राजस्थान में सरकारी खरीद का नया नियम: अब e-Sanction ऑनलाइन मिलेगी, 1 नवंबर से पूरी व्यवस्था डिजिटल
सरकारी दफ्तरों में कागज़ की फाइलें लिए घूमने का ज़माना अब पुरानी बात होने वाली है। राजस्थान में 1 नवंबर 2026 से सरकारी खरीद की स्वीकृति यानी e-Sanction पूरी तरह ऑनलाइन मिलेगी। यानी विभाग को नई सामग्री खरीदनी हो, वाहन किराये पर लेने हों या मशीनरी से जुड़ा कोई प्रस्ताव वित्त विभाग की स्वीकृति के लिए भेजना हो — अब ये सब काम कागज़ पर नहीं, कंप्यूटर स्क्रीन पर होगा।
सबसे पहले समझें: आम आदमी के लिए इसमें क्या बदलेगा
सबसे बड़ा असर होगा रफ्तार पर। अभी किसी विभाग को खरीद की स्वीकृति चाहिए तो प्रस्ताव एक टेबल से दूसरी टेबल घूमता है — कभी किसी अधिकारी के हस्ताक्षर का इंतज़ार, कभी फाइल कहां अटकी इसका पता नहीं। ऑनलाइन व्यवस्था में हर प्रस्ताव का डिजिटल निशान रहेगा। कौन-सा प्रस्ताव किस अधिकारी के पास कब पहुंचा और कितने दिन रुका, ये सब सिस्टम में दर्ज होगा। इससे न सिर्फ खरीद तेज़ होगी, बल्कि जवाबदेही भी बढ़ेगी — यानी किसी काम में देरी हुई तो फौरन पता चल जाएगा कि गलती कहां हुई।
दूसरा बड़ा फायदा पारदर्शिता का है। ऑनलाइन प्रक्रिया में स्वीकृति देने का नियम सबके लिए एक जैसा होगा। कागज़ी फाइलों में कभी-कभी नियम अलग-अलग तरह से लागू हो जाते थे। अब जब सिस्टम खुद तय करेगा कि कौन-सा प्रस्ताव किस चरण में जाएगा, तो किसी की मनमानी की गुंजाइश कम हो जाएगी।
क्या-क्या आएगा इस नई व्यवस्था के दायरे में
वित्त विभाग के 7 अक्टूबर को जारी परिपत्र के मुताबिक नई व्यवस्था में तीन तरह के काम ऑनलाइन होंगे। पहला — नवीन सामग्री की खरीद। दूसरा — किराये पर वाहन लेना, वाहन खरीदना और मशीन-विद-मैन जैसे प्रस्ताव, जिनकी स्वीकृति के लिए वित्त विभाग की सहमति ज़रूरी है। तीसरा — कार्यालय व्यय और ऐसी अन्य खरीद, जिनकी स्वीकृति प्रशासनिक विभाग, विभागाध्यक्ष या किसी अन्य सक्षम अधिकारी को देनी होती है।
एक बात साफ है — निर्माण कार्यों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है। यानी सड़क, पुल, भवन जैसी निर्माण परियोजनाओं की स्वीकृति अभी पुरानी प्रक्रिया से ही होगी। बाकी सभी सामग्री, सेवाओं और उपापन (प्रोक्योरमेंट) से जुड़े मामलों में e-Sanction लागू होगी।
प्रस्ताव का सफर: टेबल से टेबल नहीं, स्क्रीन से स्क्रीन तक
नई प्रक्रिया में प्रस्ताव का रास्ता कुछ इस तरह होगा। सबसे पहले विभागाध्यक्ष या बजट नियंत्रण अधिकारी प्रस्ताव तैयार करेंगे। पहले वो प्रस्ताव प्रशासनिक विभाग को भेजा जाएगा। वहां जांच होगी और अगर सब ठीक रहा तो प्रस्ताव पर सहमति दी जाएगी। इसके बाद प्रस्ताव वित्त (व्यय) विभाग के पास जाएगा। वित्त विभाग की स्वीकृति मिलते ही संबंधित प्रशासनिक विभाग या विभागाध्यक्ष ऑनलाइन स्वीकृति यानी e-Sanction जारी कर देंगे।
ये पूरी प्रक्रिया IFMS के बजट मैनेजमेंट मॉड्यूल के ज़रिए चलेगी। IFMS यानी इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम — सरकार का एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्लेटफॉर्म, जिस पर पहले से ही बजट और भुगतान से जुड़े कई काम होते हैं। अब e-Sanction भी इसी के अंदर आ जाएगा।
दो रास्ते, दो पोर्टल: फर्क समझना ज़रूरी
इस व्यवस्था में दो अलग-अलग रास्ते हैं, और ये फर्क समझना ज़रूरी है। पहला रास्ता उन प्रस्तावों का है जिनके लिए वित्त विभाग की स्वीकृति ज़रूरी है — ये प्रस्ताव IFMS के बजट मैनेजमेंट मॉड्यूल से भेजे जाएंगे। दूसरा रास्ता उन मामलों का है जहां स्वीकृति प्रशासनिक विभाग, विभागाध्यक्ष या किसी अन्य सक्षम अधिकारी के स्तर पर देनी है — इनके लिए SHPP पोर्टल का इस्तेमाल होगा।
