खरीफ में MSP पर 4 फसलों की खरीद: राजफेड के 810 क्रय केंद्र स्वीकृत, किसानों को सीधा भुगतान

खरीफ सीजन में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अपनी उपज बेचने की तैयारी कर रहे राजस्थान के लाखों किसानों के लिए सबसे अच्छी खबर यह है कि अब उनकी फसल का पैसा बिचौलियों के चक्कर से नहीं गुजरेगा। राजस्थान राज्य सहकारी क्रय-विक्रय संघ लिमिटेड (राजफेड) ने खरीफ विपणन सत्र के दौरान मूंग, उड़द, मूंगफली और सोयाबीन की खरीद के लिए राज्यभर में कुल 810 क्रय केंद्रों को मंजूरी दे दी है। राजफेड के वाणिज्यिक महाप्रबंधक संदीप खंडेलवाल की ओर से जारी आदेशों के बाद अब जिला कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में इन केंद्रों की तैयारियां समय पर पूरी करनी होंगी।

खरीद का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसानों को उपज का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में ऑनलाइन भेजा जाएगा। इसके लिए किसानों का जनआधार पंजीकरण के समय ही जोड़ा जाएगा, ताकि तुलाई के बाद पैसा बिना देरी के खाते में पहुंच सके।

राजफेड क्रय केंद्रों पर सीधा भुगतान: पैसा किसानों के खाते में

इस बार खरीद प्रक्रिया की सबसे खास बात भुगतान व्यवस्था है। खरीदी गई जिंसों का पैसा किसानों को सीधे उनके जनआधार से जुड़े बैंक खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर किया जाएगा। इसके लिए किसानों को ऑनलाइन पंजीकरण के समय ही जनआधार या कार्ड और मूल गिरदावरी पेश करनी होगी, जिसमें हेक्टेयर में अंकित रकबा साफ तौर पर दर्ज होना चाहिए।

राजफेड ने चेतावनी दी है कि गलत जानकारी देकर कराए गए पंजीकरण निरस्त कर दिए जाएंगे। जिन ग्राम सेवा सहकारी समितियों के पास अभी तक GST नंबर नहीं है, उन्हें जल्द से जल्द GST पंजीयन कराने और अपने व्यवस्थापकों व ऑपरेटरों की SSO आईडी बनवाकर राजफेड को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

“सहकार फसल खरीद मित्र” योजना के तहत क्रय-विक्रय सहकारी समितियों और ग्राम सेवा सहकारी समितियों के बीच इकरारनामा 500 रुपये के स्टाम्प पेपर पर नोटरी से सत्यापित करवाकर जमा करना अनिवार्य होगा। योजना के तहत ग्राम सेवा सहकारी समितियों को कुल समर्थन मूल्य क्रय दर का 0.60 प्रतिशत और क्रय-विक्रय सहकारी समिति को 0.40 प्रतिशत राशि प्रशासनिक व्यय के रूप में दी जाएगी। यह राशि काम पूरा होने, हिसाब मिलान और नेफेड से बजट मिलने के बाद ही हस्तांतरित होगी।

जिंस की गुणवत्ता जांचने के लिए मॉइश्चर मीटर और बारदाने का पूरा प्रबंधन सहकार मित्र समितियों द्वारा किया जाएगा, ताकि खरीद के समय विवाद न हो।

राजफेड के 810 क्रय केंद्र: फसलवार और समितिवार बंटवारा

राजफेड ने 810 क्रय केंद्रों को दो तरह की समितियों के माध्यम से चलाने की योजना बनाई है। क्रय-विक्रय सहकारी समितियों (KVSS) के स्तर पर 356 केंद्र और ग्राम सेवा सहकारी समितियों (GSS) के स्तर पर 454 केंद्र संचालित होंगे। फसलवार बंटवारा इस प्रकार है:

फसल कुल केंद्र KVSS स्तर पर GSS स्तर पर
मूंग 314 166 148
मूंगफली 283 162 121
उड़द 136 78 58
सोयाबीन 77 48 29
कुल 810 356 454

सबसे ज्यादा केंद्र मूंग के लिए तय किए गए हैं, जो राज्य में इस फसल के बड़े उत्पादन को देखते हुए स्वाभाविक है। मूंगफली के 283 केंद्र दूसरे नंबर पर हैं। यह बंटवारा साफ करता है कि खरीद व्यवस्था गांव स्तर तक पहुंचाई गई है, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूर की मंडियों के चक्कर न लगाने पड़ें।

