राजस्थान के 235 पदक विजेता खिलाड़ियों के लिए 6 नवंबर 2026 का दिन किसी त्योहार से कम नहीं रहा। राज्य सरकार ने इन खिलाड़ियों को 235 खिलाड़ी सरकारी नौकरी देने के प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है — और यह कोई साधारण भर्ती नहीं है। इनमें से नौ खिलाड़ी सीधे पुलिस उप अधीक्षक (DSP) बनेंगे, जबकि 73 पैरा खिलाड़ी भी इस सूची में शामिल हैं। यानी मैदान पर देश का नाम रोशन करने वाले युवाओं को अब सरकारी सेवा की स्थायी सुरक्षा भी मिलने जा रही है।
यह फैसला गुरुवार को जयपुर के शासन सचिवालय में हुई राज्य स्तरीय समिति की सातवीं बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने की। समिति के सामने सामान्य और पैरा खिलाड़ियों के कुल 286 आवेदन आए थे, जिनमें से 235 को मंजूरी मिली।
235 खिलाड़ी सरकारी नौकरी: किसे क्या पद मिलेगा
सरकार ने मंजूर नियुक्तियों को तीन श्रेणियों में बांटा है। सबसे ऊंची श्रेणी में वे खिलाड़ी हैं जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। नीचे दी गई तालिका में पूरा बंटवारा साफ दिखता है:
| श्रेणी | खिलाड़ियों की संख्या | मिलने वाले पद |
|---|---|---|
| श्रेणी-ए | 9 | पुलिस उप अधीक्षक (DSP) |
| श्रेणी-बी | 2 | आबकारी विभाग में पेट्रोलिंग ऑफिसर ग्रेड-2, राजस्थान पुलिस में उप निरीक्षक (SI) |
| श्रेणी-सी | 224 (इनमें 73 पैरा खिलाड़ी) | लिपिक ग्रेड-द्वितीय, कांस्टेबल, आबकारी सिपाही, आबकारी आरक्षक, उप जेलर |
| कुल | 235 | — |
श्रेणी-ए के नौ खिलाड़ियों को DSP का पद मिलना इस फैसले की सबसे बड़ी खबर है। आमतौर पर DSP बनने के लिए RPSC की कठिन परीक्षा पास करनी पड़ती है, लेकिन आउट ऑफ टर्न नियुक्ति के तहत खेल उपलब्धियों के आधार पर सीधे इस पद पर नियुक्ति दी जा रही है।
73 पैरा खिलाड़ी भी सूची में: हर तीसरा पद दिव्यांग एथलीट को
इस फैसले की सबसे मानवीय और अहम बात यह है कि श्रेणी-सी के 224 खिलाड़ियों में 73 पैरा खिलाड़ी शामिल हैं। यानी हर तीसरा पद एक ऐसे एथलीट को मिल रहा है जिसने शारीरिक चुनौतियों के बावजूद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक जीते हैं।
पैरा खिलाड़ियों के लिए सरकारी नौकरी का मतलब सिर्फ वेतन नहीं होता — यह उनके परिवार की आर्थिक सुरक्षा और समाज में सम्मान की गारंटी भी होती है। हाल ही में खेल मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने पैरा एशियन गेम्स के पदक विजेताओं से मुलाकात करके उन्हें नकद पुरस्कार और बेहतर ट्रेनिंग का भरोसा दिया था।
235 खिलाड़ी सरकारी नौकरी: 286 आवेदन आए, 235 मंजूर
समिति की बैठक में कुल 286 नए आवेदनों पर विचार किया गया। इनमें से 235 यानी करीब 82 प्रतिशत आवेदनों को मंजूरी मिली, जबकि 51 आवेदनों पर इस बैठक में स्वीकृति नहीं दी जा सकी।
हर आवेदन की खेल उपलब्धियों की बारीकी से जांच होती है — पदक का स्तर, प्रतियोगिता का दर्जा और खिलाड़ी की पात्रता देखी जाती है।
दिसंबर 2023 से अब तक: 187 से 422 का सफर
राज्य सरकार दिसंबर 2023 से अब तक 187 पदक विजेता खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न सरकारी नियुक्तियां दे चुकी है। अब 235 नए प्रस्तावों की मंजूरी के बाद यह संख्या 422 हो जाएगी — यानी तीन साल से भी कम समय में दोगुने से ज्यादा खिलाड़ियों को सरकारी सेवा में लाया जा चुका होगा।
