कन्हैयालाल हत्याकांड: हाईकोर्ट ने 8 आरोपियों की अपील खारिज की, UAPA की धाराओं में चलेगा मुकदमा

उदयपुर के बहुचर्चित कन्हैयालाल हत्याकांड में अब आठों आरोपियों पर आतंकवाद से जुड़ी धाराओं के तहत मुकदमा चलेगा। राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने आरोपियों की सभी अपीलें खारिज करते हुए एनआईए अदालत के आरोप तय करने के आदेश बरकरार रखे हैं। कन्हैयालाल हत्याकांड हाईकोर्ट फैसला के बाद सुनवाई तय आरोपों पर आगे बढ़ेगी।

इस फैसले का मतलब आरोपियों को दोषी ठहराना नहीं है — हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि आरोप तय करने के चरण में दोष या निर्दोष होने का फैसला नहीं होता। अंतिम फैसला ट्रायल में सबूतों की जांच के बाद होगा।

कन्हैयालाल हत्याकांड हाईकोर्ट फैसला: जानिए 5 बड़ी बातें

पहली बात यह है कि खंडपीठ ने विशेष एनआईए अदालत के 12 जनवरी और 13 फरवरी 2024 के आदेशों में दखल देने से इनकार कर दिया। इन्हीं आदेशों से आठों के खिलाफ आरोप तय हुए थे।

दूसरी बात यह है कि अब आठों पर UAPA की धारा 16, 18 और 20 के तहत आरोप कायम रहेंगे। साथ ही हत्या-साजिश की IPC धाराओं और आर्म्स एक्ट के तहत भी मुकदमा चलेगा।

तीसरी बात साजिश को लेकर अदालत की टिप्पणी है। हाईकोर्ट ने कहा कि साजिश का प्रत्यक्ष सबूत न मिलना आरोपमुक्ति का आधार नहीं हो सकता, क्योंकि साजिश का पता परिस्थितियों के सामूहिक प्रभाव से भी लगाया जा सकता है।

चौथी बात यह है कि बचाव पक्ष की वीडियो, धमकी और प्रतिबंधित संगठन से जुड़ाव न होने की दलीलें भी खारिज हो गईं। अदालत ने कहा कि इन पहलुओं की जांच ट्रायल के दौरान होगी।

पांचवीं बात यह है कि फैसला मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और न्यायमूर्ति समीर जैन की खंडपीठ ने सुनाया है। अदालत ने यह भी कहा कि इस चरण में मिनी ट्रायल नहीं चलाया जा सकता।

8 आरोपी कौन हैं और उन पर कौन सी धाराएं लगी हैं

अपील खारिज होने वाले आठ आरोपियों में मुख्य आरोपी मोहम्मद रियाज अत्तारी और मोहम्मद गौस हैं। इनके अलावा मोहसिन खान, आसिफ हुसैन, मोहम्मद मोहसिन, वसीम अली, मोहम्मद जावेद खान और मुस्लिम खान शामिल हैं। ये सभी अजमेर की केंद्रीय जेल में बंद हैं।

धारा किस कानून के तहत आरोप का मतलब
धारा 16 UAPA आतंकवादी कृत्य
धारा 18 UAPA आतंकवादी साजिश
धारा 20 UAPA आतंकवादी गिरोह की सदस्यता
हत्या, साजिश भारतीय दंड संहिता हत्या और आपराधिक साजिश
आर्म्स एक्ट शस्त्र कानून अवैध हथियार से जुड़े प्रावधान

आरोपियों ने आरोप तय करने के आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी — उनका कहना था कि पर्याप्त सबूत और साजिश का कोई सीधा साक्ष्य नहीं है। हाईकोर्ट ने दलीलें सुनकर ट्रायल कोर्ट के आदेश बरकरार रखे।

आरोप तय होना क्या होता है? कोर्ट ने साजिश पर क्या कहा

किसी भी आपराधिक मुकदमे में आरोप तय होना अहम पड़ाव होता है। इसका मतलब है कि अभियोजन की सामग्री से प्रथम दृष्टया मुकदमा चलाने का पर्याप्त आधार दिखता है। यह चरण दोष तय करने का नहीं, बल्कि ट्रायल की जरूरत तय करने का होता है।

