रबी की बुवाई का मौसम दरवाजे पर खड़ा है और ठीक उसी समय केंद्र सरकार ने किसानों को बड़ा तोहफा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए छह रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी गई है। गेहूं, जौ, चना, मसूर, सरसों और कुसुम — ये वही फसलें हैं जिन पर राजस्थान के लाखों किसान परिवारों की साल भर की कमाई टिकी होती है। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कुसुम में 675 रुपये प्रति क्विंटल की हुई है, जबकि राजस्थान की पहचान मानी जाने वाली सरसों में 413 रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा किया गया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि इस बढ़ोतरी से किसानों को उनकी उत्पादन लागत पर अच्छा मुनाफा मिलेगा। सवाल यह है कि इस फैसले का असली फायदा राजस्थान के किसान की जेब तक कितना पहुंचेगा।
छह फसलों के नए भाव: पूरी सूची एक नजर में
कैबिनेट ने जिन छह फसलों के दाम बढ़ाए हैं, उनमें हर फसल का नया समर्थन मूल्य इस प्रकार तय किया गया है। गेहूं का MSP 25 रुपये बढ़ाकर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जो पिछले सीजन के 2,585 रुपये से अधिक है। जौ में 136 रुपये की बढ़ोतरी के साथ नया भाव 2,286 रुपये, चने में 83 रुपये की बढ़ोतरी के साथ 5,958 रुपये और मसूर में 390 रुपये की बढ़ोतरी के साथ 7,390 रुपये प्रति क्विंटल तय हुआ है। रैपसीड-सरसों का MSP 413 रुपये बढ़ाकर 6,613 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है, जबकि कुसुम में सबसे बड़ी 675 रुपये की बढ़ोतरी के बाद नया भाव 7,215 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है।
| फसल | बढ़ोतरी (रुपये/क्विंटल) | नया MSP 2027-28 (रुपये/क्विंटल) |
|---|---|---|
| गेहूं | 25 | 2,610 |
| जौ | 136 | 2,286 |
| चना | 83 | 5,958 |
| मसूर | 390 | 7,390 |
| सरसों (रैपसीड) | 413 | 6,613 |
| कुसुम | 675 | 7,215 |
सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक इस बढ़ोतरी के जरिए करीब 90,952 करोड़ रुपये किसानों तक पहुंचने की उम्मीद है। MSP तय करते समय कृषि लागत एवं मूल्य आयोग यानी CACP की सिफारिशों के साथ राज्य सरकारों के सुझावों को भी ध्यान में रखा गया है।
राजस्थान के किसान के लिए क्यों खास है यह फैसला
राजस्थान के लिए यह घोषणा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रदेश की रबी अर्थव्यवस्था काफी हद तक सरसों, चना और जौ पर टिकी है। भरतपुर, अलवर, डीग और आसपास के इलाकों की पीली सरसों पूरे देश में मशहूर है और सरसों उत्पादन में राजस्थान देश के अग्रणी राज्यों में गिना जाता है। जब सरसों का समर्थन मूल्य 413 रुपये बढ़ता है, तो इसका सीधा असर प्रदेश के लाखों सरसों उत्पादक किसानों की आमदनी पर पड़ता है। इसी तरह शेखावाटी और मारवाड़ के कई इलाकों में जौ और चना रबी की मुख्य फसलें हैं, जहां सिंचाई की सुविधा सीमित होने के बावजूद किसान इन्हीं फसलों के सहारे अपना घर चलाते हैं।
रबी की बुवाई अक्टूबर-नवंबर से शुरू हो जाती है। ऐसे समय में जब किसान बीज, खाद और बुवाई की तैयारी में जुटा है, MSP का पहले से पता होना उसके लिए बड़े काम की बात है। किसान अब यह हिसाब लगाकर बुवाई का फैसला ले सकता है कि किस फसल में उसे लागत के ऊपर कितना सुनिश्चित भाव मिलेगा। खासकर सरसों और मसूर जैसी फसलों में अच्छी बढ़ोतरी से फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि किसान सिर्फ गेहूं के भरोसे न रहकर तिलहन और दलहन की तरफ भी रुख करेगा।
