जयपुर। राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव की घोषणा अभी हुई ही नहीं है, लेकिन सियासत पूरे उबाल पर है। बुधवार को कांग्रेस ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल सरकारी मशीनरी के जरिए पंचायत चुनाव के संभावित उम्मीदवारों के नाम निकलवा रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने एक पत्र साझा करके यह मुद्दा उठाया, जिसके बाद नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी सरकार पर हमलावर हो गए। दूसरी ओर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने आरोपों को विरोधाभासी बताकर पलटवार किया है।
पत्र में क्या है? एक्सेल शीट और ‘विशेष विवरण’ वाला कॉलम
डोटासरा द्वारा साझा पत्र के अनुसार जिला कलेक्टर, जो अपने जिले में जिला निर्वाचन अधिकारी भी होते हैं, सभी रिटर्निंग अधिकारियों से संभावित उम्मीदवारों की जानकारी मांग रहे हैं। यह जानकारी जिला प्रमुख, प्रधान, जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्य पदों के संभावित उम्मीदवारों को लेकर मांगी गई बताई गई है। पत्र में कुछ नाम छिपाए गए हैं, लेकिन उसका प्रारूप साफ देखा जा सकता है।
पत्र के अनुसार जानकारी एक्सेल डाटा में, तय फॉन्ट के साथ भेजनी है। नाम संबंधित पंचायत समिति, ग्राम पंचायत, वार्ड और आरक्षित श्रेणी के सामने अलग-अलग पंक्तियों में दर्ज करने को कहा गया है। किसी पद के लिए एक से ज्यादा नाम हों तो वे कॉमा या स्लैश से जोड़कर नहीं, बल्कि अलग-अलग पंक्तियों में लिखने के निर्देश हैं। शीट में ‘विशेष विवरण’ नाम का कॉलम भी है, जिसमें उम्मीदवार की विशिष्ट जानकारी, उसके उल्लेखनीय काम या राजनीतिक पृष्ठभूमि हिंदी में लिखकर भेजने को कहा गया है। पत्र में लिखा है कि राज्य सरकार से मिली एक्सेल शीट संलग्न करके भेजी जा रही है और निर्धारित प्रारूप में तैयार जानकारी उसी दिन, यानी 28.9.2026 को शाम 5 बजे तक भेजना सुनिश्चित किया जाए।
कांग्रेस के आरोप: जीतने वाले प्रतिनिधियों को निशाना बनाने की तैयारी?
डोटासरा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को संबोधित करते हुए कहा कि उनके इशारे पर मुख्यमंत्री कार्यालय में बैठा एक अधिकारी सत्ता के अहंकार में ऐसे आदेश जारी कर रहा है, लेकिन सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि राज्य की प्रशासनिक मशीनरी किसी पार्टी का चुनाव कार्यालय नहीं है, जिसका काम किसी दल के संभावित उम्मीदवारों पर नजर रखना और उनकी रिपोर्ट भेजना हो।
कांग्रेस अध्यक्ष का आरोप है कि यह जानकारी इसलिए जुटाई जा रही है ताकि कांग्रेस के जीतने वाले जनप्रतिनिधियों को निशाना बनाया जा सके — उन्हें डराने-धमकाने, पुराने मामले खोदने, नोटिस देने, झूठे मुकदमे दर्ज करने और सरकारी कार्रवाई से चुनाव लड़ने से रोकने की तैयारी के तौर पर यह डाटा मांगा जा रहा है।
डोटासरा ने सरकार से इस आदेश पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण मांगा है और निर्वाचन आयोग से पूछा है कि और कितने सबूत चाहिए। उनका कहना है कि मामले की तुरंत जांच होनी चाहिए और यह स्पष्ट होना चाहिए कि सूची किसने मांगी, किस उद्देश्य से मांगी और इसका इस्तेमाल क्या होगा। उन्होंने कहा कि नगर निकाय चुनावों में हुई किरकिरी के बाद भाजपा सरकार अब पंचायत चुनाव शुरू होने से पहले ही लोकतंत्र को डराने की तैयारी में है — किस नियम के तहत कलेक्टरों से संभावित उम्मीदवारों के नाम मांगे जा रहे हैं, यह सरकार बताए।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी यही सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार को हार का डर सताने लगा है, इसीलिए सूचियां निकलवाई जा रही हैं। जूली ने कहा कि सरकार जितना चाहे तंत्र लगा ले, राजस्थान की जनता न डरेगी और न झुकेगी — जनादेश सरकारी फाइलों से नहीं, जनता के वोटों से आता है।
राज्य निर्वाचन आयोग का रुख: ‘अभी कोई शिकायत नहीं मिली’
