रबी सीजन शुरू होने से पहले हनुमानगढ़ के किसानों के लिए खुशखबरी आई है। हनुमानगढ़ मुफ्त सरसों बीज योजना के तहत कृषि विभाग जिले के किसानों को सरसों के प्रमाणित बीज के मिनीकिट बिल्कुल फ्री बांटने जा रहा है। राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन (NMEO-Oilseeds) के तहत जिले में कुल 1,600 क्विंटल सरसों का बीज वितरित किया जाएगा। विभाग का अनुमान है कि इस पहल से करीब 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की बुवाई को बढ़ावा मिलेगा।
सबसे अहम बात यह है कि किसान को इस योजना के लिए कोई पैसा नहीं देना होगा। हर पात्र किसान को 4 किलो बीज का एक मिनीकिट मुफ्त मिलेगा। खरीफ सीजन में कम बारिश और बांधों के घटते जलस्तर के बाद रबी फसलों को लेकर चिंता बनी हुई है, ऐसे में कम पानी में अच्छी पैदावार देने वाली सरसों किसानों के लिए एक मजबूत विकल्प बनकर उभर रही है।
मुफ्त बीज किसे मिलेगा और आवेदन कैसे करना होगा
हनुमानगढ़ मुफ्त सरसों बीज के लिए किसान को अपने क्षेत्र के कृषि पर्यवेक्षक या सहायक कृषि अधिकारी से संपर्क करना होगा। आवेदन के साथ जन आधार कार्ड और जमाबंदी की प्रति जमा करनी अनिवार्य है। परमिट जारी होने के बाद किसान वीसीपी (वितरण एवं क्रय-विक्रय प्रणाली) के जरिए ग्राम सेवा सहकारी समिति (GSSS) या क्रय-विक्रय सहकारी समिति (KVSS) से बीज हासिल कर सकेंगे।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे समय रहते आवेदन करें ताकि बुवाई के समय बीज की उपलब्धता में कोई देरी न हो। विभाग का मानना है कि पानी की सीमित उपलब्धता वाले इलाकों में सरसों की खेती न केवल किसानों की लागत घटा सकती है, बल्कि देश के खाद्य तेल उत्पादन को बढ़ाने में भी बड़ी भूमिका निभा सकती है।
| आवेदन की जरूरी बातें | विवरण |
|---|---|
| कौन ले सकता है | हनुमानगढ़ जिले के पात्र किसान |
| कितना बीज मिलेगा | प्रति किसान 4 किलो का एक मिनीकिट (फ्री) |
| जरूरी दस्तावेज | जन आधार कार्ड, जमाबंदी की प्रति |
| आवेदन कहां | क्षेत्र के कृषि पर्यवेक्षक / सहायक कृषि अधिकारी के पास |
| बीज कहां मिलेगा | GSSS या KVSS से वीसीपी के माध्यम से |
क्षेत्रवार वितरण: हनुमानगढ़, नोहर और भादरा को कितना बीज
कुल 1,600 क्विंटल बीज में से 960 क्विंटल की आपूर्ति राजस्थान राज्य बीज निगम, हनुमानगढ़ और 640 क्विंटल की आपूर्ति राष्ट्रीय बीज निगम, सूरतगढ़ करेगा। वितरण के लिए जिले में क्षेत्रवार लक्ष्य तय किया गया है।
| क्षेत्र | बीज लक्ष्य |
|---|---|
| हनुमानगढ़ क्षेत्र | 770 क्विंटल |
| नोहर क्षेत्र | 530 क्विंटल |
| भादरा क्षेत्र | 300 क्विंटल |
कृषि संयुक्त निदेशक यशवंती के अनुसार वितरण की व्यवस्था पहले से तय कर ली गई है ताकि बुवाई सीजन में किसानों को इंतजार न करना पड़े।
RH-1706 किस्म: नई उन्नत सरसों की खासियत क्या है
इस योजना के तहत किसानों को सरसों की नई उन्नत किस्म RH-1706 का बीज उपलब्ध कराया जाएगा। यह किस्म वर्ष 2023 में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार द्वारा विकसित की गई थी। नई किस्म का मतलब है बेहतर उपज और तेल की अधिक मात्रा — दोनों ही किसान की आय के लिए निर्णायक हैं।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| फसल अवधि | लगभग 140 दिन में तैयार |
| औसत उपज | करीब 37 क्विंटल प्रति हेक्टेयर |
| तेल की मात्रा | लगभग 38 प्रतिशत |
| इरूसिक अम्ल | 2 प्रतिशत से कम |
इरूसिक अम्ल की मात्रा 2 प्रतिशत से कम होना इस किस्म को बाजार की दृष्टि से भी आकर्षक बनाता है, क्योंकि तेल की गुणवत्ता बेहतर होने पर मंडी में दाम का फायदा सीधे किसान तक पहुंचता है। सरसों के मौजूदा भाव को देखते हुए बेहतर किस्म की बुवाई किसान की कुल आय पर सकारात्मक असर डाल सकती है। राजस्थान में रबी सीजन में सरसों के MSP में हुई बढ़ोतरी भी किसानों के लिए हौसला बढ़ाने वाली है।
NMEO-Oilseeds मिशन: देश को खाद्य तेल आयात से राहत की ओर
यह वितरण एक बड़े राष्ट्रीय उद्देश्य का हिस्सा है। राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन (NMEO-Oilseeds) का लक्ष्य है कि देश खाद्य तेलों के आयात पर कम से कम निर्भर हो। भारत हर साल हजारों करोड़ रुपये का खाद्य तेल विदेशों से आयात करता है, जिसका सीधा असर घरेलू रसोई के खर्च पर पड़ता है। घरेलू उत्पादन बढ़ेगा तो किसानों की आय बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को दाम में राहत भी मिल सकती है।
