झालावाड़ जिले के खानपुर क्षेत्र में इस समय खेतों में रबी की तैयारी का मौसम चल रहा है। खाद, बीज, कीटनाशक और मजदूरों की मजदूरी के लिए किसानों को नकदी की सबसे ज्यादा जरूरत इन्हीं दिनों पड़ती है। लेकिन विडंबना यह है कि करीब 285 किसान ऐसे हैं जिनके खातों में उनकी पिछली फसल — गेहूं — की कमाई का एक रुपया तक नहीं पहुंचा है, और अब वे अपने ही पैसे के लिए धरने पर बैठने को मजबूर हैं।
खानपुर की क्रय–विक्रय सहकारी समिति से जुड़े सरकारी तौल केंद्रों पर समर्थन मूल्य पर गेहूं की तुलाई हुए चार महीने गुजर चुके हैं। करीब 60 हजार कट्टे गेहूं तौला गया और इसके बदले किसानों को लगभग 8 करोड़ रुपए का भुगतान होना था। लेकिन चार माह बाद भी राशि किसानों तक नहीं पहुंची। अब भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में किसानों ने खानपुर के मिनी सचिवालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है।
मामला एक नजर में: 8 करोड़ किसका, कहां अटका
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| प्रभावित किसान | करीब 285 किसान |
| तौला गया गेहूं | लगभग 60 हजार कट्टे |
| बकाया राशि | करीब 8 करोड़ रुपए |
| खरीद केंद्र | खानपुर क्रय–विक्रय सहकारी समिति के सरकारी तौल केंद्र |
| कितना समय बीता | लगभग 4 माह |
| गेहूं पहुंचाने का टेंडर | केशोरायपाटन की फर्म अभिनव एंड कंपनी |
| आरोप | ठेकेदार ने गेहूं एफएसआई गोदाम तक नहीं पहुंचाया, बीच रास्ते में गबन का आरोप |
| कानूनी स्थिति | सहकारी समिति ने ठेकेदार के खिलाफ मामला दर्ज कराया |
| धरना स्थल | खानपुर मिनी सचिवालय के बाहर |
| धरने की अगुवाई | भारतीय किसान संघ |
भुगतान में देरी की जड़: ठेकेदार पर गबन का आरोप
सहकारी समिति के व्यवस्थापक अखिलेश वैष्णव के अनुसार सरकारी तौल केंद्र पर 285 किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद की गई थी। इस गेहूं को एफएसआई के गोदाम तक पहुंचाने की जिम्मेदारी केशोरायपाटन की एक फर्म अभिनव एंड कंपनी को टेंडर के जरिए दी गई थी।
आरोप है कि ठेकेदार ने गेहूं को निर्धारित गोदाम तक पहुंचाने की बजाय बीच रास्ते में ही गबन कर लिया। समिति की ओर से इस पूरे मामले में ठेकेदार के खिलाफ मामला दर्ज कराया जा चुका है और उच्च अधिकारियों को भी सूचना दी गई है। लेकिन मामला दर्ज होने के बावजूद किसानों का करीब 8 करोड़ रुपए बकाया चल रहा है और चार महीने से किसान भुगतान के लिए भटक रहे हैं।
सवाल यही है कि गबन का आरोप और केस दर्ज होने के बाद भी भुगतान का रास्ता क्यों नहीं निकला। किसानों का कहना है कि उन्होंने समिति से लेकर अधिकारियों के कार्यालयों तक के चक्कर काट लिए, लेकिन ठोस समाधान सामने नहीं आया।
“अपने ही पैसों के लिए धरने पर बैठना पड़ रहा है”: किसानों की आवाज
किसान अर्जुन नागर का कहना है कि किसानों को उम्मीद थी कि उपज की राशि समय पर उनके खातों में पहुंच जाएगी, लेकिन चार महीने गुजरने के बाद भी भुगतान नहीं हुआ। फसल बेचने के बाद भी उन्हें अपनी ही मेहनत की कमाई के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उनका कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम से उनका समर्थन मूल्य व्यवस्था से विश्वास ही उठ गया है।
अर्जुन नागर ने बताया कि उन्होंने जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ सहित संबंधित अधिकारियों को कई बार मामले से अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया। उन्होंने चेतावनी दी है कि क्षेत्रीय किसान एक बड़ा आंदोलन करेंगे और इस दौरान अगर कोई अनहोनी होती है, तो उसके लिए प्रशासन जिम्मेदार होगा।
धरने की अगुवाई कर रहे भारतीय किसान संघ के खानपुर तहसील अध्यक्ष शंकरलाल सुमन अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। उनके साथ कोटा संभाग के संरक्षक सीताराम नागर, जिला अध्यक्ष राधेश्याम गुर्जर और जिला उपाध्यक्ष कृष्ण मुरारी शर्मा सहित कई किसान मौजूद हैं। संघ ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि सोमवार तक बकाया भुगतान को लेकर ठोस समाधान या स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई, तो खानपुर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। धरने पर मौजूद किसानों ने कहा है कि मेहनत की कमाई का भुगतान होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
