगों का काम समय पर पूरा होने से पूरे रूट के संचालन का लक्ष्य नजदीक आएगा।

परियोजना की मुख्य बातें — एक नजर में

बिंदु विवरण
परियोजना जयपुर मेट्रो फेज 1C
रूट बड़ी चौपड़ से ट्रांसपोर्ट नगर तक
खुदाई शुरू 10 अक्टूबर 2026, गलता जी मेट्रो स्टेशन (गलता गेट)
टीबीएम मशीन ‘प्रताप’ (95 मीटर लंबी); दूसरी मशीन ‘कुंभा’ जल्द
भूमिगत ट्रैक लगभग 3 किलोमीटर
गहराई मुख्य सड़क से करीब 17 मीटर नीचे
सुरंग लक्ष्य जुलाई तक सुरंग निर्माण पूरा करने का लक्ष्य
शुभारंभ मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास

जयपुर मेट्रो फेज 1C से परकोटे को क्या फायदा होगा?

परकोटे का इलाका जयपुर का सबसे पुराना और व्यस्त हिस्सा है — यहां की संकरी गलियां, भीड़भाड़ वाले बाजार और दिन भर का जाम शहरवासियों की पुरानी शिकायत है। ऊपर से एलिवेटेड मेट्रो बिछाना यहां संभव नहीं था, इसलिए भूमिगत विकल्प चुना गया। मुख्य सचिव ने शुभारंभ के मौके पर कहा कि मेट्रो विस्तार से जयपुर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था बेहतर होगी और खासकर परकोटे में यातायात जाम की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।

भूमिगत मेट्रो का एक और फायदा यह होगा कि शहर की विरासती सूरत बिगड़ेगी नहीं। परकोटे की ऐतिहासिक इमारतों और बाजारों की खूबसूरती बरकरार रहेगी, जबकि नीचे से आधुनिक परिवहन की सुविधा मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार जब यह रूट चालू होगा तो हजारों दैनिक यात्रियों को बसों और निजी वाहनों का विकल्प मिलेगा, जिससे सड़कों पर दबाव कम होगा।

धरोहरों की सुरक्षा और निर्माण मानक: मुख्य सचिव के निर्देश

शुभारंभ कार्यक्रम में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने जयपुर मेट्रो के विस्तार कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण के दौरान श्रमिकों और आमजन की सुरक्षा सर्वोपरि रखी जाए। कार्यकारी एजेंसियों को यातायात प्रबंधन और धूल नियंत्रण संबंधी निर्धारित मानकों की पूर्ण पालना सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि खुदाई के दौरान आसपास के इलाकों में रहने वालों को कम से कम परेशानी हो।

सबसे अहम निर्देश ऐतिहासिक धरोहरों को लेकर था। मुख्य सचिव ने कहा कि जयपुर की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाए और आसपास की ऐतिहासिक इमारतों की निगरानी रिपोर्ट की नियमित समीक्षा की जाए। परकोटे में सदियों पुरानी इमारतें हैं, इसलिए भूमिगत खुदाई के दौरान उनकी मजबूती पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्यों के लिए जयपुर मेट्रो के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक वैभव गालरिया और उनकी पूरी टीम की सराहना भी की।

मुख्य सचिव के अनुसार जयपुर मेट्रो मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की महत्वाकांक्षी परियोजना है और चरण-1C के तहत सुरंग निर्माण की शुरुआत इसके विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

जयपुर मेट्रो-2: अगला बड़ा लक्ष्य

शुभारंभ के मौके पर यह भी संकेत मिला कि जयपुर मेट्रो-2 का काम भी जल्द गति पकड़ेगा। फेज-1C के बाद मेट्रो-2 परियोजना शहर के अन्य हिस्सों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ेगी। अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन का विस्तार सरकार की प्राथमिकता है, और चरणबद्ध तरीके से पूरे शहर को मेट्रो के दायरे में लाया जाएगा।

जयपुर में पहले से चल रही मेट्रो सेवा को शहरवासियों का अच्छा समर्थन मिल रहा है। फेज-1C और मेट्रो-2 के पूरा होने के बाद जयपुर देश के उन चुनिंदा शहरों में शामिल हो जाएगा जहां मेट्रो नेटवर्क शहर के पुराने और नए — दोनों हिस्सों को जोड़ता है।

