जयपुर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बुजुर्ग दंपती से 2 करोड़ से अधिक की ठगी, मुख्य आरोपी पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार

जयपुर के एक बुजुर्ग दंपती के लिए पिछले करीब दो महीने किसी डरावने सपने जैसे बीते। अपने ही घर में बैठे-बैठे वे लगातार 20 दिन तक ठगों की “डिजिटल अरेस्ट” की कैद में रहे — और इस दौरान उनके खातों से 2 करोड़ रुपये से अधिक की रकम निकाल ली गई। यह जयपुर डिजिटल अरेस्ट ठगी का अब तक का सबसे बड़ा मामला माना जा रहा है।

जयपुर की सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस ने मुख्य आरोपी ललित विश्वास को पश्चिम बंगाल के 24 परगना से गिरफ्तार किया है। गिरोह के तीन सदस्य पकड़े जा चुके हैं, लेकिन पैसों के जाल का सिरा अभी कई और खातों तक जाता है।

जयपुर डिजिटल अरेस्ट ठगी की शुरुआत: 17 अगस्त से डर का खेल

इस जयपुर डिजिटल अरेस्ट ठगी की शुरुआत 17 अगस्त 2026 को एक साधारण फोन कॉल से हुई। जयपुर निवासी बुजुर्ग महिला से फोन करने वाले ने खुद को पुलिस इंस्पेक्टर बताकर कहा कि उनके नाम पर गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है। इसके बाद कथित एटीएस अधिकारियों ने वीडियो कॉल पर दंपती से बातचीत शुरू कर दी।

ठगों ने दंपती को यकीन दिलाया कि उनका नाम आतंकी फंडिंग करने वालों की सूची में है और उनके बैंक खाते का इस्तेमाल इसके लिए हो रहा है। करीब 20 दिनों तक वीडियो कॉल पर लगातार रखकर गिरफ्तारी का डर दिखाया गया, और अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए गए।

हकीकत समझ आने तक 2 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम अलग-अलग खातों में जा चुकी थी। पीड़िता ने 11 सितंबर 2026 को इस जयपुर डिजिटल अरेस्ट ठगी की रिपोर्ट जयपुर के सेंट्रल साइबर क्राइम थाने में दर्ज करवाई, जिसके बाद कॉल डिटेल रिकॉर्ड, व्हाट्सऐप चैट, बैंक स्टेटमेंट और केवाईसी दस्तावेजों के विश्लेषण ने जांच को पश्चिम बंगाल तक पहुंचा दिया।

फर्जी वर्दी और फर्जी दस्तावेज: ठगों का सुनियोजित तरीका

यह सुनियोजित अपराध था — ठगों ने पुलिस, एटीएस, एनआईए, आरबीआई, भारत सरकार और सुप्रीम कोर्ट तक के नाम और पहचान का दुरुपयोग किया। व्हाट्सऐप पर फर्जी दस्तावेज और बैंकिंग प्रमाण-पत्र भेजकर दंपती को यकीन दिलाया गया कि वे सच में बड़ी जांच के घेरे में हैं।

दंपती को किसी अपने से सलाह लेने का मौका ही नहीं दिया गया। वीडियो कॉल पर लगातार नजर रखी जाती थी — यही डिजिटल अरेस्ट का सबसे खतरनाक पहलू है, क्योंकि निगरानी में फंसा पीड़ित मदद मांगने की हिम्मत नहीं कर पाता।

पश्चिम बंगाल से गिरफ्तारी: ललित विश्वास की क्या भूमिका थी

पुलिस ने आरोपी ललित विश्वास को पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले से गिरफ्तार किया है। जांच में पता चला है कि जयपुर डिजिटल अरेस्ट ठगी की रकम कई बैंक खातों में घुमाई गई थी, और ललित विश्वास ने नेटवर्क से जुड़े लोगों को खातों की जानकारी उपलब्ध कराने और लेन-देन में सहायता की।

उसके मुहैया करवाए एचडीएफसी बैंक खाते में 2 सितंबर 2026 को 7 लाख रुपये जमा हुए थे, जिसके बदले उसने कथित रूप से 70 हजार रुपये कमीशन पाए। उसने अपने एक परिचित से एचडीएफसी खाते का खाली चेक लेकर नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक भी पहुंचाया था।

