जयपुर की पहचान — पिंक सिटी, गुलाबी शहर, राजसी विरासत — आज संकट में है। 2019 में UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साइट बने वॉल्ड सिटी क्षेत्र के दर्जे पर राजस्थान हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है, और चेताया है कि हालात न सुधरे तो यह दर्जा छिन सकता है।
जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर की सिंगल बेंच ने एक खबर का स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज की है। कोर्ट ने जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) और नगर निगम को पुराने शहर में अवैध निर्माण का सर्वे कर दो हफ्ते में रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं, और चीफ सेक्रेटरी समेत अधिकारियों से 11 बिंदुओं पर चार हफ्ते में हलफनामा मांगा है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा — जनहित याचिका कैसे बनी
दरअसल, पुराने शहर में अवैध निर्माण, अतिक्रमण और पुरानी इमारतों में बदलाव की खबरों पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया। कोर्ट ने कहा कि कई ऐतिहासिक इमारतें बदली या हटाई जा रही हैं, और उनकी जगह ऐसे नए निर्माण हो रहे हैं जो पुरानी वास्तुकला से मेल नहीं खाते — इससे जयपुर की ऐतिहासिक पहचान प्रभावित हो रही है।
कोर्ट की सबसे बड़ी टिप्पणी यह थी — “पुरानी धरोहर एक बार खत्म हो जाए तो उसे दोबारा बनाया नहीं जा सकता।” अदालत ने कहा कि UNESCO की ओर से 2023 और 2025 में भी जयपुर की स्थिति को लेकर चिंता जताई जा चुकी है। मामले में मदद के लिए कोर्ट ने चार अधिवक्ताओं को न्याय मित्र भी नियुक्त किया है।
जयपुर को वर्ल्ड हेरिटेज दर्जा कब और क्यों मिला
जयपुर का वॉल्ड सिटी क्षेत्र साल 2019 में UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित हुआ था। इसकी खास पहचान यहां की ऐतिहासिक इमारतें, महल, बाजार, गुलाबी रंग की इमारतें और पुराने शहर की बनावट है।
जयपुर को महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने 1727 में बसाया था। यह भारत का पहला नियोजित शहर माना जाता है, जिसे विद्याधर भट्टाचार्य ने वास्तुशास्त्र के सिद्धांतों पर डिजाइन किया था। नौ चौपड़ वाली योजना, एक समान गुलाबी रंग की इमारतें और चौड़े बाजार आज भी दुनिया भर के शहरी नियोजन के अध्ययन का विषय हैं।
राजस्थान में पहले से आमेर किला और जंतर-मंतर वर्ल्ड हेरिटेज सूची में हैं — वॉल्ड सिटी के जुड़ने से राज्य की पर्यटन छवि को बड़ा बूस्ट मिला था।
खतरा कहां से — अवैध निर्माण और अतिक्रमण का जाल
कोर्ट के सामने रखे गए तथ्यों के मुताबिक, पुराने शहर में कई जगह बिना नियम के निर्माण हो रहा है। पुरानी इमारतों की जगह आधुनिक कंक्रीट के ढांचे खड़े हो रहे हैं, जो पुराने शहर की एकरूप वास्तुकला को बिगाड़ रहे हैं। बढ़ता अतिक्रमण न केवल धरोहर की पहचान के लिए खतरा है, बल्कि UNESCO के नियमों का भी उल्लंघन है।
अगर कोई साइट अपने मूल स्वरूप और वास्तुकला को खो देती है, तो UNESCO उसे “खतरे में पड़ी विश्व धरोहर” की सूची में डाल सकता है, और आखिरी उपाय के तौर पर दर्जा भी रद्द कर सकता है। दुनिया में अब तक चार जगहों से यह दर्जा हटाया जा चुका है — ओमान का Arabian Oryx Sanctuary, जर्मनी का Dresden Elbe Valley, जॉर्जिया के Historical Monuments of Mtskheta और ब्रिटेन का Liverpool। कोर्ट ने इन उदाहरणों का जिक्र करके अपनी चिंता को और गंभीरता दी।
