सुनने, चलने या देखने में परेशानी झेल रहे हजारों बच्चों के लिए राजस्थान सरकार की ओर से एक बड़ी राहत की खबर आई है। प्रदेश के 3000 से ज्यादा विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों (Children with Special Needs – CwSN) को इस महीने के भीतर सहायक अंग-उपकरण मिलेंगे — व्हीलचेयर से लेकर हियरिंग एड, ब्रेल किट से लेकर स्मार्ट फोन तक।
राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने समग्र शिक्षा कार्यक्रम के तहत 25 सितंबर से 14 अक्टूबर 2026 तक राज्य के सभी जिलों में अंग-उपकरण वितरण कैंप आयोजित करने का अभियान शुरू किया है। जयपुर जिले में शनिवार को इस कड़ी का पहला बड़ा वितरण कार्यक्रम सेठ आनन्दीलाल पोद्दार बधिर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में आयोजित हुआ, जहां जयपुर के विभिन्न ब्लॉकों से आए बच्चों को उनकी जरूरत के हिसाब से उपकरण सौंपे गए।
3000 बच्चों तक पहुंचेगा अभियान — जानें क्या-क्या मिलेगा
इस अभियान के तहत प्रदेशभर में 3000 से अधिक विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। वितरण सूची में ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर, बैटरी आधारित ट्राईसाइकिल, टीएलएम किट, ब्रेल किट एवं स्लेट, हियरिंग एड, वॉकिंग स्टिक, रोलेटर, सुगम्य केन, स्मार्ट फोन, जयपुर फुट और बैसाखी जैसे उपकरण शामिल हैं।
विभाग का उद्देश्य इन उपकरणों के माध्यम से बच्चों की दैनिक गतिविधियों को आसान बनाना, उनकी आत्मनिर्भरता बढ़ाना और शिक्षा में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। अक्सर देखा जाता है कि सही उपकरण न मिल पाने की वजह से दिव्यांग बच्चे नियमित स्कूल आना बंद कर देते हैं। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि घर से स्कूल तक की इस खाई को पाटने में सहायक उपकरण सबसे सीधी और असरदार कड़ी हैं।
जयपुर कार्यक्रम में क्या-क्या बांटा गया: आंकड़े एक नजर में
जयपुर के वितरण कार्यक्रम में विभिन्न ब्लॉकों से आए बच्चों को उपकरण दिए गए। सुनने में कठिनाई वाले बच्चों के लिए 60 हियरिंग एड, 50 टीएलएम किट, 16 व्हीलचेयर, 10 रोलेटर, 5 ब्रेल किट, 5 सीपी चेयर और 2 बैसाखी वितरित की गईं।
सुनने में कठिनाई वाले बच्चों के लिए हियरिंग एड सबसे ज्यादा मांग वाला उपकरण है। दृष्टिबाधित बच्चों को ब्रेल किट और चलने-फिरने में दिक्कत वाले बच्चों को व्हीलचेयर, रोलेटर और सीपी चेयर प्रदान किए गए। सीपी चेयर यानी सेरेब्रल पाल्सी से ग्रसित बच्चों के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई कुर्सी, जो उन्हें बैठने और सीखने में मदद करती है।
कौन-कौन रहा मौजूद, क्या कहा अधिकारियों ने
जयपुर कार्यक्रम में डॉ. आकाशदीप अरोड़ा, उपायुक्त (समावेशी शिक्षा) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ रचना तिवारी (उपनिदेशक, समावेशी शिक्षा), अनिल थानवी (सहायक निदेशक), मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी आशा गुप्ता और विद्यालय के प्रधानाचार्य योगेंद्र आचार्य सहित कई अधिकारी मौजूद थे।
