जयपुर बस ड्राइवर महेश शर्मा: 6 दिन लापता, आमेर पहाड़ी पर शव, 4 लाख निकासी का रहस्य — हत्या या आत्महत्या?

जयपुर बस ड्राइवर महेश शर्मा की मौत की गुत्थी इस वक्त शहर की सबसे बड़ी चर्चा है। छह दिन तक लापता रहने के बाद 35 साल के इस प्राइवेट बस ड्राइवर का शव आमेर की हांडीपुरा पहाड़ी के सुनसान जंगल से बरामद हुआ है — और शव के साथ मिले हैं तीन ऐसे सुराग, जो इस मामले को सीधा-सादा हादसा नहीं रहने देते। पहला — शव के पास पड़ा सल्फास का खाली पैकेट। दूसरा — जिस दिन महेश लापता हुआ, उसी दिन उसके बैंक खाते से निकाले गए 4 लाख रुपये। और तीसरा — छह दिन से बंद पड़ा मोबाइल, जो शुक्रवार रात अचानक चालू हुआ और पुलिस को सीधे पहाड़ी तक ले गया।

शनिवार रात जब शव की खबर ब्रह्मपुरी पहुंची, तो परिवार और मोहल्ले के लोगों ने थाने का घेराव कर दिया — आरोप है कि हत्या हुई है और पुलिस ने लापरवाही बरती। पुलिस का कहना है कि आत्महत्या और हत्या, दोनों एंगल से जांच चल रही है। रविवार को पोस्टमार्टम के बाद शव का अंतिम संस्कार किया जाना है।

जयपुर बस ड्राइवर महेश शर्मा केस का सबसे बड़ा सवाल: गायब होने वाले दिन ही क्यों निकाले 4 लाख?

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा उलझाने वाली कड़ी पैसों की है। जानकारी के मुताबिक, 11 अक्टूबर को — यानी जिस दिन जयपुर बस ड्राइवर महेश शर्मा लापता हुआ — उसने अपने बैंक खाते से 4 लाख रुपये निकाले थे। एक प्राइवेट बस ड्राइवर के लिए यह रकम छोटी नहीं है, और सवाल यह है कि ये पैसे कहां गए। क्या महेश ने ये रुपये किसी को दिए थे? क्या पैसे उसके पास थे जब वह पहाड़ी पर पहुंचा? या फिर पैसों का ही कोई लेन-देन इस पूरी घटना की जड़ है?

पुलिस के लिए यह एंगल सबसे अहम है, क्योंकि यही वह बिंदु है जो आत्महत्या की थ्योरी को कमजोर करता है। अगर महेश ने खुदकुशी की योजना बनाई होती, तो 4 लाख रुपये निकालने का क्या मतलब था? और अगर पैसे किसी विवाद की वजह थे, तो वह विवाद किसके साथ था?

महेश शर्मा का मोबाइल शुक्रवार रात अचानक कैसे चालू हुआ?

11 अक्टूबर की रात करीब 9:30 बजे महेश का मोबाइल बंद हो गया था, और उसके बाद छह दिन तक फोन बंद ही रहा। परिवार ने 12 अक्टूबर को ब्रह्मपुरी थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। उसकी बस रामगढ़ मोड़ के पास खड़ी मिली थी — लेकिन ड्राइवर का पता नहीं था।

फिर 16 अक्टूबर की रात करीब 11 बजे महेश का मोबाइल अचानक चालू हो गया। पुलिस ने तुरंत लोकेशन खंगाली, तो वह आमेर की हांडीपुरा पहाड़ी क्षेत्र की निकली। डीसीपी नॉर्थ करण शर्मा के मुताबिक, लोकेशन मिलते ही शनिवार सुबह सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया, और पहाड़ी के सुनसान जंगल से शव बरामद हुआ — ऐसी हालत में कि जानवरों ने उसे नोंच रखा था।

यहीं एक और सवाल खड़ा होता है: छह दिन से बंद मोबाइल अचानक कैसे चालू हुआ? मोबाइल की कॉल डिटेल और लोकेशन हिस्ट्री अब इस जांच की सबसे बड़ी कुंजी है।

11 से 17 अक्टूबर: जयपुर बस ड्राइवर महेश शर्मा के छह दिन की टाइमलाइन

तारीख क्या हुआ
11 अक्टूबर महेश सवारियों से भरी बस लेकर जयपुर के लिए निकला; रात ~9:30 बजे मोबाइल बंद; बस रामगढ़ मोड़ पर खड़ी मिली; बैंक खाते से 4 लाख की निकासी
12 अक्टूबर परिवार ने ब्रह्मपुरी थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई
13–15 अक्टूबर कोई सुराग नहीं; तलाश जारी
16 अक्टूबर रात ~11 बजे मोबाइल अचानक चालू; लोकेशन आमेर की हांडीपुरा पहाड़ी में मिली
17 अक्टूबर सुबह सर्च ऑपरेशन; जंगल से शव बरामद; पास में सल्फास का खाली पैकेट; FSL टीम ने साक्ष्य जुटाए; रात में ब्रह्मपुरी थाने का घेराव
18 अक्टूबर पोस्टमार्टम, उसके बाद अंतिम संस्कार; पुलिस-प्रशासन सतर्क

