राजस्थान की सियासत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR विवाद राजस्थान) ने दोनों बड़े दलों के बीच शब्दों की जंग तेज कर दी है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को पहले अपने नेताओं के आचरण पर जवाब देना चाहिए। भाजपा का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण जैसे तकनीकी और संवैधानिक विषय को कांग्रेस सड़कों पर उतारकर शक्ति प्रदर्शन का मुद्दा बना रही है। दूसरी ओर कांग्रेस का रुख है कि पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और उसके नेताओं ने कई बार आयोग से समय मांगा है।
सियासी जानकारों का मानना है कि पंचायत चुनाव से ठीक पहले उठा यह विवाद अब केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रहा — यह भाजपा और कांग्रेस, दोनों के लिए कार्यकर्ताओं को जुटाने का सियासी मंच बन गया है।
SIR को लोकतंत्र की बुनियाद बताकर भाजपा ने बचाव किया
भाजपा के अनुसूचित जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मन्नालाल रावत ने सबसे पहले SIR की जरूरत पर ही जोर दिया। उनका तर्क था कि एक साफ-सुथरी और भरोसेमंद मतदाता सूची ही निष्पक्ष चुनाव की पहली शर्त है। रावत ने कहा कि मतदाता सूची के शुद्धीकरण की प्रक्रिया कोई नई व्यवस्था नहीं है — देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में भी इस तरह की कवायदें होती थीं।
रावत ने कांग्रेस की आपत्तियों को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है और वह अपना कर्तव्य निभा रहा है। उन्होंने केरल का उदाहरण दिया — वहां SIR जैसी प्रक्रिया के बाद भी कांग्रेस की ही सरकार बनी थी, जिससे साफ है कि यह प्रक्रिया किसी एक दल के खिलाफ नहीं है। उन्होंने यह दावा भी किया कि सर्वोच्च न्यायालय ने इस प्रक्रिया की वैधता पर मुहर लगाई है।
आयोग जाने की प्रक्रिया पर राठौड़ की आलोचना
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस के विरोध के तरीके पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयुक्त से मिलने और शिकायत दर्ज कराने का एक तय तरीका है, जिसमें समय लेकर एक सीमित प्रतिनिधिमंडल के साथ तथ्य और तर्क रखे जाते हैं। लेकिन कांग्रेस कभी 240 तो कभी 400 लोगों के साथ आयोग जाने की बात करती है, जिसे राठौड़ ने संस्थागत मर्यादा के खिलाफ बताया।
राठौड़ ने याद दिलाया कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी कांग्रेस को यही सलाह दी थी — शिकायत हो तो प्रतिनिधिमंडल लेकर जाओ, शक्ति प्रदर्शन मत करो। उनके मुताबिक कांग्रेस शिकायत के नाम पर भीड़ जुटाकर संस्थाओं पर दबाव बनाना चाहती है, जबकि समाधान का रास्ता प्रक्रिया से ही निकलता है।
आचरण वाले सवालों से बहस और आगे बढ़ी
मदन राठौड़ का बयान सिर्फ SIR तक नहीं रुका। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत से पूछा कि कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के एक कथित व्यवहार पर वे चुप क्यों हैं, जिसे भाजपा एक महिला पुलिसकर्मी के प्रति अनुचित आचरण बता रही है। राठौड़ ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में बैठे नेताओं से मर्यादित व्यवहार की अपेक्षा होती है और नेता प्रतिपक्ष जैसे पद की गरिमा के अनुरूप ही आचरण होना चाहिए।
इसके अलावा उन्होंने दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से जुड़े एक पुराने मामले का भी जिक्र किया, जिसमें कांग्रेस के एक सांसद-प्रोफेसर पर छात्राओं से संबंधित गंभीर आरोप लगे थे। राठौड़ ने कहा कि ऐसे मामलों में राजनीतिक दलों को अपना रुख स्पष्ट रखना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि ये अभी आरोप हैं और अंतिम फैसला कानूनी प्रक्रिया व जांच के बाद ही तय होगा।
साफ है कि भाजपा SIR के बचाव के साथ-साथ कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को नैतिक सवालों के घेरे में खींचना चाहती है, ताकि बहस सिर्फ आयोग की प्रक्रिया तक न रहे।
असल में SIR है क्या? क्यों उठ रहा है बवाल
विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन करने की वह प्रक्रिया है, जिसमें मृत, स्थानांतरित या दोहरे पंजीकरण वाले मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं और छूटे हुए पात्र मतदाता जोड़े जाते हैं। निर्वाचन आयोग समय-समय पर ऐसी कवायदें करता आया है। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस ने खुद कभी मतदाता सूची में सुधार की मांग की थी, इसलिए अब उस पर सवाल उठाना विरोधाभासी है। कांग्रेस का आरोप है कि पुनरीक्षण की प्रक्रिया में तेजी और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं, और इनका जवाब संस्थागत तरीके से मिलना चाहिए।
पंचायत चुनाव से पहले क्यों गर्माया मामला
राजस्थान में पंचायत चुनाव का दौर चल रहा है और नामांकन की आखिरी तारीख सामने खड़ी है। ऐसे समय में मतदाता सूची को लेकर टकराव स्वाभाविक रूप से चुनावी हथियार बन जाता है। हाल के दिनों में कांग्रेस के वोटबंदी वाले बयानों और मतदाता पंजीकरण में आई तेजी ने माहौल को और गर्म किया है। पंचायत चुनाव की ताजा तैयारियों पर हमारी विस्तृत रिपोर्ट भी पढ़ें।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस पलटवार का जवाब किस स्तर से देती है — संस्थागत प्रतिनिधिमंडल के जरिए, या विरोध की धार को और तेज करके।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल: SIR विवाद राजस्थान का मतलब क्या है?
जवाब: SIR यानी मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण — एक प्रक्रिया जिसमें मतदाता सूची को शुद्ध किया जाता है। राजस्थान में इसी प्रक्रिया को लेकर भाजपा और कांग्रेस में विवाद चल रहा है।
सवाल: भाजपा SIR का बचाव किन तर्कों से कर रही है?
जवाब: भाजपा का कहना है कि SIR कोई नई व्यवस्था नहीं है, नेहरू काल में भी ऐसी प्रक्रियाएं होती थीं, केरल में SIR के बाद कांग्रेस की सरकार बनी थी, और सुप्रीम कोर्ट ने भी इसकी वैधता मानी है।
सवाल: कांग्रेस की आपत्ति का आधार क्या है?
जवाब: कांग्रेस पुनरीक्षण प्रक्रिया की पारदर्शिता और टाइमिंग पर सवाल उठा रही है। पार्टी के नेता हाल के दिनों में कई बार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की आलोचना कर चुके हैं।
स्रोत: Zoom News (11 अक्टूबर 2026)