रबी की फसलों, खासकर सरसों की बुवाई के बीच राजस्थान में डीएपी खाद संकट ने किसानों की जेब पर सीधा असर डाला है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का आरोप है कि सरकारी दाम 1,350 रुपये वाला डीएपी का बैग बाजार में 2,100 से 2,200 रुपये में बिक रहा है। किसान एक तरफ समय पर बुवाई की चिंता से जूझ रहा है, तो दूसरी तरफ खाद की महंगाई उसकी लागत बढ़ा रही है। शुक्रवार को गहलोत ने भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा, तो जवाब में कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने पलटवार करते हुए दावा किया कि प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं है।
गहलोत का आरोप: 1350 का बैग 2200 में, नैनो डीएपी का दबाव
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि सितंबर से ही राजस्थान के अलग-अलग जिलों में डीएपी की किल्लत की खबरें आ रही हैं। उनके मुताबिक, सहकारी समितियां अपनी जरूरत सरकार को बता चुकी हैं, लेकिन उनके पास पर्याप्त खाद नहीं पहुंची।
गहलोत ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर पारंपरिक डीएपी के साथ नैनो डीएपी जैसे दूसरे उत्पाद खरीदने के लिए किसानों पर दबाव बनाया जा रहा है। उनका सवाल है कि किसानों को महंगे दाम पर खाद खरीदकर बुवाई करने के लिए मजबूर होना पड़े, तो इसे विकास कैसे कहा जा सकता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि किसानों को जरूरत के मुताबिक खाद उपलब्ध कराई जाए और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
कृषि मंत्री का पलटवार: “प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं”
डीएपी खाद संकट को लेकर उठ रहे सवालों के बीच राज्य सरकार ने खाद की उपलब्धता को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के अनुसार, प्रदेश में रबी सीजन के लिए पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे किसी भी तरह की अफवाह में आकर जरूरत से ज्यादा खाद न खरीदें और न ही उसका अनावश्यक भंडारण करें।
सरकार के मुताबिक, राज्य में फिलहाल उर्वरकों का यह स्टॉक उपलब्ध है:
| उर्वरक | उपलब्ध स्टॉक (लाख मीट्रिक टन) |
|---|---|
| यूरिया | 3.72 |
| डीएपी | 1.06 |
| एनपीके | 0.97 |
| एसएसपी | 2.08 |
कृषि विभाग उन जिलों और ब्लॉकों पर विशेष ध्यान दे रहा है, जहां खाद की खपत ज्यादा है या उपलब्धता अपेक्षाकृत कम है। ऐसे क्षेत्रों में मांग के आधार पर प्राथमिकता से आपूर्ति की व्यवस्था की जा रही है। मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार केंद्र के साथ लगातार संपर्क में है, ताकि किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार उर्वरक मिल सकें।
कालाबाजारी रोकने के लिए टास्क फोर्स की बैठक
रबी सीजन 2026-27 में किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने और वितरण व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए राज्य स्तर पर भी कदम उठाए गए हैं। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में ‘फर्टिलाइजर डिस्ट्रीब्यूशन रेगुलेटरी टास्क फोर्स’ की बैठक आयोजित की गई। बैठक में खाद की उपलब्धता, मांग के अनुरूप आपूर्ति और जमाखोरी तथा कालाबाजारी पर रोक लगाने जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को बुवाई के समय खाद के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
जमीनी हकीकत: कई जिलों में किसान पहले ही सड़कों पर उतर चुके
