राजस्थान में डीएपी खाद संकट अब आंकड़ों में साफ दिखने लगा है। रबी की बुवाई के सबसे अहम अक्टूबर महीने में प्रदेश को जितना खाद मिलना चाहिए था, उसका सिर्फ एक छोटा हिस्सा ही पहुंचा है। कृषि मंत्री की ओर से जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर के पहले सात दिनों में डीएपी की सिर्फ 16.5 फीसदी और यूरिया की महज 13 फीसदी सप्लाई हो पाई है। नतीजा — कोटा संभाग के बारां, बूंदी और झालावाड़ में किसान फिर सड़कों पर उतर आए हैं, और सरकार ने खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए मध्य प्रदेश का बॉर्डर सीज कर चेकपोस्ट लगा दिए हैं।
यह कहानी सिर्फ एक जिले की नहीं है। एक तरफ सरकार कह रही है कि खाद पर्याप्त है और 18 दिन का डीएपी व 35 दिन का यूरिया स्टॉक मौजूद है, दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री का आरोप है कि किसानों को 1,350 रुपये वाला डीएपी का कट्टा 2,200 रुपये तक ब्लैक में खरीदना पड़ रहा है। इस लेख में पूरे मामले के तथ्य, आंकड़े, दोनों पक्षों के दावे और किसानों के लिए काम के विकल्प एक साथ रख रहे हैं।
आंकड़ों में संकट: 7 दिनों में सिर्फ इतनी सप्लाई पहुंची
सबसे पहले उन्हीं आंकड़ों को समझिए जो कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा की ओर से जारी किए गए हैं। अक्टूबर माह के लिए प्रदेश को 4.6 लाख मीट्रिक टन यूरिया आवंटित हुआ था, लेकिन शुरुआती 7 दिनों में सिर्फ 61 हजार मीट्रिक टन की ही सप्लाई हो पाई — यानी करीब 13 फीसदी। शेष 3.99 लाख मीट्रिक टन अब भी आना बाकी है। डीएपी की स्थिति भी ऐसी ही है — 2 लाख मीट्रिक टन की मांग के मुकाबले सिर्फ 33 हजार मीट्रिक टन (16.5 फीसदी) सप्लाई हुई, और 1.67 लाख मीट्रिक टन अभी पहुंचना बाकी है।
आंकड़ों की भाषा में कहें तो 7 अक्टूबर तक यूरिया की करीब 1 लाख मीट्रिक टन और डीएपी की करीब 50 हजार मीट्रिक टन सप्लाई हो जानी चाहिए थी, लेकिन हकीकत इसमें काफी पीछे है।
अक्टूबर माह की स्टॉक और सप्लाई स्थिति (मीट्रिक टन में):
| उर्वरक | ओपनिंग स्टॉक | डिमांड | सप्लाई | कुल उपलब्धता | स्टॉक |
|---|---|---|---|---|---|
| यूरिया | 3,72,294 | 4,60,000 | 61,376 | 4,33,670 | 3,72,034 |
| डीएपी | 1,07,675 | 2,00,000 | 32,648 | 1,40,325 | 1,05,683 |
वहीं 2026 बनाम 2025 की तुलना भी दिलचस्प है — इस साल यूरिया की उपलब्धता पिछले साल से 43,485 मीट्रिक टन और डीएपी की 14,394 मीट्रिक टन ज्यादा बताई जा रही है। सरकार का तर्क है कि खाद आ रहा है, बस धीरे-धीरे।
किसान सड़कों पर: बूंदी में मेगा हाईवे जाम, बारां में अटरू रोड पर प्रदर्शन
बूंदी में यूरिया के लिए किसान सड़क पर उतर आए और मेगा हाईवे पर चक्काजाम कर दिया — उनका कहना था कि खाद न मिला तो बुवाई पिछड़ जाएगी। बारां में अटरू रोड पर सहकारी समिति के बाहर भी किसानों ने जाम लगा दिया; पुलिस को समझाइश के बाद जाम खुलवाना पड़ा। झालावाड़ के बकानी में भी खाद के लिए मारामारी हुई, जहां पुलिस की निगरानी में वितरण कराना पड़ा।