SHPP से मतलब राज्य के खरीद पोर्टल से है, जिसके ज़रिए खरीद से जुड़े काम पहले से होते आ रहे हैं। एकमुश्त बजट आवंटन वाली सामग्री और सेवाओं की खरीद भी इसी प्रक्रिया से होगी।
खरीद पूरी होने के बाद भुगतान की स्वीकृति IFMS से कार्यालयाध्यक्ष स्तर पर जारी होगी। इस स्वीकृति के आधार पर DDO (ड्रॉइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर) बिल तैयार करके कोषालय भेजेंगे। यानी खरीद से लेकर भुगतान तक पूरी श्रृंखला अब डिजिटल ट्रैक पर चलेगी।
1 नवंबर तक विभागों को क्या-क्या तैयारी करनी होगी
परिपत्र 7 अक्टूबर को जारी हुआ है और नई व्यवस्था 1 नवंबर से प्रभावी होगी। यानी विभागों के पास तैयारी के लिए करीब तीन हफ्ते हैं। इस दौरान विभागों को अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को IFMS के बजट मैनेजमेंट मॉड्यूल पर प्रशिक्षित करना होगा। जिन अधिकारियों को प्रस्ताव तैयार करने, जांचने और स्वीकृति देने की ज़िम्मेदारी मिलेगी, उन्हें नई प्रक्रिया की पूरी जानकारी होनी चाहिए।
जिन विभागों में अभी भी प्रस्ताव कागज़ पर तैयार होते हैं, उन्हें अपनी आंतरिक प्रक्रिया को डिजिटल फॉर्मेट में ढालना होगा। प्रस्ताव में लगने वाले दस्तावेज़, अनुमानित लागत और स्वीकृति के लिए ज़रूरी बिंदु अब ऑनलाइन दर्ज होंगे। विभागों को ये भी सुनिश्चित करना होगा कि उनके यहां पर्याप्त कंप्यूटर और इंटरनेट की सुविधा हो।
पहले की व्यवस्था में क्या दिक्कत थी
पहले सरकारी खरीद की स्वीकृति की प्रक्रिया काफी हद तक कागज़ पर निर्भर थी। प्रस्ताव हाथ से लिखकर या टाइप करके फाइल में लगाए जाते थे। फिर वो फाइल एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी के पास जाती थी। कई बार फाइलें हफ्तों तक किसी टेबल पर पड़ी रहती थीं और प्रस्ताव भेजने वाले को ये पता ही नहीं चलता था कि उसका मामला कहां अटका है।
इसकी वजह से खरीद में देरी होती थी, योजनाओं का काम रुकता था और कभी-कभी बजट का पैसा भी इस्तेमाल नहीं हो पाता था। पारदर्शिता की भी समस्या थी — किस प्रस्ताव को कितने समय में मंज़ूरी मिली और किसे नहीं, इसका कोई व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं था। e-Sanction इन्हीं समस्याओं का जवाब है।
आगे की राह
1 नवंबर को जब ये व्यवस्था लागू होगी, तब इसकी असलियत सामने आएगी। शुरुआत में कुछ दिक्कतें आ सकती हैं — नई तकनीक अपनाने में समय लगता है। लेकिन लंबे समय में e-Sanction सरकारी खरीद को तेज़, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। अब देखना ये है कि विभाग 1 नवंबर से पहले कितनी तैयारी कर पाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
e-Sanction क्या है?
e-Sanction सरकारी खरीद से जुड़ी स्वीकृति को ऑनलाइन जारी करने की व्यवस्था है। राजस्थान में वित्त विभाग के 7 अक्टूबर 2026 के परिपत्र के बाद 1 नवंबर 2026 से ये लागू होगी।
क्या सभी तरह की सरकारी खरीद पर ये लागू होगी?
निर्माण कार्यों को छोड़कर सामग्री, सेवाओं और उपापन से जुड़ी सक्षम स्वीकृतियां इसके दायरे में आएंगी।
प्रस्ताव कैसे भेजा जाएगा?
जिन प्रस्तावों पर वित्त विभाग की स्वीकृति ज़रूरी है, वे IFMS के बजट मैनेजमेंट मॉड्यूल से भेजे जाएंगे। बाकी मामलों के लिए SHPP पोर्टल का इस्तेमाल होगा।
ये व्यवस्था कब से लागू होगी?
1 नवंबर 2026 से। परिपत्र 7 अक्टूबर 2026 को जारी किया गया है।