किशनगढ़ औचक जांच: पैकेजिंग लाइसेंस के बिना बेच रहे थे सामान, दो फर्मों पर 5-5 हजार का चालान


धनतेरस और दिवाली की खरीदारी अपने चरम पर है, और इसी बीच अजमेर जिले के किशनगढ़ से उपभोक्ताओं के हक में बड़ी खबर आई है। किशनगढ़ औचक जांच में विधिक माप विज्ञान प्रकोष्ठ ने मंगलवार को कई प्रतिष्ठानों पर छापा मारा — दो फर्मों के पास जरूरी पैकेजिंग लाइसेंस ही नहीं मिला, दोनों पर 5-5 हजार रुपये का ऑनलाइन चालान काटा गया, और एक प्रतिष्ठान को पैकेट पर वजन अंकित न करने पर सुधार नोटिस थमाया गया।

यह किसी एक दिन की औपचारिकता नहीं है। मंत्री के निर्देश पर प्रदेशभर में पैकेजबंद वस्तुओं की जांच का विशेष अभियान चल रहा है, और किशनगढ़ की यह कार्रवाई उसी कड़ी का हिस्सा है। त्योहारी सीजन में यह खबर हर उस ग्राहक के लिए अहम है जो पैकेटबंद सामान खरीदता है।

किशनगढ़ औचक जांच में क्या-क्या पकड़ा गया

तीन दिवसीय अभियान के तहत मंगलवार को टीम ने किशनगढ़ शहर की इलेक्ट्रॉनिक दुकानों और पाटन औद्योगिक क्षेत्र के प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया।

इलेक्ट्रॉनिक दुकानों में लाइसेंस की कमी: ओसवाल इलेक्ट्रॉनिक और एलईडी लाइट बनाने वाली फर्म रूहानिका एक्सपोर्ट सॉल्यूशंस की जांच पैकेज्ड कमोडिटीज नियम, 2011 के तहत हुई। दोनों के पास पैकेजिंग का आवश्यक लाइसेंस नहीं मिला — प्रत्येक पर 5,000 रुपये का ऑनलाइन चालान काटा गया और संचालकों को औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए गए।

पाटन में वजन की जांच: रतन औद्योगिक क्षेत्र में पृथ्नेश रिसोर्स मूंग दाल मिल और कॉटन निर्माता स्पैकेम सर्जिकल का निरीक्षण हुआ। 50 पैकेट तौले गए — औसत वजन सही मिला और कांटे भी सत्यापित पाए गए। लेकिन कॉटन के पैकेट पर वजन का विवरण अंकित नहीं था, इसलिए सुधार नोटिस जारी कर सात दिन में सभी पैकेटों पर वजन अंकित करने के निर्देश दिए गए।

सहायक नियंत्रक भावना दयाल के अनुसार, किशनगढ़ औचक जांच का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ता को निर्धारित मात्रा और जरूरी पैकेजिंग जानकारी सही रूप में मिले।

किशनगढ़ औचक जांच के पीछे: पूरे प्रदेश में चल रहा विशेष अभियान

यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई। मंत्री सुमित गोदारा के निर्देश पर पैकेजबंद वस्तुओं की जांच का विशेष अभियान दो चरणों में चल रहा है — पहला 5 से 7 अक्टूबर तक चला, दूसरा 12 से 14 अक्टूबर तक जारी है।

अजमेर में इससे पहले भी कार्रवाई हो चुकी है: कैलाश स्पाइस इंडस्ट्रीज में असत्यापित तौल मशीन पर धारा 24/33 के तहत 10 हजार रुपये का चालान, और सुरेन्द्र डेयरी, नटराज फूड प्रोडक्ट, बालाजी फ्लोर मिल व गुरुकोल फूड इंडस्ट्रीज पर घोषणाएं अधूरी मिलने पर कुल 20 हजार रुपये के चालान। किशनगढ़ औचक जांच इसी अभियान की ताजा कड़ी है, और विभाग ने कहा है कि निरीक्षण आगे भी जारी रहेंगे।

पैकेटबंद सामान पर ये जानकारियां लिखना क्यों अनिवार्य है

विधिक माप विज्ञान अधिनियम, 2009 और पैकेज्ड कमोडिटीज नियम, 2011 के तहत हर पैकेटबंद वस्तु पर ये घोषणाएं जरूरी हैं — इन्हीं की जांच किशनगढ़ औचक जांच में हुई:

पैकेट पर अनिवार्य जानकारी क्यों जरूरी है
निर्माता/पैकर का नाम-पता खराब सामान पर जिम्मेदारी तय हो
शुद्ध मात्रा (नेट क्वांटिटी) जितना लिखा, उतना सामान मिले
अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) मनमाना दाम न वसूला जा सके
पैकेजिंग की तिथि पुराना/एक्सपायर्ड सामान न बिके
उपभोक्ता सेवा का संपर्क शिकायत के लिए पता-फोन उपलब्ध हो

