भिवाड़ी प्लास्टिक फैक्ट्री आग: आधे घंटे में पूरा प्लांट जलकर राख, 12 से ज्यादा दमकल गाड़ियां जुटीं, कोई जनहानि नहीं

रविवार सुबह भिवाड़ी के खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र की यह घटना हर मजदूर और फैक्ट्री मालिक के लिए एक चेतावनी है। प्लास्टिक के सामान बनाने वाली एक मल्टी स्पेशलिटी कंपनी में लगी आग ने महज आधे घंटे में पूरे प्लांट को अपनी चपेट में ले लिया। भिवाड़ी प्लास्टिक फैक्ट्री आग की इस घटना में सबसे राहत वाली बात यह रही कि किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है। जान बची, लेकिन फैक्ट्री, उसमें रखा कच्चा माल, तैयार सामान और मशीनें सब कुछ खाक हो गया। नुकसान का शुरुआती अनुमान लाखों रुपये का है, हालांकि सही आंकड़ा जांच के बाद ही सामने आएगा।

भिवाड़ी प्लास्टिक फैक्ट्री आग: सुबह 10 बजे से आधे घंटे तक क्या हुआ

भिवाड़ी प्लास्टिक फैक्ट्री आग की शुरुआत रविवार सुबह करीब 10 बजे हुई। अलग-अलग खबरों में समय को लेकर थोड़ा अंतर है — एक रिपोर्ट में 10 बजे और दूसरी में करीब 10:30 बजे का जिक्र है — लेकिन इस बात पर सभी सहमत हैं कि आग लगने के बाद हालात बहुत तेजी से बिगड़े। फैक्ट्री खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में प्लॉट नंबर एफ-621 पर चल रही थी, जहां प्लास्टिक के आइटम बनाए जाते थे और उत्पादन में केमिकल का भी इस्तेमाल होता था। सूचना मिलते ही खुशखेड़ा स्थित रीको फायर स्टेशन को खबर दी गई और आग की भयावहता देखकर भिवाड़ी नगर परिषद व आसपास के इलाकों से भी अतिरिक्त गाड़ियां मंगानी पड़ीं। मौके पर एक दर्जन से ज्यादा दमकल गाड़ियां आग बुझाने में जुटी रहीं।

तथ्य जानकारी
स्थान खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र, भिवाड़ी, जिला खैरथल-तिजारा
फैक्ट्री प्लास्टिक आइटम बनाने वाली मल्टी स्पेशलिटी कंपनी, प्लॉट नंबर एफ-621
आग लगने का समय रविवार सुबह करीब 10 बजे (कुछ रिपोर्टों में 10:30 बजे)
आग फैलने की रफ्तार करीब आधे घंटे में पूरा प्लांट चपेट में
दमकल गाड़ियां एक दर्जन से ज्यादा
जनहानि फिलहाल किसी जनहानि की सूचना नहीं
नुकसान लाखों रुपये की आशंका, सही आकलन बाकी
आग का कारण अभी पता नहीं चला है

प्लास्टिक और केमिकल की आग इतनी तेज क्यों होती है

भिवाड़ी प्लास्टिक फैक्ट्री आग के इतनी तेजी से फैलने की सबसे बड़ी वजह वही चीजें थीं जो उस फैक्ट्री में मौजूद थीं — प्लास्टिक और केमिकल। प्लास्टिक एक बार आग पकड़ ले तो वह पिघलता है, टपकता है और आग को नई सतहों तक पहुंचा देता है, इसलिए आग पूरे शेड में फैल जाती है। केमिकल की मौजूदगी हालात को और खतरनाक बना देती है, क्योंकि कुछ केमिकल गर्म होकर जहरीली गैसें और घना काला धुआं छोड़ते हैं। यही वजह है कि इस हादसे में आसमान में दूर-दूर तक काले धुएं का गुबार दिखाई दिया और आसपास के औद्योगिक क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। दमकल अधिकारी नरेश मीना के अनुसार, प्लास्टिक और केमिकल की बड़ी मात्रा के कारण आग ने कुछ देर में विकराल रूप ले लिया था।

12 से ज्यादा गाड़ियां और पड़ोसी फैक्ट्रियों को बचाने की जंग

इस हादसे में दमकल विभाग की सबसे बड़ी कामयाबी यह रही कि आग एक फैक्ट्री तक ही सीमित रही। खुशखेड़ा में फैक्ट्रियां एक-दूसरे से सटी हुई हैं, इसलिए आग के पड़ोसी इकाइयों तक फैलने का खतरा लगातार बना हुआ था। दमकलकर्मियों ने एक साथ दो मोर्चों पर काम किया — जलते प्लांट पर पानी डालना और आसपास की फैक्ट्रियों को बचाना। यही वजह है कि भिवाड़ी प्लास्टिक फैक्ट्री आग एक प्लांट को निगल गई, लेकिन औद्योगिक क्षेत्र की बड़ी तबाही में नहीं बदली।