डीआईजी (साइबर क्राइम) शांतनु कुमार सिंह के अनुसार अब तक तीन आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। डीजीपी राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर चल रहे विशेष अभियान में एडीजी साइबर क्राइम वीके सिंह के मुताबिक नेटवर्क व लेन-देन की जांच जारी है।

मामले के मुख्य आंकड़े एक नजर में

इस जयपुर डिजिटल अरेस्ट ठगी के अब तक सामने आए तथ्य इस प्रकार हैं:

बिंदुजानकारी
ठगी की कुल रकम2 करोड़ रुपये से अधिक
डिजिटल अरेस्ट की अवधिकरीब 20 दिन
पहला संपर्क17 अगस्त 2026 (फोन कॉल)
पुलिस में रिपोर्ट11 सितंबर 2026
मुख्य आरोपीललित विश्वास (24 परगना, पश्चिम बंगाल)
गिरफ्तार आरोपीअब तक 3
एक खाते में आई रकम7 लाख रुपये (2 सितंबर 2026)
आरोपी का कमीशन70 हजार रुपये
जांच टीमस्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, जयपुर (थानाधिकारी गजेंद्र शर्मा के नेतृत्व में)
अभियान निर्देशडीजीपी राजीव कुमार शर्मा

जयपुर डिजिटल अरेस्ट ठगी से बचाव: ये 7 बातें आज ही समझ लें

इस जयपुर डिजिटल अरेस्ट ठगी से सबसे बड़ा सबक यही है कि डर ही ठगों का सबसे बड़ा हथियार है। इन 7 बातों को याद रखें:

  1. कोई भी असली पुलिस या एजेंसी वीडियो कॉल पर “गिरफ्तारी” नहीं करती। डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया भारत में मौजूद ही नहीं है।
  2. डर में आकर पैसा ट्रांसफर न करें। फोन काटकर किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें।
  3. व्हाट्सऐप पर आए “सरकारी दस्तावेज” नकली हो सकते हैं। वारंट या सील वाले कागज आसानी से फर्जी बनाए जाते हैं।
  4. अज्ञात नंबर से आए वीडियो कॉल को तुरंत काट दें। असली अधिकारी कभी वीडियो कॉल पर जांच नहीं करते।
  5. ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें। यह राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन है — जितनी जल्दी शिकायत, उतनी ज्यादा रकम फ्रीज होने की संभावना।
  6. राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। बैंक स्टेटमेंट और चैट के स्क्रीनशॉट संभालकर रखें।
  7. बुजुर्ग परिजनों को खास तौर पर सतर्क करें। ठग अक्सर अकेले रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाते हैं।

राजस्थान में ठगी के पैसों को म्यूल अकाउंट के जरिए घुमाने के नेटवर्क का भी बड़ा खुलासा हो चुका है — पढ़ें पूरी खबर। त्योहारी सीजन में साइबर ठगी से बचाव की राजस्थान पुलिस की एडवाइजरी भी जरूर पढ़ें। अपने बैंक खाते की जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को कभी न दें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: डिजिटल अरेस्ट क्या होता है?
जवाब: ठगों का फर्जी तरीका — खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर “गिरफ्तारी” का डर दिखाते हैं और निगरानी में रखकर पैसे ऐंठते हैं। इस जयपुर डिजिटल अरेस्ट ठगी में भी यही तरीका अपनाया गया। भारतीय कानून में ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं है।

सवाल: क्या पुलिस वीडियो कॉल पर पूछताछ या गिरफ्तारी कर सकती है?
जवाब: नहीं। हर कानूनी कार्रवाई लिखित नोटिस या थाने में उपस्थिति से होती है — वीडियो कॉल पर डर दिखाकर पैसे मांगने वाला हर व्यक्ति ठग है।

सवाल: इस मामले में अब तक कितने आरोपी पकड़े गए हैं?
जवाब: तीन आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं, जिनमें मुख्य आरोपी ललित विश्वास भी शामिल है, जिसे पश्चिम बंगाल के 24 परगना से पकड़ा गया। नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।

सवाल: साइबर ठगी होने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए?
जवाब: तुरंत 1930 (राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन) पर कॉल करें, cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें, नजदीकी साइबर थाने में रिपोर्ट दें और अपने बैंक को सूचित करें।

यह जयपुर डिजिटल अरेस्ट ठगी एक बार फिर बताती है कि ठगों का सबसे बड़ा हथियार डर है — और जागरूकता ही सबसे मजबूत बचाव।

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