जयपुर मेट्रो का सफर अब तक: 1A और 1B से 1C तक

जयपुर मेट्रो की कहानी चरणों में लिखी जा रही है। पहला चरण मानसरोवर से चांदपोल तक शुरू हुआ था, जिसने शहर के पश्चिमी हिस्से को मेट्रो से जोड़ा। इसके बाद चरण 1B में चांदपोल से बड़ी चौपड़ तक भूमिगत मेट्रो का विस्तार हुआ, जो परकोटे के अंदर मेट्रो पहुंचाने का पहला बड़ा प्रयोग था। अब चरण 1C उसी कड़ी का अगला हिस्सा है, जो बड़ी चौपड़ से आगे ट्रांसपोर्ट नगर तक नेटवर्क बढ़ाएगा।

दिलचस्प बात यह है कि चरण 1B के दौरान भी परकोटे की ऐतिहासिक इमारतों की सुरक्षा को लेकर यही चिंताएं उठी थीं, और उस अनुभव को अब 1C में भी लागू किया जा रहा है। मुख्य सचिव द्वारा ऐतिहासिक इमारतों की निगरानी रिपोर्ट की नियमित समीक्षा के निर्देश इसी अनुभव का नतीजा हैं। चरणबद्ध विस्तार की यह रणनीति दिखाती है कि जयपुर मेट्रो धीरे-धीरे लेकिन सोच-समझकर आगे बढ़ रही है।

खुदाई के दौरान आमजन के लिए जरूरी बातें

सुरंग निर्माण का काम महीनों चलेगा, और इस दौरान गलता गेट व आसपास के इलाकों में रहने-आने-जाने वालों को कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। मुख्य सचिव ने कार्यकारी एजेंसियों को यातायात प्रबंधन और धूल नियंत्रण के निर्धारित मानकों का पालन करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन फिर भी व्यस्त समय में इन इलाकों में थोड़ी असुविधा संभव है।

पहली बात — खुदाई वाले इलाकों के पास से गुजरते समय वैकल्पिक मार्ग अपनाएं और यातायात पुलिस के निर्देशों का पालन करें। दूसरी बात — निर्माण स्थलों के आसपास धूल और शोर बढ़ सकता है, इसलिए बुजुर्गों और बच्चों वाले परिवार खिड़कियां बंद रखने जैसे सामान्य उपाय कर सकते हैं। तीसरी बात — परियोजना की प्रगति की आधिकारिक जानकारी के लिए जयपुर मेट्रो रेल निगम की घोषणाओं पर नजर रखें, अफवाहों पर ध्यान न दें। निर्माण कार्य की निगरानी के लिए एजेंसियों को श्रमिकों और आमजन की सुरक्षा सर्वोपरि रखने को कहा गया है, इसलिए कोई भी खतरनाक स्थिति दिखे तो संबंधित हेल्पलाइन पर सूचित करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: जयपुर मेट्रो फेज 1C की खुदाई कहां शुरू हुई है?

उत्तर: 10 अक्टूबर 2026 को गलता गेट के पास प्रस्तावित गलता जी मेट्रो स्टेशन पर टनल बोरिंग मशीन ‘प्रताप’ से भूमिगत सुरंग की खुदाई का शुभारंभ हुआ।

प्रश्न 2: फेज 1C का रूट कहां से कहां तक है?

उत्तर: यह विस्तार बड़ी चौपड़ से ट्रांसपोर्ट नगर तक है, जिसमें लगभग 3 किलोमीटर भूमिगत ट्रैक बनेगा। मेट्रो मुख्य सड़क से करीब 17 मीटर नीचे चलेगी।

प्रश्न 3: सुरंग कब तक तैयार होगी?

उत्तर: अधिकारियों ने जुलाई तक सुरंग बनाने का लक्ष्य रखा है। दूसरी टीबीएम ‘कुंभा’ भी इसी महीने के अंत तक काम शुरू कर देगी, जिससे गति बढ़ेगी।

प्रश्न 4: आम जनता को क्या फायदा मिलेगा?

उत्तर: परकोटे जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में यातायात जाम से राहत मिलेगी और शहर की विरासती सूरत बिना बिगड़े आधुनिक सार्वजनिक परिवहन की सुविधा उपलब्ध होगी।

नोट: यह खबर मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। परियोजना की आधिकारिक जानकारी के लिए जयपुर मेट्रो रेल निगम की वेबसाइट देखें।

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