43 साल से प्लॉट का इंतजार! हाईकोर्ट ने निवाई नगरपालिका के अध्यक्ष और अधिकारी को किया तलब

निवाई नगरपालिका प्लॉट विवाद में राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए नगरपालिका के अध्यक्ष और कार्यकारी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। मामला 90 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक मदनलाल गौतम का है, जिन्हें 1983 में आवंटित भूखंड का कब्जा और पट्टा 43 साल बाद भी नहीं मिला। सोचिए — 90 की उम्र में एक बुजुर्ग आज भी अपने प्लॉट के लिए अदालत के चक्कर काट रहा है, जिसकी पूरी राशि उसने 1985 में ही जमा करा दी थी।

अदालत ने दोनों अधिकारियों को 26 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे पेश होकर जवाब देने को कहा है। उसी दिन हाईकोर्ट ने एक दूसरे अहम मामले में ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी का निलंबन आदेश भी निरस्त कर दिया। आइए जानते हैं दोनों मामलों की पूरी कहानी।

90 की उम्र में भी न्याय की उम्मीद

मदनलाल गौतम पेशे से शिक्षक रहे हैं। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने सोचा था कि निवाई की दीनदयाल कॉलोनी में आवंटित भूखंड पर छोटा-सा घर बनाएंगे। लेकिन नगरपालिका की लालफीताशाही ने इस साधारण ख्वाहिश को चार दशकों तक लटका कर रखा।

अधिवक्ता प्रहलाद शर्मा के मुताबिक, 1983 में आवंटन और 1985 में पूरी राशि जमा के बाद कब्जा-पट्टे की उम्मीद थी। लेकिन नगरपालिका ने भूखंडों के क्रमांक बदल दिए, जिससे आवंटित भूखंड की स्थिति ही बदल गई। न भौतिक कब्जा मिला, न पट्टा जारी हुआ। उम्र 90 हो गई, लेकिन निवाई नगरपालिका प्लॉट आज तक नहीं मिला।

1983 से 2026: 43 साल के इंतजार की टाइमलाइन

वर्ष क्या हुआ
1983 दीनदयाल कॉलोनी, निवाई में मदनलाल गौतम को भूखंड आवंटित
1985 भूखंड की निर्धारित राशि नगरपालिका में जमा
1985 के बाद नगरपालिका ने भूखंडों के क्रमांक बदले, आवंटित भूखंड की स्थिति बदली
1985–2025 न भौतिक कब्जा मिला, न पट्टा जारी हुआ
2026 द्वितीय सिविल अपील पर हाईकोर्ट में सुनवाई; याचिकाकर्ता की उम्र 90 वर्ष
17 अक्टूबर 2026 हाईकोर्ट ने नगरपालिका अध्यक्ष और कार्यकारी अधिकारी को तलब किया
26 अक्टूबर 2026 दोनों अधिकारियों को दोपहर 2 बजे व्यक्तिगत पेशी

निवाई नगरपालिका प्लॉट पर हाईकोर्ट के तीखे सवाल

न्यायमूर्ति अशोक कुमार जैन ने द्वितीय सिविल अपील की सुनवाई में नगरपालिका से सीधा सवाल किया — चार दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद याचिकाकर्ता को आवंटित भूखंड का कब्जा और पट्टा क्यों नहीं दिया गया?

जब कोई चार दशक पहले पूरी राशि जमा करा चुका हो, तो भूखंड न देना सिर्फ लापरवाही नहीं, बुजुर्ग नागरिक के साथ अन्याय भी है। व्यक्तिगत पेशी का आदेश बताता है कि अदालत सिर्फ कागजी जवाब नहीं चाहती — वह जिम्मेदार अधिकारियों से सीधे पूछना चाहती है कि 43 साल तक यह निवाई नगरपालिका प्लॉट मामला क्यों लटका रहा।

26 अक्टूबर को क्या होगा

26 अक्टूबर की पेशी में इन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है: 1983 के भूखंड के क्रमांक क्यों बदले गए? 43 साल तक कब्जा क्यों नहीं सौंपा गया? क्या भूखंड किसी और को तो नहीं दे दिया गया? और बुजुर्ग को अब कब तक कब्जा-पट्टा मिलेगा?