लागत पर कितना मुनाफा: मार्जिन का गणित समझिए
MSP बढ़ोतरी की असली तस्वीर तब साफ होती है जब हम उत्पादन लागत से इसकी तुलना करते हैं। सरकार के मुताबिक गेहूं की उत्पादन लागत 1,264 रुपये प्रति क्विंटल आंकी गई है, जिसके मुकाबले 2,610 रुपये का MSP किसान को लागत पर 106 प्रतिशत का मार्जिन देता है। यानी किसान जितना खर्च करेगा, उससे दोगुने से भी ज्यादा दाम उसे समर्थन मूल्य पर मिलेगा। सरसों में यह मार्जिन 96 प्रतिशत और मसूर में 92 प्रतिशत रखा गया है। चने में लागत पर 59 प्रतिशत, जौ में 58 प्रतिशत और कुसुम में 50 प्रतिशत का मार्जिन तय किया गया है।
इसका सीधा मतलब यह है कि कोई भी रबी फसल ऐसी नहीं है जिसमें किसान को लागत से कम भाव मिलने की चिंता रहे। हालांकि जानकार यह भी कहते हैं कि वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकारी खरीद व्यवस्था कितनी उपज MSP पर खरीदती है। मंडी भाव कई बार समर्थन मूल्य से नीचे भी चले जाते हैं, इसलिए खरीद केंद्रों की उपलब्धता पर नजर रखना जरूरी होगा।
बुवाई से पहले किसान क्या करें: काम की सलाह
पहली बात, बुवाई का फैसला नए MSP को ध्यान में रखकर लें। जिन इलाकों में पानी कम है, वहां सरसों, चना और जौ जैसी फसलें कम लागत में अच्छा रिटर्न दे सकती हैं। दूसरी बात, बीज और खाद की खरीदारी समय पर और बिल के साथ करें, ताकि बाद में किसी योजना या खरीद पंजीयन में दिक्कत न आए। तीसरी बात, सरकारी खरीद के लिए पंजीयन और खरीद केंद्रों की जानकारी राज्य सरकार की ओर से खरीद सीजन के आसपास जारी होती है, इसलिए अपने नजदीकी मंडी और संबंधित विभाग से ताजा जानकारी लेते रहें। चौथी बात, फसल बेचते समय मंडी के रोजाना भाव और MSP की तुलना जरूर करें — अगर खुला बाजार भाव समर्थन मूल्य से ऊपर है तो वहां बेचना फायदेमंद रहेगा, और भाव नीचे हो तो सरकारी खरीद का विकल्प सुरक्षित रहेगा। अंत में, फसल बीमा जैसी योजनाओं की अंतिम तारीखों पर भी नजर रखें, ताकि मौसम की मार पड़ने पर नुकसान की भरपाई का रास्ता खुला रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल 1: नए MSP कब से लागू होंगे?
जवाब: बढ़े हुए समर्थन मूल्य मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए तय किए गए हैं, यानी आने वाली रबी फसल की खरीद इन्हीं नए भावों पर होगी।
सवाल 2: सबसे ज्यादा बढ़ोतरी किस फसल में हुई है?
जवाब: कुसुम में सबसे ज्यादा 675 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है और इसका नया MSP 7,215 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। इसके बाद सरसों में 413 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
सवाल 3: गेहूं का नया समर्थन मूल्य कितना है?
जवाब: गेहूं का MSP 25 रुपये बढ़ाकर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। पिछले मार्केटिंग वर्ष में यह 2,585 रुपये प्रति क्विंटल था।
सवाल 4: MSP का लाभ हर किसान को मिलेगा या कुछ शर्तें हैं?
जवाब: MSP का लाभ सरकारी खरीद व्यवस्था के जरिए मिलता है। किसान अपनी उपज निर्धारित खरीद केंद्रों पर समर्थन मूल्य पर बेच सकता है, इसलिए खरीद शुरू होने पर पंजीयन और केंद्रों की जानकारी समय पर लेना जरूरी है।