राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू इस साल नवंबर में एक बिल्कुल नया नज़ारा पेश करने जा रहा है। यहां पहली बार दो दिवसीय ‘माउंट आबू बर्ड फेस्टिवल-2026’ आयोजित होगा, जिसमें पक्षियों और जैव विविधता को समर्पित तमाम कार्यक्रम होंगे। 28 और 29 नवंबर को होने वाले इस महोत्सव में देशभर के पक्षी विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और राजस्थान के विभिन्न विद्यालयों के करीब 400 विद्यार्थी हिस्सा लेंगे। आयोजन की खास बात यह है कि इसका मुख्य केंद्र केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की आंतरिक सुरक्षा अकादमी का मैदान होगा, जहां प्रशासन, वन विभाग और पर्यावरण संगठनों के समन्वय से तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।
यह महोत्सव सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि माउंट आबू को ईको-टूरिज्म के नक्शे पर एक नई पहचान देने की कोशिश है। आमतौर पर पर्यटक माउंट आबू को नक्की झील और दिलवाड़ा मंदिर के लिए जानते हैं, लेकिन अरावली की इन पहाड़ियों में पक्षियों की दुनिया भी उतनी ही समृद्ध है।
माउंट आबू बर्ड फेस्टिवल में क्या-क्या होगा: बर्ड वॉक से लेकर प्रश्नोत्तरी तक
महोत्सव के दो दिनों में विद्यार्थियों और पक्षी प्रेमियों के लिए कई तरह की गतिविधियां रखी गई हैं।
पक्षी विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में बर्ड वॉक और बर्ड ट्रेल का आयोजन होगा। इसमें प्रतिभागी सुबह-सुबह विशेषज्ञों के साथ प्रकृति की सैर पर निकलेंगे और अपने प्राकृतिक परिवेश में पक्षियों को पहचानना सीखेंगे।
विद्यार्थियों के लिए चित्रकला और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इन प्रतियोगिताओं का मकसद बच्चों में पक्षियों और पर्यावरण के प्रति जिज्ञासा जगाना है। पारिस्थितिकी तंत्र में पक्षियों की भूमिका और उनके संरक्षण पर विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि बच्चे सिर्फ प्रतियोगिता में हिस्सा न लें, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी अपने साथ ले जाएं।
कार्यक्रम की पूरी रूपरेखा एक नज़र में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| महोत्सव का नाम | माउंट आबू बर्ड फेस्टिवल-2026 |
| तारीख | 28 और 29 नवंबर 2026 (दो दिवसीय) |
| मुख्य आयोजन स्थल | सीआरपीएफ आंतरिक सुरक्षा अकादमी मैदान, माउंट आबू |
| आयोजक | ग्रीन पीपल सोसायटी (उदयपुर) |
| सहयोगी | डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया, राजस्थान वन विभाग, सीआरपीएफ अकादमी |
| प्रतिभागी | पक्षी विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और करीब 400 विद्यार्थी |
| मुख्य गतिविधियां | बर्ड वॉक, बर्ड ट्रेल, चित्रकला प्रतियोगिता, प्रश्नोत्तरी |
प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा, अधिकारियों से मुलाकात
महोत्सव की तैयारियों को लेकर ग्रीन पीपल सोसायटी उदयपुर के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में माउंट आबू का दौरा किया और माउंट आबू बर्ड फेस्टिवल की प्रशासनिक रूपरेखा पर चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने उपखंड अधिकारी राहुल श्रीवास्तव से मुलाकात कर प्रशासनिक समन्वय और गतिविधियों की रूपरेखा पर विस्तार से बात की।
बैठक में सोसायटी के अध्यक्ष राहुल भटनागर, उपाध्यक्ष विक्रम सिंह और इंद्रजीत माथुर ने महोत्सव के उद्देश्यों और आयोजन की योजना की जानकारी दी। स्थल चयन को लेकर सीआरपीएफ के कमांडेंट महेंद्र कुमार और डीआईजी भरत भूषण के साथ पहले ही विस्तृत चर्चा हो चुकी है, जिसके बाद अकादमी के मैदान को मुख्य आयोजन स्थल के रूप में तय किया गया।
यह आयोजन ग्रीन पीपल सोसायटी के तत्वावधान में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया, राजस्थान वन विभाग और सीआरपीएफ अकादमी के सहयोग से होगा।
माउंट आबू का ईको-टूरिज्म: पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
माउंट आबू राजस्थान का इकलौता हिल स्टेशन है और अरावली पर्वत श्रृंखला में बसा यह शहर साल भर पर्यटकों को आकर्षित करता है। अब बर्ड फेस्टिवल जैसे आयोजनों से यहां का पर्यटन सिर्फ मौसमी सैर-सपाटे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रकृति और जैव विविधता के अनुभव से भी जुड़ेगा।
