सारस मेला राजस्थान की बड़ी जीत: श्रीनगर में बिक्री में अव्वल रहा प्रदेश

राजस्थान की ग्रामीण महिलाओं के हाथ के हुनर ने एक बार फिर देश भर में अपनी धाक जमा दी है। सारस मेला राजस्थान के लिए इस बार सिर्फ भागीदारी की खबर नहीं, बल्कि जीत की खबर लेकर आया है — श्रीनगर में संपन्न हुए दस दिवसीय मेले में बिक्री के मामले में राजस्थान को सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला राज्य चुना गया है। देश के 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 200 से ज्यादा महिला कारीगरों और उद्यमियों के बीच यह उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि यहां मुकाबला सिर्फ उत्पादों का नहीं, बल्कि मेहनत, पहचान और भरोसे का था।

सारस मेला राजस्थान: श्रीनगर में कैसे मिली यह जीत

श्रीनगर के पोलो व्यू पार्क में आयोजित यह मेला 25 अक्टूबर से शुरू हुआ था और 3 नवंबर को इसका समापन हुआ। जम्मू-कश्मीर ग्रामीण आजीविका मिशन (JKRLM) की ओर से आयोजित इस प्रदर्शनी में कुल 80 स्टॉल लगे थे, जहां महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों ने अपने हाथ से तैयार हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद और पारंपरिक खाद्य पदार्थ प्रदर्शित किए।

समापन समारोह में बिक्री श्रेणी में राजस्थान को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला राज्य घोषित किया गया, जबकि खाद्य श्रेणी में श्रीनगर जिले ने पहला स्थान हासिल किया। समारोह को मिशन निदेशक डॉ. शुभ्रा शर्मा ने संबोधित किया और अच्छी बिक्री तथा देशभर से महिला उद्यमियों की भागीदारी की सराहना की। सम्मान कार्यक्रम में स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों को प्रमाण पत्र भी दिए गए।

सिर्फ व्यापार नहीं, सीखने और जुड़ने का मंच भी

डॉ. शुभ्रा शर्मा ने एक अहम बात साफ की — सारस मेला आयोजित करने का उद्देश्य केवल व्यापार करना या उत्पादों का प्रचार करना नहीं था। यह मेला महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए एक ऐसा मंच भी था, जहां वे आपस में बातचीत कर सकें, अनुभव साझा कर सकें और एक-दूसरे से सीखकर आर्थिक विकास के नए अवसर तलाश सकें।

सारस मेला राजस्थान की महिलाओं के लिए क्यों अहम है

सारस मेले ग्रामीण विकास मंत्रालय के दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) से जुड़ी पहल के तहत आयोजित किए जाते हैं। इनका मकसद स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने और कारोबार बढ़ाने के अवसर देना है। गांव में बनी चीज को शहर के बाजार तक पहुंचाना किसी भी छोटे उद्यमी के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है, और सारस मेले इसी दूरी को खत्म करते हैं।

इन मेलों में महिलाओं को ब्रांडिंग, पैकेजिंग, मार्केटिंग और कारोबार विस्तार से जुड़ा मार्गदर्शन भी मिलता है। कई समूहों के लिए यही मंच पहला मौका होता है, जब उनके उत्पादों को गांव से बाहर पहचान मिलती है।

राजस्थान में महिला उद्यमिता की मजबूत जमीन

राजस्थान में महिला स्वयं सहायता समूहों का नेटवर्क पहले से ही काफी मजबूत है। राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) के जरिए महिला समूहों को प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और बाजार से जोड़ने का काम लगातार चल रहा है। हाल ही में जयपुर में आयोजित राजीविका दिवाली मेला और शिल्पग्राम परिसर में आयोजित अमृता हाट ने भी महिला कारीगरों को अच्छा मंच दिया था। श्रीनगर की जीत इसी लगातार मेहनत की अगली कड़ी है, और सारस मेला राजस्थान की इस सफलता ने इसे और पक्का किया है।

