जयपुर, 4 अक्टूबर 2026। राजस्थान के किसान इस वक्त मौसम की दोहरी मार झेल रहे हैं — कहीं कम बारिश और सूखे जैसे हालात ने फसलें चौपट कर दी हैं, तो कहीं बेमौसम तेज बारिश और जलभराव ने खड़ी फसल बर्बाद कर दी। बीज, खाद, जुताई और सिंचाई पर हजारों रुपये खर्च करने के बाद इस खरीफ सीजन में किसान के हाथ बेहद कम लगा है, और अब कर्ज चुकाने की चिंता उसकी नींद उड़ा रही है। इसी पृष्ठभूमि में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने रविवार को सरकार को घेरते हुए कहा कि भाजपा सरकार पंचायत चुनाव की जोड़-तोड़ और धनबल में व्यस्त है, जबकि प्रदेश का किसान मौसम की मार से बेहाल है।
मौसम की दोहरी मार: कहीं सूखा, कहीं जलभराव
मानसून सीजन 2026 की फाइनल रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में सामान्य से करीब 12.6 प्रतिशत कम बारिश हुई — 2015 के बाद का सबसे सूखा सीजन। पश्चिमी राजस्थान में बारिश की कमी से फसलों पर संकट की खबरें लगातार आ रही हैं और कई इलाकों में किसान फसल खराबे के सर्वे व राहत की मांग कर रहे हैं। वहीं कुछ क्षेत्रों में बेमौसम तेज बारिश और जलभराव ने खड़ी फसल को नुकसान पहुंचाया। जूली के मुताबिक कमजोर और असमान मानसून का असर खरीफ सीजन की बुवाई और फसल उत्पादन, दोनों पर पड़ा है।
फसल उत्पादन पर मंडराता खतरा — और उसका असर आपकी थाली तक
जूली ने चेतावनी दी है कि फसल खराबे का असर केवल किसान तक सीमित नहीं रहेगा। अगर राजस्थान में बाजरा, ग्वार, मूंग, मोठ और सोयाबीन जैसी फसलों के उत्पादन में कमी आई, तो आगे चलकर बाजार में इनकी उपलब्धता प्रभावित हो सकती है — दूसरे राज्यों से माल मंगाना पड़ सकता है और कीमतों पर असर पड़ेगा।
इतना ही नहीं, फसल उत्पादन कम होने का सीधा असर पशुपालन पर पड़ेगा। चारे की उपलब्धता और कीमतों को लेकर किसानों व पशुपालकों की चिंता बढ़ेगी, और इसका असर दूध व घी जैसी रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। जूली का तर्क है कि सरकार को इस स्थिति पर अभी से तैयारी करनी चाहिए, न कि संकट गहराने के बाद जागना चाहिए।
कर्ज और KCC किस्त का दबाव — दोहरी परेशानी
किसान की मुश्किल सिर्फ फसल खराब होने तक सीमित नहीं है। जूली ने बताया कि किसान ने बीज, खाद, जुताई और सिंचाई पर पहले ही अच्छा-खासा पैसा खर्च कर दिया था — कई किसानों ने तो कर्ज लेकर खेती की थी। अब जब फसल ही नहीं बची, तो एक तरफ खराबे का संकट है और दूसरी तरफ कर्ज चुकाने की चिंता। इसमें किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की बकाया किस्त जमा करने का दबाव भी जुड़ गया है, जबकि मौसम की मार से किसान की आमदनी ही प्रभावित हो चुकी है। जूली ने सरकार से सवाल किया — ऐसे संकट में किसानों को राहत देने की ठोस कार्ययोजना क्या है?