समर्थन मूल्य पर खरीद में भुगतान की व्यवस्था कैसे काम करती है
समर्थन मूल्य व्यवस्था में किसान सरकारी खरीद केंद्रों पर अपनी उपज बेचते हैं और तुलाई के बाद एक निश्चित समय सीमा के भीतर भुगतान उनके बैंक खातों में सीधे पहुंचना चाहिए। सामान्य प्रक्रिया के तहत खरीद एजेंसी किसानों की उपज का रिकॉर्ड बनाती है, माल को भंडारण या आगे की सप्लाई चेन में भेजती है और उसके बाद भुगतान की प्रक्रिया पूरी होती है।
इस व्यवस्था में अगर बिचौलिया स्तर पर कोई गड़बड़ी होती है — जैसे माल का गबन या भंडारण तक माल न पहुंचना — तो उसका खामियाजा सीधे किसानों को भुगतना पड़ता है, क्योंकि भुगतान का स्रोत ही अटक जाता है। झालावाड़ का यह मामला इसी कड़ी का उदाहरण है, जहां ठेकेदार के खिलाफ गबन का मामला दर्ज तो हो गया, लेकिन भुगतान की गाड़ी चार महीने से खड़ी है।
अगर आपका भी भुगतान अटका हो तो क्या करें
झालावाड़ जैसा मामला अगर किसी और क्षेत्र के किसान के साथ भी हो रहा है, तो यह जानना जरूरी है कि भुगतान अटकने पर किसान कहां और कैसे शिकायत कर सकते हैं:
सबसे पहले खरीद केंद्र और सहकारी समिति से लिखित में पूछताछ करें — तुलाई की रसीद, जे-फॉर्म या खरीद की पर्ची संभालकर रखें। यही आपके दावे का सबसे मजबूत सबूत है।
जिला कलेक्टर को ज्ञापन दें — झालावाड़ के किसानों ने भी यही रास्ता अपनाया है। लिखित ज्ञापन देने से मामला आधिकारिक रिकॉर्ड में आता है।
सहकारी विभाग के रजिस्ट्रार या जिला सहकारी अधिकारी से शिकायत करें — क्रय–विक्रय सहकारी समितियों के कामकाज पर सहकारी विभाग की निगरानी होती है।
राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन (181) पर शिकायत दर्ज कराएं — यह राज्य सरकार की आधिकारिक शिकायत निवारण व्यवस्था है, जहां शिकायत का ट्रैकिंग नंबर मिलता है।
पुलिस में लिखित शिकायत — अगर माल का गबन या धोखाधड़ी का संदेह हो, तो संबंधित थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराना जरूरी है, जैसा कि खानपुर मामले में समिति ने किया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: झालावाड़ में कितने किसानों का भुगतान अटका है और राशि कितनी है?
उत्तर: करीब 285 किसानों का लगभग 8 करोड़ रुपए का भुगतान अटका हुआ है। ये किसान खानपुर क्रय–विक्रय सहकारी समिति के सरकारी तौल केंद्रों पर समर्थन मूल्य पर गेहूं बेच चुके हैं।
प्रश्न: भुगतान में देरी की वजह क्या बताई जा रही है?
उत्तर: सहकारी समिति के अनुसार गेहूं को एफएसआई के गोदाम तक पहुंचाने का टेंडर केशोरायपाटन की फर्म अभिनव एंड कंपनी को दिया गया था। आरोप है कि ठेकेदार ने गेहूं बीच रास्ते में गबन कर लिया। समिति ने ठेकेदार के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।
प्रश्न: किसान कहां धरना दे रहे हैं और उनकी मांग क्या है?
उत्तर: भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में किसान खानपुर के मिनी सचिवालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना दे रहे हैं। उनकी मांग है कि 8 करोड़ रुपए का बकाया भुगतान तुरंत किया जाए। सोमवार तक समाधान न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
प्रश्न: इस मामले में प्रशासन की क्या प्रतिक्रिया है?
उत्तर: जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ सहित अधिकारियों को मामले से अवगत कराया गया है। सहकारी समिति ने ठेकेदार के खिलाफ मामला दर्ज कराया है और उच्च अधिकारियों को सूचना दी गई है, लेकिन भुगतान अभी तक नहीं हुआ है।
झालावाड़ का यह मामला समर्थन मूल्य व्यवस्था की उस कड़ी को उजागर करता है, जहां किसान अपनी उपज बेचने के बाद भी महीनों तक भुगतान के लिए भटकते हैं। जब तक 285 किसानों के खातों में 8 करोड़ रुपए नहीं पहुंचते, तब तक यह मामला सुलझा नहीं माना जा सकता। सोमवार तक की चेतावनी के बाद अब सभी की नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। राज न्यूज इस खबर पर नजर बनाए हुए है।