यह आंकड़ा इसलिए भी अहम है क्योंकि राजस्थान में खेल प्रतिभाओं को सरकारी नौकरी देना अब किसी एक फैसले तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक निरंतर चलने वाली नीति बन चुका है। इसी सोच के तहत अक्टूबर 2026 में राजस्थान टॉप्स योजना भी लागू की गई थी, जिसके तहत 50 प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को 2028 ओलंपिक की तैयारी के लिए हर महीने 25,000 रुपये का भत्ता और विश्व स्तरीय कोचिंग दी जा रही है।
आउट ऑफ टर्न नियुक्ति क्या होती है और यह क्यों जरूरी है
आउट ऑफ टर्न नियुक्ति का मतलब है — बिना सामान्य भर्ती परीक्षा के, खेल उपलब्धियों के आधार पर सीधे सरकारी नौकरी देना। यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है क्योंकि एक खिलाड़ी के जीवन का सबसे अच्छा समय 18 से 30 साल के बीच होता है, और अगर वह इस दौरान सिर्फ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लग जाए तो खेल छूट जाएगा।
इस व्यवस्था से खिलाड़ी बिना नौकरी की चिंता के खेल पर ध्यान दे सकते हैं, और पदक जीतने के बाद उन्हें स्थायी रोजगार की सुरक्षा मिल जाती है।
आगे क्या होगा: नियुक्ति आदेश तक का रास्ता
मंजूरी मिलना पहला चरण है। अब अगला चरण संबंधित विभागों की ओर से नियुक्ति आदेश जारी करना होगा — नियुक्ति की स्वीकृति के बाद संबंधित विभागों की नियुक्ति प्रक्रिया और आदेश जारी होना ही अगला चरण है।
बैठक में वन विभाग में पहले से नियुक्त खिलाड़ियों के समायोजन पर भी चर्चा हुई — उन्हें नियमों में एक बार की छूट देकर दूसरे विभागों में समायोजित करने का प्रस्ताव विचाराधीन है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: राजस्थान में 235 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी किस आधार पर मिलेगी? उत्तर: राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के आधार पर आउट ऑफ टर्न नियुक्ति दी जा रही है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता वाली समिति की सातवीं बैठक में 286 आवेदनों में से 235 को मंजूरी दी गई है।
प्रश्न 2: कितने खिलाड़ी DSP बनेंगे और बाकी को कौन से पद मिलेंगे? उत्तर: श्रेणी-ए के 9 खिलाड़ी पुलिस उप अधीक्षक (DSP) बनेंगे। श्रेणी-बी के 2 खिलाड़ियों को आबकारी विभाग में पेट्रोलिंग ऑफिसर और पुलिस में उप निरीक्षक का पद मिलेगा। श्रेणी-सी के 224 खिलाड़ियों को लिपिक ग्रेड-द्वितीय, कांस्टेबल, आबकारी सिपाही, आबकारी आरक्षक और उप जेलर के पद दिए जाएंगे।
प्रश्न 3: क्या पैरा खिलाड़ियों को भी इस फैसले में जगह मिली है? उत्तर: हां। 235 में से 73 पैरा खिलाड़ी शामिल हैं, जो श्रेणी-सी की नियुक्तियों का हिस्सा हैं। सरकार ने पैरा एशियन गेम्स के पदक विजेताओं को नकद पुरस्कार और ट्रेनिंग का भरोसा भी पहले ही दिया था।
प्रश्न 4: अब तक कुल कितने खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न नौकरी मिल चुकी है? उत्तर: दिसंबर 2023 से अब तक 187 पदक विजेता खिलाड़ियों को नियुक्ति दी जा चुकी है। 235 नए प्रस्तावों की मंजूरी के बाद यह कुल संख्या 422 हो जाएगी।
राजस्थान के 235 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने का फैसला सिर्फ एक भर्ती की खबर नहीं है — यह प्रदेश के उन हजारों युवा खिलाड़ियों के लिए संदेश है जो गांव-ढाणी के मैदानों में सुबह-शाम अभ्यास करते हैं। पदक जीतिए, सरकार नौकरी देगी। अब नजर इस पर रहेगी कि नियुक्ति आदेश कितनी जल्दी जारी होते हैं।