राजस्थान में वन्यजीव पर्यटन का दायरा लगातार बढ़ रहा है। हाल ही में झालाना में लेपर्ड सफारी जैसे अनुभवों ने पर्यटकों को आकर्षित किया है, और अब माउंट आबू का बर्ड फेस्टिवल इस कड़ी को और मजबूत करेगा। राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार नए प्रयोग हो रहे हैं — शाही रेलगाड़ी पैलेस ऑन व्हील्स के जरिए विदेशी पर्यटक राजस्थान की धरोहर से जुड़ रहे हैं, तो भरतपुर में पशु मेले जैसी परंपरागत आयोजन ग्रामीण संस्कृति को जिंदा रखे हुए हैं।
बर्ड फेस्टिवल इस परिप्रेक्ष्य में एक नया अध्याय है, क्योंकि यह पर्यटन को संरक्षण से जोड़ता है। माउंट आबू बर्ड फेस्टिवल में जब 400 विद्यार्थी पक्षियों को पहचानना सीखेंगे, तो वे सिर्फ दर्शक नहीं रहेंगे — वे पर्यावरण के प्रति संवेदनशील नागरिक बनेंगे।
माउंट आबू बर्ड फेस्टिवल क्यों खास है: पक्षी संरक्षण का संदेश
पक्षी किसी भी पारिस्थितिकी तंत्र की सेहत के सबसे संवेदनशील संकेतक माने जाते हैं। जहां पक्षियों की विविधता और संख्या अच्छी होती है, वहां पर्यावरण संतुलन भी बेहतर होता है। माउंट आबू की अरावली पहाड़ियां, झीलें और जंगल पक्षियों के लिए प्राकृतिक आवास हैं, लेकिन बढ़ते पर्यटन और शहरीकरण का दबाव इन आवासों पर भी पड़ रहा है।
ऐसे में बर्ड फेस्टिवल दो काम एक साथ करेगा — एक ओर यह पर्यटकों को पक्षियों की दुनिया से जोड़ेगा, दूसरी ओर स्थानीय समुदाय और बच्चों में संरक्षण की भावना जगाएगा। विशेषज्ञों की मौजूदगी से यह महोत्सव सिर्फ मनोरंजन का मंच नहीं, बल्कि वैज्ञानिक जागरूकता का केंद्र भी बनेगा।
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन की भागीदारी इस आयोजन की गंभीरता को दर्शाती है। संगठन के बारे में अधिक जानकारी के लिए WWF-India की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है।
पर्यटकों के लिए उपयोगी जानकारी
अगर आप भी माउंट आबू बर्ड फेस्टिवल का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो नवंबर का आखिरी सप्ताह माउंट आबू घूमने का बेहतरीन समय है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और पहाड़ियों में हरियाली बनी रहती है। माउंट आबू का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन आबू रोड है, जबकि नजदीकी हवाई अड्डा उदयपुर में है। यहां से सड़क मार्ग से माउंट आबू आसानी से पहुंचा जा सकता है।
महोत्सव के दिनों में माउंट आबू में पर्यटकों की भीड़ बढ़ने की संभावना है, इसलिए होटल और ठहरने की बुकिंग पहले से करा लेना समझदारी होगी। बर्ड वॉक जैसे कार्यक्रम सुबह जल्दी शुरू होते हैं, इसलिए प्रतिभागियों को समय पर पहुंचने की सलाह दी जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न: माउंट आबू बर्ड फेस्टिवल कब और कहां आयोजित होगा?
उत्तर: यह दो दिवसीय महोत्सव 28 और 29 नवंबर 2026 को माउंट आबू में आयोजित होगा। इसका मुख्य आयोजन सीआरपीएफ आंतरिक सुरक्षा अकादमी के मैदान में होगा।
प्रश्न: इस महोत्सव में कौन-कौन भाग ले सकता है?
उत्तर: महोत्सव में पक्षी विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और राजस्थान के विभिन्न विद्यालयों के करीब 400 विद्यार्थी भाग लेंगे। यह आयोजन ग्रीन पीपल सोसायटी के तत्वावधान में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया, राजस्थान वन विभाग और सीआरपीएफ अकादमी के सहयोग से हो रहा है।
प्रश्न: महोत्सव में कौन-कौन सी गतिविधियां होंगी?
उत्तर: विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में बर्ड वॉक और बर्ड ट्रेल आयोजित होंगे। इसके अलावा विद्यार्थियों के लिए चित्रकला और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं रखी गई हैं। पारिस्थितिकी तंत्र में पक्षियों की भूमिका और उनके संरक्षण पर विशेष जोर दिया जाएगा।
प्रश्न: माउंट आबू पहुंचने का सबसे आसान तरीका क्या है?
उत्तर: माउंट आबू का नजदीकी रेलवे स्टेशन आबू रोड है और नजदीकी हवाई अड्डा उदयपुर में स्थित है। दोनों जगहों से सड़क मार्ग के जरिए माउंट आबू पहुंचा जा सकता है। नवंबर के आखिरी सप्ताह में यहां का मौसम पर्यटन के लिए सबसे उपयुक्त रहता है।