आगे क्या: जयपुर में लगेगा राष्ट्रीय सारस मेला

राजस्थान की महिलाओं के लिए अगला बड़ा मौका घर पर ही आने वाला है। जयपुर में 25 दिसंबर से राष्ट्रीय सारस मेला आयोजित किया जाना प्रस्तावित है। यह 18 दिवसीय मेला होगा, जिसमें 750 से 800 स्टॉल लगाए जाने की योजना है। आयोजन जवाहर कला केंद्र के दक्षिणी परिसर, शिल्पग्राम और इंदिरा गांधी पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास संस्थान परिसर में प्रस्तावित है, और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय से स्वीकृति भी मिल चुकी है।

इस मेले में हस्तशिल्प निर्माण का सजीव प्रदर्शन, कार्यशालाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। क्रेता-विक्रेता सम्मेलन के जरिए महिला उद्यमियों को बाजार से जोड़ने के अवसर दिए जाएंगे, और राजसखी ब्रांड से उत्पादों को डिजिटल बाजार तक पहुंचाने पर जोर रहेगा।

मेले से जुड़ना चाहने वाली महिलाओं के लिए काम की बातें

अगर आप किसी महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं और अपने उत्पादों को सारस मेला राजस्थान जैसे मेलों तक पहुंचाना चाहती हैं, तो सबसे पहला कदम अपने नजदीकी राजीविका ब्लॉक या जिला कार्यालय से संपर्क करना है। समूह का पंजीकरण, उत्पादों की सूची और गुणवत्ता मानकों की जानकारी वहीं से मिलती है। स्टॉल के लिए चयन आमतौर पर उत्पाद की गुणवत्ता, विविधता और समूह की तैयारी के आधार पर होता है।

दूसरी अहम बात पैकेजिंग और दाम की है। श्रीनगर जैसे मेलों में खरीदार सिर्फ सामान नहीं, बल्कि उसकी कहानी और भरोसा भी खरीदता है। साफ-सुथरी पैकेजिंग, सही दाम और ईमानदार जानकारी ही एक स्टॉल को बाकी से अलग करती है। साथ ही, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की आधिकारिक जानकारी से सही अपडेट मिल सकती है। प्रदेश की दूसरी योजनाओं के लिए महिला वर्क फ्रॉम होम योजना से जुड़ी खबर भी काम की हो सकती है।

बिंदु विवरण
मेला सारस मेला, श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर)
स्थान पोलो व्यू पार्क, श्रीनगर
अवधि 25 अक्टूबर से 3 नवंबर 2026 (10 दिन)
आयोजक जम्मू-कश्मीर ग्रामीण आजीविका मिशन (JKRLM)
स्टॉल 80
भागीदारी 17 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश, 200 से ज्यादा महिला कारीगर-उद्यमी
राजस्थान की उपलब्धि बिक्री श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला राज्य
खाद्य श्रेणी श्रीनगर जिला पहले स्थान पर
अगला बड़ा मेला राष्ट्रीय सारस मेला, जयपुर — 25 दिसंबर 2026 से (प्रस्तावित, 18 दिन)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सारस मेला श्रीनगर में राजस्थान को कौन सा स्थान मिला?
बिक्री श्रेणी में राजस्थान को सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला राज्य चुना गया। खाद्य श्रेणी में श्रीनगर जिले ने पहला स्थान हासिल किया।

श्रीनगर का सारस मेला कब और कहां आयोजित हुआ?
यह मेला 25 अक्टूबर से 3 नवंबर 2026 तक श्रीनगर के पोलो व्यू पार्क में आयोजित हुआ। इसका आयोजन जम्मू-कश्मीर ग्रामीण आजीविका मिशन (JKRLM) ने किया था।

मेले में कितने राज्यों की महिलाओं ने हिस्सा लिया?
17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 200 से ज्यादा महिला कारीगरों और उद्यमियों ने हिस्सा लिया। मेले में कुल 80 स्टॉल लगाए गए थे।

जयपुर में अगला सारस मेला कब लगेगा?
जयपुर में 25 दिसंबर 2026 से राष्ट्रीय सारस मेला प्रस्तावित है। यह 18 दिन चलेगा, 750 से 800 स्टॉल लगेंगे।

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