इस विवाद के बीच राज्य निर्वाचन आयोग की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह से इस मामले में संपर्क नहीं हो सका। वहीं आयोग के सचिव राजेश वर्मा ने कहा है कि उन्हें अभी तक ऐसी कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। वर्मा के अनुसार अगर शिकायत मिलती है तो उसकी जांच करवाई जाएगी और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई भी की जाएगी। इसका मतलब है कि फिलहाल आयोग औपचारिक शिकायत का इंतजार कर रहा है; लिखित शिकायत मिलने के बाद ही जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
भाजपा का पलटवार: ‘जहां जीतते हैं वहां ठीक, जहां हारते हैं वहां आरोप’
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस के बयानों में साफ विरोधाभास है। एक ओर कांग्रेस नेता कहते हैं कि नगर निकाय चुनावों में वे भाजपा से सिर्फ कुछ वोटों से पीछे रहे, दूसरी ओर वे चुनाव प्रक्रिया और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप लगा रहे हैं। राठौड़ ने कहा कि अगर दुरुपयोग हुआ होता तो कांग्रेस को इतने वोट नहीं मिलते। उनका तंज था कि जहां कांग्रेस जीतती है वहां वह अपनी पीठ थपथपाती है और जहां हारती है वहां ईवीएम, आयोग और सरकारी मशीनरी को दोष देती है।
पूरा मामला एक नजर में
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| विवाद की शुरुआत | कांग्रेस द्वारा साझा किया गया पत्र |
| जानकारी किसके लिए मांगी गई | जिला प्रमुख, प्रधान, जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य के संभावित उम्मीदवार |
| जानकारी किसके जरिए मांगी गई | जिला कलेक्टर (जिला निर्वाचन अधिकारी) द्वारा रिटर्निंग अधिकारियों से |
| खास कॉलम | ‘विशेष विवरण’ — उल्लेखनीय काम और राजनीतिक पृष्ठभूमि हिंदी में |
| पत्र में दी गई समय-सीमा | 28.9.2026 को शाम 5 बजे तक |
| कांग्रेस की मांग | सार्वजनिक स्पष्टीकरण और निर्वाचन आयोग से तुरंत जांच |
| आयोग के सचिव का बयान | अभी कोई शिकायत नहीं मिली; मिलने पर जांच और जरूरत पर कार्रवाई |
| भाजपा का जवाब | कांग्रेस के बयानों में विरोधाभास; दुरुपयोग होता तो इतने वोट नहीं मिलते |
यह विवाद क्यों अहम है और आगे क्या हो सकता है?
पंचायतीराज चुनाव राजस्थान की ग्रामीण राजनीति की नींव होते हैं और स्थानीय सत्ता की दिशा तय करते हैं। ऐसे चुनाव से पहले संभावित उम्मीदवारों की सूची पर उठा विवाद इसलिए बड़ा है क्योंकि यह सीधे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़ा सवाल है। आगे तीन चीजें दिशा तय करेंगी — क्या कांग्रेस आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराती है, क्या सरकार सार्वजनिक स्पष्टीकरण देती है, और आयोग जांच में क्या पाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न: कांग्रेस ने सरकार पर क्या आरोप लगाया है?
उत्तर: कांग्रेस का आरोप है कि राज्य सरकार सरकारी मशीनरी के जरिए पंचायत चुनाव के संभावित उम्मीदवारों के नाम और जानकारी निकलवा रही है, ताकि कांग्रेस के जीतने वाले प्रतिनिधियों को निशाना बनाया जा सके।
प्रश्न: पत्र में किस तरह की जानकारी मांगी गई है?
उत्तर: संभावित उम्मीदवारों के नाम एक्सेल शीट में पंचायत समिति, ग्राम पंचायत, वार्ड और आरक्षित श्रेणी के सामने अलग-अलग पंक्तियों में, ‘विशेष विवरण’ कॉलम में राजनीतिक पृष्ठभूमि समेत, 28.9.2026 शाम 5 बजे तक भेजने को कहा गया है।
प्रश्न: राज्य निर्वाचन आयोग ने क्या कहा है?
उत्तर: आयोग के सचिव राजेश वर्मा ने कहा है कि अभी तक कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। शिकायत मिलने पर जांच करवाई जाएगी और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई भी होगी।
प्रश्न: भाजपा ने आरोपों पर क्या जवाब दिया है?
उत्तर: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस के बयानों में विरोधाभास है। अगर सत्ता का दुरुपयोग हुआ होता तो नगर निकाय चुनावों में कांग्रेस को इतने वोट नहीं मिलते।