सरपंच चुनाव हिंसा: चित्तौड़गढ़-झुंझुनूं में बवाल, 1 युवक की मौत, 2 पुलिसकर्मी घायल

सरपंच चुनाव के तीसरे चरण के दौरान राजस्थान के दो जिलों में हिंसा भड़क उठी। चित्तौड़गढ़ में मतगणना केंद्र पर 150 से ज्यादा लोगों की भीड़ ने पथराव कर दिया, जिसमें दो पुलिसकर्मी घायल हो गए। झुंझुनूं के नवलगढ़ में खूनी संघर्ष में एक युवक की मौत हुई और दो लोग घायल हुए। चित्तौड़गढ़ में नतीजे से असहमति और फर्जी वोटिंग का आरोप वजह बना, जबकि झुंझुनूं में चुनावी रंजिश पहले से भड़क रही थी। दोनों घटनाएं सरपंच चुनाव हिंसा राजस्थान की ताजा मिसाल हैं।

गुरुवार रात मतगणना चल रही थी, और नतीजे आते ही हारने वालों का गुस्सा सड़कों पर आ गया। चित्तौड़गढ़ में मतगणना केंद्र के कर्मचारियों को कमरों में छिपकर जान बचानी पड़ी, और पुलिस को रात करीब दो बजे तक भारी बल तैनात रखना पड़ा।

सरपंच चुनाव हिंसा: चित्तौड़गढ़ में मतगणना केंद्र पर पथराव

नेतावल पाछली ग्राम पंचायत में गुरुवार रात मतगणना राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में बने केंद्र पर चल रही थी। गिनती पूरी हुई तो रामेश्वर लाल धाकड़ 456 वोटों के अंतर से विजयी घोषित हुए।

विजयी प्रत्याशी के घर पहुंचते ही केंद्र के बाहर भीड़ जुट गई। हार से नाराज ग्रामीणों ने फर्जी वोटिंग के आरोप लगाए, नारेबाजी हुई और कुछ ही देर में मामला पथराव तक पहुंच गया। देखते ही देखते डेढ़ सौ से ज्यादा लोग एकत्र हो गए और मतगणना केंद्र पर पत्थर बरसने लगे।

अचानक हुए हमले से वहां मौजूद मतदानकर्मियों में अफरा-तफरी मच गई। हालात बिगड़ते देख कर्मचारियों ने कमरों के भीतर शरण ली — उन्हें डर था कि बाहर निकलने पर पत्थर लग सकते हैं। पुलिसकर्मियों ने भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन उपद्रव बढ़ता चला गया। भीड़ ने बाहर खड़े वाहनों को भी नहीं छोड़ा — एक बस और जोनल मजिस्ट्रेट की बोलेरो के शीशे तोड़ दिए गए, और स्ट्रीट लाइटें तोड़कर अंधेरा कर दिया गया।

भीड़ को काबू करने की कोशिश में दो पुलिसकर्मी घायल हो गए। करीब आधे घंटे तक मौके पर हंगामा चलता रहा। सूचना मिलते ही चित्तौड़गढ़ के एसपी धर्मेंद्र सिंह अतिरिक्त पुलिस जाब्ते के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और भारी बल ने भीड़ को खदेड़कर स्थिति नियंत्रित की।

झुंझुनूं के नवलगढ़ में खूनी संघर्ष, एक युवक की मौत

झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ क्षेत्र के देलसर गांव में बुधवार रात दो सरपंच प्रत्याशियों के समर्थकों के बीच विवाद हुआ, जो लाठी-डंडों और पथराव तक पहुंच गया। विवाद के दौरान कैंपर गाड़ियों की भिड़ंत हुई और पुलिस की गाड़ियों पर भी पत्थर फेंके गए।

इस घटना में पंजाब के होशियारपुर निवासी जगदीप सिंह उर्फ जग्गी (30) की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हुए हैं। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और हालात संभाले। चित्तौड़गढ़ की तुलना में झुंझुनूं वाली घटना ज्यादा गंभीर साबित हुई, क्योंकि वहां एक जान चली गई।

दोनों घटनाओं में एक जैसा पैटर्न: आरोप, भीड़ और फिर हिंसा

दोनों जगहों की कहानी एक ही ढर्रे पर चली — नतीजे से असहमति, फिर फर्जी वोटिंग या गड़बड़ी का आरोप, फिर नारेबाजी और आखिर में हिंसा। चित्तौड़गढ़ में आरोप फर्जी मतदान का था, झुंझुनूं में विवाद चुनावी रंजिश को लेकर था। जबकि आरोपों की जांच का रास्ता प्रशासनिक है — पुनर्मतगणना का आवेदन या चुनाव अधिकारी के सामने शिकायत।