अब क्या होगा — 2 हफ्ते में सर्वे, 4 हफ्ते में हलफनामा
कोर्ट के निर्देशों का ब्योरा इस प्रकार है:
| बिंदु | निर्देश | समय सीमा |
|---|---|---|
| अवैध निर्माण का सर्वे | JDA और जयपुर नगर निगम मिलकर पुराने शहर में अवैध/नियम-विरुद्ध निर्माण की पूरी रिपोर्ट देंगे | 2 हफ्ते |
| 11 बिंदुओं पर हलफनामा | चीफ सेक्रेटरी समेत संबंधित विभागों के अधिकारी हलफनामा देंगे | 4 हफ्ते |
| न्याय मित्र | मामले में मदद के लिए 4 अधिवक्ता न्याय मित्र नियुक्त | तत्काल |
| चेतावनी | दिसंबर 2026 तक प्रभावी कदम न उठे तो दर्जे पर गंभीर खतरा | दिसंबर 2026 |
11 बिंदुओं वाले हलफनामे में पिछले पांच साल में हुए अवैध निर्माण, उन पर कार्रवाई, नियमों के पालन और जिम्मेदारी तय करने जैसे सवाल शामिल हैं — यानी अब कोर्ट यह भी जानना चाहता है कि पिछले पांच साल में धरोहर बचाने के लिए क्या किया गया और किसकी लापरवाही हुई।
जयपुर की धरोहर को बचाने के लिए क्या जरूरी है
विशेषज्ञों और कोर्ट की टिप्पणियों से साफ है कि दर्जे को बचाने के लिए कुछ ठोस कदम तुरंत जरूरी हैं:
- वॉल्ड सिटी में बिल्डिंग बायलॉज का सख्त पालन: कोई भी नया निर्माण या मरम्मत पुरानी वास्तुकला के अनुरूप होनी चाहिए।
- अतिक्रमण पर जीरो टॉलरेंस: बाजारों और गलियों में अतिक्रमण पर नियमित सर्वे और कार्रवाई जरूरी है।
- हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट: किसी भी बड़े प्रोजेक्ट से पहले यह आकलन अनिवार्य होना चाहिए।
- स्थानीय लोगों की भागीदारी: दुकानदारों और निवासियों को नियमों की जानकारी देकर सहयोग बढ़ाना होगा।
- UNESCO को नियमित रिपोर्टिंग: 2023 और 2025 की चिंताओं का जवाब देते हुए संरक्षण की ठोस रिपोर्ट भेजनी चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल 1: जयपुर को वर्ल्ड हेरिटेज दर्जा कब मिला था?
जवाब: जयपुर के वॉल्ड सिटी क्षेत्र को साल 2019 में UNESCO ने वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किया था — ऐतिहासिक इमारतें, महल, बाजार, गुलाबी रंग की इमारतें और पुराने शहर की नियोजित बनावट इसकी पहचान हैं।
सवाल 2: हाईकोर्ट ने इस मामले में क्या आदेश दिया है?
जवाब: हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज की है। JDA और नगर निगम को दो हफ्ते में अवैध निर्माण का सर्वे, और अधिकारियों को 11 बिंदुओं पर चार हफ्ते में हलफनामा देने के आदेश दिए गए।
सवाल 3: क्या सच में दर्जा छिन सकता है?
जवाब: हां, यह संभव है। दुनिया में अब तक चार जगहों से UNESCO का वर्ल्ड हेरिटेज दर्जा हटाया जा चुका है। कोर्ट ने चेताया है कि दिसंबर 2026 तक प्रभावी कदम न उठे, तो जयपुर के दर्जे पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
सवाल 4: UNESCO ने पहले भी चिंता जताई थी?
जवाब: हां, कोर्ट के मुताबिक UNESCO की ओर से 2023 और 2025 में भी जयपुर की स्थिति को लेकर चिंता जताई जा चुकी है। पुराने शहर में अवैध निर्माण और अतिक्रमण बढ़ना इसका मुख्य कारण है।
जयपुर की धरोहर सिर्फ राजस्थान की नहीं, बल्कि पूरे देश की पहचान है। हाईकोर्ट की यह चेतावनी समय पर आई है — अब गेंद प्रशासन के पाले में है। दो हफ्ते में सर्वे रिपोर्ट और चार हफ्ते में हलफनामा आने के बाद कोर्ट आगे की दिशा तय करेगा। क्या दिसंबर 2026 से पहले JDA और नगर निगम पुराने शहर की विरासत बचा पाएंगे? राज न्यूज़ इस मामले की हर अपडेट आप तक पहुंचाता रहेगा।