Congress War Room: पंचायत चुनाव में ‘वोट चोरी’ बनेगा कांग्रेस का बड़ा हथियार, गांव-गांव प्रचार का जिला-वार प्लान

निकाय चुनाव की लड़ाई अभी शांत भी नहीं हुई थी कि कांग्रेस ने पंचायत चुनाव के लिए अपना सबसे तीखा हथियार निकाल दिया है — ‘वोट चोरी’ का आरोप। बुधवार 7 अक्टूबर को जयपुर में पार्टी के वॉर रूम में हुई बैठक में तय हुआ कि निकाय चुनाव के दौरान पुलिस-प्रशासन के दुरुपयोग, फॉर्म खारिज करने और वोट चोरी के आरोपों को पंचायत चुनाव में कांग्रेस का प्रमुख मुद्दा बनाया जाएगा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि इस कथित धांधली का हिसाब जनता पंचायत चुनाव में लेगी।

बैठक की अध्यक्षता डोटासरा और राजस्थान कांग्रेस प्रभारी सुखजिंद्र सिंह रंधावा ने की। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली समेत वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इसके बाद प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पर जिला प्रभारियों, सह-प्रभारियों और जिलाध्यक्षों की संयुक्त बैठक में जिले-वार प्रचार का खाका भी खींचा गया।

‘वोट चोरी का हिसाब’: डोटासरा का सरकार पर सीधा वार

डोटासरा ने दावा किया कि निकाय चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के वोट प्रतिशत में अंतर महज 0.94 प्रतिशत रहा, जबकि अजमेर, पाली, जयपुर और जोधपुर में कांग्रेस ने कई जगह भाजपा को हजारों वोटों से पीछे छोड़ा। फिर भी नतीजे भाजपा के पक्ष में क्यों गए — यही सवाल उन्होंने उठाया। उनके मुताबिक निकाय चुनाव में पुलिस और प्रशासन का दुरुपयोग हुआ और कांग्रेस प्रत्याशियों पर दबाव की राजनीति चली।

डोटासरा ने बताया कि कांग्रेस ने राज्य निर्वाचन आयोग को ज्ञापन देकर उन घटनाओं से अवगत कराया है, जहां सिंबल खारिज किए गए या फॉर्म रद्द किए गए। पुलिस महानिदेशक को भी सबूतों के साथ जानकारी दी गई है। चुनाव आयोग और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि देशभर में कांग्रेस वोट चोरी के खिलाफ लड़ रही है और राजस्थान में भी यही मुद्दा जनता के बीच लेकर जाएगी।

चेतावनी के लहजे में डोटासरा ने कहा कि निकाय चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ क्रॉस वोटिंग करने वाले नेताओं और पार्षदों को बख्शा नहीं जाएगा। चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदेशभर में आंदोलन चलेगा — 10 अक्टूबर से शुरू हो रहे देशव्यापी अभियान के अनुरूप। उन्होंने ये सवाल भी उठाया कि 13 अक्टूबर को नामांकन करने वालों का परिणाम करीब 35 दिन बाद आएगा — इतने लंबे अंतराल में सत्ता के दुरुपयोग की आशंका क्या नहीं बढ़ेगी?

गांव-गांव प्रचार: बड़े नेता मैदान में उतरेंगे

बैठक का दूसरा बड़ा फैसला प्रचार की रणनीति को लेकर था। तय हुआ कि सभी शीर्ष नेता अपने प्रभार वाले जिलों के साथ-साथ उन क्षेत्रों में भी प्रचार के लिए जाएंगे, जहां जिला कांग्रेस कमेटियां उन्हें आमंत्रित करेंगी। जनसभाओं सहित हर प्रचार गतिविधि में वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी रहेगी और प्रदेश कांग्रेस कमेटी जिले-वार प्रचार कार्यक्रम तैयार करेगी।

टिकट बंटवारे में पारदर्शिता का दावा

उम्मीदवार चयन को लेकर डोटासरा ने कहा कि सभी जिलों में जिला कांग्रेस कमेटियों की पॉलिटिकल अफेयर कमेटी के माध्यम से पारदर्शी तरीके से प्रत्याशियों का चयन होगा। इस प्रक्रिया में जिले के विधायक, पूर्व विधायक, सांसद, पूर्व जनप्रतिनिधि और अग्रिम संगठनों के पदाधिकारियों को शामिल किया जाएगा। सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया गया। पंचायत चुनाव में बागी उम्मीदवार अक्सर नतीजे पलट देते हैं, इसलिए टिकट वितरण में पारदर्शिता का दावा कांग्रेस के लिए अहम माना जा रहा है।

