दौसा के सिकराय में DAP खाद के लिए घंटों लगी कतारें, पुलिस पर धक्का देने का आरोप; कृषि मंत्री के गृह जिले में लगातार दूसरा दिन

राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा के गृह जिले दौसा में DAP खाद को लेकर किसानों की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही। बुधवार को दौसा के सिकराय कस्बे में खाद वितरण केंद्र के बाहर सैकड़ों किसान सुबह से लंबी कतारों में खड़े रहे। एक कट्टा खाद के लिए घंटों धूप में खड़े रहने के बाद जब भीड़ बेकाबू होने लगी तो पुलिस को बुलाना पड़ा — और किसानों का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने लाइन में खड़े किसानों को धक्का देकर बाहर निकालने की कोशिश की। प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

यह दौसा जिले में लगातार दूसरे दिन खाद को लेकर बवाल है। इससे एक दिन पहले मंगलवार को बांदीकुई में DAP लेने के लिए ऐसी भीड़ उमड़ी थी कि दो लोगों की तबीयत बिगड़ गई थी। सिकराय की घटना से साफ है कि रबी की बुआई के इस अहम समय में जिले में खाद की सप्लाई मांग से काफी पीछे चल रही है।

सिकराय में बुधवार को क्या हुआ: घंटों की लाइन, फिर धक्का-मुक्की

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक सिकराय में बुधवार सुबह से ही वितरण केंद्र के बाहर किसानों की भीड़ जुटने लगी। जैसे-जैसे दिन चढ़ा, कतार लंबी होती गई। एक कट्टा खाद के लिए किसानों को कई घंटे लाइन में खड़ा रहना पड़ा, जिनमें बुजुर्ग किसान भी शामिल थे।

किसानों का कहना है कि खेती के इस समय खाद की सबसे ज्यादा जरूरत है, लेकिन खाद आसानी से मिल नहीं रही। एक कट्टे के लिए भी उन्हें पूरा दिन परेशान होना पड़ रहा है। भीड़ बढ़ने पर व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस को बुलाया गया। किसानों के मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने कुछ किसानों को पकड़कर लाइन से खींचने की कोशिश की, जिससे धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बन गई।

एक दिन पहले बांदीकुई: दो की तबीयत बिगड़ी, 840 कट्टों के लिए मारामारी

सिकराय से एक दिन पहले मंगलवार को बांदीकुई में भी ऐसा ही नजारा था। क्रय-विक्रय सहकारी समिति में करीब एक महीने बाद 840 कट्टे DAP खाद पहुंचने की सूचना पर किसान सुबह करीब 7 बजे से ही कतार में लग गए थे। खाद लेने से पहले जमाबंदी पर मोहर और टोकन के लिए अलग-अलग लाइनें लगने से परेशानी और बढ़ गई।

बाद में यह जानकारी दी गई कि खाद के लिए पहले कृषि विभाग के कार्यालय से टोकन लेना होगा। जैसे ही यह सूचना मिली, कतार में खड़े किसान टोकन लेने के लिए दौड़ पड़े और भीड़ बढ़ गई। तेज धूप और भीड़ के बीच किसान संतोष शर्मा बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े। मौके पर मौजूद लोगों और पुलिस ने उन्हें संभाला और 108 एंबुलेंस से बांदीकुई उप जिला अस्पताल पहुंचाया गया। इसी दौरान भीड़ में एक महिला की तबीयत भी बिगड़ गई थी। किसानों के मुताबिक उन्हें करीब 20 दिन से खाद का इंतजार था।

क्यों खाली हैं गोदाम: रबी सीजन में मांग और सप्लाई का गणित

अक्टूबर का महीना रबी की बुआई का सबसे अहम समय होता है। सरसों, चना और गेहूं की बुआई से पहले खेतों में DAP की जरूरत सबसे ज्यादा होती है। समस्या यह है कि सरकारी वितरण केंद्रों पर खाद की सप्लाई मांग के मुकाबले बहुत कम आ रही है। बांदीकुई में एक महीने बाद सिर्फ 840 कट्टे आए, जबकि इंतजार करने वाले किसानों की संख्या हजारों में थी।