राजस्थान इस मिशन के लिए सबसे अहम राज्य है, क्योंकि यहां देश की सरसों का बड़ा हिस्सा पैदा होता है। हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, अलवर, भरतपुर और टोंक जैसे जिले सरसों उत्पादन के प्रमुख केंद्र हैं। हनुमानगढ़ में इस बार मुफ्त बीज वितरण के साथ रकबा 1.89 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2.50 से 3 लाख हेक्टेयर तक पहुंचने की उम्मीद है। यदि मौसम और बुवाई सही रही तो उत्पादन का नया रिकॉर्ड भी बन सकता है।
मिशन के तहत केवल बीज ही नहीं, बल्कि उन्नत किस्मों की पहचान, किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार तक पहुंच जैसे पहलुओं पर भी काम हो रहा है। RH-1706 जैसी नई किस्मों का प्रचार-प्रसार इसी रणनीति का हिस्सा है। किसानों के लिए यह मौका है कि वे पुरानी किस्मों की जगह नई किस्म अपनाकर प्रति हेक्टेयर उत्पादन बढ़ाएं।
बुवाई से जुड़ी सावधानियां और विभाग की सलाह
सरसों की बुवाई में समय और तरीका दोनों अहम हैं। कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि बुवाई सही तापमान और नमी पर ही करें — जल्दबाजी में अंकुरण कमजोर रह सकता है। बीज की गहराई ज्यादा न रखें और कतारों के बीच उचित दूरी रखें ताकि पौधों को धूप और हवा मिले।
सिंचाई की बात करें तो सरसों को गेहूं के मुकाबले कम पानी चाहिए। पहली सिंचाई बुवाई के करीब 25-30 दिन बाद और दूसरी फूल आने के समय पर करना पर्याप्त होता है। ज्यादा पानी देने से फसल गिरने का खतरा रहता है। उर्वरक मिट्टी की जांच के आधार पर दें, और तेल की मात्रा बढ़ाने के लिए गंधक (सल्फर) की पूर्ति न भूलें।
कमजोर खरीफ के बाद रबी में सरसों क्यों सबसे अहम विकल्प
हनुमानगढ़ मुफ्त सरसों बीज योजना को समझने के लिए पृष्ठभूमि जानना जरूरी है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले साल जिले में सरसों की बुवाई 1.89 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई थी। इस बार रबी सीजन में सिंचाई जल की उपलब्धता को देखते हुए सरसों का रकबा 2.50 लाख से 3 लाख हेक्टेयर तक पहुंचने की संभावना है।
खरीफ सीजन में कम बारिश हुई और बांधों का जलस्तर घटा है, जिससे रबी फसलों के लिए पानी की चुनौती बढ़ गई है। गेहूं जैसी फसलों की तुलना में सरसों कम सिंचाई में भी ठीक-ठाक पैदावार देती है। इसलिए विभाग ने सरसों को प्राथमिकता दी है। मुफ्त बीज मिलने से किसानों की लागत और घटेगी, और बड़े रकबे में बुवाई को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी बल मिलेगा, क्योंकि भारत हर साल बड़ी मात्रा में खाद्य तेल का आयात करता है।
पड़ोसी जिलों के किसानों ने भी बुवाई को लेकर इसी दिशा में सलाह दी है। भीलवाड़ा के कृषि विशेषज्ञों ने सरसों की बुवाई में जल्दबाजी न करने की सलाह दी है ताकि सही तापमान और नमी पर बुवाई हो। हनुमानगढ़ के किसान भी स्थानीय कृषि पर्यवेक्षक की सलाह पर ही बुवाई का समय तय करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल: हनुमानगढ़ में मुफ्त सरसों बीज के लिए आवेदन कहां करना होगा?
जवाब: अपने क्षेत्र के कृषि पर्यवेक्षक या सहायक कृषि अधिकारी से संपर्क करें। आवेदन के साथ जन आधार कार्ड और जमाबंदी की प्रति जमा करनी होगी।
सवाल: एक किसान को कितना बीज मुफ्त मिलेगा?
जवाब: प्रत्येक पात्र किसान को 4 किलो बीज का एक मिनीकिट बिल्कुल मुफ्त दिया जाएगा।
सवाल: मुफ्त बीज में कौन-सी किस्म का सरसों होगा?
जवाब: RH-1706 किस्म का बीज दिया जाएगा, जिसे 2023 में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार ने विकसित किया था। इसकी औसत उपज करीब 37 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और तेल की मात्रा लगभग 38 प्रतिशत है। इरूसिक अम्ल 2 प्रतिशत से कम होने से तेल की गुणवत्ता भी अच्छी रहती है।
सवाल: क्या बीज के लिए कोई फीस या शुल्क लगेगा?
जवाब: नहीं, 4 किलो का मिनीकिट पूरी तरह मुफ्त मिलेगा। बीज परमिट मिलने के बाद GSSS या KVSS से वीसीपी के माध्यम से प्राप्त करना होगा।
सवाल: यह योजना किस मिशन के तहत चल रही है?
जवाब: राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन (NMEO-Oilseeds) के तहत जिले में 1,600 क्विंटल प्रमाणित सरसों बीज बांटा जाएगा। इसका लक्ष्य खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता बढ़ाना है। हनुमानगढ़ क्षेत्र को 770, नोहर को 530 और भादरा को 300 क्विंटल बीज मिलेगा।
(स्रोत: Kisan Tak)