फलोदी बोरवेल हादसा ने एक बार फिर खुले बोरवेल की खतरनाक हकीकत सामने रख दी है। गुरुवार (15 अक्टूबर 2026) को लोहावट क्षेत्र में 9 साल का भोमाराम अपने खेत के करीब 1050 फीट गहरे खुले बोरवेल में जा गिरा। राहत की बात ये है कि बच्चा करीब 640 फीट पर अटका है और कैमरे में उसकी हलचल दिखी है — यानी वो जिंदा है। SDRF, पुलिस और प्रशासन की टीमें युद्धस्तर पर रेस्क्यू में जुटी हैं, बोरवेल में ऑक्सीजन पहुंचाने की कोशिशें जारी हैं। खबर फैलते ही पूनियों की ढाणी में सैकड़ों ग्रामीण घटनास्थल पर जुट गए हैं। भोमाराम अपने माता-पिता का इकलौता बेटा है, जिससे परिवार का दुख और गहरा हो गया है।
फलोदी बोरवेल हादसा: 640 फीट पर फंसा मासूम, कैमरे में दिखी हलचल
इस हादसे में सबसे उम्मीद भरी खबर रेस्क्यू टीम की ओर से आई है। बचाव दल ने बोरवेल के अंदर कैमरा उतारकर बच्चे की स्थिति का पता लगाने की कोशिश की, और जांच के दौरान मासूम के मूवमेंट की जानकारी सामने आई। इतनी गहराई पर फंसे बच्चे के लिए सबसे बड़ा खतरा ऑक्सीजन की कमी होती है, इसलिए टीम पाइप के जरिए नीचे लगातार ऑक्सीजन पहुंचा रही है।
घटनास्थल पर SDRF की विशेष टीम के साथ मतोड़ा थाना पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारी मौजूद हैं। मौके पर जुटी ग्रामीणों की भीड़ बचाव अभियान पर नजर बनाए हुए है और हर कोई मासूम के सकुशल बाहर निकलने की दुआ कर रहा है।
मरम्मत का काम चल रहा था, पिता पास में ही थे — फिर भी हो गया हादसा
ये हादसा लोहावट पंचायत समिति क्षेत्र की ग्राम पंचायत नौसर के तहत पूनियों की ढाणी में हुआ। जानकारी के अनुसार, पांचाराम भील के खेत में लगा नलकूप खराब हो गया था। इसकी मरम्मत के लिए खेत में बोरिंग मशीन बुलाई गई थी — पंप को बाहर निकाला गया था और बोरवेल खुला पड़ा था। बच्चे के पिता मशीन के पास ही काम कर रहे थे और 9 वर्षीय भोमाराम भी आसपास खेल रहा था। इसी दौरान अचानक मासूम खुले बोरवेल के गड्ढे में जा गिरा।
पिता कुछ ही कदम की दूरी पर थे, फिर भी एक पल में हादसा हो गया। यही खुले बोरवेल का सबसे बड़ा खतरा है — ये दिखाई नहीं देता और बच्चा कब उसमें समा जाए, किसी को पता नहीं चलता। हादसे के बाद खेत में चीख-पुकार मच गई और सूचना मिलते ही मतोड़ा थाना पुलिस व प्रशासन की टीम घटनास्थल पर पहुंच गई।
रेस्क्यू में कौन-कौन, और क्यों है इतनी गहराई पर बचाव मुश्किल
हादसे के बाद बचाव अभियान में SDRF, मतोड़ा थाना पुलिस और जिला प्रशासन एक साथ काम कर रहे हैं। ऐसे मामलों में आमतौर पर बोरवेल के बगल में समानांतर गड्ढा खोदकर सुरंग के जरिए बच्चे तक पहुंचा जाता है, साथ ही ऊपर से ऑक्सीजन पाइप और कैमरा उतारा जाता है।
640 फीट की गहराई पर रेस्क्यू अपने आप में बड़ी चुनौती है — नीचे रोशनी नहीं होती और मिट्टी धंसने का खतरा रहता है, इसलिए बचाव दल हर कदम फूंक-फूंककर रखता है। उम्मीद की किरण ये है कि कुछ समय पहले अलवर में भी ऐसा ही हादसा हुआ था, जहां बोरवेल में गिरे 8 साल के मासूम को SDRF ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया था। सही रणनीति से ऐसे मामलों में बच्चे की जान बचाई जा सकती है।
फलोदी बोरवेल हादसा से सबक: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश, फिर भी लापरवाही
