जयपुर मेट्रो QR टिकट: 80 हजार टोकन गुम होने के बाद JMRC का बड़ा फैसला, इस हफ्ते से टोकन सिस्टम बंद

जयपुर मेट्रो में रोजाना सफर करने वाले यात्रियों के लिए इस हफ्ते एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। गुलाबी नगरी की जीवनरेखा कही जाने वाली जयपुर मेट्रो में अब टोकन का दौर खत्म होने वाला है। जयपुर मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (JMRC) टोकन-आधारित टिकट व्यवस्था की जगह पूरी तरह ऑनलाइन जयपुर मेट्रो QR टिकट सिस्टम लागू करने की तैयारी में है। महीनों तक चले ट्रायल के बाद अब यह नई व्यवस्था इसी हफ्ते से पूरे नेटवर्क पर शुरू हो सकती है। इसका सीधा असर आपकी जेब और आपके सफर की रफ्तार — दोनों पर पड़ेगा।

टोकन का दौर खत्म — जयपुर मेट्रो QR टिकट व्यवस्था की शुरुआत

JMRC के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, QR-आधारित टिकटों का परीक्षण साल की शुरुआत से ही चल रहा था, और इस दौरान टोकन के साथ-साथ नया विकल्प भी यात्रियों को दिया जा रहा था। अब ट्रायल का चरण लगभग पूरा हो चुका है, और ऑनलाइन टिकटिंग सिस्टम इस हफ्ते से पूरे मेट्रो नेटवर्क में लागू कर दिया जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत एक बड़ा बदलाव यह होगा कि रोलआउट शुरू होते ही टिकट काउंटरों से प्लास्टिक टोकन वापस ले लिए जाएंगे। यानी अब स्टेशन पर टिकट लेने पर आपके हाथ में छोटा-सा प्लास्टिक का टोकन नहीं, बल्कि QR कोड वाला टिकट आएगा। स्टेशन में लगे ऑटोमैटिक फेयर गेट पर इस QR कोड को स्कैन करते ही गेट खुल जाएगा — ठीक वैसे ही, जैसे एयरपोर्ट पर बोर्डिंग पास स्कैन होता है।

अधिकारियों का कहना है कि इस बदलाव को एक साथ नहीं, बल्कि चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि किसी भी यात्री को अचानक असुविधा का सामना न करना पड़े और नई व्यवस्था सुचारु रूप से पटरी पर आ जाए।

80 हजार टोकन गुम — हर टोकन की कीमत 22 रुपये

इस बड़े फैसले के पीछे एक चौंकाने वाली वजह है — टोकनों का लगातार गुम होना। आंकड़े बताते हैं कि बीते 9 वर्षों में जयपुर मेट्रो के लगभग 80 हजार स्मार्ट टोकन गुम हो चुके हैं। मार्च 2024 तक की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह संख्या 79,156 थी, और उसके बाद भी हर दिन 100 से 150 टोकन यात्रियों के साथ चले जाते हैं या खराब हो जाते हैं।

आंकड़ा विवरण
9 साल में गुम टोकन लगभग 80,000 स्मार्ट टोकन
रोजाना गुम होने वाले टोकन 100 से 150
एक टोकन की लागत लगभग 22 रुपये
रोजाना मेट्रो यात्री 60 हजार से अधिक

हर टोकन को बनाने में करीब 22 रुपये की लागत आती है। यानी 80 हजार टोकनों का मतलब है करोड़ों रुपये का सीधा नुकसान — और यह नुकसान हर दिन बढ़ता ही जा रहा था। कुछ यात्री यात्रा के बाद टोकन यादगार के तौर पर अपने साथ घर ले जाते हैं, तो कुछ टोकन इस्तेमाल के दौरान खराब हो जाते हैं। स्टेशन से बाहर निकलने के बाद वैसे भी टोकन अमान्य हो जाते हैं, लेकिन मेट्रो प्रशासन को हर गुम टोकन की कीमत चुकानी पड़ती है। यही वजह है कि JMRC ने अब टोकन सिस्टम को ही इतिहास बनाने का फैसला किया है।

टिकट लेने के तीन तरीके — ऐप, काउंटर और पेपरलेस प्लान

नई व्यवस्था में यात्रियों के पास टिकट लेने के कई विकल्प होंगे, ताकि स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले और न करने वाले — दोनों तरह के यात्रियों को सहूलियत मिले।

1. JMRC मोबाइल ऐप से डिजिटल टिकट: JMRC ने 15 अगस्त को अपना मोबाइल ऐप लॉन्च किया था। इस ऐप के जरिए यात्री घर बैठे या रास्ते में ही QR टिकट खरीद सकेंगे और स्टेशन के गेट पर सीधे अपने फोन से स्कैन करके अंदर जा सकेंगे। इससे टिकट काउंटर पर कतार में लगने की झंझट से भी राहत मिलेगी।

2. काउंटर पर प्रिंटेड QR टिकट: जो यात्री मोबाइल से टिकट नहीं लेना चाहेंगे, उनके लिए टिकट काउंटरों पर QR कोड वाले मुद्रित (प्रिंटेड) टिकट उपलब्ध कराए जाएंगे। इन्हें ऑटोमैटिक फेयर गेट पर स्कैन करना होगा।

