पुष्कर मेला हॉर्स रेस इस बार मेले के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने जा रही है। अंतरराष्ट्रीय पुष्कर मेले में पहली बार घोड़ों की एंड्यूरेंस राइड प्रतियोगिता होगी, जिसमें देसी नस्ल के घोड़े रेतीले धोरों और अरावली की तलहटी में अपनी ताकत और सहनशक्ति आजमाएंगे। दो रेस होंगी — 30 किलोमीटर और 60 किलोमीटर की — और चुने गए छह प्रतिभागियों को नेशनल स्तर पर खेलने का मौका मिलेगा। पशुपालन विभाग और राजस्थान घुड़सवारी संघ मिलकर इस प्रतियोगिता का आयोजन कर रहे हैं, और प्रशासन से इसकी अनुमति भी मिल चुकी है।
पुष्कर पशु मेला अब तक ऊंटों, घोड़ों और बकरियों की खरीद-फरोख्त के लिए जाना जाता रहा है। इस बार आयोजकों ने पर्यटकों को आकर्षित करने और देसी नस्लों को बढ़ावा देने के लिए कुछ नया करने का फैसला किया है — और अगर यह प्रयोग सफल रहा तो आने वाले सालों में पुष्कर में अंतरराष्ट्रीय स्तर की हॉर्स राइडिंग प्रतियोगिता भी हो सकती है।
पुष्कर मेला हॉर्स रेस क्यों है इतनी खास
एंड्यूरेंस राइडिंग में सिर्फ रफ्तार से जीत तय नहीं होती। इसमें घोड़े और सवार दोनों की सहनशक्ति, तालमेल और फिटनेस परखी जाती है। घोड़े को लंबी दूरी तक तय गति से दौड़ना होता है और रास्ते में उसकी सेहत भी जांची जाती है। जो घोड़ा थक जाए या फिट न पाए, उसे रेस से बाहर कर दिया जाता है।
पशुपालन विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. नवीन परिहार ने बताया कि मेले में पहली बार पुष्कर एंड्यूरेंस राइड होगी और इससे किसानों व अश्वपालकों को अच्छा मंच मिलेगा। रूट तय हो चुका है और प्रशासनिक अनुमति मिल चुकी है।
इस प्रतियोगिता में सिर्फ देसी नस्ल के घोड़े ही हिस्सा ले सकेंगे — मारवाड़ी, काठियावाड़ी और सिंधी-कच्छी नस्ल के घोड़े धोरों में सरपट दौड़ेंगे। रेस से पहले हर घोड़े का स्वास्थ्य परीक्षण होगा और प्रतियोगिता के दौरान पशुपालन विभाग घोड़ों के स्वास्थ्य और खान-पान का पूरा ध्यान रखेगा।
कैसी होगी रेस: रूट, राउंड और सख्त नियम
रेस की शुरुआत मोतीसर रोड स्थित चारागाह भूमि से होगी। हेलीपैड पर घोड़ों की जांच की जाएगी, इसके बाद रेस आरामबाग, धोरों के पीछे बने रिसॉर्ट और सवाईपुरा गांव के श्मशान के पास से होते हुए पिचोलिया गांव और वन भूमि से अरावली पर्वत तक राउंड करेगी। पूरा ट्रैक 15 किलोमीटर का है — 30 किलोमीटर की रेस में इसके दो राउंड और 60 किलोमीटर की रेस में चार राउंड लगाने होंगे।
रेस के नियम काफी सख्त हैं। एक घंटे में घोड़े को सिर्फ 15 किलोमीटर ही दौड़ना होगा। इससे ज्यादा तेज दौड़ाने पर घोड़े को पांच साल के लिए प्रतियोगिता से बाहर कर दिया जाएगा, ताकि कोई सवार घोड़े को उसकी क्षमता से ज्यादा न दौड़ाए।
रेस में घुड़सवार टीम के रूप में या व्यक्तिगत तौर पर भी शामिल हो सकेंगे। एक टीम में पांच सदस्य होंगे, जबकि व्यक्तिगत राइड में 50 घुड़सवार हिस्सा लेंगे। प्रतियोगिता के बाद चिन्हित छह प्रतिभागियों को नेशनल स्तर के लिए क्वालीफाई किया जाएगा — पुष्कर के धोरों से निकला विजेता सीधे राष्ट्रीय मंच तक पहुंच सकेगा।
| तथ्य | जानकारी |
|---|---|
| प्रतियोगिता | पुष्कर मेला हॉर्स रेस (एंड्यूरेंस राइड), पहली बार |
| रेस की दूरी | 30 किलोमीटर और 60 किलोमीटर (दो रेस) |
| ट्रैक | 15 किलोमीटर, 30 किमी में 2 राउंड, 60 किमी में 4 राउंड |
| रूट | मोतीसर रोड चारागाह भूमि से शुरू, हेलीपैड, आरामबाग, सवाईपुरा, पिचोलिया होते हुए अरावली पर्वत तक |
| गति सीमा | 15 किलोमीटर प्रति घंटा; उल्लंघन पर 5 साल का प्रतिबंध |
| भागीदारी | 5 सदस्यीय टीमें और 50 व्यक्तिगत घुड़सवार |