किसानों का कहना है कि जब खाद आती है तो वितरण की व्यवस्था भी दुरुस्त नहीं होती। टोकन के लिए अलग लाइन, जमाबंदी पर मोहर के लिए अलग कतार — इस जटिल प्रक्रिया में पूरा दिन निकल जाता है। उनकी मांग है कि केंद्रों पर स्टॉक की जानकारी पहले से सार्वजनिक हो और किसानों की संख्या के हिसाब से काउंटर और कर्मचारी बढ़ाए जाएं।

यह संकट सिर्फ दौसा तक सीमित नहीं है। इससे पहले बारां में DAP की दुकान बंद होने पर किसान सड़क पर बैठ गए थे और टोंक में DAP की उपलब्धता को लेकर जिला प्रशासन तक बहस में आ गया था।

किसानों के लिए जरूरी जानकारी

अगर आप खाद वितरण केंद्र जा रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:

  • जमाबंदी/खसरा कागजात: खाद के लिए जमाबंदी पर मोहर जरूरी है — अपने खेत के कागजात पहले से तैयार रखें।
  • टोकन की प्रक्रिया: कई केंद्रों पर पहले कृषि विभाग के कार्यालय से टोकन लेना होता है। केंद्र जाने से पहले टोकन कहां से मिलेगा, यह पूछताछ कर लें।
  • आधार कार्ड: पहचान के लिए मूल आधार कार्ड साथ रखें।
  • सुबह जल्दी पहुंचें: भीड़ से बचने के लिए सुबह जल्दी केंद्र पहुंचना बेहतर रहता है।
  • बिचौलियों से सावधान: अधिकांश केंद्रों पर एक किसान को सीमित कट्टे ही मिलते हैं — किसी के झांसे में न आएं।
तारीख स्थान घटना
6 अक्टूबर 2026 बांदीकुई, दौसा 840 कट्टे DAP के लिए भारी भीड़; धक्का-मुक्की में दो लोगों की तबीयत बिगड़ी, एक किसान बेहोश
7 अक्टूबर 2026 सिकराय, दौसा सैकड़ों किसान घंटों लाइन में खड़े रहे; पुलिस पर धक्का देकर बाहर निकालने का आरोप

किसानों की मांग: स्टॉक की जानकारी पहले से मिले

सिकराय और बांदीकुई, दोनों जगहों पर किसानों की मांग एक जैसी है — पर्याप्त खाद और बेहतर वितरण व्यवस्था। उनका कहना है कि अगर केंद्रों पर पर्याप्त खाद हो और वितरण की सही व्यवस्था हो तो इतनी बड़ी भीड़ जमा ही न हो। मांग है कि स्टॉक की जानकारी पहले से सार्वजनिक हो, किसानों की संख्या के हिसाब से काउंटर बढ़ाए जाएं, और बुजुर्ग किसानों के लिए बैठने जैसी बुनियादी सहूलियतें मिलें। अब नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है — क्या सप्लाई बढ़ेगी, या कतारें और लंबी होंगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: सिकराय में खाद को लेकर क्या हुआ?
जवाब: 7 अक्टूबर को दौसा के सिकराय में DAP खाद के लिए सैकड़ों किसान सुबह से घंटों लाइन में खड़े रहे। भीड़ बढ़ने पर पुलिस बुलाई गई और किसानों ने पुलिस पर धक्का देकर लाइन से बाहर निकालने का आरोप लगाया।

सवाल: एक दिन पहले बांदीकुई में क्या हुआ था?
जवाब: 6 अक्टूबर को बांदीकुई में एक महीने बाद 840 कट्टे DAP पहुंचे थे। भीड़ और धूप के बीच दो लोगों की तबीयत बिगड़ गई थी, एक किसान बेहोश होकर गिर पड़ा था।

सवाल: DAP खाद के लिए क्या दस्तावेज चाहिए?
जवाब: जमाबंदी/खसरा के कागजात (मोहर के लिए), आधार कार्ड और कई केंद्रों पर कृषि विभाग से जारी टोकन जरूरी होता है।

सवाल: दौसा में खाद की किल्लत क्यों है?
जवाब: रबी की बुआई के समय DAP की मांग सबसे ज्यादा होती है, लेकिन सरकारी केंद्रों पर सप्लाई मांग से काफी कम आ रही है।

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