चुनाव में दिलचस्प मुकाबले तो बहुत देखे गए हैं, लेकिन बीकानेर के बज्जू पंचायत चुनाव में इस बार ऐसा मोड़ आया है जिसने पूरे इलाके को चौंका दिया है। बज्जू खालसा पंचायत समिति के वार्ड नंबर एक में मुकाबला दो राजनीतिक दलों के बीच ही नहीं, एक ही घर की जेठानी और देवरानी के बीच भी है। घर एक है, परिवार एक है — लेकिन चुनावी मैदान में राहें बिल्कुल अलग-अलग हो गई हैं।
भाजपा ने यहां जेठानी नख्तू देवी चंदेल को टिकट दिया है, तो कांग्रेस ने देवरानी रामप्यारी चंदेल पर भरोसा जताया है। दोनों प्रत्याशी सगे भाइयों की पत्नियां हैं, यानी चुनावी टक्कर घर के आंगन से निकलकर सीधे मैदान में पहुंच गई है। इस मुकाबले ने पूरे वार्ड में जबरदस्त दिलचस्पी पैदा कर दी है और अब सबकी नजरें मतदाताओं के फैसले पर टिकी हैं।
एक ही परिवार की दो बहुएं: कौन, किसके साथ
इस मुकाबले को समझने के लिए पहले चंदेल परिवार के रिश्तों को समझना जरूरी है। दोनों प्रत्याशियों के पति सगे भाई हैं, और दोनों के ससुर एक ही हैं — रामूराम चंदेल। यही वजह है कि ये मुकाबला सिर्फ दो दलों का नहीं, बल्कि एक ही घर की दो पीढ़ियों वाली बहुओं की प्रतिष्ठा का सवाल भी बन गया है।
| प्रत्याशी | रिश्ता | पार्टी | पति का नाम |
|---|---|---|---|
| नख्तू देवी चंदेल | जेठानी (बड़ी बहू) | भारतीय जनता पार्टी | दीपाराम चंदेल |
| रामप्यारी चंदेल | देवरानी (छोटी बहू) | कांग्रेस | राजाराम चंदेल (दीपाराम के छोटे भाई) |
ससुर रामूराम चंदेल के लिए ये स्थिति किसी परीक्षा से कम नहीं। घर की दोनों बहुएं अब अलग-अलग राजनीतिक दलों के प्रत्याशी के रूप में मतदाताओं के बीच जा रही हैं और अपने-अपने पक्ष में वोट की अपील कर रही हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, टिकटों की घोषणा से पहले तक दोनों परिवारों के बीच सब कुछ सामान्य था। लेकिन घोषणा के बाद ये मामला पूरे वार्ड में चर्चा का केंद्र बन गया। गांव की चौपाल से लेकर चाय की थड़ियों तक अब सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है — जेठानी जीतेगी या देवरानी?
आरक्षण ने कैसे पलट दिया चुनावी समीकरण
इस दिलचस्प मुकाबले के पीछे एक बड़ा प्रशासनिक कारण भी है। बज्जू खालसा पंचायत समिति में इस बार प्रधान पद अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित हो गया है। प्रधान पद की दावेदारी के बीच राजनीतिक खेमों में नए समीकरण बने, और पंचायत समिति सदस्य पदों के लिए उपयुक्त प्रत्याशी तलाशने में भी प्रमुख दलों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
आरक्षण लागू होने के बाद दोनों प्रमुख दलों के सामने योग्य उम्मीदवार खोजने की चुनौती थी। इसी प्रक्रिया में वार्ड नंबर एक में भाजपा और कांग्रेस ने एक ही परिवार की दो बहुओं को टिकट दे दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आरक्षण व्यवस्था ने इस बार कई सीटों पर पारंपरिक समीकरण बदले हैं, और बज्जू का ये मुकाबला उसी बदलाव का सबसे अनोखा उदाहरण है।
गौरतलब है कि पंचायतीराज व्यवस्था में महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण का प्रावधान है, जिसके तहत आधे वार्ड महिला आरक्षित होते हैं। कांग्रेस ने जयपुर की तीन पंचायत समितियों में 51 प्रत्याशियों की सूची जारी करते हुए 31 महिलाओं को टिकट दिया था — यानी दोनों ही दल महिला मतदाताओं और महिला नेतृत्व को साधने की रणनीति पर चल रहे हैं।
वार्ड नंबर एक का गणित: तीन गांव, दो प्रत्याशी
बज्जू खालसा पंचायत समिति के वार्ड नंबर एक में तीन राजस्व गांव शामिल हैं — बरसलपुर, भुरासर और गोकुल। इन्हीं तीन गांवों के मतदाता तय करेंगे कि नख्तू देवी और रामप्यारी में से कौन पंचायत समिति का सदस्य बनेगा।
तीनों गांवों में चंदेल परिवार की पैठ मानी जाती है, लेकिन इस बार परिवार के ही दो खेमों में बंट जाने से मतदाताओं के सामने दुविधा खड़ी हो गई है। मतदाता अब प्रत्याशी के काम और व्यक्तित्व के साथ-साथ परिवारिक समीकरणों को भी तौल रहे हैं। स्थानीय जानकारों का कहना है कि ऐसे मुकाबलों में आखिरकार दल का संगठन और प्रचार अभियान ही नतीजा तय करता है — रिश्ते भावनात्मक माहौल तो बनाते हैं, लेकिन वोट अक्सर विकास और विश्वास पर पड़ता है।
