जयपुर. कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने रविवार को जयपुर में अपने आवास पर मीडिया से बातचीत में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर जमकर सवाल उठाए। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर पायलट ने केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश में पहले नोटबंदी हुई और अब वोटबंदी की जा रही है।
पायलट का दावा है कि देशभर में करीब 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उनका कहना था कि आमतौर पर आबादी बढ़ने के साथ मतदाताओं की संख्या भी बढ़ती है, लेकिन पहली बार इतने बड़े पैमाने पर नाम काटे जा रहे हैं। पायलट ने कहा कि वोट लोकतंत्र में जनता का सबसे बड़ा हथियार है और अगर नागरिक से उसका वोट देने का अधिकार ही छीन लिया जाए तो लोकतंत्र के लिए इससे गंभीर स्थिति और क्या हो सकती है।
13 करोड़ नाम हटने का दावा: आंकड़ा कहां से आया?
पायलट के बयान का सबसे बड़ा हिस्सा मतदाता सूची से हटाए गए नामों का आंकड़ा रहा। उन्होंने दावा किया कि SIR के दौरान देशभर में करीब 13 करोड़ नाम ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से हटाए गए हैं। यहां एक महत्वपूर्ण बात साफ करना जरूरी है — यह ड्राफ्ट रोल से हटाए गए नामों का आंकड़ा है। इसका यह मतलब नहीं है कि सभी हटाए गए नाम गलत तरीके से बाहर किए गए थे।
चुनाव आयोग इस पर कहता रहा है कि SIR का मकसद मतदाता सूचियों को अधिक सटीक बनाना है और जिन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR पूरा हो चुका है, वहां छूटे हुए पात्र मतदाताओं और नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान भी चलाया जा रहा है। आयोग के मुताबिक यह प्रक्रिया सूचियों को साफ और सही करने के लिए है।
पायलट ने बिहार, पश्चिम बंगाल और हरियाणा का उदाहरण देते हुए कहा कि अलग-अलग राज्यों में टारगेट करके मतदाताओं के नाम हटाए गए। उनका कहना था कि यह चिंता सिर्फ कांग्रेस की नहीं, देश के नौजवानों और आम मतदाताओं के बीच भी चुनाव प्रक्रिया को लेकर आशंका पैदा हुई है।
आयोग के भीतर ही मतभेद: 14 बार दर्ज आपत्तियां
पायलट ने चुनाव आयोग के अंदरूनी कामकाज को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि आयोग में तीन सदस्य होते हैं और महत्वपूर्ण फैसले नियमों के मुताबिक बहुमत से लिए जाने चाहिए। अगर मतभेद हो तो दो सदस्यों के बहुमत का निर्णय लागू होता है। पायलट का आरोप है कि मौजूदा व्यवस्था में दोनों चुनाव आयुक्तों को किनारे कर दिया गया और SIR से जुड़े कई फैसलों में उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया।
उनके मुताबिक दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले करीब 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई थी। पायलट का कहना था कि अगर आयोग जैसी संस्था के भीतर ही गंभीर मतभेद सामने आ रहे हैं तो उसकी पारदर्शिता पर खुली चर्चा जरूरी है।
CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग
पायलट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रोल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर यानी ERO के पास मतदाता का नाम जोड़ने या हटाने की महत्वपूर्ण शक्ति होती है, लेकिन पूरी प्रक्रिया को CEC के स्तर पर केंद्रीकृत कर दिया गया। उनके आरोप के मुताबिक निजी कार्यालय से लोगों के नाम जोड़ने-काटने का काम किया गया।
पायलट ने यह भी कहा कि देशभर में आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ आंदोलन हो रहे हैं और लोगों की मांग है कि उन्हें न्याय मिले। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार को इतनी ताकत देने का काम प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री की ओर से किया जा रहा है।
आयोग का पक्ष: SIR का मकसद क्या है?