पायलट, रंधावा और जूली के तेवर

सचिन पायलट ने दिल्ली में विपक्षी सांसदों के मार्च का जिक्र करते हुए कहा कि करीब 300 सांसद चुनाव आयोग से मिलना चाहते थे, लेकिन उन्हें बसों में भरकर थानों में भेज दिया गया। उनके मुताबिक नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ जैसा व्यवहार हुआ, वैसा पहले कभी किसी नेता प्रतिपक्ष के साथ नहीं हुआ। पायलट ने कहा कि भाजपा निकाय चुनाव में जीत दर्ज करने के बावजूद हार गई, जबकि कांग्रेस हारकर भी जीत गई। पंचायत चुनाव में मनरेगा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता देने की बात भी उन्होंने कही।

सुखजिंद्र सिंह रंधावा ने कहा कि निकाय चुनाव में पुलिस-प्रशासन के दुरुपयोग के बावजूद कांग्रेस ने मजबूती से मुकाबला किया, और अब पंचायत चुनाव में पार्टी इससे ज्यादा ताकत से मैदान में उतरेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि निकाय चुनाव के दौरान पार्षदों को उठाने और दूसरे राज्यों की सीमाओं पर रोकने जैसी घटनाएं हुईं — उनके मुताबिक राजस्थान जैसे शांतिप्रिय राज्य में ऐसा पहली बार दिखा।

टीकाराम जूली ने कहा कि निकाय चुनाव का परिणाम ऐतिहासिक रहा। उनका सवाल था — अगर भाजपा की प्रचंड जीत हुई है तो अजमेर, पाली और जयपुर जैसे बड़े शहरों में उसका वोट प्रतिशत क्यों गिरा?

पृष्ठभूमि: नामांकन 8 अक्टूबर से, मतदान 23 अक्टूबर से

ये बैठक ऐसे समय में हुई है जब पंचायत चुनाव का बिगुल बज चुका है। नामांकन 8 अक्टूबर से शुरू हो रही है और जिला परिषद-पंचायत समिति सदस्यों का मतदान 23 अक्टूबर से चार चरणों में होगा। धनतेरस के चलते पहले तीन चरणों की वोटिंग एक दिन पहले कराने का फैसला भी हो चुका है।

तारीख/घटना विवरण
8 अक्टूबर 2026 नामांकन प्रक्रिया शुरू
10 अक्टूबर 2026 ‘वोट चोरी’ के खिलाफ कांग्रेस का देशव्यापी अभियान शुरू
13 अक्टूबर 2026 डोटासरा के मुताबिक इस दिन नामांकन वालों का परिणाम करीब 35 दिन बाद
23 अक्टूबर 2026 से जिला परिषद व पंचायत समिति सदस्यों का मतदान (4 चरण)
0.94% निकाय चुनाव में कांग्रेस-भाजपा के वोट प्रतिशत का अंतर (डोटासरा का दावा)

भाजपा की ओर से भी तैयारियां जोरों पर हैं। दोनों दलों के लिए ये चुनाव अगले विधानसभा चुनाव से पहले का सेमीफाइनल माना जा रहा है। अब देखना होगा कि कांग्रेस का ‘वोट चोरी का हिसाब’ वाला नैरेटिव गांवों तक कितना पहुंचता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: 7 अक्टूबर की बैठक में क्या तय हुआ?

उत्तर: पंचायत चुनाव में भाजपा सरकार की विफलताएं गांव-गांव बताई जाएंगी, निकाय चुनाव में ‘वोट चोरी’ के आरोप प्रमुख मुद्दा होंगे, बड़े नेता जिला-वार प्रचार में उतरेंगे और टिकट बंटवारा पारदर्शी प्रक्रिया से होगा।

प्रश्न 2: डोटासरा ने निकाय चुनाव पर क्या आरोप लगाए?

उत्तर: दावा किया कि वोट प्रतिशत का अंतर सिर्फ 0.94% रहा, फिर भी नतीजे भाजपा के पक्ष में गए। पुलिस-प्रशासन के दुरुपयोग, फॉर्म खारिज करने और वोट चोरी के आरोप लगाए; कहा कि इसका हिसाब जनता पंचायत चुनाव में लेगी।

प्रश्न 3: पंचायत चुनाव 2026 की अहम तारीखें क्या हैं?

उत्तर: नामांकन 8 अक्टूबर से शुरू होगा। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों का मतदान 23 अक्टूबर से चार चरणों में होगा। धनतेरस के कारण पहले तीन चरणों की वोटिंग एक दिन पहले कराई जाएगी।

प्रश्न 4: कांग्रेस किन मुद्दों पर पंचायत चुनाव लड़ेगी?

उत्तर: भाजपा सरकार के ढाई साल की विफलताएं, निकाय चुनाव में कथित वोट चोरी और प्रशासन का दुरुपयोग प्रमुख मुद्दे होंगे। पायलट ने मनरेगा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता देने की बात कही है।

Leave a Comment