किसानों की परेशानी सिर्फ कमी की नहीं, व्यवस्था की भी है। ज्यादातर छोटे किसान दूसरे का वाहन किराए पर लेकर आते हैं और पूरे सीजन का खाद एक बार में ले जाना चाहते हैं, जबकि सरकार कह रही है कि किसान टुकड़ों में खाद खरीदें। दुकानों पर लंबी कतारें, आधार कार्ड और जमाबंदी की नकल की शर्त, और पोस मशीन से ओटीपी के जरिए वितरण — यह सब किसानों में पैनिक पैदा कर रहा है।
पहले भी प्रदेश में खाद की कमी को लेकर किसान आंदोलन हो चुके हैं, और खाद के मुद्दे पर सियासी आरोप-प्रत्यारोप भी तेज रहा है।
सरकार का दावा: 18 दिन का डीएपी, 35 दिन का यूरिया और सख्त कार्रवाई
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है। उनके मुताबिक खरीफ 2026 में डीएपी की 5.10 लाख मीट्रिक टन मांग के मुकाबले 5.45 लाख मीट्रिक टन और यूरिया की 11 लाख मीट्रिक टन मांग के मुकाबले 17.15 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा उपलब्ध कराया गया। वर्तमान में 1.05 लाख मीट्रिक टन डीएपी और 3.63 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है, और 35 हजार मीट्रिक टन की खेप 14 अक्टूबर तक मिल जाएगी — यह खपत के हिसाब से 18 दिन का डीएपी और 35 दिन का यूरिया है।
कालाबाजारी पर सख्ती का भी दावा है — 64 विक्रेताओं की बिक्री पर रोक, 128 फर्मों के लाइसेंस सस्पेंड या निरस्त, 25 पर एफआईआर और 11 गिरफ्तारियां हुई हैं। नैनो डीएपी की जबरन टैगिंग रोकने के लिए अब कृषि विभाग के कार्मिकों की निगरानी में ही खाद बेचा जा रहा है।
कोटा संभाग के संयुक्त निदेशक अतीश कुमार शर्मा के मुताबिक कोटा जिले को अक्टूबर में 27 हजार मीट्रिक टन यूरिया आवंटित हुआ है, जिसमें से 6 हजार मीट्रिक टन पहुंच चुका है। डीएपी का 11 हजार मीट्रिक टन अलॉटमेंट है, अभी तक 2 हजार मीट्रिक टन आया है — बाकी इस महीने चार कंपनियों की रैक से आपूर्ति होगी, और बारां के रैक पॉइंट से 485 मीट्रिक टन डीएपी कोटा को दी गई है।
गहलोत का आरोप: ब्लैक में 2,200 रुपये का डीएपी कट्टा
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया है कि प्रदेश के किसानों को कालाबाजारी के जरिए ही डीएपी मिल रहा है — 1,350 रुपये वाले कट्टे के लिए किसानों से डेढ़ गुना पैसा वसूला जा रहा है, बाजार में यही कट्टा 2,100 से 2,200 रुपये तक बिक रहा है।
सियासत इस मुद्दे पर पहले से ही गर्म है — थर्ड फ्रंट के नेता नरेश मीणा भी खाद को लेकर आंदोलनरत हैं। कृषि मंत्री का जवाब है कि पूरा अलॉटमेंट केंद्र सरकार करती है और उपलब्धता पर्याप्त बताई जा रही है।
MP बॉर्डर सीज: खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए चेकपोस्ट