चुनाव आयोग कहता रहा है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूचियों को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना है। जिन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR पूरा हो चुका है, वहां छूटे हुए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं ताकि कोई पात्र मतदाता सूची से बाहर न रहे।
| मुद्दा | पायलट का दावा | आयोग की स्थिति |
|---|---|---|
| 13 करोड़ नाम | सूची से हटाए गए | आंकड़ा ड्राफ्ट रोल का; छूटे पात्र मतदाताओं के लिए विशेष अभियान |
| आयोग का कामकाज | आयुक्तों को दरकिनार कर फैसले, 14 बार आपत्ति | प्रक्रिया नियमों के तहत, सूची सही करने का मकसद |
राजस्थान पर भी निशाना: सूखा प्रबंधन और निकाय चुनाव
पायलट ने आरोप लगाया कि राजस्थान में अकाल प्रबंधन में सरकार विफल रही और सरकार राहत पर ध्यान देने की बजाय चुनाव प्रबंधन में लगी रही। मानसून को लेकर पायलट ने कहा कि अगर सरकार दो महीने पहले तैयारी करती तो मौजूदा संकट काफी हद तक कम हो सकता था।
शहरी निकाय चुनावों को लेकर पायलट ने कहा कि मतदान और मतगणना के बीच जानबूझकर अंतर बढ़ाया गया और पुलिस-प्रशासन का दुरुपयोग हुआ। उनका दावा है कि जनता ने जनादेश कांग्रेस के पक्ष में दिया, लेकिन प्रक्रिया के दौरान जैसी परिस्थितियां बनीं, उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
पंजाब को लेकर पायलट के दावे
पायलट ने पंजाब विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत से कांग्रेस की सरकार बनने का दावा किया। उन्होंने ‘आप’ सरकार पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
नशे के मुद्दे पर पायलट ने कहा कि पंजाब में अब केमिकल ड्रग्स का इस्तेमाल बढ़ रहा है, जो बेहद घातक है। उनके मुताबिक नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों को पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। पायलट ने कहा कि पंजाब बॉर्डर से सटा है, पाकिस्तान से ड्रग्स की तस्करी हो रही है और चूंकि पूरा इलाका रक्षा और गृह मंत्रालय के अधीन है, तो केंद्र सरकार इस पर लगाम क्यों नहीं लगा पा रही है।
FAQ
सचिन पायलट ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए?
पायलट ने आरोप लगाया कि आयोग की कार्यप्रणाली निष्पक्ष और पारदर्शी नहीं रही। SIR के नाम पर करीब 13 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाए गए और दोनों चुनाव आयुक्तों को दरकिनार करके फैसले लिए गए।
‘वोटबंदी’ से पायलट का क्या मतलब है?
पायलट ने कहा कि देश में पहले नोटबंदी हुई और अब वोटबंदी की जा रही है। उनके मुताबिक मतदाताओं के नाम बड़े पैमाने पर सूची से हटाकर नागरिकों के वोट देने के अधिकार को कमजोर किया जा रहा है।
क्या पायलट ने CEC को हटाने की मांग की?
हां, पायलट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की और आरोप लगाया कि पूरी चुनाव प्रक्रिया को उनके स्तर पर केंद्रीकृत कर दिया गया है।
चुनाव आयोग का पक्ष क्या है?
आयोग का कहना है कि SIR का मकसद मतदाता सूचियों को अधिक सटीक बनाना है और जिन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR पूरा हो चुका है, वहां छूटे हुए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
निष्कर्ष: पायलट का यह बयान कांग्रेस की ओर से चुनाव आयोग और SIR के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है। 13 करोड़ नामों का आंकड़ा, आयोग के भीतर मतभेद के दावे और CEC को हटाने की मांग — ये तीनों मुद्दे आने वाले दिनों में सियासत को और गर्माएंगे। देखना होगा कि आयोग इन आरोपों का क्या जवाब देता है।