Panchayat Chunav 2026: गहलोत बोले — ‘कांग्रेस में सब साथ हैं’, पायलट ने बताई उम्मीदवारों की कसौटी; 8 अक्टूबर से नामांकन

पंचायत चुनाव के नामांकन शुरू होने में अब सिर्फ एक दिन बचा है और ठीक इस मौके पर कांग्रेस के दो सबसे बड़े चेहरों — पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट — ने पार्टी की एकजुटता को लेकर बड़ा बयान दिया है। गहलोत ने दावा किया कि कांग्रेस में सभी नेता साथ हैं और पार्टी एकजुट होकर मैदान में उतर रही है। वहीं, पायलट ने साफ किया कि इस बार उम्मीदवारों के चयन में ‘मजबूत और साफ छवि’ को प्राथमिकता दी जाएगी।

ये बयान ऐसे वक्त में आए हैं जब पिछले कुछ हफ्तों में कांग्रेस को भीतर से कई झटके लगे हैं — 2 अक्टूबर को भरतपुर के दिग्गज नेता विश्वेंद्र सिंह ने पार्टी छोड़ दी, और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ लगातार कांग्रेस की ‘फूट’ को लेकर हमले कर रहे हैं। ऐसे में गहलोत-पायलट की ये जोड़ीदार नुमाइश सियासी तौर पर बड़ा संदेश है: पार्टी हर मतभेद से ऊपर उठकर पंचायत चुनाव को गंभीरता से ले रही है।

गहलोत का ‘सब साथ हैं’ बयान — चुनाव से ठीक पहले का संदेश

अशोक गहलोत ने पंचायत चुनाव से पहले कहा कि कांग्रेस के सभी नेता साथ हैं और पार्टी एकजुट होकर मैदान में उतरेगी। पूर्व मुख्यमंत्री का ये बयान सिर्फ औपचारिक नहीं है — इसकी टाइमिंग महत्वपूर्ण है। नामांकन 8 अक्टूबर से शुरू हो रहे हैं और टिकट बंटवारे को लेकर हर पार्टी में असंतोष आम बात है। गहलोत पहले से कह चुके हैं कि टिकट सिफारिश के आधार पर नहीं, जमीनी हकीकत देखकर दिए जाने चाहिए — यहां तक कि अगर वे खुद किसी की सिफारिश करें, तब भी सिर्फ उनकी सिफारिश पर टिकट नहीं मिलना चाहिए।

उनकी इस नसीहत के दो मकसद साफ दिखते हैं। पहला — टिकट वितरण में पारदर्शिता का दावा करके बागी उम्मीदवारों के खतरे को कम करना। दूसरा — पर्यवेक्षकों को स्थानीय समीकरण के आधार पर फैसला लेने की छूट देकर संगठन को जिम्मेदारी देना। गहलोत ने युवाओं को 50 प्रतिशत से ज्यादा टिकट देने की पैरवी भी की थी, जो इस बार की कांग्रेस रणनीति का अहम हिस्सा हो सकती है।

पायलट की उम्मीदवार कसौटी: ‘मजबूत और साफ छवि’

सचिन पायलट ने अपने बयान में इस बार उम्मीदवार चयन की कसौटी खोलकर रख दी — मजबूत और साफ छवि वाले उम्मीदवार। ये दो शब्द कांग्रेस की पिछली चुनावी चोटों से जुड़े हैं। निकाय चुनावों में पार्टी को करारी हार मिली थी, और पंचायत स्तर पर उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि ही सबसे बड़ा फैक्टर होती है। पंचायत चुनाव में मतदाता पार्टी से ज्यादा उम्मीदवार को देखता है — सरपंच और वार्ड पंच के लिए ‘साफ छवि’ का मतलब है बेदाग रिकॉर्ड, स्थानीय पकड़ और विवादों से दूरी।

पायलट का ये बयान गहलोत की टिकट-वितरण वाली नसीहत के साथ मिलकर एक पूरी तस्वीर बनाता है: सिफारिश नहीं, जमीनी ताकत; उम्र नहीं, छवि। दोनों नेताओं का संदेश एक ही दिशा में है, भले ही शब्द अलग-अलग हों।

क्यों अहम है ये एकजुटता का दावा — पृष्ठभूमि समझिए

पिछले एक महीने में कांग्रेस की आंतरिक स्थिति अच्छी नहीं रही। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन भरतपुर राजघराने के विश्वेंद्र सिंह ने ‘घुटन’ का हवाला देकर पार्टी से अलग होने की घोषणा कर दी। इससे ठीक पहले भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा था कि पार्टी के सभी नेता एक-दूसरे को नीचा दिखाने में लगे हैं।