अभी तीन सवालों के जवाब बाकी हैं

पहला सवाल — आग लगी कैसे? अब तक कारण पता नहीं चल पाया है। शॉर्ट सर्किट से लेकर केमिकल रिएक्शन तक कई आशंकाएं जताई जा सकती हैं, लेकिन किसी भी आशंका को तथ्य बताना जल्दबाजी होगी। दूसरा सवाल — नुकसान कितना हुआ? पूरा प्लांट जल गया है, इसलिए लाखों रुपये के नुकसान की आशंका है, लेकिन सही आंकड़ा आकलन के बाद ही आएगा। तीसरा और सबसे अहम सवाल — क्या फैक्ट्री में अग्नि सुरक्षा के इंतजाम पर्याप्त थे? राजस्थान में हाल में फैक्ट्री आग की घटनाएं पहले भी हुई हैं — दूदू में सोलर प्लांट की आग में 18 दमकल गाड़ियां जुटी थीं, जयपुर के सांगानेर में गोल्ड चेन फैक्ट्री की आग में दो मजदूरों की मौत हुई थी और पाली की फैक्ट्री आग में मजदूर झुलसे थे। इनसे सबक लेकर भिवाड़ी की इस आग की जांच को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

खुशखेड़ा: दिल्ली से सटा औद्योगिक इलाका क्यों चर्चा में है

भिवाड़ी राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले का प्रमुख औद्योगिक शहर है और खुशखेड़ा उसका एक अहम औद्योगिक क्षेत्र है, जहां रीको के तहत कई इकाइयां चल रही हैं। दिल्ली-एनसीआर से नजदीकी की वजह से यहां प्लास्टिक, ऑटो पार्ट्स, केमिकल और पैकेजिंग से जुड़ी फैक्ट्रियां बड़ी संख्या में हैं और हजारों मजदूर इनमें काम करते हैं। ऐसे में एक फैक्ट्री की आग पूरे औद्योगिक क्षेत्र के लिए चेतावनी बन जाती है। यही वजह है कि खुशखेड़ा जैसे घने औद्योगिक क्षेत्रों में साझा फायर स्टेशन, पानी की पर्याप्त व्यवस्था और इकाइयों के बीच फायर गैप जैसे इंतजाम बेहद जरूरी हैं।

भिवाड़ी प्लास्टिक फैक्ट्री आग से सबक: फैक्ट्री में आग लगे तो क्या करें

भिवाड़ी प्लास्टिक फैक्ट्री आग से एक आम सबक भी निकलता है। आग लगते ही सबसे पहले फायर अलार्म बजाएं और सभी को सुरक्षित निकासी मार्ग से बाहर निकालें — सामान बचाने के चक्कर में अंदर वापस जाना सबसे बड़ी गलती होती है। तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दें और आग का स्थान, वहां मौजूद सामग्री और लोगों की संख्या साफ-साफ बताएं। प्लास्टिक या केमिकल की आग में प्रशिक्षित लोगों के आने तक सुरक्षित दूरी बनाए रखें। धुएं से बचने के लिए मुंह पर गीला कपड़ा रखें और नीचे झुककर बाहर निकलें, क्योंकि धुआं ऊपर उठता है। फैक्ट्री प्रबंधन को नियमित फायर ड्रिल और केमिकल स्टोरेज नियमों का पालन हर हाल में करना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

भिवाड़ी में आग कहां और कब लगी?
खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र के प्लॉट एफ-621 स्थित प्लास्टिक फैक्ट्री में रविवार सुबह करीब 10 बजे आग लगी।

भिवाड़ी प्लास्टिक फैक्ट्री आग में कोई हताहत हुआ है?
फिलहाल किसी जनहानि की सूचना नहीं मिली है।

नुकसान कितना हुआ है?
पूरा प्लांट जलकर राख हो गया है, इसलिए लाखों रुपये के नुकसान की आशंका है। सही आंकड़ा आकलन के बाद ही सामने आएगा।

आग लगने का कारण क्या है?
अभी कारण पता नहीं चला है। आग बुझने के बाद घटनास्थल की जांच से ही कारण स्पष्ट हो सकेगा।

उसी सुबह कोटपूतली-बहरोड़ के केशवाना में भी धानुका कंपनी में भीषण आग लगी थी, जहां आधा दर्जन दमकल गाड़ियां पहुंची थीं। एक ही सुबह दो औद्योगिक आग की घटनाएं बताती हैं कि औद्योगिक सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ाने की जरूरत है। भिवाड़ी प्लास्टिक फैक्ट्री आग की जांच और नुकसान के आकलन पर आगे जो भी जानकारी आएगी, वह इस कहानी का अगला अध्याय होगी। (स्रोत: ईटीवी भारत)

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