इस वार्ड में मतदान की तारीख और प्रक्रिया राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार तय होगी। आधिकारिक चुनाव कार्यक्रम और अधिसूचनाओं के लिए राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान की वेबसाइट देखी जा सकती है।
बीकानेर से जयपुर तक: चुनावी कार्यक्रम की पूरी तस्वीर
बज्जू का ये मुकाबला बीकानेर जिले के पंचायत चुनाव के दूसरे चरण का हिस्सा है। बीकानेर जिले की पांच पंचायत समितियों में नामांकन की संवीक्षा शनिवार को पूरी हो चुकी है और कुल 310 अभ्यर्थियों के नामांकन वैध पाए गए हैं। बीठनोक, बीकानेर, बज्जू खालसा, हदां और कोलायत — इन पांचों समितियों में बज्जू खालसा से 76 अभ्यर्थियों ने 80 नामांकन भरे थे, जिनमें से 59 वैध पाए गए।
| चरण/जिला | अहम तारीख | ब्योरा |
|---|---|---|
| बीकानेर (दूसरा चरण) | 19 अक्टूबर तक | नाम वापसी की अंतिम तिथि, दोपहर 3 बजे तक |
| जयपुर (पहला चरण) | 22 अक्टूबर | 8 पंचायत समितियों में मतदान, सुबह 7 से शाम 6 बजे तक |
| जयपुर | 17 अक्टूबर | 797 बूथों की ईवीएम कमीशनिंग पूरी, 794 मतदान केंद्र |
| राज्यभर | 4 चरणों में | करीब 1.69 लाख जनप्रतिनिधियों का चुनाव |
जयपुर जिले में पंचायती राज चुनाव के पहले चरण के तहत गोविंदगढ़, चौमूं, किशनगढ़-रेनवाल, जोबनेर, झोटवाड़ा, सांभरलेक, दूदू और मौजमाबाद पंचायत समितियों के लिए शनिवार को ईवीएम की कमीशनिंग की गई। जिला निर्वाचन अधिकारी संदेश नायक के निर्देशन में श्रीभवानी निकेतन के फार्मेसी कॉलेज परिसर में ये प्रक्रिया पूरी हुई। मतदान दल 21 अक्टूबर को प्रशिक्षण के बाद रवाना होंगे।
राजस्थान में पंचायतीराज आम चुनाव-2026 कुल चार चरणों में कराए जा रहे हैं। ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों में चुने जाने वाले ये प्रतिनिधि ही गांव-गांव तक विकास योजनाओं को पहुंचाने की सबसे अहम कड़ी होते हैं — सड़क, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और मनरेगा जैसी योजनाओं का क्रियान्वयन इन्हीं के हाथ में होता है।
क्यों दिलचस्प है जेठानी-देवरानी का ये मुकाबला
पंचायत चुनावों में परिवार के सदस्य आमने-सामने आते रहे हैं, लेकिन जेठानी-देवरानी का सीधा मुकाबला, वो भी दो राष्ट्रीय दलों के टिकट पर, अपने आप में दुर्लभ है। ये दिखाता है कि ग्रामीण राजनीति में महिलाओं की भागीदारी अब सिर्फ आरक्षण की मजबूरी नहीं रही — दल अब महिला चेहरों को जीतने वाली रणनीति के तौर पर देख रहे हैं।
चुनावी प्रचार अब अपने चरम पर है। दोनों प्रत्याशियों के सामने अपने-अपने दलों के समर्थकों को एकजुट करने और मतदाताओं का विश्वास जीतने की चुनौती है। नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव चिह्न आवंटित होंगे और उसके बाद मुकाबले का असली चेहरा सामने आएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
बज्जू पंचायत चुनाव में जेठानी-देवरानी का मुकाबला किस वार्ड में है?
बज्जू खालसा पंचायत समिति के वार्ड नंबर एक में ये मुकाबला हो रहा है। इस वार्ड में बरसलपुर, भुरासर और गोकुल — तीन राजस्व गांव शामिल हैं।
नख्तू देवी और रामप्यारी चंदेल का आपस में क्या रिश्ता है?
दोनों एक ही परिवार की बहुएं हैं। नख्तू देवी जेठानी हैं (पति दीपाराम चंदेल) और रामप्यारी देवरानी हैं (पति राजाराम चंदेल, जो दीपाराम के छोटे भाई हैं)। दोनों के ससुर रामूराम चंदेल हैं।
भाजपा और कांग्रेस ने किसे टिकट दिया है?
भाजपा ने जेठानी नख्तू देवी चंदेल को और कांग्रेस ने देवरानी रामप्यारी चंदेल को प्रत्याशी बनाया है।
बज्जू खालसा में प्रधान पद का आरक्षण क्या है?
इस बार बज्जू खालसा पंचायत समिति में प्रधान पद अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित है, जिससे चुनावी समीकरण बदले हैं।
बीकानेर पंचायत चुनाव में नाम वापसी की अंतिम तिथि क्या है?
नाम वापसी की प्रक्रिया 19 अक्टूबर (सोमवार) को दोपहर 3 बजे तक पूरी होगी। इसके बाद चुनाव चिह्न आवंटित किए जाएंगे।