केवल आरोप लगने से मतदान में गड़बड़ी साबित नहीं होती। गांव की राजनीति में सरपंच का चुनाव अक्सर निजी प्रतिष्ठा का सवाल बन जाता है, और यही वजह है कि नतीजे के बाद छोटा सा विवाद भी बड़ी हिंसा में बदल जाता है।

दोनों घटनाओं का तुलनात्मक विवरण

बिंदु चित्तौड़गढ़ (नेतावल पाछली) झुंझुनूं (देलसर, नवलगढ़)
विवाद की वजह फर्जी वोटिंग का आरोप चुनावी रंजिश को लेकर विवाद
भीड़/हमला 150+ लोग, केंद्र पर पथराव समर्थकों में संघर्ष, पुलिस गाड़ियों पर पथराव
मौत कोई नहीं 1 युवक की मौत (होशियारपुर निवासी)
घायल 2 पुलिसकर्मी घायल 2 लोग घायल
नुकसान बस व बोलेरो के शीशे टूटे, स्ट्रीट लाइटें तोड़ी गईं कैंपर गाड़ियों की भिड़ंत, वाहनों को नुकसान
पुलिस कार्रवाई एसपी धर्मेंद्र सिंह अतिरिक्त बल सहित पहुंचे, रात 2 बजे तक तैनाती पुलिस मौके पर पहुंची, हालात संभाले

सरपंच चुनाव हिंसा के बाद पुलिस की कार्रवाई और आगे क्या होगा

चित्तौड़गढ़ में एसपी धर्मेंद्र सिंह अतिरिक्त बल के साथ मौके पर पहुंचे और भीड़ को खदेड़कर स्थिति नियंत्रित की। पुलिस ने तनाव को देखते हुए देर रात करीब दो बजे तक भारी बल तैनात रखा। झुंझुनूं में भी पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हालात संभाले। अब दोनों मामलों में अगला कदम आरोपों की जांच और हिंसा में शामिल लोगों की पहचान है।

तीसरे चरण के नतीजे इसी दौरान आए हैं, जिनमें हजारों पंचायतों में सरपंच तय हुए। (तीसरे चरण के नतीजों की पूरी जानकारी यहां पढ़ें) नतीजों के बाद ज्यादातर जगहों पर शांति रही, लेकिन चित्तौड़गढ़ और झुंझुनूं की घटनाओं ने दिखा दिया कि जहां-जहां मुकाबला कांटे का रहा, वहां तनाव भी ज्यादा है। चुनाव आयोग और जिला प्रशासन के लिए यह सबक है कि मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करने की जरूरत है। गौरतलब है कि हाल ही में अलवर के राजपुर में भी बड़े पथराव की घटना सामने आई थी, जिसमें डीएसपी समेत चार पुलिसकर्मी घायल हुए थे। (अलवर राजपुर पथराव की खबर यहां पढ़ें)

नतीजे से असहमति हो तो क्या करें: कानूनी रास्ता क्या है

अगर किसी प्रत्याशी को लगता है कि मतगणना में गड़बड़ी हुई है, तो उसके पास कानूनी रास्ते मौजूद हैं — मतगणना के दौरान रिटर्निंग अधिकारी से पुनर्मतगणना की मांग, जिला निर्वाचन अधिकारी के पास शिकायत, या चुनाव याचिका के जरिए अदालत। हिंसा से न तो नतीजा बदलता है, न ही आरोप साबित होते हैं — उल्टा हिंसा करने वालों पर ही मुकदमा दर्ज होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

चित्तौड़गढ़ में सरपंच चुनाव के बाद हिंसा कहां हुई?
नेतावल पाछली ग्राम पंचायत में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के बाहर पथराव हुआ। रामेश्वर लाल धाकड़ की 456 वोटों से जीत के बाद फर्जी वोटिंग के आरोपों पर भीड़ हिंसक हो गई।

झुंझुनूं के नवलगढ़ में क्या हुआ?
देलसर गांव में बुधवार रात दो प्रत्याशियों के समर्थकों के बीच विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। पंजाब के होशियारपुर निवासी जगदीप सिंह उर्फ जग्गी (30) की मौत हुई, दो घायल हुए।

चित्तौड़गढ़ हिंसा में कितने पुलिसकर्मी घायल हुए?
दो पुलिसकर्मी घायल हुए। एसपी धर्मेंद्र सिंह अतिरिक्त बल के साथ मौके पर पहुंचे और रात करीब दो बजे तक भारी बल तैनात रहा।

सरपंच चुनाव नतीजे से असहमत प्रत्याशी क्या कर सकते हैं?
वे रिटर्निंग अधिकारी से पुनर्मतगणना की मांग कर सकते हैं, जिला निर्वाचन अधिकारी के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं, या चुनाव याचिका के जरिए अदालत जा सकते हैं।

स्रोत: आजतक की रिपोर्ट (चित्तौड़गढ़) और एनडीटीवी राजस्थान की रिपोर्ट (झुंझुनूं)

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