इस संकट का एक अहम पहलू खाद की अंतर-राज्यीय तस्करी भी है। कृषि विभाग के मुताबिक राजस्थान को आवंटित खाद मध्य प्रदेश भी जा रहा है। इसे रोकने के लिए मध्य प्रदेश का बॉर्डर सीज कर दिया गया है और चेकपोस्ट लगा दी गई हैं। रामगंज मंडी के उडवा, इटावा के खातौली और हरिपुरा मांझी पर कृषि विभाग के कार्मिक चेकिंग कर रहे हैं।
नियम साफ है — राजस्थान के अलॉटमेंट वाला खाद बिना अनुमति के मध्य प्रदेश ले जाना कालाबाजारी माना जाएगा। अगर किसान के पास बिल है तो दुकानदार पर कार्रवाई होगी, और बिल नहीं है तो मुकदमा दर्ज किया जाएगा। पिछले साल भी इस तरह का मुकदमा दर्ज हो चुका है।
DAP न मिले तो क्या करें: कृषि अधिकारियों का सब्सीट्यूट फार्मूला
कई दुकानों पर डीएपी उपलब्ध नहीं है, ऐसे में कृषि अधिकारी किसानों को सब्सीट्यूट खाद का फार्मूला बता रहे हैं। यूरिया में 23 फीसदी नाइट्रोजन, सिंगल सुपर फास्फेट (SSP) में 16 फीसदी फास्फोरस, ट्रिपल सुपर फॉस्फेट (TSP) में 46 फीसदी फास्फोरस, और डीएपी में 18 फीसदी नाइट्रोजन के साथ 46 फीसदी फास्फोरस होता है।
अधिकारियों की सलाह के मुताबिक अगर बाजार में डीएपी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल रहा है, तो किसान तीन बैग सिंगल सुपर फास्फेट और एक बैग यूरिया मिलाकर डीएपी तैयार कर सकता है — इसमें खेत को अतिरिक्त पोषक तत्व कैल्शियम और सल्फर भी मिल जाएंगे, जो तिलहन फसलों के लिए फायदेमंद है। वहीं एक बैग टीएसपी और आधा बैग यूरिया का मिश्रण डीएपी से भी बेहतर विकल्प बन सकता है।
किसानों के लिए काम की जानकारी के लिए राजस्थान कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी खाद वितरण से जुड़े दिशा-निर्देश देखे जा सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: राजस्थान में डीएपी खाद की कमी क्यों है?
उत्तर: अक्टूबर के पहले सात दिनों में प्रदेश को आवंटित डीएपी का सिर्फ 16.5 फीसदी और यूरिया का 13 फीसदी ही सप्लाई हुआ है। डिमांड के मुकाबले सप्लाई धीमी है, जिससे दुकानों पर कतारें और कुछ जगहों पर कालाबाजारी की स्थिति बन रही है।
प्रश्न: सरकार खाद की कमी पर क्या कह रही है?
उत्तर: कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा का दावा है कि प्रदेश में 18 दिन का डीएपी और 35 दिन का यूरिया स्टॉक है, 14 अक्टूबर तक 35 हजार मीट्रिक टन की नई खेप मिल जाएगी, और कालाबाजारी पर 64 विक्रेताओं पर रोक व 11 गिरफ्तारियां हुई हैं।
प्रश्न: डीएपी न मिले तो किसान क्या विकल्प अपनाएं?
उत्तर: कृषि अधिकारियों के मुताबिक तीन बैग SSP + एक बैग यूरिया, या एक बैग TSP + आधा बैग यूरिया मिलाकर डीएपी का विकल्प तैयार किया जा सकता है। एनपीके भी सरसों जैसी फसलों के लिए अच्छा विकल्प है।
प्रश्न: MP बॉर्डर सीज क्यों किया गया है?
उत्तर: राजस्थान को आवंटित खाद मध्य प्रदेश ले जाए जाने की शिकायतों पर सरकार ने बॉर्डर सीज कर रामगंज मंडी के उडवा, इटावा के खातौली और हरिपुरा मांझी पर चेकपोस्ट लगाए हैं। बिना अनुमति खाद ले जाना कालाबाजारी माना जाएगा।