हाईकोर्ट ने यही सिद्धांत दोहराया — आरोप तय करते समय यह देखा जाता है कि अभियोजन की सामग्री प्रथम दृष्टया अपराध की ओर संकेत करती है या नहीं। अगर हां, तो आरोप तय होकर ट्रायल में गवाही व सबूतों की जांच होती है।

साजिश पर अदालत की टिप्पणी फैसले का सबसे अहम हिस्सा मानी जा रही है। बचाव पक्ष का तर्क था कि साजिश का कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं है, इसलिए आरोप हटाए जाएं। लेकिन साजिश अक्सर छिपकर रची जाती है, इसलिए परिस्थितियों को जोड़कर भी उसका अंदाजा लगाया जा सकता है। वीडियो और धमकियों की जांच ट्रायल में होगी।

28 जून 2022 से 6 नवंबर 2026 तक: पूरा घटनाक्रम

  • 28 जून 2022: उदयपुर में दर्जी कन्हैयालाल की उनकी दुकान में हत्या हुई, जिससे देशभर में हलचल मच गई थी।
  • जांच NIA को: मामले की गंभीरता देखते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने जांच संभाली।
  • 12 जनवरी 2024: विशेष एनआईए अदालत ने आरोप तय करने का आदेश दिया।
  • 13 फरवरी 2024: आरोपों का औपचारिक आदेश पारित हुआ।
  • 4 अक्टूबर 2026: हाईकोर्ट ने 5 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज की थी — यह आदेश आज के फैसले से अलग था।
  • 5 नवंबर 2026: खंडपीठ ने 8 आरोपियों की अपीलें खारिज कर दीं।
  • 6 नवंबर 2026: फैसले की खबर सामने आई; विशेष एनआईए अदालत में ट्रायल का रास्ता साफ हो गया।

4 अक्टूबर का आदेश अलग था — दोनों फैसलों में क्या फर्क है

यह सवाल उठ सकता है कि क्या यह वही फैसला है जो अक्टूबर में आया था। ऐसा नहीं है। 4 अक्टूबर 2026 को हाईकोर्ट ने 5 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज की थी — जमानत का सवाल यह होता है कि क्या आरोपी को ट्रायल के दौरान जेल से बाहर रहने की इजाजत मिले।

आज का फैसला अलग सवाल पर है — क्या आरोप तय करने का ट्रायल कोर्ट का आदेश सही है। हाईकोर्ट ने कहा कि आदेश सही है और मुकदमा तय आरोपों पर चलेगा। यानी एक फैसला जमानत से जुड़ा था, दूसरा आरोप तय होने से। हाल ही में हाईकोर्ट से जुड़ा फर्जी जमानत आदेश का मामला भी सामने आया था।

कन्हैयालाल हत्याकांड हाईकोर्ट फैसला: अब आगे क्या होगा

अब मामला विशेष एनआईए अदालत में जाएगा, जहां तय आरोपों पर सुनवाई आगे बढ़ेगी। अभियोजन पक्ष गवाह और सबूत पेश करेगा, बचाव पक्ष को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा और अदालत सभी साक्ष्यों का स्वतंत्र मूल्यांकन करेगी।

UAPA के तहत मुकदमा चलना गंभीर बात है, क्योंकि इन धाराओं में सजा कड़ी होती है। लेकिन आरोप तय होना दोषसिद्धि नहीं है — ट्रायल में सबूत कमजोर पाए गए तो अदालत आरोपियों को बरी भी कर सकती है। इसलिए आने वाले महीनों में इस सुनवाई पर सबकी नजर रहेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या हाईकोर्ट ने 8 आरोपियों को दोषी करार दे दिया है?
नहीं। हाईकोर्ट ने सिर्फ आरोप तय करने के आदेश बरकरार रखे हैं; दोष या निर्दोष होने का फैसला ट्रायल के बाद होगा।

UAPA की धारा 16, 18 और 20 का क्या मतलब है?
धारा 16 आतंकवादी कृत्य, धारा 18 साजिश और धारा 20 आतंकवादी गिरोह का सदस्य होने से जुड़ी है। इन धाराओं में सजा कड़ी होती है।

यह फैसला किस बेंच ने सुनाया?
मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और न्यायमूर्ति समीर जैन की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया है।

मुकदमे की सुनवाई अब कहां चलेगी?
सुनवाई विशेष एनआईए अदालत में चलेगी, जहां गवाही और सबूतों की जांच के बाद अंतिम फैसला होगा।

स्रोत: जी न्यूज़ की रिपोर्ट

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