अधिकारियों ने अभिभावकों से अपील की कि अगर उनके घर या मोहल्ले में कोई विशेष आवश्यकता वाला बच्चा है जो स्कूल से दूर है, तो उसे नजदीकी सरकारी विद्यालय से जोड़ा जाए। समावेशी शिक्षा का सिद्धांत ही यही है — कोई बच्चा अपनी शारीरिक सीमा की वजह से शिक्षा से वंचित न रहे।
25 सितंबर से 14 अक्टूबर तक — सभी जिलों में कैंप
अभियान का कैलेंडर 25 सितंबर 2026 से शुरू होकर 14 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। इस अवधि में प्रदेश के सभी जिलों में चरणबद्ध तरीके से वितरण कैंप लगाए जा रहे हैं। जयपुर के बाद अन्य जिलों में भी इसी तरह ब्लॉक-स्तर के कार्यक्रम होंगे, ताकि दूर-दराज के बच्चों को उपकरण लेने के लिए जिला मुख्यालय तक न जाना पड़े।
अभिभावकों के लिए जरूरी जानकारी: उपकरण पाने की प्रक्रिया
अगर आपका बच्चा विशेष आवश्यकता वाला है, तो ये कदम उठाएं: सबसे पहले बच्चा जिस सरकारी विद्यालय में पढ़ता है, वहां के प्रधानाचार्य या ब्लॉक शिक्षा अधिकारी से लिखित में आवश्यकता दर्ज कराएं। जिला अस्पताल या अधिकृत चिकित्सक से विकलांगता प्रमाणपत्र तैयार रखें — यही उपकरण की श्रेणी तय करता है। अपने जिले का वितरण कैंप कब लगेगा, यह जानकारी ब्लॉक शिक्षा कार्यालय या जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से मिल जाएगी। समग्र शिक्षा कार्यक्रम के तहत ये उपकरण बच्चों को निःशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं।
समावेशी शिक्षा क्या है और क्यों जरूरी है
समावेशी शिक्षा का अर्थ है — विशेष आवश्यकता वाले बच्चे आम बच्चों के साथ एक ही विद्यालय में पढ़ें, खेलें और सीखें। समग्र शिक्षा अभियान के तहत इसके लिए विशेष शिक्षकों की नियुक्ति, रैम्प और सुगम शौचालय जैसे बुनियादी ढांचे, तथा टीएलएम (टीचिंग-लर्निंग मटेरियल) किट की व्यवस्था की जाती है।
ब्रेल किट और स्लेट दृष्टिबाधित बच्चों को पढ़ने-लिखने में सक्षम बनाते हैं, जबकि टीएलएम किट बौद्धिक दिव्यांगता वाले बच्चों के लिए खेल-खेल में सीखने के साधन हैं। जयपुर फुट — जो जयपुर की ही बनाई गई कृत्रिम पैर तकनीक है — विकलांग व्यक्तियों के जीवन में दशकों से बदलाव ला रही है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अब स्कूली बच्चों को भी ये उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
FAQ
प्रश्न: क्या उपकरण सिर्फ जयपुर के बच्चों को मिलेंगे? उत्तर: नहीं। जयपुर का कार्यक्रम अभियान की एक कड़ी था। 25 सितंबर से 14 अक्टूबर तक राज्य के सभी जिलों में वितरण कैंप लगाए जा रहे हैं।
प्रश्न: उपकरण पाने के लिए क्या दस्तावेज चाहिए? उत्तर: विकलांगता प्रमाणपत्र (अधिकृत चिकित्सक द्वारा), आधार/जन्म प्रमाणपत्र और विद्यालय का नामांकन विवरण। स्कूल या ब्लॉक कार्यालय में आवश्यकता दर्ज करानी होगी।
प्रश्न: क्या ये उपकरण खरीदने पड़ते हैं? उत्तर: नहीं, समग्र शिक्षा कार्यक्रम के तहत पात्र विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों को ये उपकरण निःशुल्क वितरित किए जाते हैं।
प्रश्न: कैंप की तारीख अपने जिले में कैसे पता करें? उत्तर: अपने ब्लॉक के मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय या जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से संपर्क करें। स्कूल के प्रधानाचार्य भी यह जानकारी दे सकते हैं।