दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले बड़े प्रदर्शन से ठीक पहले शुक्रवार रात राजस्थान में सीजेपी कार्यकर्ता हिरासत का बड़ा मामला सामने आया। राजस्थान पुलिस ने सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) के तीन नेताओं और कार्यकर्ताओं पर एक साथ कार्रवाई की — अलवर में एक नेता को घर से उठाने का आरोप लगा, सीकर में एक कार्यकर्ता को दिनभर थाने के पास बिठाकर रखा गया और नीमकाथाना में एक कार्यकर्ता के घर के बाहर सुबह से पुलिस का पहरा लगा दिया गया।
पुलिस का कहना है कि यह हिरासत नहीं, बल्कि दिल्ली में लागू धारा 163 के बारे में समझाने और पाबंद करने की कार्रवाई थी। वहीं सीजेपी का आरोप है कि 10 अक्टूबर के प्रदर्शन को रोकने की सोची-समझी कोशिश हो रही है। इस बीच रेलवे ने दिल्ली जाने वाली 9 ट्रेनें भी रद्द कर दीं, जिनमें उदयपुर और श्रीगंगानगर से चलने वाली दो ट्रेनें शामिल हैं।
अलवर के मानखेड़ा में रात 10 बजे पहुंची पुलिस की दो गाड़ियां
सबसे बड़ा घटनाक्रम अलवर जिले के कठूमर इलाके के मानखेड़ा गांव में हुआ। सीजेपी के राष्ट्रीय संगठन सह-प्रभारी दीपक बालियान के घर रात करीब 10 बजे पुलिस की दो गाड़ियां पहुंचीं। पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर इसका वीडियो साझा किया और पुलिसकर्मियों से बालियान को ले जाने का आधार पूछा।
रांका का आरोप है कि पुलिस ने बालियान के साथ मारपीट की, जबकि वह पैर के फ्रैक्चर से उबर रहे थे। सीजेपी का दावा है कि उनका मोबाइल फोन और चप्पलें बिना कागजी कार्रवाई के जब्त कर ली गईं और उनसे लिखवाया गया कि मारपीट नहीं हुई। इसके बाद उन्हें करीब 100 किलोमीटर तक घुमाकर घर छोड़ दिया गया, लेकिन घर के बाहर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात कर दिए गए। रांका ने कहा कि बालियान के भाई के साथ भी मारपीट हुई।
सीकर के रींगस और नीमकाथाना में भी दिनभर पुलिसिया पहरा
सीकर जिले के रींगस में सीजेपी कार्यकर्ता संजू वर्मा को थाने के पास एक कैंटीन में दिनभर पुलिस की निगरानी में रखा गया। बाहर करीब 100 समर्थक जमा रहे। शाम को चेतावनी देकर उन्हें छोड़ दिया गया। संजू वर्मा वही कार्यकर्ता हैं जो 21 अगस्त को संगठन के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के दौरान जयपुर के पास रामपुरा-कंवरपुरा गांव में स्कूल निरीक्षण के समय हुए हमले में घायल हुए थे।
नीमकाथाना में सीजेपी से जुड़े दलित कार्यकर्ता गीगराज जोडली के घर के बाहर सुबह से पुलिस बल तैनात रहा। जोडली का कहना है कि उन्हें अनौपचारिक ‘हाउस अरेस्ट’ में रखा गया और काम पर जाने से रोका गया।
पुलिस का पक्ष: हिरासत नहीं, धारा 163 की पाबंदी की कार्रवाई
पुलिस ने सीजेपी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। कठूमर थाने के सहायक उपनिरीक्षक उमरुद्दीन ने बताया कि दिल्ली में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू है, इसलिए टीम बालियान को समझाने और प्रदर्शन के आह्वान पर पाबंद करने गई थी। आवश्यक प्रक्रिया और मेडिकल जांच के बाद उन्हें सम्मान के साथ घर भेज दिया गया।
मारपीट या अवैध हिरासत की बातों को पुलिस ने अफवाह बताया। एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि बालियान को हिरासत में नहीं लिया गया — वे घर पर ही हैं।