कौन बेच सकेगा और कैसे होगा पंजीकरण

MSP पर अपनी उपज बेचने के इच्छुक किसानों को पहले ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण के समय जनआधार या कार्ड के साथ हेक्टेयर में रकबा अंकित मूल गिरदावरी प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

खरीद केंद्रों पर भारत सरकार द्वारा निर्धारित गुणवत्ता मापदंडों (FAQ) के अनुरूप ही खरीद सुनिश्चित की जाएगी। केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक तुलाई मशीनें, कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्टिविटी और बैटरी बैकअप की व्यवस्था होगी। जिंसों को बारिश और नमी से सुरक्षित रखने के लिए तिरपाल, खूंटे और रस्सियों की पर्याप्त व्यवस्था भी हर केंद्र पर होगी।

किसानों को सलाह है कि वे उपज को अच्छी तरह सुखाकर और साफ करके ही केंद्र पर लाएं, क्योंकि FAQ मापदंडों पर खरी न उतरने वाली जिंस की खरीद में दिक्कत आ सकती है।

खरीद केंद्रों पर निगरानी का त्रिस्तरीय इंतजाम

MSP खरीद को विवादमुक्त और पारदर्शी बनाए रखने के लिए राज्य स्तर से लेकर केंद्र स्तर तक त्रिस्तरीय निगरानी ढांचा सक्रिय किया गया है। मुख्य सचिव के निर्देशों के तहत संवेदनशील क्रय केंद्रों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी और खरीद केंद्रों पर शांति व कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी।

जिला स्तर पर जिला कलक्टर की अध्यक्षता में “जिला स्तरीय समन्वय एवं निगरानी समिति” गठित होगी, जिसमें पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त रजिस्ट्रार, राजफेड के क्षेत्रीय अधिकारी, जिला रसद अधिकारी, उप निदेशक (कृषि) और उप रजिस्ट्रार शामिल होंगे।

हर क्रय केंद्र पर गिरदावरी और राजस्व संबंधी शिकायतों के तत्काल समाधान के लिए नायब तहसीलदार या गिरदावर की मय हलका पटवारी के साथ ड्यूटी लगाई जाएगी। इसके अलावा खरीद केंद्र स्तर पर उपखंड अधिकारी (SDO) की अध्यक्षता में भी निगरानी समिति काम करेगी, जिसमें थाना इंचार्ज, कृषि उपज मंडी समिति के सचिव और केंद्र व्यवस्थापक शामिल रहेंगे।

किसान ध्यान रखें: ये गलतियां न करें

राजफेड ने साफ किया है कि गलत जानकारी देकर कराए गए पंजीकरण रद्द कर दिए जाएंगे। इसलिए किसान इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

– सही गिरदावरी: हेक्टेयर में रकबा अंकित मूल गिरदावरी ही मान्य होगी, फोटोकॉपी या पुराना रिकॉर्ड न चलें। – जनआधार अपडेट: बैंक खाता जनआधार से लिंक और सक्रिय होना चाहिए, वरना भुगतान अटक सकता है। – गुणवत्ता मानक: नमी ज्यादा होने पर जिंस FAQ मानकों पर खरी नहीं उतरेगी, उपज को सुखाकर लाएं। – समय पर पहुंचें: खरीद केंद्रों पर भीड़ से बचने के लिए पंजीकरण और तुलाई की तारीखों का पालन करें।

किसानों से जुड़ी अन्य ताजा खबरों के लिए आप कपास उत्पादकता मिशन और राजस्थान डीएपी खाद संकट की खबरें भी पढ़ सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न: किन फसलों की MSP पर खरीद होगी? उत्तर: खरीफ विपणन सत्र में मूंग, उड़द, मूंगफली और सोयाबीन — इन चार फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद होगी।

प्रश्न: कुल कितने क्रय केंद्र बनाए गए हैं? उत्तर: राज्यभर में कुल 810 क्रय केंद्र स्वीकृत किए गए हैं — इनमें 356 क्रय-विक्रय सहकारी समितियों और 454 ग्राम सेवा सहकारी समितियों के स्तर पर संचालित होंगे।

प्रश्न: भुगतान कैसे मिलेगा? उत्तर: खरीदी गई जिंस का भुगतान किसानों के जनआधार से जुड़े बैंक खातों में सीधे ऑनलाइन ट्रांसफर किया जाएगा।

प्रश्न: पंजीकरण के लिए कौन से दस्तावेज चाहिए? उत्तर: ऑनलाइन पंजीकरण के समय जनआधार या कार्ड और हेक्टेयर में रकबा अंकित मूल गिरदावरी प्रस्तुत करना अनिवार्य है। गलत जानकारी पर पंजीकरण निरस्त हो जाएगा।

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