अगर अदालत अधिकारियों के जवाब से संतुष्ट नहीं हुई, तो नगरपालिका के खिलाफ और सख्त आदेश भी आ सकते हैं। ऐसे मामलों में अदालतें अक्सर निश्चित समयसीमा में कब्जा और पट्टा देने का निर्देश देती हैं।

एक ही दिन में हाईकोर्ट का दूसरा बड़ा फैसला

उसी दिन हाईकोर्ट ने निलंबन और अनुशासनात्मक कार्रवाई पर अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी कर्मचारी को निलंबित करने का उद्देश्य उसे दंडित करना नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है।

मामला एक ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी का है, जिन पर कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे। महिला कर्मचारी की शिकायत पर 16 जनवरी को उन्हें निलंबित किया गया था। अधिकारी ने सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण में अपील की, जहां तकनीकी आधार पर राहत मिली — उस समय उनके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित नहीं थी, और बाद में उन्हें बहाल कर अलवर में नई तैनाती दे दी गई।

न्यायमूर्ति अनूप कुमार ने निलंबन आदेश निरस्त करते हुए सरकार को निर्देश दिया कि आरोप पत्र तामील होने की तारीख से छह महीने के भीतर अनुशासनात्मक कार्रवाई पूरी की जाए। अदालत ने कहा कि निलंबन का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कर्मचारी साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करे और गवाहों को प्रभावित न कर सके।

भूखंड आवंटन में आपके काम की 5 बातें

मदनलाल गौतम का मामला उन हजारों लोगों के लिए सबक है, जो निवाई नगरपालिका प्लॉट जैसे आवंटन का इंतजार कर रहे हैं:

  1. रसीदें संभालकर रखें: आवंटन पत्र और राशि जमा की रसीद की मूल प्रतियां सुरक्षित रखें — दशकों बाद यही सबसे बड़े सबूत बनती हैं।
  2. क्रमांक बदलने पर तुरंत आपत्ति: नगरपालिका क्रमांक बदले तो लिखित आपत्ति दर्ज कराएं और पावती लें।
  3. पट्टा अटके तो RTI: सूचना के अधिकार से पूछें कि फाइल किस अधिकारी के पास अटकी है।
  4. लंबे इंतजार पर अदालत का रास्ता: अदालतें दशकों पुरानी लापरवाही पर भी सख्त रुख अपना रही हैं।
  5. वरिष्ठ नागरिकों को प्राथमिकता: कई नगरपालिकाओं में बुजुर्गों के मामलों को प्राथमिकता के प्रावधान हैं — अपना अधिकार जरूर पूछें।

हाईकोर्ट के ऐसे ही अहम फैसलों पर हमारी पहले की रिपोर्ट भी पढ़ें — विदेश यात्रा पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला और जयपुर हेरिटेज पर हाईकोर्ट की सख्ती।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न 1: मदनलाल गौतम को भूखंड कब आवंटित हुआ था?

उत्तर: 1983 में निवाई की दीनदयाल कॉलोनी में भूखंड आवंटित हुआ था; 1985 में पूरी राशि जमा करा दी गई थी।

प्रश्न 2: हाईकोर्ट ने किन अधिकारियों को तलब किया है?

उत्तर: निवाई नगरपालिका के अध्यक्ष और कार्यकारी अधिकारी को 26 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया गया है।

प्रश्न 3: BMO के निलंबन मामले में क्या फैसला आया?

उत्तर: न्यायमूर्ति अनूप कुमार ने निलंबन आदेश निरस्त कर दिया और कहा कि निलंबन का उद्देश्य दंड नहीं, निष्पक्ष जांच है। सरकार को 6 महीने में कार्रवाई पूरी करने का निर्देश मिला है।

प्रश्न 4: 43 साल बाद अब क्या हो सकता है?

उत्तर: 26 अक्टूबर की पेशी में जवाब के आधार पर अदालत फैसला करेगी। जवाब संतोषजनक न हुआ तो इस निवाई नगरपालिका प्लॉट विवाद में निश्चित समयसीमा में कब्जा और पट्टा देने का सख्त आदेश आ सकता है।

स्रोत: अमर उजाला की मूल रिपोर्ट (17 अक्टूबर 2026)

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