“पुलिस एक्टिव होती तो महेश बच जाता” — थाने का घेराव और परिवार की 4 मांगें

शनिवार रात शव मिलने की खबर फैलते ही ब्रह्मपुरी में आक्रोश फूट पड़ा। जयपुर बस ड्राइवर महेश शर्मा के परिवार का साफ आरोप है कि उसकी हत्या की गई है। देर रात परिवार और इलाके के लोग ब्रह्मपुरी थाने पहुंचे, आधी रात को थाने का घेराव किया और पुलिस पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए।

परिवार का तर्क है — गुमशुदगी की रिपोर्ट 12 अक्टूबर को दर्ज हुई थी, लेकिन छह दिन तक कोई ठोस तलाश नहीं हुई। पुलिस अफसरों ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया और जांच के आधार पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया।

प्रदर्शन के दौरान परिवार ने चार मांगें रखीं — मृतक के परिवार को 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता, एक डेयरी बूथ, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, और मामले के जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई। पुलिस अब रविवार को शांतिपूर्ण तरीके से अंतिम संस्कार करवाने की कोशिश में है।

जांच के दो रास्ते: सल्फास का पैकेट बनाम हत्या की आशंका

शव के पास सल्फास (सेलफॉस) का खाली पैकेट मिलने से शुरुआती आशंका यही है कि महेश ने जहर खाकर खुद जान दे दी। लेकिन परिवार इसे मानने को तैयार नहीं — उनका कहना है कि यह हत्या है। एसीपी आमेर (प्रोबेशनर आईपीएस) प्रतीक सिंह के मुताबिक, पुलिस ने FSL टीम की मदद से मौके से साक्ष्य जुटा लिए हैं।

अब जांच दो वैज्ञानिक रिपोर्टों पर टिकी है — पोस्टमार्टम रिपोर्ट, जो मौत की असली वजह बताएगी, और मोबाइल की फोरेंसिक जांच, जिससे 11 से 16 अक्टूबर के बीच की लोकेशन और कॉल डिटेल सामने आएगी। हालांकि शव को जानवरों ने नोंचा है, जिससे बाहरी चोटों की पहचान मुश्किल हो सकती है — इसलिए FSL की भूमिका और बढ़ जाती है। साथ ही बैंक स्टेटमेंट से 4 लाख रुपये की कड़ी भी सुलझानी होगी। पुलिस का कहना है कि खुदकुशी और हत्या, दोनों एंगल खुले हैं।

गौरतलब है कि जयपुर पुलिस ने हाल ही में ऑपरेशन म्यूल हंटर में 21 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया था, और कोटा में ऑपरेशन हॉक के तहत हिस्ट्रीशीटरों पर कार्रवाई भी हुई है — लेकिन इस मामले में परिवार को शुरुआती लापरवाही का अहसास है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

जयपुर बस ड्राइवर महेश शर्मा कौन था?

महेश शर्मा 35 साल का था और जयपुर के ब्रह्मपुरी इलाके का रहने वाला था। वह प्राइवेट बस चलाकर अपने परिवार का गुजारा करता था।

शव कहां और कैसे मिला?

17 अक्टूबर को सर्च ऑपरेशन में आमेर की हांडीपुरा पहाड़ी के सुनसान जंगल से उसका शव बरामद हुआ। पास में सल्फास का खाली पैकेट मिला था, और जानवरों ने शव को नोंच रखा था।

4 लाख रुपये का क्या हुआ?

11 अक्टूबर को महेश ने बैंक खाते से 4 लाख रुपये निकाले थे। यह रकम कहां गई, इसका अभी पता नहीं चला है — पुलिस बैंक स्टेटमेंट से इसका पता लगाने की कोशिश कर रही है।

अब आगे क्या होगा?

18 अक्टूबर को पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार होगा। पोस्टमार्टम, FSL और मोबाइल फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि यह आत्महत्या थी या हत्या। परिवार ने 1 करोड़ की सहायता, डेयरी बूथ, सरकारी नौकरी और जांच अधिकारी पर कार्रवाई की मांग रखी है।

स्रोत: ABP Live व Dainik Navajyoti, 18 अक्टूबर 2026

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