जूली की सरकार से पांच बड़ी मांगें
नेता प्रतिपक्ष ने सिर्फ आरोप नहीं लगाए, ठोस मांगें भी रखीं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं को किसान का बेटा कहते हैं, लेकिन आज जब प्रदेश का किसान संकट में है तो सरकार की संवेदनशीलता और सक्रियता जमीन पर क्यों नहीं दिख रही? किसान को भाषण नहीं, संकट की घड़ी में राहत चाहिए — और सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि राजस्थान के किसानों के लिए उसकी कार्ययोजना क्या है।
| मांग | क्या कहा गया |
|---|---|
| फसल खराबे का सर्वे | प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल फसल खराबे का सर्वे कराया जाए |
| गिरदावरी | आवश्यकतानुसार गिरदावरी कराकर नुकसान का सही आकलन हो |
| फसल बीमा का भुगतान | फसल बीमा का शीघ्र भुगतान किसानों तक पहुंचे |
| चारे की व्यवस्था | पशुपालकों के लिए पर्याप्त और उचित दर पर चारे की व्यवस्था हो |
| कर्ज और KCC पर राहत | किसानों के कर्ज और KCC की किस्तों को लेकर राहत के ठोस कदम उठाए जाएं |
सियासी संदर्भ: पंचायत चुनाव और किसान की नाराजगी
इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी रविवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के एक हालिया बयान पर हमला बोला। गहलोत के मुताबिक मुख्यमंत्री ने कहा था कि किसान केवल 20-25 दिन ही काम करते हैं। गहलोत ने कहा कि अन्नदाता के योगदान को इस तरह कम आंकना ठीक नहीं है, और किसानों की यह नाराजगी आगामी पंचायत चुनाव में दिखेगी।
जूली ने पंचायत चुनाव पर भी टिप्पणी की — उनका कहना है कि सरकार को सत्ता की जोड़-तोड़ में ऊर्जा लगाने के बजाय किसान की सुध लेनी चाहिए। पंचायतें गांव और किसान से सीधे जुड़ी हैं, इसलिए पंचायत चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया और स्थानीय जनभागीदारी का माध्यम बनने चाहिए, न कि धनबल और जोड़-तोड़ का अखाड़ा।
किसान अभी क्या कर सकते हैं
सरकारी राहत का ऐलान हो या न हो, प्रभावित किसान अपने स्तर पर कुछ जरूरी कदम उठाकर अपने नुकसान का रिकॉर्ड मजबूत कर सकते हैं:
- नुकसान की तस्वीरें और वीडियो रखें: तारीख के साथ खेत की फोटो-वीडियो बनाएं — सर्वे और बीमा दावे में ये सबूत काम आएंगे।
- पटवारी से लिखित मांग करें: अपने क्षेत्र के पटवारी से गिरदावरी और खराबे के आकलन की मांग लिखित में करें।
- फसल बीमा की सूचना समय पर दें: बीमा कराया है तो निर्धारित समय-सीमा में बीमा कंपनी या बैंक को नुकसान की सूचना जरूर दें।
- KCC और कर्ज की रसीदें संभालें: किस्त और ब्याज से जुड़े कागजात व्यवस्थित रखें, ताकि राहत की घोषणा पर दावा करने में दिक्कत न हो।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: टीकाराम जूली ने किसानों को लेकर सरकार से क्या मांग की है?
उत्तर: जूली ने फसल खराबे का तत्काल सर्वे, आवश्यकतानुसार गिरदावरी, फसल बीमा का शीघ्र भुगतान, पशुपालकों के लिए उचित दर पर चारे की व्यवस्था और किसानों के कर्ज व KCC किस्तों पर राहत की मांग की है।
प्रश्न 2: इस बार राजस्थान में फसलों को नुकसान कैसे हुआ?
उत्तर: मानसून कमजोर और असमान रहा — कहीं कम बारिश व सूखे जैसे हालात बने, तो कहीं बेमौसम तेज बारिश और जलभराव ने खड़ी फसल बर्बाद कर दी। मानसून 2026 में सामान्य से करीब 12.6 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई।
प्रश्न 3: फसल उत्पादन कम होने का आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
उत्तर: बाजरा, ग्वार, मूंग, मोठ और सोयाबीन का उत्पादन घटने से बाजार में उपलब्धता प्रभावित हो सकती है, दूसरे राज्यों से माल मंगाना पड़ सकता है और कीमतों पर असर पड़ सकता है। चारा महंगा होने से दूध और घी की कीमतें भी प्रभावित हो सकती हैं।
प्रश्न 4: किसान फसल बीमा का लाभ कैसे ले सकते हैं?
उत्तर: जिन किसानों ने फसल का बीमा कराया है, वे निर्धारित समय-सीमा में बीमा कंपनी या संबंधित बैंक को नुकसान की सूचना दें। खराब फसल की तारीख सहित फोटो-वीडियो रखें और पटवारी से गिरदावरी का रिकॉर्ड बनवाएं।