3. पेपरलेस काउंटर की योजना: JMRC एक पेपरलेस काउंटर सिस्टम पर भी विचार कर रहा है। इस मॉडल में यात्री काउंटर पर अपना मोबाइल नंबर बताएंगे और QR टिकट सीधे उनके फोन पर भेज दिया जाएगा — कोई प्रिंटेड पर्ची नहीं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की फोन नंबर साझा करने को लेकर सहूलियत का आकलन करने के बाद ही इस योजना को अपनाया जाएगा।

चरणबद्ध तरीके से लागू होगा बदलाव

JMRC ने साफ किया है कि नई टिकटिंग व्यवस्था को एक झटके में नहीं, बल्कि चरणों में लागू किया जाएगा। इसका मकसद है कि रोजाना सफर करने वाले हजारों यात्रियों को किसी तरह की दिक्कत न हो। पहले चरण में QR टिकट और टोकन दोनों विकल्प साथ-साथ चल सकते हैं, और धीरे-धीरे टोकन को पूरी तरह हटा दिया जाएगा।

अधिकारियों के मुताबिक, QR सिस्टम से स्टेशन में यात्रियों की आवाजाही तेज होगी, क्योंकि स्कैन-आधारित एंट्री टोकन डालने और निकालने की प्रक्रिया से तेज होती है। भीड़भाड़ वाले समय में इसका फायदा सबसे ज्यादा दिखेगा।

यात्रियों के लिए क्या बदलेगा — फायदे और ध्यान रखने वाली बातें

इस बदलाव से यात्रियों को कई सीधे फायदे मिलेंगे। सबसे बड़ा फायदा समय की बचत का होगा — काउंटर की लंबी कतार से छुटकारा और गेट पर तेज एंट्री। दूसरा, अब टोकन गुम होने या जेब में रखने की चिंता खत्म हो जाएगी। तीसरा, मोबाइल ऐप से पहले से टिकट लेकर आप अपनी यात्रा की योजना बेहतर बना सकेंगे।

वहीं, कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी होगा। फोन से QR स्कैन करते समय स्क्रीन की ब्राइटनेस पर्याप्त रखें, ताकि गेट का स्कैनर कोड को आसानी से पढ़ सके। अगर आप काउंटर से प्रिंटेड QR टिकट लेते हैं, तो उसे मोड़ें या गीला न करें। और हां, नई व्यवस्था के शुरुआती दिनों में स्टेशनों पर कर्मचारियों से मदद लेने में संकोच न करें — चरणबद्ध लागू होने की वजह से शुरुआती हफ्तों में थोड़ा तालमेल बैठने में समय लग सकता है।

आगे की योजना — IRCTC और थर्ड-पार्टी ऐप से भी मिलेगा टिकट

JMRC की नजर सिर्फ QR टिकट तक सीमित नहीं है। निगम IRCTC और अन्य अधिकृत प्लेटफॉर्म के साथ एकीकरण की संभावना भी तलाश रहा है, ताकि दिल्ली मेट्रो और देश की कुछ अन्य मेट्रो सेवाओं की तरह जयपुर मेट्रो के टिकट भी थर्ड-पार्टी ऐप से खरीदे जा सकें। अधिकारियों के मुताबिक, यह योजना पूरी लाइन-1 के संचालन और शहर में राइडरशिप बढ़ने के बाद आगे बढ़ाई जाएगी।

गौरतलब है कि जयपुर मेट्रो के विस्तार का काम भी तेजी से चल रहा है — फेज 1C के तहत गलता गेट के पास टनल बोरिंग मशीन ‘प्रताप’ से भूमिगत सुरंग की खुदाई शुरू हो चुकी है। ऐसे में टिकटिंग का आधुनिकीकरण और नेटवर्क का विस्तार, दोनों मिलकर जयपुर के शहरी परिवहन की तस्वीर बदलने वाले हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न 1: जयपुर मेट्रो में QR टिकट व्यवस्था कब से शुरू होगी?
उत्तर: JMRC के मुताबिक ट्रायल अंतिम चरण में है और नई व्यवस्था इस हफ्ते से चरणबद्ध तरीके से पूरे नेटवर्क पर लागू की जाएगी।

प्रश्न 2: क्या टोकन पूरी तरह बंद हो जाएंगे?
उत्तर: हां, रोलआउट शुरू होने के बाद टिकट काउंटरों से प्लास्टिक टोकन वापस ले लिए जाएंगे और उनकी जगह QR कोड वाले टिकट मिलेंगे।

प्रश्न 3: जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है, वे टिकट कैसे लेंगे?
उत्तर: उनके लिए टिकट काउंटरों पर QR कोड वाले प्रिंटेड टिकट उपलब्ध रहेंगे, जिन्हें गेट पर स्कैन करके स्टेशन में प्रवेश किया जा सकेगा।

प्रश्न 4: JMRC का मोबाइल ऐप कब लॉन्च हुआ था?
उत्तर: JMRC मोबाइल ऐप 15 अगस्त को लॉन्च किया गया था। इसी ऐप से यात्री डिजिटल QR टिकट खरीदकर सीधे फोन से स्कैन कर सकेंगे।


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स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया | दैनिक नवज्योति

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