| नस्लें | मारवाड़ी, काठियावाड़ी, सिंधी-कच्छी (सिर्फ देसी नस्ल) |
| आयोजक | पशुपालन विभाग और राजस्थान घुड़सवारी संघ |
| मेला अवधि | 10 से 26 नवंबर 2026; औपचारिक कार्यक्रम 17 से 24 नवंबर |
मारवाड़ी, काठियावाड़ी और कच्छी-सिंधी: तीन देसी नस्लों की खासियत
मारवाड़ी नस्ल के घोड़े अपने अंदर की ओर मुड़े धनुषाकार कानों, तेज गति और मजबूत कद-काठी के लिए जाने जाते हैं। ये रेगिस्तानी इलाकों में बिना थके लंबी दूरी तय कर सकते हैं और इनकी रेवाल चाल इनकी सबसे बड़ी पहचान है।
काठियावाड़ी नस्ल के घोड़े राजकोट, जूनागढ़ और अमरेली क्षेत्र के साथ-साथ राजस्थान-महाराष्ट्र के सीमावर्ती इलाकों में पाए जाते हैं। इनके मुड़े हुए कान, मजबूत बनावट और शानदार रेवाल चाल इन्हें खास बनाती है।
कच्छी-सिंधी नस्ल कच्छ सहित बाड़मेर और जैसलमेर के सीमावर्ती इलाकों में पाई जाती है। ये घोड़े सूखे और रेतीले क्षेत्रों में कम पानी और कम भोजन में भी रह सकते हैं। इनकी रोमन नाक और तेज रफ्तार इनकी पहचान है।
अश्वपालकों को क्या फायदा मिलेगा
इस प्रतियोगिता से ग्रामीण इलाकों के अश्वपालकों को सीधा फायदा होगा। उन्हें अपने घोड़ों का प्रदर्शन दिखाने और देखने का मौका मिलेगा, देसी नस्ल के बारे में जानकारी मिलेगी और घोड़ों की खरीद-फरोख्त में भी फायदा होगा।
पर्यटकों के लिहाज से भी यह रेस मेले का बड़ा आकर्षण बनेगी। पुष्कर मेले में इस बार विदेशी पर्यटकों के लिए फोटोग्राफी प्रतियोगिता भी रखी गई है, और पुष्कर मेला 2026 में विदेशी पर्यटकों के लिए फोटोग्राफी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले पर्यटक धोरों में दौड़ते घोड़ों की तस्वीरें भी खींच सकेंगे। मेले के दौरान पुष्कर कार्तिक स्नान के लिए भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।
पुष्कर मेला 2026: तारीखें और पर्यटकों के लिए जानकारी
पुष्कर मेले की अनौपचारिक शुरुआत 10 नवंबर से होगी और मेला 26 नवंबर तक चलेगा। पर्यटन विभाग के मुख्य आयोजन 17 से 24 नवंबर के बीच होंगे, और हॉर्स रेस इन्हीं औपचारिक कार्यक्रमों के दौरान कराई जाएगी। मेले में ऊंटों और घोड़ों की खरीद-फरोख्त के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोक संगीत और पारंपरिक खेल भी होंगे।
पुष्कर पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन अजमेर है, जो पुष्कर से करीब 14 किलोमीटर दूर है। अजमेर से बस और टैक्सी आसानी से मिल जाती है। रुकने के लिए पुष्कर में होटल, धर्मशाला और टेंट कैंप की व्यवस्था रहती है, लेकिन मेले के चरम दिनों में पहले से बुकिंग कराना बेहतर रहता है।
रेस देखने जाना चाहते हैं तो सुबह का समय सबसे अच्छा रहेगा, क्योंकि रेस मोतीसर रोड स्थित चारागाह भूमि से शुरू होगी। धूप से बचने के लिए टोपी और पानी की बोतल साथ रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पुष्कर मेला हॉर्स रेस कब होगी?
मेले के औपचारिक कार्यक्रमों (17 से 24 नवंबर 2026) के दौरान। मेला 10 नवंबर से शुरू होकर 26 नवंबर तक चलेगा।
रेस में कौन से घोड़े हिस्सा ले सकते हैं?
सिर्फ देसी नस्ल के घोड़े — मारवाड़ी, काठियावाड़ी और सिंधी-कच्छी नस्ल। रेस से पहले हर घोड़े का स्वास्थ्य परीक्षण होगा।
60 किलोमीटर की रेस कैसे पूरी होगी?
15 किलोमीटर के ट्रैक के चार राउंड लगाकर 60 किलोमीटर की दूरी पूरी होगी। 30 किलोमीटर की रेस में दो राउंड लगाने होंगे। गति सीमा 15 किलोमीटर प्रति घंटा है।
रेस जीतने वालों को क्या मिलेगा?
चिन्हित छह प्रतिभागियों को नेशनल स्तर के लिए क्वालीफाई किया जाएगा। अश्वपालकों को अपने घोड़ों की खरीद-फरोख्त और पहचान का फायदा भी मिलेगा।
स्रोत: पत्रिका, अजमेर