ऐसे में गहलोत और पायलट का एक ही दिन, एक ही मुद्दे पर सकारात्मक बयान देना संयोग नहीं लगता। ये भाजपा के ‘फूट’ वाले नैरेटिव का सीधा जवाब है। याद कीजिए — 4 अक्टूबर को गहलोत ने निकाय चुनावों में भाजपा पर पुलिस-प्रशासन के दुरुपयोग का आरोप लगाया था, जिसका 6 अक्टूबर को गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने पलटवार किया। अब कांग्रेस हमले की बजाय ‘एकजुटता’ के मोर्चे पर खेल रही है।

पंचायत चुनाव 2026: कार्यक्रम और अहम तारीखें

राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। मतदान चार चरणों में होगा। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए मतदान 23 अक्टूबर से शुरू होगा, जबकि नामांकन प्रक्रिया 8 अक्टूबर से प्रारंभ हो जाएगी। धनतेरस के चलते पहले तीन चरणों की वोटिंग एक दिन पहले कराने का फैसला भी हुआ है — त्योहार के मद्देनजर ये बदलाव किया गया।

तारीख कार्यक्रम
8 अक्टूबर 2026 नामांकन प्रक्रिया शुरू
23 अक्टूबर 2026 से जिला परिषद व पंचायत समिति सदस्यों का मतदान (4 चरण)
धनतेरस समायोजन पहले तीन चरणों की वोटिंग एक दिन पहले

भाजपा की ओर से भी तैयारियां जोरों पर हैं — पार्टी ने सातों संभागों में चुनाव संचालन समितियां घोषित कर दी हैं और 25 जिलों का तीन दिवसीय दौरा भी किया। यानी दोनों दलों के लिए ये चुनाव सेमीफाइनल जैसा है।

मतदाताओं के लिए इसका क्या मतलब है

पंचायत चुनाव में असली दांव सरपंच और वार्ड पंच के स्तर पर होता है। अगर कांग्रेस वाकई ‘साफ छवि और मजबूत’ उम्मीदवार उतारती है, तो ग्रामीण मतदाताओं के सामने विकल्प स्पष्ट होंगे। और अगर टिकट वितरण में गहलोत की नसीहत — सिफारिश नहीं, जमीनी ताकत — लागू होती है, तो बागी उम्मीदवारों की संख्या कम रह सकती है, जो छोटे चुनावों में अक्सर नतीजे पलट देते हैं।

नामांकन शुरू होने के बाद अगले कुछ दिनों में दोनों दलों की उम्मीदवार सूचियां सामने आएंगी। तभी पता चलेगा कि एकजुटता के ये दावे जमीन पर कितने उतरते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: पंचायत चुनाव 2026 में नामांकन कब से शुरू हो रहे हैं?

उत्तर: राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार नामांकन प्रक्रिया 8 अक्टूबर 2026 से शुरू होगी। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए मतदान 23 अक्टूबर से चार चरणों में कराया जाएगा।

प्रश्न 2: अशोक गहलोत ने कांग्रेस की एकजुटता को लेकर क्या कहा?

उत्तर: पंचायत चुनाव से पहले गहलोत ने दावा किया कि कांग्रेस में सभी नेता साथ हैं और पार्टी एकजुट होकर मैदान में उतर रही है। उन्होंने पहले टिकट वितरण में सिफारिश की बजाय जमीनी हकीकत को प्राथमिकता देने की नसीहत भी दी थी।

प्रश्न 3: सचिन पायलट ने उम्मीदवारों को लेकर क्या कसौटी बताई?

उत्तर: पायलट ने कहा कि इस बार पार्टी मजबूत और साफ छवि वाले उम्मीदवारों को मैदान में उतारेगी। यानी व्यक्तिगत पकड़ और बेदाग रिकॉर्ड वाले चेहरों को प्राथमिकता मिलेगी।

प्रश्न 4: कांग्रेस में हाल में क्या आंतरिक उथल-पुथल हुई है?

उत्तर: 2 अक्टूबर को वरिष्ठ नेता विश्वेंद्र सिंह ने पार्टी छोड़ दी थी, और भाजपा लगातार कांग्रेस की आंतरिक फूट पर हमले कर रही है। इसी पृष्ठभूमि में गहलोत-पायलट के एकजुटता वाले बयान सियासी तौर पर अहम माने जा रहे हैं।

Leave a Comment