सरकारी दावों और विपक्ष के आरोपों के बीच जमीनी हकीकत यह है कि पिछले एक हफ्ते में कई जिलों से किसानों की नाराजगी की खबरें सामने आ चुकी हैं। बारां में डीएपी की दुकान बंद होने पर किसान सड़क पर बैठ गए थे, जबकि दौसा के सिकराय में डीएपी के लिए लंबी कतारें लगीं और पुलिस से धक्का-मुक्की की नौबत आ गई थी। सरकार ने प्रदेश में 7.83 लाख टन उर्वरक स्टॉक होने का दावा भी किया था, लेकिन जिलों में वितरण की रफ्तार पर सवाल बने हुए हैं। सरसों की बुवाई का समय राजस्थान के किसानों के लिए बेहद अहम होता है, और खाद की कमी इस दौर में किसान के लिए दोहरी मार बन गई है।
रबी 2026-27: बुवाई लक्ष्य के हिसाब से तैयार उर्वरक योजना
राज्य सरकार ने रबी सीजन में अलग-अलग फसलों के प्रस्तावित रकबे को ध्यान में रखते हुए उर्वरकों की जरूरत का आकलन किया है। कृषि मंत्री के अनुसार, केंद्र सरकार की ओर से तिलहन और दलहन की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी के अनुरूप इन फसलों का प्रस्तावित बुवाई क्षेत्र बढ़ाया गया है, जबकि अनाज की फसलों का क्षेत्र घटाने की योजना है।
| फसल वर्ग | रबी 2025-26 (लाख हेक्टेयर) | रबी 2026-27 प्रस्तावित (लाख हेक्टेयर) |
|---|---|---|
| तिलहन | 39.82 | 40.06 |
| दलहन | 20.69 | 21.95 |
| अनाज | 42.77 | 38.50 |
सरकार का कहना है कि फसलवार क्षेत्रफल और उर्वरकों की अनुमानित मांग के आधार पर आपूर्ति एवं वितरण की योजना तैयार की गई है। कृषि विभाग की वेबसाइट agriculture.rajasthan.gov.in पर उर्वरक से जुड़ी योजनाओं और वितरण की जानकारी उपलब्ध रहती है।
किसान क्या करें: बुवाई के समय ये बातें रखें ध्यान
डीएपी खाद संकट के इस दौर में किसानों के लिए सबसे जरूरी है कि वे घबराकर जरूरत से ज्यादा खाद न खरीदें और न ही उसका भंडारण करें — इससे बाजार में कृत्रिम कमी पैदा होती है। खाद हमेशा अधिकृत विक्रेता या सहकारी समिति से ही लें और पक्का बिल जरूर मांगें। अगर कोई विक्रेता सरकारी दाम से ज्यादा वसूलता है या डीएपी के साथ जबरन दूसरा उत्पाद थोपता है, तो जिला कृषि अधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराएं। बुवाई में देरी न हो, इसलिए समय पर उपलब्ध उर्वरक विकल्पों पर कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेना भी फायदेमंद रहेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: डीएपी का सरकारी दाम कितना है और बाजार में कितने में मिल रहा है?
उत्तर: डीएपी के बैग का सरकारी दाम 1,350 रुपये है। गहलोत के आरोप के मुताबिक, कालाबाजारी में यही बैग 2,100 से 2,200 रुपये में किसानों को खरीदना पड़ रहा है।
प्रश्न 2: सरकार का डीएपी की उपलब्धता पर क्या कहना है?
उत्तर: कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा का दावा है कि प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं है। सरकार के मुताबिक 1.06 लाख मीट्रिक टन डीएपी समेत कुल 7.83 लाख टन उर्वरक स्टॉक उपलब्ध है।
प्रश्न 3: कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
उत्तर: मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में ‘फर्टिलाइजर डिस्ट्रीब्यूशन रेगुलेटरी टास्क फोर्स’ की बैठक हुई, जिसमें खाद की उपलब्धता, आपूर्ति और जमाखोरी-कालाबाजारी पर रोक लगाने पर चर्चा की गई।
प्रश्न 4: किसान खाद की कालाबाजारी की शिकायत कहां करें?
उत्तर: जिला कृषि अधिकारी के कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। राज्य के कृषि विभाग की वेबसाइट पर भी शिकायत और सुझाव के विकल्प उपलब्ध हैं।