तीनों कार्रवाइयों का लेखा-जोखा एक नजर में
| नेता/कार्यकर्ता | स्थान | क्या हुआ | पुलिस का दावा |
|---|---|---|---|
| दीपक बालियान (संगठन सह-प्रभारी) | मानखेड़ा, अलवर | रात 10 बजे घर से ले जाने का आरोप, 100 KM घुमाकर छोड़ा | पाबंदी की कार्रवाई, मेडिकल के बाद घर भेजा |
| संजू वर्मा (कार्यकर्ता) | रींगस, सीकर | थाने के पास कैंटीन में दिनभर निगरानी, 100 समर्थक बाहर | शाम को चेतावनी देकर छोड़ा |
| गीगराज जोडली (दलित कार्यकर्ता) | नीमकाथाना | घर के बाहर सुबह से पुलिस तैनात, ‘हाउस अरेस्ट’ का आरोप | दिल्ली की धारा 163 की सूचना देने गए थे |
प्रदर्शन किस मुद्दे पर? सीईसी ज्ञानेश कुमार निशाने पर
सीजेपी ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं से बड़ी संख्या में नागरिकों के मताधिकार प्रभावित हो सकते हैं। रांका ने कहा कि कार्यकर्ता गिरफ्तारी देने के लिए भी तैयार हैं।
पार्टी संस्थापक अभिजीत डिपके ने लिखा कि प्रदर्शन से पहले देशभर में हजारों युवाओं को हिरासत में लिया गया, लेकिन डराने की कोशिश काम नहीं आएगी — वे दिल्ली पहुंचकर जंतर-मंतर तक मार्च करेंगे। मुख्य निर्वाचन आयुक्त का मुद्दा राजस्थान में पहले से गरम है — कांग्रेस भी वोट चोरी के मुद्दे को पंचायत चुनाव में हथियार बना रही है।
मानवाधिकार संगठन की निंदा, रेलवे ने 9 ट्रेनें रद्द कीं
पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL) ने कार्यकर्ताओं की आवाजाही पर पाबंदियों की निंदा की है। राष्ट्रीय अध्यक्ष कविता श्रीवास्तव ने कहा कि दिल्ली पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस का यह दुरुपयोग राज्य के अलोकतांत्रिक होने का सबूत है।
उधर रेलवे ने स्टेशनों पर भीड़ की आशंका में नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन जाने वाली 9 ट्रेनें रद्द कर दीं, जिनमें उदयपुर और श्रीगंगानगर से दिल्ली जाने वाली ट्रेनें भी हैं। दिल्ली आंदोलन के चलते ट्रेनें रद्द होने से यात्री पहले से परेशान थे। पुलिस हिरासत के मुद्दे पर राजस्थान में पहले से बहस चल रही है — हिरासत में मौतों के बढ़ते मामलों को लेकर विपक्ष सरकार को घेर चुका है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. सीजेपी कार्यकर्ता हिरासत का मामला क्या है?
10 अक्टूबर के दिल्ली प्रदर्शन से पहले राजस्थान पुलिस ने सीजेपी के तीन नेताओं — दीपक बालियान (अलवर), संजू वर्मा (सीकर), गीगराज जोडली (नीमकाथाना) — पर कार्रवाई की। पार्टी ने अवैध हिरासत का आरोप लगाया, पुलिस ने पाबंदी की कार्रवाई बताई।
2. पुलिस ने आरोपों पर क्या कहा?
कठूमर थाने के एएसआई उमरुद्दीन के अनुसार दिल्ली में BNSS की धारा 163 लागू है, इसलिए पुलिस समझाने और पाबंद करने गई थी। मेडिकल जांच के बाद बालियान को घर भेज दिया गया; मारपीट के आरोप अफवाह बताए गए।
3. दिल्ली प्रदर्शन किसलिए हो रहा है?
सीजेपी मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं के विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेगी।
4. ट्रेनें क्यों रद्द हुईं?
रेलवे ने नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन स्टेशनों पर भीड़ की आशंका में 9 ट्रेनें रद्द की हैं, जिनमें उदयपुर और श्रीगंगानगर से दिल्ली जाने वाली ट्रेनें शामिल हैं।