धन-धान्य कृषि योजना: नागौर ने जीता देश में दूसरा स्थान
राजस्थान के नागौर जिले ने कृषि के क्षेत्र में पूरे देश में अपनी अलग पहचान बना ली है। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना की पहली वर्षगांठ पर नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सम्मान समारोह में नागौर जिले को समग्र प्रदर्शन के आधार पर देशभर में दूसरा स्थान मिला है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह सम्मान जिला प्रशासन को प्रदान किया। बिहार के गया को पहला और मध्य प्रदेश के उमरिया को तीसरा स्थान मिला। यह उपलब्धि राजस्थान के किसानों के लिए गर्व की बात है, क्योंकि देश के 100 चयनित जिलों में से नागौर का नाम शीर्ष पर आया है।
सबसे बड़ी खबर: नागौर देशभर में दूसरे नंबर पर
नई दिल्ली के पूसा स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर में आयोजित कार्यक्रम में देशभर के जिलों के प्रदर्शन की समीक्षा की गई। समग्र प्रदर्शन की श्रेणी में नागौर ने दूसरा स्थान हासिल किया — यानी योजना को जमीन पर उतारने में नागौर का काम देश के सर्वश्रेष्ठ जिलों में रहा। यह सम्मान इस बात की पुष्टि है कि किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने और कृषि उत्पादकता बढ़ाने में नागौर का प्रशासनिक तंत्र राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।
धन-धान्य कृषि योजना क्या है: 100 जिलों का मेगा मिशन
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना की शुरुआत 11 अक्टूबर 2025 को हुई थी। इसका मकसद उन 100 जिलों में कृषि विकास को तेज रफ्तार देना है, जहां कृषि उत्पादकता, फसल सघनता और कृषि ऋण का वितरण राष्ट्रीय औसत से कम है। यानी वे जिले जहां किसानों को सबसे ज्यादा मदद की जरूरत है, वहां योजनाओं का फायदा सीधे पहुंचाया जाए।
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसका समन्वित ढांचा है। केंद्र सरकार के 11 मंत्रालयों और विभागों की 36 योजनाओं को एक साथ जोड़ा गया है, साथ में राज्य सरकारों की संबंधित योजनाओं का भी समन्वय होता है। जिला स्तर पर कृषि विकास की ठोस योजनाएं बनती हैं, ताकि किसान को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें — बीज, सिंचाई, ऋण और भंडारण की मदद एक ही छत के नीचे मिले।
धन-धान्य कृषि योजना के 6 बड़े उद्देश्य
योजना को छह स्पष्ट लक्ष्यों के इर्द-गिर्द बनाया गया है। हर जिले का प्रदर्शन इन्हीं लक्ष्यों पर मापा जाता है:
कृषि उत्पादकता बढ़ाना: प्रति हेक्टेयर उपज में सुधार, ताकि किसान की आय बढ़े।
फसल विविधीकरण और टिकाऊ खेती: सिर्फ एक फसल पर निर्भरता खत्म कर नई फसलों और पर्यावरण-अनुकूल तरीकों को बढ़ावा।
फसल कटाई के बाद भंडारण: गोदाम और कोल्ड स्टोरेज की सुविधा, ताकि फसल बर्बाद न हो और किसान को सही दाम मिले।
सिंचाई व्यवस्था में सुधार: पानी की हर बूंद का सही इस्तेमाल, ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी तकनीकों का विस्तार।
कृषि ऋण की आसान उपलब्धता: अल्पकालीन और दीर्घकालीन दोनों तरह के ऋण किसानों तक समय पर पहुंचाना।
बेहतर प्रशासन और सेवा वितरण: योजनाओं का लाभ बिना देरी और बिना बिचौलियों के किसानों तक पहुंचाना।
इन छह उद्देश्यों में अलग-अलग उत्कृष्ट कार्य करने वाले 18 जिलों को भी सम्मानित किया गया। कृषि उत्पादकता बढ़ाने में छत्रपति संभाजीनगर (महाराष्ट्र), चित्रकूट (उत्तर प्रदेश) और गेजिंग (सिक्किम) का चयन हुआ। फसल विविधीकरण, भंडारण, सिंचाई, कृषि ऋण और प्रशासनिक दक्षता की श्रेणियों में देश के अलग-अलग जिलों को पुरस्कृत किया गया।
सम्मान समारोह में और क्या-क्या हुआ
कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि योजना के दूसरे वर्ष में जमीनी स्तर पर ठोस परिणाम हासिल करने पर जोर दिया जाएगा। उनके मुताबिक किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना ही इस योजना का असली मानदंड है। सिर्फ कागजों पर आंकड़े नहीं, बल्कि खेत में दिखता बदलाव ही सफलता है।
समारोह में तीन जिलों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव भी साझा किए — गढ़चिरोली ने जल संरक्षण, अल्लूरी सीताराम राजू ने बागवानी और बांका ने प्राकृतिक कृषि का मॉडल पेश किया। इससे दूसरे जिलों को भी सीखने का मौका मिला।
नागौर के किसानों को इससे क्या मिलेगा
सवाल यह है कि यह राष्ट्रीय सम्मान नागौर के आम किसान के लिए क्या मायने रखता है। जवाब सीधा है — दूसरे स्थान का मतलब है कि किसानों तक मदद पहुंचाने वाला तंत्र देश के सबसे मजबूत तंत्रों में गिना गया है। इससे:
योजनाओं का लाभ तेजी से मिलेगा: मान्यता से प्रशासन पर क्रियान्वयन और तेज करने का प्रोत्साहन बनेगा।
कृषि ऋण आसान होगा: ऋण वितरण योजना के प्रमुख उद्देश्यों में है, यानी समय पर कर्ज की व्यवस्था सुधरेगी।
सिंचाई और भंडारण पर फोकस: नागौर जैसे शुष्क क्षेत्र की सबसे बड़ी जरूरत पर काम तेज होगा।
योजना एक नजर में
| तथ्य | विवरण |
| योजना का नाम | प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना |
| शुरुआत | 11 अक्टूबर 2025 |
| लक्ष्य जिले | देश के 100 जिले |
| जुड़े मंत्रालय/विभाग | 11 मंत्रालयों की 36 योजनाएं |
| प्रमुख उद्देश्य | 6 (उत्पादकता, विविधीकरण, भंडारण, सिंचाई, ऋण, प्रशासन) |
| समग्र प्रथम स्थान | गया, बिहार |
| समग्र द्वितीय स्थान | नागौर, राजस्थान |
| समग्र तृतीय स्थान | उमरिया, मध्य प्रदेश |
| अन्य सम्मानित जिले | 18 (विभिन्न उद्देश्यों में उत्कृष्ट कार्य) |
| सम्मान समारोह | पूसा, नई दिल्ली — 12 अक्टूबर 2026 |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: धन-धान्य कृषि योजना में किन जिलों को शामिल किया गया है?
उत्तर: योजना में देश के 100 ऐसे जिले शामिल हैं, जहां कृषि उत्पादकता, फसल सघनता और कृषि ऋण का वितरण कम है। राजस्थान का नागौर जिला भी इन्हीं में से एक है।
प्रश्न 2: नागौर को दूसरा स्थान किस आधार पर मिला?
उत्तर: योजना के एक साल के क्रियान्वयन में समग्र प्रदर्शन के आधार पर जिलों की रैंकिंग की गई। नागौर ने योजनाओं को जमीन पर उतारने, किसानों तक लाभ पहुंचाने और लक्ष्यों को पूरा करने में देशभर में दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।
प्रश्न 3: इस योजना से किसानों को सीधा क्या फायदा मिलेगा?
उत्तर: बीज, सिंचाई, कृषि ऋण, फसल भंडारण और फसल विविधीकरण से जुड़ी 36 केंद्रीय योजनाओं का लाभ जिला स्तर पर एक समन्वित तरीके से मिलेगा। यानी किसानों को एक ही जगह से कई योजनाओं की मदद मिलेगी। अधिकृत जानकारी के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की वेबसाइट देखें।
प्रश्न 4: योजना के दूसरे वर्ष में क्या खास होगा?
उत्तर: केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा है कि दूसरे वर्ष में जमीनी स्तर पर ठोस परिणाम पर जोर होगा। किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ही योजना की सफलता का पैमाना होगा।
राजस्थान के किसानों से जुड़ी ऐसी ही अहम खबरों के लिए पढ़ते रहें: खरीफ में MSP पर 4 फसलों की खरीद: राजफेड के 810 क्रय केंद्र स्वीकृत और Rabi MSP बढ़ोतरी 2027-28: सरसों 6,613 और गेहूं 2,610 रुपये। रबी सीजन में खाद की उपलब्धता पर भी सरकार ने हाल में बड़ा अपडेट दिया है।