फलोदी बोरवेल हादसा कोई पहली घटना नहीं है। देश के अलग-अलग हिस्सों में खुले बोरवेल में बच्चों के गिरने की घटनाएं होती रही हैं। इन्हीं हादसों को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सालों पहले साफ निर्देश दिए थे — हर बोरवेल को इस्तेमाल के बाद ढककर या सील करके रखना होगा, चारों ओर बाड़ लगानी होगी, चेतावनी बोर्ड लगाना होगा और जिला प्रशासन के पास पंजीकरण कराना होगा। मरम्मत के दौरान भी खुले बोरवेल के पास बच्चों को नहीं आने देना चाहिए।
हकीकत ये है कि खेतों में इन नियमों का पालन अक्सर नहीं होता। बोरवेल खराब होने पर पंप निकालकर उसे ऐसे ही खुला छोड़ दिया जाता है। नियम कागजों में हैं, लेकिन खेत तक नहीं पहुंचे — और इसकी कीमत मासूम बच्चे चुका रहे हैं।
किसान परिवारों के लिए 6 जरूरी सावधानियां
- मरम्मत के दौरान बोरवेल कभी खुला न छोड़ें — काम रुकते ही उसे ढक दें या भारी पटिया रख दें।
- बोरवेल के चारों ओर मजबूत बाड़ या जाली लगाएं, ताकि बच्चे पास न जा सकें।
- बंद या सूखे बोरवेल को मिट्टी-रेत से पूरी तरह भरकर सील कर दें — आधा-अधूरा ढका बोरवेल सबसे खतरनाक होता है।
- मरम्मत के समय बच्चों को खेत से दूर रखें, बोरिंग मशीन के पास खेलने न दें।
- गांव के सभी बोरवेल का ब्योरा पंचायत के पास दर्ज कराएं।
- हादसा होने पर तुरंत पुलिस-प्रशासन को सूचना दें — खुद बोरवेल में उतरना जानलेवा हो सकता है।
घटना के प्रमुख तथ्य एक नजर में
| तथ्य | जानकारी |
|---|---|
| हादसे की तारीख | 15 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) |
| स्थान | पूनियों की ढाणी, ग्राम पंचायत नौसर, लोहावट, फलोदी |
| बच्चा | भोमाराम (9 वर्ष), पुत्र पांचाराम भील — माता-पिता का इकलौता बेटा |
| बोरवेल की कुल गहराई | करीब 1050 फीट |
| बच्चा कहां फंसा है | करीब 640 फीट की गहराई पर |
| हादसे की वजह | नलकूप की मरम्मत के लिए बोरिंग मशीन आई थी, बोरवेल खुला था |
| रेस्क्यू टीमें | SDRF, मतोड़ा थाना पुलिस, जिला प्रशासन |
| मौजूदा स्थिति | कैमरे में बच्चे की हलचल मिली, ऑक्सीजन पहुंचाने के प्रयास जारी |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
फलोदी बोरवेल हादसा कब और कहां हुआ?
गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को फलोदी जिले के लोहावट क्षेत्र की ग्राम पंचायत नौसर के तहत पूनियों की ढाणी में।
बोरवेल में गिरा बच्चा कौन है, उसकी हालत कैसी है?
भोमाराम (9 वर्ष), पुत्र पांचाराम भील। वो करीब 640 फीट पर फंसा है, लेकिन कैमरे में उसकी हलचल देखी गई है — वो जीवित है और रेस्क्यू जारी है।
रेस्क्यू में अभी क्या हो रहा है?
SDRF, मतोड़ा पुलिस और जिला प्रशासन मौके पर हैं। ऑक्सीजन पाइप और कैमरा उतारा गया है, समानांतर खुदाई समेत सभी विकल्पों पर काम चल रहा है।
खुले बोरवेल को लेकर क्या नियम हैं?
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार हर बोरवेल को ढककर/सील करके रखना, बाड़ लगाना, चेतावनी बोर्ड लगाना और जिला प्रशासन के पास पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
फलोदी में ही कुछ दिन पहले वायुसेना का ड्रोन भी खेत में गिरा था, जिसने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया था। वहीं पश्चिमी विक्षोभ के असर से 16 अक्टूबर तक प्रदेश में बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट भी जारी है — खेतों में काम करने वाले किसानों के लिए ये दोनों खबरें सतर्क रहने की चेतावनी हैं। इस हादसे की विस्तृत रिपोर्ट ABP Live पर भी पढ़ी जा सकती है।