जिन दो फर्मों पर चालान हुआ, वे बिना वैध लाइसेंस के पैकेजबंद कारोबार कर रही थीं — और स्पैकेम सर्जिकल के पैकेटों पर वजन न लिखना भी इसी नियम का उल्लंघन है।

दिवाली की खरीदारी में आप खुद इन बातों का रखें ध्यान

त्योहारी सीजन में सोना-चांदी से लेकर इलेक्ट्रॉनिक सामान तक की खरीदारी बढ़ जाती है। ठगी से बचने के लिए:

  1. सील जांचें — टूटी सील मतलब छेड़छाड़ की आशंका।
  2. MRP से ज्यादा न दें — UPI भुगतान करते समय भी बिल में MRP मिलाएं।
  3. नेट वजन पढ़ें — बड़े अंतर पर सवाल उठाएं।
  4. एक्सपायरी देखें — खासकर खाद्य पदार्थों और दवाओं पर।
  5. बिल हमेशा लें — बिना बिल शिकायत साबित करना मुश्किल।
  6. कांटा शून्य पर — खुला सामान तौलते समय देखना आपका अधिकार है।

ठगी लगे तो शिकायत कहां और कैसे करें

पैकेट में सामान कम हो, MRP से ज्यादा दाम वसूला जाए या कांटा गलत तौले — तो चुप न रहें:

  • 1915 — राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (टोल-फ्री, हिंदी में मदद)।
  • e-Daakhil पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत; जानकारी consumeraffairs.nic.in पर।
  • जिला उपभोक्ता आयोग में लिखित शिकायत — 50 लाख रुपये तक के मामले जिला स्तर पर।
  • विधिक माप विज्ञान कार्यालय में सीधी शिकायत — तौल-पैकेजिंग मामलों में यही विभाग कार्रवाई करता है, जैसा किशनगढ़ औचक जांच में हुआ।

बिल, पैकेट की फोटो और दुकान का नाम-पता जरूर रखें — यही सबसे मजबूत सबूत है।

नियम तोड़ने पर कितनी सजा — एक नजर में

  • पैकेजिंग लाइसेंस नहीं: किशनगढ़ में दो फर्मों पर 5-5 हजार रुपये का ऑनलाइन चालान।
  • असत्यापित तौल मशीन: अजमेर में 10 हजार रुपये का चालान (धारा 24/33)।
  • घोषणा अधूरी: अजमेर की चार फर्मों पर कुल 20 हजार रुपये के चालान।
  • पहली चूक पर: सुधार नोटिस — जैसे स्पैकेम सर्जिकल को 7 दिन का समय।
  • दोबारा उल्लंघन: जुर्माना बढ़ता है, लाइसेंस निलंबन तक की कार्रवाई संभव।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

किशनगढ़ में किन फर्मों पर चालान हुआ और क्यों?
ओसवाल इलेक्ट्रॉनिक और रूहानिका एक्सपोर्ट सॉल्यूशंस — दोनों के पास पैकेज्ड कमोडिटीज नियम, 2011 के तहत जरूरी पैकेजिंग लाइसेंस नहीं मिला, इसलिए प्रत्येक पर 5,000 रुपये का ऑनलाइन चालान किया गया।

पैकेजिंग लाइसेंस क्या होता है?
विधिक माप विज्ञान विभाग की अनुमति, जो तय करती है कि फर्म पैकेट पर सही मात्रा, MRP और अनिवार्य घोषणाएं अंकित करेगी। बिना लाइसेंस पैकेजिंग पर ठगी का खतरा रहता है।

MRP से ज्यादा दाम मांगे तो क्या करें?
यह गैरकानूनी है। पहले सही दाम लगाने को कहें; न माने तो 1915 हेल्पलाइन या e-Daakhil पर शिकायत करें — बिल सबसे बड़ा सबूत होगा।

उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर क्या है?
1915 (टोल-फ्री)। ऑनलाइन शिकायत के लिए consumeraffairs.nic.in भी उपलब्ध है।


दिवाली के खरीदारी सीजन में किशनगढ़ औचक जांच एक साफ संदेश देती है — उपभोक्ता हितों से खिलवाड़ पर अब सीधी कार्रवाई होगी। लेकिन सिर्फ विभाग के भरोसे न रहें; जागरूक ग्राहक बनना ठगी से बचने का सबसे पक्का तरीका है। पैकेट उठाएं तो लेबल पढ़ें, दाम दें तो बिल लें — और गड़बड़ी दिखे तो शिकायत जरूर करें।

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